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रविवार, 1 जुलाई 2012

नैनीताल भाग 9 --- कौसानी




नैनीताल भाग 9 
 कौसानी 


सोमेश्वर का हसीं नजारा  

5 बजने वाले थे जब हम सोमेश्वर पहुंचे  ..खाना खाकर हम अपनी गाडी में और हरिशर्मा जी अपने बैंक के साथियों के साथ हमारे साथ ही सोमेश्वेर पहुंचे ...बैंक के ऊपर ही उनका घर है जो बैंक ने दिया है ..काफी बड़ा घर है ..सामान  के नाम पर सिर्फ एक पलंग, सोफे ,खाने की टेबल  और कुछ किचन का सामान भी है जो बैंक का ही है  .. जहाँ पर एक स्थानीय महिला आकर खाना बना जाती है  और साफ -सफाई कर जाती है  ..उनका परिवार जयपुर ही रहता है  ....

मेरी नैनीताल यात्रा भाग 8 पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 




यह है हरिशर्माजी का बैंक --और ऊपर वो खुद रहते है 

धुप बहुत थी सो कौसानी हम थोड़ी देर बाद जाएगे यहाँ से 10 मिनट में कौसानी आ जाएगा ..तब तक थोडा रेस्ट कर ले ...कार में बैठे -बैठे कमर अकड गई थी ...मिस्टर को तो पलंग मिल गया और वो आराम करने लगे ,पर बेटियां कहा बैठने वाली थी इसलिए अंकल के पीछे पड़ गई की हमको अपने शहर में धुमाए ..धुमने के लिए यहाँ कुछ नहीं था सिर्फ एक शिवजी का मंदिर है और वहां इस समय जाएगे तो कौसानी का सूर्यास्त देखने से बंचित रह जाएगे ..इसलिए हम यु ही पास में ही धुमने चल दिए .....




मेरे पीछे कोसी नदी है अभी पानी नहीं है बारिश में पानी भरा रहता होगा ----




यह है अखरोट का लहलहाता पेड़  ..छोटे -छोटे अखरोट भी लगे है ...






और यह है कच्चे अखरोट 


यह चीड  का पेड़ है  इसके फुल जो लकड़ी के होते है उनसे शो - पीस बनते है नैनीताल में  बहुत बिक रहे थे ..मैने भी ख़रीदे है ....



पुल पार  करके हम पहाड़ो की तरफ चल दिए ..काफी ऊँचाई के बाद हमें सोमेश्वर का एक नया ही रूप देखने को  मिला आप भी देखे --





दूर तक फैले खेत और पहाड़ो पर बसे मकान  बड़े दिलकश और अजीज लग रहे थे ....छोटे -छोटे रंग -बिरंगे खेत चौकड़ी की शक्ल में नजर आ रहे थे ..मानो प्रकृति चौपड़  खेल रही हो ..और छोटे -छोटे घर 'गोट 'की शक्ल में इधर -उधर फैले हो ....और पहाड़ इस खेल का आन्नद ले रहा हो ..
बीच में से वो नदी बह रही थी  जहाँ अभी मैने  एक फोटू  खींचा था  ....


वापसी में हमने  हरिजी के घर चाय -नाश्ता किया ..उनके एक दोस्त 'मंगल सिंह' जी आ गए जो स्थानीय ही है और वो वहां के बाहुबली गिने जाते है ..कल हमको  घुमाने का दायित्व  उनका रहा,वो अपनी गाडी ले आएगे जिससे हम लोग 'पाताल भैरवी देखने जाएगे ..
सोमेश्वर से हम 'मंगल सिंह जी की गाडी से कौसानी को चल पड़े ..कल सन्डे होने के कारण शर्माजी भी हमारे साथ ही कसौनी चल पड़े  ...


 कौसानी :----


जब हम कौसानी  पहुचें तो शाम होने लगी थी पर सूरज अभी भी क्षितिज पर चमक रहा था ..हम सूर्यास्त देखने को उत्सुक थे पर वहां पहुच कर मालुम हुआ की आज तो बादल है कुछ दिखलाई  नहीं देगा ..न पहाड़ न हिमालय की बर्फ वाली चोटी जहाँ सूरज की किरणे पड़ते ही बर्फ सोने की  तरह चमकने लगती है !ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने सोने की चादर बिछा दी हो ..हम बड़े  मायूश हुए पर कोई बात नहीं ऐसा नजारा मैं  अपनी 'डलहोजी -खजियार' यात्रा में देख चुकी थी....


कौसानी उतराखंड का एक खुबसूरत पर्यटक स्थल  है ..इसको ब्रह्मा ने अपने हाथो से बसाया है ऐसा प्रतीत होता है  ...यहाँ की सुन्दरता आँखों को मोहित करने वाली है ..यह इण्डिया का स्विज़रलैंड भी कहलाता है  ! यह समुदरतल से 1890 मी की ऊँचाई पर स्थित  है ...यहाँ से 350 किलो मी.लम्बी हिमालय की नंदा देवी पर्वतश्रंक्ला दिखाई देती है ऐसा द्रश्य बहुत कम उतराखंड में दिखाई देता है..इसके एक तरफ सोमेश्वेर की धाटियाँ  दिखाई देती है तो दूसरी तरफ बैजनाथ की धाटियाँ !यह पिंगनाथ चोटी पर बसा है ...


1929 में जब गांधीजी बागेश्वर में जन संबोधन करने आए तो यहाँ के अनाशक्ति आश्रम में ठहरे थे ..यहाँ का वातावरण और शुध्य जलवायु उनको मोहित कर गई ..वो यहाँ काफी टाइम रहे ..आज यहाँ एक संग्राहलय है...
हिंदी के मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंतजी की भी यह जनम स्थली है....उनका जनम और प्रारंभिक शिक्षा भी यहीं हुई है ...उनके घर को भी संग्राहलय बना दिया गया है ....




कौसानी में एक लक्ष्मी आश्रम भी है जो एक अंग्रेज महिला ने बनवाया था जो रहने वाली तो लन्दन की थी पर यहाँ के सोंदर्य से इतनी प्रभावित हुई की यही गांधीजी की अनुनायी बन गई ..उनका यह आश्रम लडकियों को -सिलाई बुनाई सिखाता है ....कृष्ण -जनमअष्टमी  पर यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है .. 


यहाँ चाय की खेती भी होती है ..यहाँ की चाय की कीमत बहुत ज्यादा है जिसकी विदेशो में बहुत मांग है  यह चाय बड़ी पतियों वाली और खुशबूदार होती है ..मुझे भी शर्माजी ने एक पैकेट चाय उपहार स्वरूप दी है ....


कौसानी का  नजारा होटल की बालकनी से 


चाय के बागान  


खुबसुरत रास्ते और हरियाली यही तो सुन्दरता  ईश्वर ने  पहाड़ों को बख्सी है 


होटल में हमारा 4 इन 1 रूम






होटल pine 








होटल  pine  का रास्ता


अनाशक्ति आश्रम 

अन्दर  का द्रश्य 

हमको  सूर्य अस्त तो नहीं मिला तो  सोचा की  सुबह सूर्योदय देखेगे ....यह सोचकर हम अपने होटल आ गए जो शर्मा जी ने हमें डिस्काउंट पर दिलाया था ..4 इन 1रूम सिर्फ 500 रु में.....होटल का नाम था  pine !
होटल में अपना सामान रखकर  हम चल दिए घुमने कौसानी --छोटा सा बाज़ार था एक जगह हमने चाय पी ,बाद में हम शर्माजी के एक दोस्त की दुकान पर गए जहाँ हमने शाल और स्वेटर खरीदे   ....  





डिस्काउंट में बढियां स्वेटर मिला 


शर्माजी का अनोखा अंदाज़ 


बाज़ार में खास न दुकाने है न सैलानी,..कुछ लोग ही दिखाई दे रहे थे ..कहते है की अभी सीज़न शुरू नहीं हुआ ..  यहाँ रात को 9बजे के बाद कोई होटल खुला नहीं रहता .. हमें खाना नहीं मिलता इसलिए हम खाना खाने चल दिए ... होटल उतराखंड के रेस्टोरेंट में ,  खुले गार्डन में रेस्टोरेंट हैं ..बड़ा ही आनन्द -भरा शमां था ...यहाँ  भी शर्माजी की वजय से बिल में 20 % डिस्काउंट मिल गया..हालाकि आज की दावत उनकी ही थी ..कल से हमारा खर्चा शुरू होगा ...  खाना खाकर निकले तो पूरा कौसानी सुनसान था ..हम अपने होटल में चल दिए पर यह क्या यहाँ तो लाइट ही नहीं थी ...दो घंटे होटल वालो ने जनरेटर चलाया पर उससे हमारे मोबाइल चार्ज हुए ..कैमरे के सेल चार्ज नहीं हो सके .. रात को एक बड़ी -सी मकड़ी  ने सबको बहुत तंग किया ..उसने तो कुछ नहीं किया पर हम ही डर  रहे थे ..आखिर में उसको बाहर का रास्ता  दिखाकर ही चैन आया और हम सो सके ...


होटल उतराखंड का गार्डन रात को डिम -लाइट - डिनर 


मकड़ी रानी बड़ी  सयानी 




 कल ही यात्रा पातळ भेरवी की ...मिलते है .....

जारी ......









13 टिप्‍पणियां:

सदा ने कहा…

इस सचित्र प्रस्‍तु‍ति के लिए आभार

Maheshwari kaneri ने कहा…

कौसानी उत्तराखण्ड़ का स्वर्ग है मुझे भी इसे देखने का सौभाग्य मिला था यहाँ का सूर्य उदय और अस्त बहुत खुबसूरत होता है...सचित्र सुन्दर प्रस्तुति के लिए अभार...

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल के चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आकर चर्चामंच की शोभा बढायें

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति .... कच्चे अखरोट पहली बार देखे

डॉ टी एस दराल ने कहा…

१९८५ की कसौनी की यात्रा की यादें ताज़ा हो गईं . बहुत सुन्दर फोटो हैं .
आभार .

amanvaishnavi ने कहा…

maasi maa, nice tour.thanks

RITESH GUPTA ने कहा…

दर्शन जी....
सजीव चित्रण .....मजा आ आ गया फोटो देखकर और लेख पढ़कर.....
अपनी हाल ही की यात्रा में सोमेश्वर में कार को ठीक कराने के लिए रुके थे ....कौसानी में हम लोग अनाशक्ति आश्रम में एक रात का विश्राम लिया था...आश्रम से कौसानी का अद्भुत नजारा नजर आताआता हैं..|

Manu Tyagi ने कहा…

बीच बीच में आपने कौसानी को कोसनी लिख दिया है .........मै जब पांच छह साल पहले गया था तो इसी होटल में रूका था क्यों​कि ग्रुप वाली बसे इसी होटल में रूकाती हैं ये काफी बडा होटल है वहां का और 4 बैड के रूम तो यहां आम हैं । आपकी यात्रा बढिया चल रही है पाताल भैरवी का इंतजार

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

लेकिन हम कुदरत के इस रूप से वंचित ही रह गए ..

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

mene bhi didi ..

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

सही कहा रितेश ,पर हमारे कैमरे के सेल जीवित नहीं थे इस कारण फोटू नहीं ले सके ..

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

थंक्स मन्नू ,वो गलती सुधर ली है ....

Rakesh Kumar ने कहा…

कौसानी के बारे में सुन्दर जानकारियाँ दीं हैं आपने.
लगता है आपको सूर्यास्त और सूर्योदय तो नही देखने को मिला,

पर इस पोस्ट में सफ़ेद सूट में और अगली पोस्ट में
काले सूट में आपको देखकर ही हमें सूर्योदय और सूर्यास्त
के दर्शन हो गए, दर्शी जी.

हरि जी की कृपा अपरम्पार है ,जी.

वो मकड़ी भी लगता है हनुमान जी की ही दूत थी.
आपको याद दिलाने आई थी 'हनुमान लीला' की.