मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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गुरुवार, 26 मई 2011

नाकाम मुहब्बत !!!







" मैं  तुमसे  मुहब्बत करती हूँ ----"
  मैं तुम्हें ---
  अपने  प्यार  के  सभी-- सूरज दिखाउ ---
  तो  तुम्हारी  ----
  आँखे चकाचौंध हो  जाएगी -----
  तुम  उन ----
  छुपे  हुए  कौनो को  नही  जानते----' राज '---
  जहाँ मैरी -- मुहब्बत ---चुपचाप सांसे  ले  रही है ----- 
  गर ,-- मर भी गई  --- ?
  तो  तुमसे  ये  वादा  रहा --- 
  मैं   मिलने   जरुर  आउंगी  ----
  चाहे   मेरे   टूकड़े- टूकडे  हो  जाए ----
  मेरी  आत्मा  एक  पक्षी   बन ------
  तेरे  इर्द -गिर्द  चक्कर  काटेगी   ----
  और 'सिर्फ'  तुम्हारा  नाम  पुकारेगी -----

  ' तुम  मुझसे  दूर  रहकर  भी  मेरे पास हो |
  आत्मा  के  रिश्ते   टूट  नही  सकते   || '





34 टिप्‍पणियां:

Rakesh Kumar ने कहा…

दर्शी जी लगता है आप प्यार के 'राज' का पर्दाफाश कर रहीं हैं.
या हमको किसी और गहरे 'राज'से मिलवाने का साहस कर रही हैं.
आपकी सुन्दर प्यारभरी रचना को तो हृदय से नमन ही करता हूँ मैं.

मेरे ब्लॉग पर अभी तक न आने का आपका क्या राज है?
चली आईयेगा.आपको 'सरयू' स्नान का न्यौता है.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

' तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते ||

फिर ये मुहब्बत नाकाम कैसे हुयी ? अच्छी प्रस्तुति

मदन शर्मा ने कहा…

जो वादा किया वो निभाना पडेगा
रोके ज़माना चाहे रोके खुदाई तुझे आना पडेगा
तड़पती निगाहों ने आवाज दी है ..............
बहुत अच्छा दर्द से भरे नज्म सुनाये जा रही हैं आप
बधाई हो आपको !!

मदन शर्मा ने कहा…

आदरणीय दर्शन कौर धनोए जी, नमस्कार....
आपके ब्लॉग में आकर अच्छा लगा,
आप यूँ ही लिखती रहें, ईश्वर से कामना है, आभार !!

कविता रावत ने कहा…

' तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते ||
.. sach aatma ke rishte totte to nahi lekin jab inhen dhona pade to phir we rishte-rishte kahan!
badiya prastuti..

prerna argal ने कहा…

' तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते || '
bahut bemishaal rachaa,virah vedanaa liye.sunder shabdon ka chyan,badhaai aapko,


please visit my blog and leave the comments also.

वीना ने कहा…

इसी को प्यार कहते हैं...

Rajesh Kumari ने कहा…

pyar se autprot man ke achche bhaavon ka sunder chitran kiya hai.love is in the air.

संध्या शर्मा ने कहा…

आत्मा के रिश्ते टूटा नही करते...
लाजवाब प्रस्तुति.......

रश्मि प्रभा... ने कहा…

' तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते || '
aatma ke rishte birle bante hain ... sach kabhi tootta nahin

संजय भास्कर ने कहा…

आदरणीय दर्शन कौर जी,
नमस्कार !
आपकी हर रचना की तरह यह रचना भी बेमिसाल है !

कुश्वंश ने कहा…

तुम उन ----
छुपे हुए कौनो को नही जानते----' राज '---
जहाँ मेरी -- मुहब्बत ---चुपचाप सांसे ले रही है -----

अच्छी प्रस्तुति

sushma 'आहुति' ने कहा…

yahi to pyar ka rista hai...

आशुतोष की कलम ने कहा…

आत्मा के रिश्ते तो अमर होते हैं आत्मा की तरह जन्मजन्मान्तर के लिए..
कितनी सुन्दर कृति है आप की...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

' तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते || '
kya baat hai...bhut sundar

डॉ टी एस दराल ने कहा…

क्या बात है । बढ़िया जी ।

आशा ने कहा…

बहुत भाव पूर्ण रचना |बधाई |
आशा

ललित शर्मा ने कहा…

@अपने प्यार के सभी--सुरज दिखाउ
तो तुम्हारी
आँखे चकाचोंध हो जाएगी

वाह मान गए....दर्शन कौर जी....
सुन्दर बिम्ब का प्रयोग किया है आपने
एक मंजी हुयी कविता के लिए
आभार

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

दर्शन जी,
वैसे तो मैं इस लायक नहीं हूँ की आपको कोई सुझाव दूं क्योंकि आप स्वयं ही एक खूबसूरत लेखिका हैं!
फिर भी अगर गुस्ताखी माफ़ हो तो कुछ कहना चाहूँगा, रचना तो आपको वाकई काबिल-ए-तारीफ है, परन्तु अगर आप ज़रा मात्राओं का ध्यान रखेंगी तो और भी मज़ा आ जाएगा!
जैसे की सुरज "सूरज", चकाचोंध "चकाचौंध", आदि!
माफ़ी दीजियेगा अगर आपको अच्छा न लगा हो तो!
दास,
सुरेन्द्र!

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

@ नही, सुरेंदरजी आपकी बाते मुझे बुरी नही लगी --कई बार लाख कोशिश के बाद भी रोमन लिपि के अंग्रेजी वर्जन हिंदी में हो नही पाते है --मजबूरी वश वैसा ही लिखा छोड़ना पड़ता है --मुझे खुद पता चल जाता है --
वैसे आपकी बातो का ध्यान रखूंगी --धन्यवाद !

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

संगीता जी. ऐसी कोई बात नही है ...यह सिर्फ कविता हे ?

वन्दना ने कहा…

' तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते ||

सही कहा आत्मा के रिश्ते नही टूटा करते।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

दिल में छुपा अथाह प्यार पर सुन्दर कविता !

Udan Tashtari ने कहा…

तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते || '



-वाह!! बहुत खूब!!!

Vivek Jain ने कहा…

तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते ||
वाह! बहुत सुंदर प्रस्तुति
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते || '

Sach kaha aapne.... aise bandhan kahan tootte hain...

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

दिल का रिश्ता ...दूर नहीं हो सकता...
जिसको जोड़ लिया वो हर समय के लिए हो गया...
यही तो प्यार की परिभाषा है...है न...!!
रचना पढ़ कर लग रहा है...सिर्फ लिखा नहीं गया...जिया भी गया है....!!

दर्शन जी!! सच में आपकी अभिव्यक्ति का जबाब नहीं...!
चंद शब्दों में बता दिया, जो कहना चाहती थी..

: केवल राम : ने कहा…

मेरी आत्मा एक पक्षी बन ------
तेरे इर्द -गिर्द चक्कर काटेगी ----
और 'सिर्फ' तुम्हारा नाम पुकारेगी -----

बहुत खूबसूरती से आपने आपने मन की भावनाओं को अभिव्यक्त किया है ....आपका आभार

GirishMukul ने कहा…

वाह क्या बात है जी

Sunil Kumar ने कहा…

तुम मुझसे दूर रहकर भी मेरे पास हो |
आत्मा के रिश्ते टूट नही सकते |
बहुत भाव पूर्ण रचना ,बधाई .......

Rakesh Kumar ने कहा…

आदरणीय दर्शी जी ,
मेरे ब्लॉग पर आपके 'दर्श' को अँखियाँ तरस गयीं हैं.
मैंने भी तो 'आत्मा' की ही बात की है.फिर आप किस
वजह से मुहँ फेरे हुए हैं अभी तक. लगता है मुझे भी अब
चिड़िया बनकर आपके ब्लॉग के चक्कर लगाने पड़ेंगें.
मेरी बातें आपके ऊपर से चाहे ५ किलोमीटर ऊपर निकल जाये,
पर मैं तो अपनी फरियाद सुनाता ही रहूँगा आपको.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'आत्मा के रिश्ते कभी टूट नहीं सकते '

................यही तो है सच्चा और अमर प्रेम

................सुन्दर रचना

artijha ने कहा…

behad khubsurat maa......lajabab