मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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मंगलवार, 1 मई 2012

श्रद्धांजलि ......




जगजीत सिंह 





फिल्म -इंडस्ट्री  की तरफ से स्व. जगजीतसिंह जी को  यह श्रद्धांजलि  बहुत ही गजब की थी! आत्म -विभोर हो गया मन ...दो घंटे चला यह प्रोग्राम (कलर्स ) पर अपने आप में बेमिसाल था ..चुनिन्दा गायको ने अपनी तरफ से उन्हें दी श्रन्धांजलि ...अनूप जलोटा  ने अपनी दिलकश आवाज में ---- ' ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो  भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी ...मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी ' और आखरी में उनका अन्तरा  . ' ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो  
मगर मुझको लौटा दो जगजीत वापस ...
वो गजलो की शामें वो महफ़िल रूहानी .....' वाह !वाह !वाह ! की आवाजे गूंजने लगी ----

मेहँदी हसन साहेब की इस ग़ज़ल ने समा बाँध दिया .---' चुपके -चुपके रात दिन आंसू बहाना याद हैं .....' जगजीतसिंह जी  की गाई गजल 'तुम इतना क्यों मुस्कुरा रहे हो ,क्या गम  हैं जिसको छुपा रहे हो '...... चित्रा जी पर सटीक बैठ रहा था एकांतचित हो वो सभी को सुन रही थी जहाँ उनका अपना हम सफ़र उनका साथ  छोड़ चूका था ..उनकी आँखें नम थी--- 
कुणाल गांजावाला ने अपनी मदमस्त आवाज़ में इस गजल में चार चाँद लगा दिया  ...  

हरिहरन साहेब की जादू भरी आवाज़ --- 'सरकती जाए हैं  रुख से ये नकाब आहिस्ता -अहिस्ता  ...'  तालियों की गडगडाहट से हाल गूंज गया ..रिचा शर्मा ने अपनी आवाज में  प्यार का पहला ख़त लिखा---
' प्यार का पहला ख़त लिखने में वक्त तो लगता हैं  .. 
नए परिंदों को उड़ने में वक्त तो लगता हैं....  

.जावेद साहेब ने कहा की जब भी में आँखें बंद करके जगजीत सिंह की आवाज़ सुनता हूँ  तो ऐसा लगता हैं की बस सुनता रहू वो हमारी यादों में हमारी धडकनों में हमारे दिल में हमेशा ताज़ा रहेगे ..| 
उस्ताद रशीद  खान की गई ठुमरी ----'याद पिया की आई ..यह दुःख सहा न जाए .. हाय ' दिल के अन्दर तक उतर गई ..
 हंसराज राज 'हंस' पंजाबी सूफी गायक हैं  उन्होंने  अपने सूफी अंदाज में जगजीत सिंहजी  की ग़जल का रस पान करवाया ..'गरज बरस प्यासी धरती पर फिर पानी ने मौला .....  
सोनू निगम ने वो फेमस गजल सुनाई जो मुझे भी बहुत पसंद हैं ...
' होश वालो को खबर क्या बेखुदी क्या चीज़ हैं ,इश्क कहते हैं किसे और आशिक क्या चीज़ हैं..' ....
'होठो से छूलो तुम मेरा गीत अमर कर दो ' आखिर में सभी ने एक ही स्वर में गया ----"होठो से छूलो तुम मेरा गीत अमर कर दो ..बन जाओ मीत मेरे मेरी प्रीत अमर कर दो "



आज जगजीत सिंगजी  हमारे बीच नहीं हैं पर उनकी आवाज़ का जादू आज भी हमारे दिलो में बसा हैं जब भी उनकी कोई गजल सुनती हूँ तो पैर  खुद ब  खुद थम जाते हैं और आँखें नम हो जाती हैं .... उन्हें भाव भीनी श्रधांजलि ...




* जगजीत और चित्रा *

7 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
बुधवारीय चर्चा-मंच पर |

charchamanch.blogspot.com

anju(anu) choudhary ने कहा…

भाव भीनी श्रधांजलि ........आभार

संध्या शर्मा ने कहा…

भाव पूर्ण श्रद्धांजलि...आभार

डॉ टी एस दराल ने कहा…

हमने भी देखा था यह प्रोग्राम . जगजीत सिंह जी की आवाज़ में जादू था . बेहतरीन ग़ज़ल गायक थे .

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

चिट्ठी ना कोई संदेश,
जाने वो कौन सा देश
जहां तुम चले गए, जहां तुम चले गए..

नमन

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

chupke chupke rat sin wala kalam hasrat mohani ka hai jise ghulam ali saahab ne prastut kiya tha ........... karyakram ke ant me jo geet hontho se choo lo tum usme jalota sahab ne do line gakar shama bandh diya .. " jagjeet amar kar do ... sangeet amar kar do ...

aapki sundar prastuti par hardik dhanybaad

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

गजल गायकी के महानायक को विनम्र श्रद्धांजलि