मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

ऐसी जिन्दगी तो चाही नहीं थी मैनें .....?





साँसों का बंधन /
दिल की कराहें /
काँटों का बिछौना /
ऐसी जिन्दगी तो चाही नहीं थी मैनें .....?

आँखों का रोना /
दिल का तडपना / 
रातो को जगना /
ऐसी जिन्दगी तो चाही नहीं थी मैनें .....?

अपनों से बिछड़ना /
अपनों के लिए रोना /
फिर खुद ही संभलना /
ऐसी जिन्दगी तो  चाही नहीं थी मैनें ......?

कलेजे से लगाना /
फिर दूर हटाना /
खुद के हाथो ही बिजली गिरना /
ऐसी जिन्दगी तो चाही नहीं थी मैनें ...... ?

रस्ते से गुजरना /
आवाजे लगाना /
उसका यू  खिड़की पे आना  /
मुझे तांककर  कतरा जाना /
ऐसी जिन्दगी तो चाही नहीं थी मैनें ....?

अपना बनाना /
हासिल करना /
मोहब्बत जताना /
फिर धोखा खाना /
ऐसी जिन्दगी तो चाही नहीं  थी मैनें .....?

ऐसी जिन्दगी तो चाही नहीं थी मैनें ....?
   

6 टिप्‍पणियां:

RITESH GUPTA ने कहा…

ऐसी जिंदगी कोई नहीं चाहता, पर क्या करे होगा वोही जो उपर वाले को मंजूर हो....बस हम कहते रह जाते हैं की ऐसी जिंदगी तो चाही नहीं थी मैंने...| यही हैं चलती का नाम गाड़ी....
बहुत बढ़िया और भावनाओं को व्यक्त करती रचना....धन्यवाद

sushma 'आहुति' ने कहा…

शब्दों की अनवरत खुबसूरत अभिवयक्ति...... .

Reena Maurya ने कहा…

भावनाओं को शब्दों में खूबसूरती से बांधा है...
अति सुन्दर....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (21-12-2012) के चर्चा मंच-११०० (कल हो न हो..) पर भी होगी!
सूचनार्थ...!

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

बस एक ही शब्द ''दर्द ही दर्द ''

suresh agarwal adhir ने कहा…

Bhawanao ki sundar abhivyakti ....
http://ehsaasmere.blogspot.in/