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सोमवार, 16 जून 2014

** माथेरान ** Matheran *



** माथेरान **
 एक हिल -स्टेशन  





31 मई 2014 

काफी  दिनों से माथेरान जाने की सोच रही थी । माथेरान, यह रायगढ़  जिले में आता है पर  मुंबई के बहुत करीबी खूबसूरत हिल स्टेशन होने के कारण भी जाने का प्रोग्राम नहीं बन रहा था --जब ५ मई का 'डलहौज़ी ' का प्रोग्राम केंसिल हुआ तो लगा इस बार तो किसी पहाड़ पर जाना ही है चाहे माथेरान ही क्यों न हो ---

 माथेरान मुंबई से 110  किलोमीटर दूर है और समुद्रतल से सिर्फ 800 मीटर की ऊचांई पर स्थित यह देश का सबसे छोटा हिल स्टेशन है इसकी खोज मई 1850 में ठाणे जिले के कलेक्टर  ह्यूज पॉइंटस मलेट ने बॉम्बे की गर्मी से परेशान होकर की थी --वैसे  बरसात के मौसम में  मुंबई  वासी यहाँ काफी तादात में आते है । यहाँ की फ्रेश हवा मन और तन दोनों को तरोताजा कर देती है  यदि २-3 दिन छुटियाँ एक साथ आ जाए तो एक पिकनिक आयोजन का बेहद सरल और सस्ता मनोरंजन स्थल है ---- माथेरान ।

शनिवार का दिन था और बेटी का जन्मदिन भी सो, हम सब सुबह  7. 30 बजे  वसई -पनवेल DMO से कोपर स्टेशन पहुंचे ,40 मिनट का सफर ठसाठस भरा हुआ था --- कोपर स्टेशन से हमने कल्याण जाने के लिए लोकल पकड़ी जो कुछ हलकी थी ,वहा से हमें खपोली जाने वाली लोकल मिली जिसेसे  हम नेरल स्टेशन पहुंचे यहाँ से माथेरान 9 किमी दूर है अब हमें माथेरान के लिए खिलौना -गाडी  पकड़नी थी जहाँ -रविवार होने के कारण काफी भीड़ थी ,मालुम  पड़ा की सीट 150 है और लाईन 500 की लगी है ,इसलिए यहाँ टिकिट  मिलना नामुमकिन ही नहीं असम्भव ही लग रहा था पतिदेव ने टी टी ई होने के काऱण कुछ जुगाड़ बैठाने की कोशिश की पर कोई फायदा नहीं हुआ ---आखिरकार कार से जाना तय हुआ वैसे भी 65 रु. ट्रेन में लग रहे थे और 70 रु. (पर सीट )कार में  ज्यादा नुकसान नहीं था--पर कार में सिर्फ 6 मेंबर ही जा सकते थे और हम 8 थे यानी 2 कार करनी थी हमने 700 रु. में 2 कार की पर जो नज़ारे  ट्रॉय ट्रेन में बैठने के बाद नजर आने थे वो नज़ारे कार में नहीं थे ? खेर, मज़बूरी थी ---ढ़ाई घण्टे की ट्रॉय ट्रेन की यात्रा कार ने सिर्फ 45 मिनट में ही करवा दी -- हम  अमन लॉज पहुँच  गए आगे वाहन जाना  वर्जित है अब हमे आगे की यात्रा पैदल, घोड़े पर या बग्गी  में करनी थी --

यहाँ पहुंचकर पता चला की यहाँ से माथेरान तक एक और मिनी ट्रेन चलती है वाह !सब ख़ुशी से उछल पड़े । जब मैं पहली बार 1995 में माथेरान आई  थी तब यह मिनी ट्रेन नहीं चलती थी, हो सकता है की कुछ साल यहाँ आने वाली ट्रॉय ट्रेन बंद थी तब इस मिनी ट्रेन को चलाया गया होगा। इस खिलौना ट्रेन को  दोबारा 100 वर्ष पुरे होने के उपलक्ष में पिछले साल ही दोबारा जान समुदाय की मांग पर चलाया है--  

आगे का सफर हमको दूसरी ट्रेन से करना था  जो अमर लॉज से  चलती है --मैं कार से उतरी और टिकिट खिड़की पर पहुंची --आगे की ट्रेंन का टिकिट लेने तो पता चला की ये तो माथेरान में जाने की एंट्री फीस है सिर्फ हर मेंबर 50 रु. ---टिकिट कटाकर हम पैदल ही चल पड़े 10 मिनिट के बाद हम अमन लाज के पास थे, अमन लॉज तो दिखाई नहीं दी हा, एक बोर्ड जरूर दिखा,  यहाँ भी 40 रु. टिकिट था -- यहाँ हर 10 मिनट पर यह मिनी ट्रेन चलती है  , 10 मिनट बाद हम माथेरान में थे ठंडी हवा तो बहुत थी पर गर्मी ने भी अपना साम्राज्य फैला रखा था , भीड़  बहुत थी काफी लोग घूम  रहे थे --
अब , जैसा की  होता है हर हिल स्टेशन पर रूम दिखने वालो की एक भीड़ ने हमे धेर लिया और हम सब रूम देखने लगे पर कोई भी ढंग का रूम दिखाई नहीं दिया थोड़ी ठीक होटल में 7 हजार से  शुरू होने वाले रूम थे जो हमारी जेब से भारी थे बाकी तो सब खाना -पीना इंक्लूड वाले रिसोर्ट  होटल थे आखिर हमे एक ए. सी. रूम मिला 6  हजार में वो काफी बड़ा था और हम 8 मेंबर उसमें आराम से आ सकते थे-- 3 बज रहे थे सो हम सब खाना खाने सामने रेस्टोरेंट में  घुस गए  -- खाना ठीक था और काफी सस्ता भी --

 शाम को हम यहाँ के पॉइंट देखने निकले  यहाँ 38 पॉइंट है पहले इको पॉइंट फिर  सनसेट पॉइंट शारलॉट पॉइंट पर खूबसूरत लेक भी है पर  वहां पानी नहीं था नजदीक ही शिव जी का बहुत पुराना मंदिर भी है यहाँ जैन मंदिर भी है हाथ की बनी बॉस की खूबसूरत वस्तुए और चमड़े की चप्पले काफी मात्रा में बिक रही थी --

यहाँ ठहरने और घूमने  के लिए ज्यादा दिनों की जरुरत नहीं है -- यहाँ सिर्फ आराम और पैदल चलने के लिए माथेरान मुंबई और पुणे वालो के लिए एक श्रेष्ठ विकल्प है --    

  







    



























चर्च 



 पि
पिसरनाथ मंदिर 


 शैरलॉट लेक 




























और इस तरह माथेरान यात्रा समाप्त हुई --

12 टिप्‍पणियां:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

Very Nice Clicks....

Ritesh Gupta ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Ritesh Gupta ने कहा…

चलो डलहौजी नहीं तो माथेरान ही सही..... कही न कही तो घूमने जाना है था..... यात्रा विवरण अच्छा लगा... काफी सुना है इस छोटे से हिल स्टेशन के बारे..... फोटोओ से माथेरान की स्थिति का पता चल रहा है |

आपने होटल बहुत महंगा लिया है... क्या सस्ते होटल नहीं वहाँ पर...

रीतेश

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन बच्चे और हम - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Point ने कहा…

बहुत अच्छा ज़ी , हम भी कुछ प्लानिंग करते है घूम आते है |

अन्तर सोहिल ने कहा…

खूबसूरत जगह है बेशक छोटी सही
धन्यवाद इस पोस्ट के लिये

प्रणाम

स्वाति ने कहा…

bahut upyogi jankari

Kishan Bahety ने कहा…

डलहौजी और माथरेन में शायद ही कोई समानता होगी । पर मुम्बई के व्यस्त लोगो के लिए ये सही जगह है ।
आपने वहा पहुचने के लिए तो सबसे सस्ता उपाय बता दिया । पर आपके लेख से लगता है वहा ठहरने की जगह थोड़ी महंगी है ।
वहा जाने का सही समय या महीना कौन सा ठीक है ।
बाकि लेख और फ़ोटो दोनों ही बहुत अच्छा है
k K

Kishan Bahety ने कहा…

डलहौजी और माथरेन में शायद ही कोई समानता होगी । पर मुम्बई के व्यस्त लोगो के लिए ये सही जगह है ।
आपने वहा पहुचने के लिए तो सबसे सस्ता उपाय बता दिया । पर आपके लेख से लगता है वहा ठहरने की जगह थोड़ी महंगी है ।
वहा जाने का सही समय या महीना कौन सा ठीक है ।
बाकि लेख और फ़ोटो दोनों ही बहुत अच्छा है
k K

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

बॉम्बे के नजदीक होने से यहाँ हर चीज महंगी है ।वैसे छुटियों में ज्यादा महंगे हो जाते है और बरसात में सस्ते । तब यहाँ ट्रेन भी नहीं चलती।

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

हम तो गर्मियों में गए थे पर बारिश छोड़कर सभी मौसम अनुकूल है । और छुटियों के अलावा रूम भी ज्यादा मंहगे नहीं है।

बीनू कुकरेती ने कहा…

वाह बुआ पुरानी याद ताजा हो गयी। मुम्बई की प्रसिद्द बारिश में यहाँ जाने का मौका मिला था।