मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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मंगलवार, 16 अगस्त 2016

जयपुर की सैर ==भाग 9 ( jaipur ki sair == bhag 9 )

जयपुर की सैर ==भाग 9
(अल्बर्ट हाल )




तारीख 13 को  हम बॉम्बे से 3 सहेलियां निकली थी जयपुर जाने को  'सम्पर्क क्रांति ट्रेन ' से और वो  रात कयामत की रात थी। ... 

अब आगे -----

21अप्रैल 2016


सिटी पैलेस घूमकर हम सीधे अल्बर्ट हाल को निकल गए। ... 

अब हमने सिटी पैलेस से ऑटो किया और पहुँच गए 'अल्बर्ट हाल'  यह एक संग्रहालय है।
यहाँ पहुँच कर थोड़ी भूख लग रही थी तो वही फुटपाथ से हमने बर्गर खाया ।बिलकुल बेकार बर्गर लगा । फिर जब मोसम्बी का रस पिया तो जान में जान आई  क्योकि गर्मी अपने पुरे शबाब पर थी।

इतने में हमारे दोस्त अरविन्द जी का फोन आ गया वो हमको अल्बर्ट हाल में ढूंढ रहे थे । उनको वही रहने का बोलकर हम फटाफट सड़क क्रास कर के अल्बर्ट हाल पहुँच गए यहाँ काफी सिक्योरिटी थी और कबूतरो का तो मानो गढ़ ही था --- जैसे जयगढ़ वैसे ही कबूतरगढ़ हा हा हा हा

यहाँ भी  जेब काटनी पड़ी यानी टिकिट खरीदना पडा शायद 40 रु. खेर, अंदर घुसते ही छोटे से फब्बारे के दर्शन हुए पर कबूतर गढ़ होने के कारण गन्दगी बहुत थी ।
हम पहले माले पर पहुँचे यहाँ एक मिस्र की ममी सो रही है , पता नहीं ये हिन्दुस्तान में क्या कर रही है खेर, आप भी देखिये :----








यहाँ मम्मी सो रही है 

यहाँ काफी सामान मिस्र और चायना का था  बड़े बड़े आदमकद फ्लॉवर पॉट चीनी मिट्ठी की तश्तरियां , प्यालियाँ और भी बहुत सी चीजें...
और दूसरे माले पर सारा संगीत का साजो- समान रखा था । अनेक प्रकार की शहनाईयां, तबले, सितार,बँसुरियां, वीणा , सारंगी और एक जगह तो इतनी बड़ी वीणा रखी थी जो एक कमरे से दूसरे कमरे तक जा रही थी ,मेरे कैमरे ने उसका फोटू लेने से साफ़ इंकार कर दिया क्या करती आखिर इतनी बड़ी भी वीणा होती है क्या ? :) :)

इस वीणा को देख तुरन्त दिमाग में एक फ़िल्मी गीत घुस गया ----
" मेरी वीणा तुम बिन रोये .. सजना ,सजना,सजना.." 

उफ़्फ़्फ़, आप लोग मत रोने लग जाना , हम आगे बढ़ते है।

यहाँ कई संगीत की अजीबो गरीब चीजें  देखने को मिली ..
कई नक्काशियोंदार राजाओ की चिल्मचियां,  उनके वाशबेसिन, उनके गरम पानी के होद और खाने पीने के बर्तन, तलवारे और बन्दुके भी थी, उस टाईम के सिक्के ,ज्वेलरी, ग्रन्थ, और तेल चित्र भी रखे थे । कुल मिलाकर काफी पुराना और देखने लायक सामान था। पुराने लोग इसको अजायबघर कहते थे । 

वैसे इन संग्राहलयो में पहुंचकर हमको इतिहास की सम्पूर्ण जानकारी मिलती है । अब हम लोग बहुत थक गए थे इसलिए तुरन्त घर को निकल पड़े क्योकि वहां से हमको किसी के घर खाना खाने जाना था ...

शेष बाद में ब्रेक के बाद ---


 आंगन में फुव्वारा 




 बड़ा जग 






गर्म पानी करने का बर्तन 












 जग 


 एक पेंटिंग 




 इस पेंटिंग में बताया है की कैसे मत्स्य रूप रखकर भगवान विष्णु ने इंसान को बचाया  


 छोटी बग्गी 





कल की सैर हवामहल ----






मंगलवार, 2 अगस्त 2016

जयपुर की सैर == भाग 8 ( jaipur ki shair bhag == 8 )


जयपुर की सैर == भाग 8
(सिटी पैलेस )





तारीख 13 को  हम बॉम्बे से 3 सहेलियां निकली थी जयपुर जाने को  'सम्पर्क क्रांति ट्रेन ' से और वो  रात कयामत की रात थी। ... 

अब आगे -----

21अप्रैल 2016



आज जयपुर में काफी गर्मी थी फिर भी आज हम जयपुर के कुछ ऐतिहासिक स्मारक देखने निकल पड़े ।सुबह फटाफट आमलेट और ब्रेड भर पेट खाकर और ग्लोकोश की तीन बॉटल बनाकर हमने ओला कैब मंगा ली और सीधे सिटी पैलेस चल दिए ...आज भी नीना हमारे साथ नहीं थी क्योंकि वो पूरी तरह ठीक नहीं थी और हम उसको आराम का बोलकर निकल गए। 

हम जयपुर के त्रिपौलिया बाजार में स्थित शानदार महल सिटी पैलेस के सामने पहुंचे यहाँ 50 रु. का टिकिट था और  विदेशियों के लिए शायद 200 रु. या  ज्यादा का था। यहाँ दो महल चंद्र महल और मुबारक महल है। यह महल राजस्थानी और मुगल शैली का शानदार नमूना है। यहाँ एक संग्रहालय भी है जिसमें पोशाकें , शास्त्र और मुगलकालीन पेंटिंग्स और कालीन है। 

टिकिट लेकर हम महल के मेन गेट से अंदर दाखिल हुए  यहाँ काफी दुकाने बनी हुई थी और काफी अँगरेज़ घूम रहे थे जिनसे राजस्थानी युवक अपनी टूटी फूटी इंग्लिश में बाते कर रहे थे और वो लोग राजस्थानी सामान काफी उत्सुकता से देख रहे थे ।

सामने ही दीवाने खास था यहाँ दीवारों पर कांच में अनेक शास्त्र सजे हुए थे।  अंदर हमको एक चांदी का  बड़ा सा कलश  दिखाई दिया जिसके बारे में वहां के केयरटेकर   से जानकारी ली तो उसने हमको एक बोर्ड की तरफ इशारा कर दिया जिस पर सारा वाकिया लिखा था आप भी देखिये :---





और यह रहा वो कलश ;---





आज यहाँ काफी चहलपहल नजर आ रही थी क्योकि बड़ी- बड़ी लाईट्स लग रही थी, हमको लगा की शायद कोई शूटिंग होने वाली है पर मालूमात करने पर पता चला की आज रात को किसी सेठिये ने ये निचे का हाल किराये पर लिया है अपने बेटे की शादी के लिए , जब किराया पूछा तो पता चला की 25 लाख रुपये सिर्फ एक रात का किराया ही है  बाकि सजावटी समान का चार्ज अलग से ... हमको बहुत आश्चर्य हुआ लोग अपनी शान के लिए कितना पैसा पानी की तरह बहाते है । खेर, हम अपनी फोटू खींचकर आगे बढ़ चले ...

अब हम अंदर को चल पड़े जहाँ शस्त्रो का संग्रहालय था जिसे "सिलह खाना" कहते थे वहां कई तरह के  तीर, तलवार और भाले रखे थे । पुरानी पिस्तौल और बन्दूक भी रखी थी अनेक चाकुओ के मुठ मीनाकारी और जवाहरातो से जड़े हुए थे । यहाँ हमको कई पीतल ,सीप और हाथीदांत के बने बेजोड़ कारीगरी की हुई सजावटी चीजें देखने को मिली। उस वक्त के राजाओ और रानियों के पहनने वाले वस्त्र जो हाथ से बने हुए थे और जो प्राकृतिक रंगों से रँगे हुए थे और जिन पर असली गोटा - किनारी लगी हुई थी काफी भारीभरकम वस्त्र थे , देखकर ही लगता था की ये भारी -भारी कपडे कैसे रानियां पहनती होगी। 

खेर, वहां से हम उस हॉल में आये जहाँ लाल मखमल की कुर्सियां और टेबल लगी हुई थी जहाँ महाराज के साथ अंग्रेज आफिसर बैठ कर मीटिंग करते थे।राजा और महाराजाओ के आदमकद तेल चित्र टँगे थे एक जगह राजधराने की अब तक की पीढ़ी के फोटू लगे थे और वर्तमान में जो युवराज है उनके भी चित्र लगे थे ।
यहाँ हमको फोटू खींचने की मनाई थी इसलिए कोई फोटू नहीं खिंच सकी..... 






राजा के गोल्फ के कपड़े, जूते, बगैरा  बड़े करीने से सजे हुए थे यानी उस समय हिन्दुस्थान में अंग्रेजी हुकूमत और गुलामी की जंजीरो ने पैरो में बेड़ियां डालनी शुरू कर दी थी ।

अंदर फोटू खिंचना मना था फिर भी हमने कई जगह मोबाईल से फोटू खिंच ही लिए ।

महल में एक कला गैलरी भी है जहाँ तेल चित्र , शाही साजो समान और अरबी ,फ़ारसी ,लेटिन और संस्कृत की  दुर्लभ रचनाएँ है 

अब हम उस हिस्से में आये जहाँ पहले माले पर काफी दुकाने थी जहाँ ढेरो पेंटिंग लगी हुई थी और उनको बनाने वाले पेंटर भी बैठे हुए थे जो कुछ रूपियो के बदले आपके फोटू बना कर दे रहे थे कई लोग उनसे अपने  स्केच बनवा रहे थे । 
यहाँ हमारे लायक कुछ नहीं था इसलिए हम आगे बढ़ गए ।

एक जगह हाथ के बने कपड़े मिल रहे थे तो कहीं जड़ाऊ ज्वेलरी मिल रही थी । पर हर चीज बहुत मंहगी थी । जो विदेशियों को आकर्षित कर सकती थी हमको नहीं ...

अब हम बाहर आँगन में आ गए जहाँ बहुत पुरानी तोप रखी थी हमने उसके साथ कुछ फोटू खिचाये और बाहर निकल गए अब हम "अल्बर्ट हाल" जा रहे थे ...
शेष अगले भाग में---



 महल का प्रवेश द्वार 








 मुबारक महल 


 मेरे पीछे जो तस्वीर है वो लंदन की महारानी के वेलकम की तस्वीर है 





 चंद्र महल 


 ये है कचरे का पात्र  


 केयरटेकर  के साथ मैं और अलज़ीरा   



ये  वो  पहरेदार है जिनके पूर्वज भी यहाँ राजा जी की सेवा करते थे   
 हम तीन 




दीवाने खास में मैं 



शेष अगले अंक में 






शनिवार, 30 जुलाई 2016

जयपुर की सैर ==भाग 7 ( jaipur ki sair == bhag 7 )




जयपुर की सैर ==भाग 7
बिड़ला मन्दिर --जयपुर 

बिड़ला मन्दिर का प्रमुख्य द्वार 





तारीख 13 को  हम बॉम्बे से 3 सहेलियां निकली थी जयपुर जाने को  'सम्पर्क क्रांति ट्रेन ' से और वो  रात कयामत की रात थी। ... 

अब आगे ----


20 अप्रैल 2016 

आज हमको हरी शर्मा जी के घर जाना है हम शादी में शरीक नहीं हो सके पर जयपुर आने के बाद उनके घर जाना जरुरी है । रात को नीना की तबियत ख़राब हो गई थी इसलिए वो हमारे साथ न जा सकी इसलिए हम तीनों ही चल दिए।

हमने ओला कैप मंगवाई और उनके घर 'मानसरोवर' कॉलोनी चल दिए ।एक घण्टे के सफर के बाद उनके घर पहुंचे सब से मिले शादी में न पहुँचने की क्षमा याचना हुई ,नाश्ता किया और बेटी को नेग दिया और उन्होंने  भी हमको मिठाई देकर सम्मानित किया ।

हम 4 बजे उनकी माताजी से बिदा लेकर निकल पड़े यहाँ के फेमस बिड़ला मन्दिर देखने।
आने के टाईम हम एक ऑटो में बैठ गए और उसमें हमारी जो गत बनी की पूछो मत। उसने 1 घण्टे में हमको जयपुर की सारी गलियों के दर्शन करवा दिए । बड़ी मुश्किल से जान बची ...

बिड़ला मन्दिर काफी फेमस है और यह मन्दिर आपको हर बड़े शहर में मिल जायेगा । सफ़ेद संगमरमर से बना ये मन्दिर बहुत ही बड़े क्षेत्रफल में फैला हुआ है और काफी खूबसूरत बना है राधा कृष्ण की मोहक मूर्ति से सजा हुआ मुझे बहुत पसन्द आया।और सबसे बड़ी चीज पसन्द आई यहाँ फोटू खिंचने पर कोई पाबन्दी नहीं है ,हमने भी खूब जी भरकर फोटू खिंचे फिर आराम किया यहाँ काफी भीड़ रहती है पर शांति भी खूब मिलती है ।
रात को हमने यही ।मन्दिर के बाहर ठेले पर पावभाजी खाई ।और ऑटो कर घर आ गए ...

















मीना और मैं 

मैं ,अल्जीरा और मीना 



रात होने से फोटू क्लीयर  नहीं आये 

शेष अगले भाग में ----



शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

जयपुर की सैर == भाग 6 ( Jipur ki sair = bhag 6 )


जयपुर की सैर  == भाग 6









तारीख 13 को  हम बॉम्बे से 3 सहेलियां निकली थी जयपुर जाने को  'सम्पर्क क्रांति ट्रेन ' से और वो  रात कयामत की रात थी। ... 

अब आगे ----


18 अप्रैल 2016

आज सुबह देर तक सोते रहे क्योकि कल बहुत थक गए थे 9 बजे सब उठ गए आज मैंने सबको इंदौर के फेमस पोहे बनाकर खिलाये । सबको बहुत अच्छे लगे फिर हम मार्किट जाने को तैयार होने लगे  आज हम मार्किट जा रहे थे कुछ शॉपिंग करने..

आज सुबह हमारे एक और मित्र 'अरविंद भट्ट' जी हमसे मिलने आ गए, उन्होंने गुलाब के फूलों से और चॉकलेट से हमारा जोरद्वार स्वागत किया । फिर हम उनकी गाड़ी से बापू मार्केट तक आये ,आज उनको भी काम था इसलिए उनकी दावत कल के लिए स्थगित कर दी । कल मिलने का बोलकर वो चले गए पर शाम को हमको  घर छोड़ने का वादा किया अब हम दिनभर शॉपिंग करेगे।

हम बापू मार्किट में आये यहाँ पर  राजस्थानी साजो समान भरा पड़ा है जिसको देखना ही बहुत अच्छा लगता है ।पर भाव- ताव बहुत होता है टूरिज्म प्लेस होने के कारण पहले भाव ज्यादा बोलते है फिर धीरे धीरे कम करते है । गर्मी बहुत थी और हम गर्मी से बेहाल हो रहे थे फिर भी हमने यहाँ से राजस्थानी लहँगा, बैग, चूड़ियाँ,  चप्पल, चादरें, पेंटिंग वगैरा खरीदी और सबने यहाँ के मशहूर घाघरे खरीदे ।यहाँ की मशहूर चाट खाई। दिन भर हम नीबू पानी और जूस पीते रहे ताकि पानी की कमी न हो । वैसे हम घर पर से भी ठंडा ग्लूकोश का पानी बनाकर लाये थे।

पूरा दिन शॉपिंग करते रहे और शाम को अरविंद जी आ गये ,गर्मी अपनी चरम सीमा पर थी । मार्किट में गर्मी से झुलसते हुए जब कार के AC की ठंडी हवा आई तो मुझे तो नींद के झोंके आने लगे।
राजाजी बाग पहुंचकर अरविंद ने एक - एक लस्सी पिलाई और हम अपने घर पहुँच गए ।आज बहुत थक गए थे मुझसे तो उठा ही नहीं जा रहा था, अल्ज़िरा ने ही पुलाव बनाये और सबने खाये और जो सोये की पूछो मत

19 अप्रैल2016
सुबह 5 बजे मीना अक्सर उठ जाती है आज उसी ने सबके लिए नाश्ता बनाया अंडे और ब्रेड .. पहले वो  बाजार से अंडे और ब्रेड लाई फिर सबको उठाया, हम सब फ्रेश होकर अरविंद का इंतजार करने लगे देखते है आज अरविंद ने कहाँ ले जाना है ।
ठीक टाईम पर अरविंद के साथ हम सब मैँ, अल्ज़िरा, नीना और मीना निकल पड़े। 

आज हम सबने कल का खरीदा हुआ घाघरा और चप्पल पहना था। पहले अरविंद अपने IT कॉलेज लेकर आये जहाँ वो प्रोफ़ेसर है उनके कॉलेज के शानदार बगीचे में हमने कुछ फोटू खिंचे फिर हमारी कार जयपुर की व्यस्त सड़कों से गुजरती हुई जयपुर के बड़े मॉल वर्ल्ड ट्रेड पार्क  में आई , बहुत विशाल और भव्य मॉल था। आज हमारा लन्च यही था। आज का दिन हमने इसी मॉल में बिताया। और यह एक यादगार दिन साबित हुआ।






 लक्ष्मी मिष्ठान भंडार के टेस्टी  दही भल्ले और टिकिया 






LMB  



 कॉलेज के कम्पाउंड में -- मैँ  नीना और मीना  


वर्ल्ड ट्रेड पार्क बाहर का दृश्य 



























इस तरह आज का दिन मजेदार रहा