मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

नींद आँखों से कौसो दूर थी










कल की  रात बहुत शौख बड़ी रोचक थी .....
आसमां था काला सितारों की बड़ी रौनक थी ..
खुली खिड़की से रौशनी कभी-कभी मुझ पर पड़ती थी ,
हवा के झौंके मेरे अंग को स्पर्श कर के छू जाते थे ..
नींद आँखों से कौसो दूर र्रर्रर थी ...

झांकता हुआ चाँद किसी की याद दिला रहा था  ......
किसी की मदहोश आवाज मुझे बेसुध किये जा रही थी  ..
वो कोई था जिसकी बांहों में मेरी जन्नत थी ..
वो मेरा खवाब! मेरा प्यार ! मेरा हमदम ! मेरा नसीब था ....
पर वो मुझसे लाखो मील दूर था ...
चाहकर भी मैं उसे छू नहीं पा रही थी ...
नींद आँखों से कौसो दूर र्रर्रर थी ...

 वो मेरे साथ तो था ,पर मेरे पास न था ...
 उसके होने का एहसास मन को सुकून दे रहा था  ..
तन मेरी गिरफ्त से दूर किसी के आगोश में था ..
अनुभूति तो थी--- पर स्पर्श नहीं था ....
हसरते जवां थी और उमंगे बेकाबू थी ....
नींद आंखों से कौसो दूरररर  थी .....

तभी कही से अचानक एक आवाज़ आई -----
"जागते रहो "

कोई पास न था ? कोई साथ न था  ????
सिर्फ खामोशियाँ थी और मैं थी और मेरे एहसास !





9 टिप्‍पणियां:

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

kal ki raat ka ahsaas :)
waise aise ahsaas jindagi jeene ke liye kaafi hote hain...
behtareen!

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

हर अहसास ही तो साथ है :)

expression ने कहा…

दूर होकर भी पास होने का एहसास और ज्यादा दर्द देता है.....
दिल जान कर भी कहाँ मानता है....
बहुत प्यारी कविता दर्शन जी..

सादर
अनु

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत खूबसूरत अहसास।

sushma 'आहुति' ने कहा…

कोमल भावो की अभिवयक्ति......

MANU PRAKASH TYAGI ने कहा…

वाह आपने तो खामोश रात की बातो को सुंदर शब्दो में बयां किया है । अकेलापन क्या होता है उसे कैसे महसूस करते हैं सब लिख दिया

सदा ने कहा…

वाह ... बेहतरीन

राकेश कौशिक ने कहा…

"अनुभूति तो थी--- पर स्पर्श नहीं था ...."
बहुत खूब

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…



✿♥❀♥❁•*¨✿❀❁•*¨✫♥
♥सादर वंदे मातरम् !♥
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वो मेरे साथ तो था ,पर मेरे पास न था ...
उसके होने का एहसास मन को सुकून दे रहा था ..
तन मेरी गिरफ्त से दूर किसी के आगोश में था ..
अनुभूति तो थी--- पर स्पर्श नहीं था ....
हसरते जवां थी और उमंगे बेकाबू थी ....
नींद आंखों से कोसों दूऽऽरऽरऽर थी ....

वाह !
बहुत ख़ूब !

आदरणीया दर्शन कौर धनोय जी
सुंदर रचना के लिए साधुवाद !

लोहड़ी की बहुत बहुत बधाई और हार्दिक मंगलकामनाएं !

साथ ही
मकर संक्रांति की शुभकामनाएं !
राजेन्द्र स्वर्णकार
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