"बहुत याद आता हैं वो गुजरा हुआ जमाना।
वो बचपन का गांव!
वो कच्चा आशियाना!
खुली हुई छत!
झाड़ू लगाने की पहल!
फिर पानी का छिड़काव!
जमीन से उठती मिट्टी की महक!
फिर पलंग पर बिछौना!
लेटकर तारों को गिनना!
आधी रात को––
तारों की चमक में,
मटके को ढूंढना!
उल्टा पड़ा लोटा उठाना,
शीतल जल से घूंट घूंट भरना!
बहुत याद आता है वो गुजरा हुआ जमाना।
न Ac, न पंखा,
हाय! कितनी मदहोशी,
कितना याराना!
फूलों की भीनी-भीनी खुशबू,
आम के पेड़ के लहराते झोंके,
बिगड़ते मौसम में,
बिस्तर को लपेटकर,
भागम भाग मचाना !
हाय!कितना याद आता हैं.....
वो गुजरा हुआ जमाना।
वो गुजरा हुआ जमाना!!
–दर्शन के दिल से।
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