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सोमवार, 4 जुलाई 2011

सागर और चंद आंसू !!





' कोई सागर इस दिल को बहलाता नही '




   कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं 
जिन्दगी की कश्ती  लगी है दांव पर 
     क्यों कोई मांझी आकर पार लगाता नहीं  ?
  कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं  --


गलती हमारी थी क्यों की कश्ती तूफां के हवाले !
पतवारे फैंक कर क्यों हो गए इन हवाओं के सहारे !
क्यों कोई आकर आज इस तूफां से हमें बचाता नहीं ?
कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं -- 






जब घर से चली थी तो ये मंजर सुहाना था !
मंजिल तक पहुंचने का इक बहाना था !
सनक थी तुझे पाने की, 
तुझसे मिलने का इक ख़्वाब था,
क्यों कोई आकर आज हमे मंजिल तक पहुंचता नहीं ?  
कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं --


साथ पाकर तेरा राह में गुनगुनाना चाह था मैने !
आँखों की गहराइयाँ नापकर यह एहसास जताया था मैनें !
हर परेशानी,हर मुश्किलों में सहचर्य चाहा था मैने !
क्यों कोई आकर आज हमकदम बनके राह दिखलाता नहीं ?
कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं -- 






जिन्दगी के इस तूफां से कैसे खुद को बचाऊं ?
कैसे समेंटू अपना कांरवा ? कहाँ नीड़ बनाऊं ?
कश्ती टूटी,घर टुटा, गुम हो गई पतवारे 
बहे जा रही हूँ जीवन के इस सैलाब में,
थक गई हूँ इस बोझ को ढ़ोते -ढ़ोते,
अश्को से नफरत !खुशियों से नफरत !
नफरत हैं अपने वजूद से --
क्यों कोई आकर आज इस दिल को दिलासा दिलाता नहीं ?
कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं --  



  

  
आंधियो में भी कभी चिरांग जलते हैं --सोचा नही था ?
सेहरा में भी कभी फूल खिलते हैं --सोचा न था ? 
जुगनू भी कभी दिन में चमकते हैं --सोचा न था ?
कांटो पर भी कभी गुलाब खिलते हैं --सोचा न था ?
भटकाव से भी कभी राहे मिलती हैं --सोचा न था ?
दरख्सतों पर भी कभी कमल खिलते हैं --सोचा न था ?
क्यों कोई आकर आज इन सवालों को सुलझाता नहीं ?
कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं -- 




20 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब ... रफ़ी के इस गीत की आत्मा को आपने अपने शब्दों में उतार दिया है ... बहुत लाजवाब लिखा है ...

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

गहन ..गंभीर .. भाव भर दिए हैं गीत में ...

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

sach kahun darshan jee dil ko bahlane ke liye saagar ke badle aasman ki aur rukh kar ke dekhna...:)

fir ahsaas hoga..kaise khula hua khila hua aasmaaan apke dil ko bahlata hai..!!

waise aap jaise hastiyon ke post pe comment karen..ye to ham jaiso ke layak bat nahi hai..

god bless you!! and very best wishes..nd regards!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरत गीत पर अपने मन के भावों को शब्द दिए हैं ...

H P SHARMA ने कहा…

poem bahut badhiya hai ek ek shabd arthpoorn

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आप रचना के साथ चित्र का चुनाव इतना सटीक करती हैं के रचना ही चित्र हो जाते हैं और चित्र रचना...बेहद भावपूर्ण रचना है आपकी...वाह...

नीरज

रश्मि प्रभा... ने कहा…

गलती हमारी थी क्यों की कश्ती तूफां के हवाले !
पतवारे फैंक कर क्यों हो गए इन हवाओं के सहारे !
क्यों कोई आकर आज इस तूफां से हमें बचाता नहीं ?
कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं --
waah

sushma 'आहुति' ने कहा…

khubsurat geet ko apne bhaav dekar aur bhi khubsurat bana diya... very nice...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

लग रहा है जैसे इस पुराने गाने की छूट गई पंक्तियाँ हैं ।
लाज़वाब ।

संजय भास्कर ने कहा…

आदरणीय दर्शन कौर जी
नमस्कार !
कोमल भावों की सुन्दरतम एवं सहजतम अभिव्यक्ति

संजय भास्कर ने कहा…

सुन्दर शब्दों से सजाई हुई बेहद ख़ूबसूरत रचना!
करीब 20 दिनों से अस्वस्थता के कारण ब्लॉगजगत से दूर हूँ
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

गहन अभिव्यक्ति.... बहुत सुंदर

कुश्वंश ने कहा…

बेहद भावपूर्ण रचना लाजवाब,

निर्मला कपिला ने कहा…

कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं --
बेखुदी मे भी करार आता नही---- हवाओं के साथ बहने वालों को कैसे करार आयेगा? सुन्दर रचना। बधाई।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वियोग शृंगार की सुन्दर अभिव्यक्ति!

श्यामल सुमन ने कहा…

बहुत खूब दर्शन जी - देर हुई आपके ब्लॉग का दर्शन करने में क्योंकि ऑफिस चला गया था. सुन्दर भाव. लीजिये मेरे तरफ से कुछ त्वरित पंक्तियाँ -

आँधियों में भी चिरागें जल सके जज्बात से
फूल सहरा में खिलेंगे प्यार मीठी बात से
औ दरख्तों पे कमल के सुमन भी खिल उठे
दिल की गहराई से कोई इसको आजमाता नहीं

हाँ एक बात और - मैं "श्याम" नहीं "श्यामल" हूँ.
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

: केवल राम : ने कहा…

साथ पाकर तेरा राह में गुनगुनाना चाह था मैने !
आँखों की गहराइयाँ नापकर यह एहसास जताया था मैनें !
हर परेशानी,हर मुश्किलों में सहचर्य चाहा था मैने !
क्यों कोई आकर आज हमकदम बनके राह दिखलाता नहीं ?
कोई सागर इस दिल को बहलाता नहीं --

सागर स्वयं शांत होता तो किसी को क्योँ वहलायेगा....मन के भावों को काफी सुंदर और सटीक तरीके से सामने रखा है ...आपका आभार

वन्दना ने कहा…

खूबसूरत भावो से सजी सुन्दर रचना।

mahendra srivastava ने कहा…

भावपूर्ण रचना। बहुत सुंदर

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत खुबसूरत भावों से सजी रचना जिसमे हर रंग का समावेश खूबसूरती से किया गया है |
सुन्दर रचना |