मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा
भाग★4
7 फरवरी 2026
4 फरवरी की रात 12:15 पर हमारी ट्रेन LTT रेल्वे स्टेशन बॉम्बे से निकली और हम 6 फरवरी सुबह 12 बजे पूरी पहुँच गए । शाम को हमने श्री जगन्नाथ जी के दर्शन किये । आज हम सुबह से निकले है पूरी के अन्य मन्दिर देखने ...
अब आगे.....
हमने अलारनाथ,बेड़ी हनुमान ओर नरेंद्र तालाब मन्दिर के दर्शन किये थे ।
अगला मन्दिर पुरी से 5-6 km दूरी पर था ।जिसका नाम था " गुप्त वृंदावन" कहते है यहाँ वृंदावन की आध्यात्मिक ऊर्जा मौजूद है इसलिए लोग इसको गुप्त वृंदावन बोलते है वैसे इसको "श्री गौर विहार आश्रम या माता मठ के नाम से भी पुकारते है।"
यह मन्दिर चैतन्य महाप्रभु की साधना से भी जुड़ा हुआ है।
इस मन्दिर में काफी सुंदर पौराणिक दृश्यों से चित्रित सजी मूर्तिया बनी हुई थी।जो देखने मे बहुत सुंदर नजर आ रही थी। एक बड़ा चक्र भी था।मैंने यहाँ पर जीभर कर फोटू खिंचे।
यहाँ भगवानशिव,विष्णु,हनुमान,कृष्ण की ओर चैतन्य महाप्रभु की मनमोहक प्रतिमाएं थी।
यहाँ कई जगह सेल्फी पॉइंट भी बने हुए थे जिधर लोग अपनी तस्वीरे उतार रहे थे।बीच मे बड़ा सा तालाब भी था।
इस मंदिर में टिकिट था । परन्तु सफाई नदारत थी इतने अच्छे मन्दिर का मेंटनेंस न के बराबर था।
इस मन्दिर में थोड़ी भीड़ थी।सबसे पहले हमसे बोला गया कि लंगर चालू है अगर किसी को खाना खाना हो तो जा सकते हो।
हमने भी सुबह नाश्ता किया था फिर कुछ खाया नही था तो हमको भी भूख लगने लगी थी तो हम उस तरफ चल दिये जिधर बोला गया था।
आगे जाकर देखा तो ये एक छोटा -सा खुला एरिया था जिधर टेबल कुर्सियों पर लोग खाना खा रहे थे ।वातावरण एकदम देशी था। पंडित जैसी वेशभूषा में लोग खाना परोस रहे थे। यहाँ लंगर फ्री नही था,एक आदमी का 80 रु चार्ज था। खाना अनलिमिटेड था जितना खाना हो खाओ। तो मैंने 160 रु के 2 कूपन कटवाए ओर पत्तल लेकर हमदोनो एक खाली टेबल पर बैठ गए।
यहाँ हमको सब्जी,दाल, चावल दिए गए। रोटी नही थी । सब्जी बहुत टेस्टी थी। लास्ट में दी गई मीठी चटनी तो कमाल की थी। खाना स्वादिष्ट था। वैसे भी लंगर का खाना स्वादिष्ट ही होता है।हम दोनों के पेट फुल हो गये थे। इतना टेस्टी खाना सिर्फ़ 80 रु में काफी सस्ता था पर बाथरूम जाना उतना ही महंगा था😂 हम 10-10 ₹ देकर बाथरूम में फ्रेश हुये।
बाद में हमने सारा मन्दिर देखा जो काफी बड़ा था । हमने काफी इंजॉय किया और ऑटो वाले के बार बार बुलाने पर आखिर मन न होते हुए भी हम मन्दिर से बाहर आ गए।
अब हम आखरी मन्दिर की तरफ चल दिये जो पुरी से 3-4km दूरी पर है। इस मन्दिर को "ओंकारेश्वर" मन्दिर के नाम से जाना जाता है और भगवान शिव को समर्पित है।
यहाँ गेट पर नन्दी की विशाल प्रतिमा थी जो भगवान शिव की तरफ मुंह कर के बैठी थी। यहाँ 108 शिवलिंग भी थे।इस मन्दिर में भी बहुत सी प्रतिमाएं थी और काफी खूबसूरत थी।यहाँ भी एक चक्र था जो काफी बड़ा और काफी भारी था जिसे सब चला रहे थे।मैंने ओर मिस्टर ने भी उस चक्र को घुमाया पर भारी होने से हमसे बरोबर घुमा नही☺️ फिर हम एक हॉल में गए जिधर 108 शिवलिंग बने हुए थे। उनके दर्शन कर भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन कर के हम बाहर आ गए।
3 बजे हम वापस होटल में आ गए ।
कुछ देर आराम कर के हम 5 बजे फिर से बाहर निकले और गोल्डन बीच पर पहुँचे। लेकिन आज हम लेट हो गए बीच पर पहुँचे तो अंधेरा हो गया था।मुझे लगा था कि हम सूर्यास्त तक पहुँच जायेगे पर बीच पर अंधेरा हो गया था। हम ने वहाँ गोलगप्पे खाये पर इतने घटिया गोलगप्पे मैंने जिंदगी में कभी नही खाये थे 😅 पुरी प्लेट खाये बगैर ही हम आगे चल दिये।थोड़ी देर दुकानों पर कुछ देखा पर कुछ खास नही था तो हम कुछ देर अंधेरे में घूमकर वापस होटल को चल दिये।
शेष अगले भाग में
जय जगन्नाथ🙏
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