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रविवार, 15 मई 2011

!! इक लम्हे का प्यार !!



!! इक लम्हे का प्यार !!






इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?


**************************************************


कसूर उनका नही मेरा था --
जो उन दो लम्हों को जिन्दगी मान बैठी  
चोट खा बैठी  
क्यों कर उन दो लम्हों में जिन्दगी गुजार दी मैने
प्यार आ जाता है आखो में रोने से पहले 
हर खवाब टूट जाता है सोने से पहले 
इश्क है गुनाह यह तो समझ गए हम 
काश, की कोई रोक लेता यह गुनाह करने से पहले !




       


हम ख़ाक जमी की होकर 
उस चाँद की हसरत कर बैठे 
थी,चीज वो सबसे ऊँची 
जिससे मुहब्बत कर बैठे 
दामन में हम फकीरों के 
कुछ खार इक्कठे कर बैठे 
काश, की कोई रोक लेता दामन भिगोने से पहले !







कितना समझाया इस  नादां दिल को लेकिन --
तेरी चाहत मेरी जिन्दगी की कमजोरी बन गई 
तू हर पल मेरे दिल के बहुत पास रहता है
ये दूरियाँ मेरे प्यार की रुसवाई  बन गई 
तेरे बिन जिन्दगी मुझे खलती है यारब !
अब तो जेसे गुजरी गुजार दी यारब !
अब जीने का कोई सबब  नही रहा  यारब  !  
मोंत खुद हेरान है ,जिन्दगी ठगी -सी लगती है 
काश की कोई रोक लेता तुझ संग दिल लगाने से पहले 
  







इक लम्हा गुजारा था मैने तेरे आगोश में 
हर पल तेरे वजूद को सजोया था अपने दामन मै 
भोर हुई ,कलिया मसल मुंह फेर चल दिए 
सुनी मांग ! सुनी चाहत ! सुनी राहगुजर
हम ठगे से बैठे रहे ,उनके कदमो की चाप सुनते रहे 
दूर होती गई वो आहटे ! वो खुशियाँ ! वो चाहते  
मेरा आंचल सूना ही रह गया उनके जाने से पहले 
काश ,की कोई रोक लेता उनमे समाने से पहले !!!    





43 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
रश्मि प्रभा... ने कहा…

इश्क है गुनाह यह तो समझ गए हम
काश, की कोई रोक लेता यह गुनाह करने से पहले !
सारे तारों को झंकृत कर दिया इन पंक्तियों ने

Rakesh Kumar ने कहा…

काश ,की कोई रोक लेता उनमे समाने से पहले !!!

दर्शी जी,आपको रोकना क्या आसान काम है.
काश! हम न हुए,
पर आप तो बम्बई की और सैर कराने वालीं थी न.
बीच बीच में 'ब्रेक' दे रहीं हैं क्या ?

Sunil Kumar ने कहा…

हम तो यही कहेंगे दिलें नादाँ तुझे हुआ क्या है ........मज़बूरी है कोई नहीं रोक सकता ..

आकाश सिंह ने कहा…

प्यार आ जाता है आखो में रोने से पहले
हर खवाब टूट जाता है सोने से पहले
इश्क है गुनाह यह तो समझ गए हम
काश, की कोई रोक लेता यह गुनाह करने से पहले !
-----------------------------------------
प्रिय दर्शन जी दिल की बातों को बहुत ही संजीदगी से एक सूत्र में पिरो कर प्रस्तुत कियें हैं| अगर समय मिले तो कृपया आप मुझे कॉल करें मेरा नं है 09576880359 या अपना नं अपने ब्लॉग में अंकित करें खुबसूरत रचना के लिए आभार |

Rajesh Kumari ने कहा…

प्यार आ जाता है आखो में रोने से पहले
हर खवाब टूट जाता है सोने से पहले
इश्क है गुनाह यह तो समझ गए हम
काश, की कोई रोक लेता यह गुनाह करने से पहले !
bahut haseen ghazal hai.har line khoobsurat hai.

sushma 'आहुति' ने कहा…

इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?.. bas ek lamha bhut kuch kah diya apne...

विशाल ने कहा…

इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?

वाह! दर्शी जी,वाह!
सच कहूं तो इन दो लाईनों ने पूरा सच ब्यान कर दिया.
बाकी रचना तो इन्ही दो लाईनों का विस्तार है.
आप लिखते रहे ,हम पढ़ते रहें.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?

खूब कहा .....सुंदर संवेदनशील रचना

Udan Tashtari ने कहा…

इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?


-बस, उसी लम्हें का तो खेल है...उम्द रचना.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत उम्दा भावप्रणव रचना!

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

वाह वाह वाह
खूबसूरत चित्रों के साथ मनमोहक रचना दर्शन जी!

artijha ने कहा…

maa....pyari maa...maine us din aapki ye kabita padhi thi...jis din blog open nhi ho pa raha tha...pr comments nhi kar pai....इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?
aap to likhti hi hai hamesha ki trhbhut touching...kya khu main aapko...itni sundar hoke itni sundar kabitae jo likhti hai...ati sudar...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?

इन दो पंक्तियों के बीच का विस्तार बहुत भावुक शब्दों में किया है .... अच्छी प्रस्तुति

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत खूब!
दिल का दर्द शब्दों में उभर आया है।
उस हसीन चाँद ने जीभर हमें रुलाया है।।
--
तुकान्त और अतुकान्त का बढ़िया संगम किया है आपने!
लिखती रहिए छ्दों में निखार आता जाएगा!

aarkay ने कहा…

एक अंदाज़ ये भी-

"ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजे
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है "

" चढ़ा मंसूर सूली पर , पुकारा इश्क वालों को,
यही है बाम की जीना , वो आये , जिसका जी चाहे. "

गरज ये कि प्यार कोई गुनाह नहीं !

Kailash C Sharma ने कहा…

इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?

क्या खूब पंक्तियाँ हैं! बहुत मर्मस्पर्शी और भावपूर्ण रचना..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

भूले से मोहब्बत कर बैठा ... नाडा था हमारा दिल ही तो है ...
गहरे ज़ज्बात पिरोए हैं ...

वीना ने कहा…

इश्क है गुनाह यह तो समझ गए हम
काश, की कोई रोक लेता यह गुनाह करने से पहले !

खूबसूरत एहसासों से सजी रचना...

G.N.SHAW ने कहा…

दर्शी जी सोंचने से अच्छा है ..बेचैन न हुआ जाये !सचित्र सुन्दर संगम !

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत सुन्दर चित्रमयी प्रस्तुति है । आपके काव्य पक्ष के दर्शन तो आज ही हुए । बधाई ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 17 - 05 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.blogspot.com/

Vivek Jain ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

डॉ. हरदीप संधु ने कहा…

बहुत मर्मस्पर्शी और भावपूर्ण रचना !

Kunwar Kusumesh ने कहा…

हम ख़ाक जमी की होकर
उस चाँद की हसरत कर बैठे
थी,चीज वो सबसे ऊँची
जिससे मुहब्बत कर बैठे

ग़ज़ब है ग़ज़ब .

M VERMA ने कहा…

लम्हों को कौन समझ पाया है

Khare A ने कहा…

kya bat he, bahut hi khoobsurat rachna!

बाबुषा ने कहा…

pyaar mein doobi huyee rachna..

अजय कुमार ने कहा…

khoobsoorat bhaaw , ishk hotaa hee hai aisa

संजय भास्कर ने कहा…

ला-जवाब" जबर्दस्त!!
खूब कहा .....सुंदर संवेदनशील रचना

संजय भास्कर ने कहा…

खूबसूरती से आकार लेते शब्द ,मनमोहक रचना बधाई

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

निवेदिता ने कहा…

बेहद मर्मस्पर्शी.........

mahendra srivastava ने कहा…

इक लम्हा गुजारा था मैने तेरे आगोश में
हर पल तेरे वजूद को सजोया था अपने दामन मै

बहुत सुंदर

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत मर्मस्पर्शी ,बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है

H P SHARMA ने कहा…

तुमने जिससे प्यार किया है इतना
वो भी बिन दर्शन रोता होगा उतना

तुमने उसको ये बतलाया
वो भी प्रेमी बन सकता है

तुमने उसको अहसास दिया
ये दिल उस पर मर सकता है

ओ प्रीत भरे संगीत भरे
ओ जनम जनम के प्यार
वो तेरी याद मे भरता है

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति दी है आपने अमर प्रेम को.बधाई.

सतीश सक्सेना ने कहा…

वाकई कई बार उन लम्हों पर पछतावा होता है , जो एक समय सुनहरे थे .....
शुभकामनायें !

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'इक लम्हे में उन्होंने जिंदगी संवार दी मेरी
इक लम्हे में उन्होंने जिंदगी उजाड़ दी मेरी '
..................................इन दो पंक्तियों के बीच के लम्हों को प्रेम और श्रृंगार की जिस मीठी चाशनी में भिगोकर आपने प्रस्तुत किया है , अति अति सुन्दर और सराहनीय है |

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

उत्तम

अशोक बजाज ने कहा…

शुभकामनायें !

Hamarivani ने कहा…

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संजीव ने कहा…

कमाल की शब्‍द शिल्‍पी हैं आप, धन्‍यवाद.

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

बहुत ही सुंदर
ये दूरियाँ मेरे प्यार की रुसवाई बन गई
तेरे बिन जिन्दगी मुझे खलती है यारब !
अब तो जेसे गुजरी गुजार दी यारब !
अब जीने का कोई सबब नही रहा यारब !
मोंत खुद हेरान है ,जिन्दगी ठगी -सी लगती है
काश की कोई रोक लेता तुझ संग दिल लगाने से पहले