मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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मंगलवार, 31 मई 2011

जन्म-दिन बहुत -बहुत मुबारक हो !!!







" जन्म-दिन बहुत -बहुत मुबारक हो "


३१ मई  जेस का पहला जन्म दिन 

आज मेरी बिटियाँ जेस का जन्म दिन है--एक माँ उसे दुआओ  के अलावा क्या दे सकती है .. 
एक छोटी -सी कविता ..उसको समर्पित है..







  " खुशबु के झोंके की तरह होती है बेटियाँ !
स्पर्श खुरदुरा हो तो रोती हैं बेटियाँ !

हीरा अगर हैं बेटा,तो मोती हैं बेटियाँ !
  दो -दो कुलों को रोशन करती है बेटियाँ !

         विधि का विधान है यही दुनिया की रस्म भी,
मुठ्ठी भरे नीर -सी होती हैं बेटियाँ !

कौन कहता है की बोझ होती हैं बेटियाँ  ?
दो -दो कुलों की लाज को ढोती है बेटियाँ !

        वो दिखे नही तो खलिश -सी चुभती हैं दिल मैं --
               सामने गर आ जाए तो दिले -सुंकू होती हैं बेटियाँ !

                  कांटो की राह -गुजर पर खुद ही चलती रहेगी हर सो ,
अपनों के लिए फूल ही बोती है बेटियाँ ! 

शबनम की इक बूंद -सी होती हैं बेटियाँ !
स्नेह की तपस पाकर पिधलती है बेटियाँ ! 
    


" एक प्यार भरा उपहार बेटी को "  

प्यार भरा उपहार 

( उसे कुतों से बड़ा प्यार है ,उनके मामले मै वो बहुत भावुक है ) 
 लीजिए  केक भी हाजिर हैं ..कटने के इन्तजार मैं  ..



"लीजिए लड्डू भी खाइए  " 

सभी ब्लोगर दोस्तों को पार्टी का आमंत्रण है ...आए और  एंजाय करे ..... 




गुरुवार, 26 मई 2011

नाकाम मुहब्बत !!!







" मैं  तुमसे  मुहब्बत करती हूँ ----"
  मैं तुम्हें ---
  अपने  प्यार  के  सभी-- सूरज दिखाउ ---
  तो  तुम्हारी  ----
  आँखे चकाचौंध हो  जाएगी -----
  तुम  उन ----
  छुपे  हुए  कौनो को  नही  जानते----' राज '---
  जहाँ मैरी -- मुहब्बत ---चुपचाप सांसे  ले  रही है ----- 
  गर ,-- मर भी गई  --- ?
  तो  तुमसे  ये  वादा  रहा --- 
  मैं   मिलने   जरुर  आउंगी  ----
  चाहे   मेरे   टूकड़े- टूकडे  हो  जाए ----
  मेरी  आत्मा  एक  पक्षी   बन ------
  तेरे  इर्द -गिर्द  चक्कर  काटेगी   ----
  और 'सिर्फ'  तुम्हारा  नाम  पुकारेगी -----

  ' तुम  मुझसे  दूर  रहकर  भी  मेरे पास हो |
  आत्मा  के  रिश्ते   टूट  नही  सकते   || '





सोमवार, 23 मई 2011

लागी छूटे न !!!!!



लागी छूटे न




लागी छूटे न अब तो सनम !
  चाहे जाए जिया ,तेरी कसम !!



पर मै जानती हूँ  तेरे दिल में मै नही हूँ    ?
मेरा प्यार , मेरा अहसास !सब खोखला है 
तू मुझसे प्यार नही करता  ?
 मैं  तेरी आरजू इन आँखों में लिए भटकती रहूंगी 
तुझ से मिलने को अब मैं तरसती रहूंगी 

वो खुशनुमा दिन !
वो खुशनुमा राते !

जब हम मिलकर प्यार किया करते थे 
  वो कदम के पेड़ की छाया....
वो रजनीगन्धा के फुल....
जूही की मदमस्त खुशबु से सराबोर 
वह तेरे दिल का आँगन ........
जहां तेरी मुस्कुराती तस्वीर मेरे मन को हर्षाती थी !
जहां कभी मैं निशब्द चली आती थी ,
तेरे दिल के दरवाजो को झंकृत कर के 
न शोर !
न कोई कोलाहल !
   
खामोशी से लरजते वो तेरे अशआर 
मुझे अंदर तक रोंद गए है....





अब वो बात कहाँ .....

तेरी विरह अग्नि में मै, जल रही हूँ ज़ालिम !
बूंद -बूंद पिघल रही हूँ ज़ालिम !  
इस तपिश से मुझे बचा ले ज़ालिम !

कैसे तुझे  चाहू !
कैसे तुझे पाऊ !
कैसे तुझे देखू !

इस दिल की लगी से मुझे बचा ले यारा !
           इस पीड़ा से मुक्ति दिला दे यारा !!


" दूर है फिर भी दिल के करीब निशाना है तेरा "


रविवार, 15 मई 2011

!! इक लम्हे का प्यार !!



!! इक लम्हे का प्यार !!






इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?


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कसूर उनका नही मेरा था --
जो उन दो लम्हों को जिन्दगी मान बैठी  
चोट खा बैठी  
क्यों कर उन दो लम्हों में जिन्दगी गुजार दी मैने
प्यार आ जाता है आखो में रोने से पहले 
हर खवाब टूट जाता है सोने से पहले 
इश्क है गुनाह यह तो समझ गए हम 
काश, की कोई रोक लेता यह गुनाह करने से पहले !




       


हम ख़ाक जमी की होकर 
उस चाँद की हसरत कर बैठे 
थी,चीज वो सबसे ऊँची 
जिससे मुहब्बत कर बैठे 
दामन में हम फकीरों के 
कुछ खार इक्कठे कर बैठे 
काश, की कोई रोक लेता दामन भिगोने से पहले !







कितना समझाया इस  नादां दिल को लेकिन --
तेरी चाहत मेरी जिन्दगी की कमजोरी बन गई 
तू हर पल मेरे दिल के बहुत पास रहता है
ये दूरियाँ मेरे प्यार की रुसवाई  बन गई 
तेरे बिन जिन्दगी मुझे खलती है यारब !
अब तो जेसे गुजरी गुजार दी यारब !
अब जीने का कोई सबब  नही रहा  यारब  !  
मोंत खुद हेरान है ,जिन्दगी ठगी -सी लगती है 
काश की कोई रोक लेता तुझ संग दिल लगाने से पहले 
  







इक लम्हा गुजारा था मैने तेरे आगोश में 
हर पल तेरे वजूद को सजोया था अपने दामन मै 
भोर हुई ,कलिया मसल मुंह फेर चल दिए 
सुनी मांग ! सुनी चाहत ! सुनी राहगुजर
हम ठगे से बैठे रहे ,उनके कदमो की चाप सुनते रहे 
दूर होती गई वो आहटे ! वो खुशियाँ ! वो चाहते  
मेरा आंचल सूना ही रह गया उनके जाने से पहले 
काश ,की कोई रोक लेता उनमे समाने से पहले !!!    





गुरुवार, 5 मई 2011

परिंदा !!!



"  तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे करीब हो !
आत्माओं के रिश्ते टूट नही सकते !!"








सालो के बिछड़े परिंदे
फिर आज एक बार मिले
उड़ चले
वहाँ
जहां
कभी निर्विकार उड़ान भरते थे
धवल आकाश
सुफल  पुरव्इया के साथ
जहां
दोनों ने मरने -जीने की कसमे खाई थी
कभी जुदा न होने के लिए
गले मिलकर
चोंच से चोंच लड़ाई
शिकवा -शिकायत
फिर बेहद प्यार
प्यार का इजहार
आंखो मे आंसू लिए
दोनों उड़ चले
जहां कभी दोनों साथ -साथ रहते थे








लेकिन
तब
इस बेरहम समाज को
इनका प्यार मंजूर नही हुआ
न चाहते हुए भी
दोनों बिछड़ गए
हमेशा के लिए




आज...
किस्मत ने फिर पलटी खाई
दोनों सालो बाद मिले
एक दुसरे को प्यासी नजरो से देखा
आँखे मिली
फिर चोंच से चोंच मिलाई
बेहद प्यार किया
कितना सुखद मिलन था  ?
दोनों देर तक
गले लिपट कर रोते रहे
प्यार करते रहे
सारी मर्यादाओ से परे
इस जमी से आस्मां तक
एक होने के लिए








उनकी आँखों में एक विश्वास था
मिलन की चाह थी
अब कभी जुदा न होने का
एक मोंन  संकल्प था
हमेशा एक ही रहने का
जूनून था ....


दूर ~~~से आवाज आ रही थी --

''हमे मिलना ही था हमदम ,किसी राह भी निकलते "