मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा
भाग★5
8 फरवरी 2026
4 फरवरी की रात 12:15 पर हमारी ट्रेन LTT रेल्वे स्टेशन बॉम्बे से निकली और हम 6 फरवरी सुबह 12 बजे पूरी पहुँच गए । शाम को हमने श्री जगन्नाथ जी के दर्शन किये । कल हमने पूरी के अन्य मन्दिर देखे थे ...
अब आगे.....
कल हमने पूरी के अन्य लोकल मन्दिर देखे और आज हम कोणार्क सूर्य मन्दिर देखने निकले है।
कल मैंने एक ड्राइवर को बोलकर एक कैब बुक की थी जो हमको सूर्य मन्दिर ओर साक्षी गोपाल मन्दिर के दर्शन करवा सके।टोटल 2200 सों रु।
सुबह उठकर होटल के रेस्तरां में बढ़िया नाश्ता किया फिर पैदल चौक तक निकल गए।यहाँ तो कार आती नही है सबको 200 मीटर दूर चौक तक जाना होता है।
चौक पर पहुँचकर हम कार में बैठे और आगे का सफर तैय करने लगे।
सबसे पहले हम " साक्षी गोपाल" मन्दिर पहुँचे। इसको "सत्यवादी गोपीनाथ मन्दिर" भी बोलते है। यह मन्दिर पुरी से 20 km दूर है। ये मन्दिर भगवान कृष्ण को समर्पित है।
यहाँ बिल्कुल भीड़ नही थी हमने आराम से दर्शन किये।
यहाँ पंडित लोगो का बहुत आतंक है।पर हमको पहले से पता था तो हम किसी के झांसे में नही आये।
यहाँ का इतिहास इस प्रकार है कि:---
" कहते है कि जगन्नाथ पुरी की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक भक्त साक्षी गोपाल मंदिर के दर्शन नहीं कर लेते। यह दुनिया के उन दुर्लभ विष्णु मंदिरों में से एक है जहाँ भगवान को प्रसाद के रूप में चावल के बजाय गेहूं (जैसे पूरी या लप्सी) का भोग लगाया जाता है。
मंदिर का निर्माण पारंपरिक कलिंग शैली में किया गया है, जो इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है।
आंवला नवमी मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव है। साल में केवल इसी दिन भक्तों को देवी राधा के चरणों के दर्शन करने का अवसर मिलता है।
पौराणिक कथा:-
एक वृद्वय ओर एक युवा ब्राह्मण वृंदावन की यात्रा पर गए थे रास्ते मे युवा ब्राह्मण ने वृद्वय ब्राह्मण की बहुत सेवा की जिससे खुश होकर वृद्वय ब्राह्मण ने अपनी इकलौती लड़की की शादी उससे करवाने का वचन दिया था। परन्तु यात्रा खत्म होने के बाद गांव लौटकर आने पर वृद्वय ब्राह्मण अपने वचन से मुकर गया तो दुखी हो युवा ब्राह्मण ने भगवान कृष्ण से गवाही देने की विन्नति की। भगवान उसकी साक्षी यानी कि गवाही देने के लिए तैयार हो गए परन्तु उन्होंने एक शर्त रखी कि –– "तुम आगे-आगे चलना ओर मैं पीछे-पीछे चलूंगा। तुम पीछे मुड़कर मत देखना"
तब भक्त बोला कि–-" प्रभु मुझे कैसे पता चलेगा कि आप पीछे आ रहे हो?"
तब भगवान बोले कि––" मेरे घुधरुओ की आवाज़ तुमको सुनाई देती रहेगी।"
तब ब्राह्मण अपने गांव पहुँचने ही वाला था कि अचानक आवाज़ आनी बन्द हो गई तो धबराकर ब्राह्मण ने पीछे मुड़कर देख लिया। बस भगवान वही पत्थर के बन गए ।पर उन्होंने वही रुककर ब्राह्मण के सत्य की गवाही दी इसीलिए इस मन्दिर को साक्षी गोपाल मन्दिर बोलते है।
यहाँ पर ब्राह्मण लोग नाम पता लिखकर पैसे लेते है और बोलते है कि आप इस मन्दिर में आये तो उसकी गवाही यही है।परंतु मैंने ऐसा कुछ नही किया हमने भगवान के दर्शन कर लिए यही हमारे लिए काफी है।
यहाँ भगवान के भोग के आटे के लड्डू ओर गुड़ के पकोड़े जैसे कुछ मिलते है जिसे स्थानीय भाषा मे पता नही क्या बोलते है।
उसके बाद हम आगे "रेत की कारीगरी" देखने गए मतलब "सेंड म्यूज़ियम" यहाँ रेती से बहुत सुंदर कलाकारी की गई थी।पर इससे पहले मैं मैसूर का देख चुकी थी तो मुझे ज्यादा पसन्द नही आया।वैसे धूप और गर्मी के कारण कुछ मजा भी नही आ रहा था।अगर शाम को देखा जाय तो जरूर अच्छा लगेगा।
पोस्ट लंबी हो जाने से यही विश्राम देती हूं अगला मन्दिर सूर्य मन्दिर का वर्णन हम नेक्स्ट भाग में करेगे।
जय जगन्नाथ🙏
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें