मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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गुरुवार, 27 अक्तूबर 2011

याद....!!!









याद आते हो तो कितने ----
अपने -से लगते हो तुम ----
वर्ना,  हर लम्हां गुजरता हैं   ----
तुम्हारे ख्यालो में ----
चुप -सी आँखों में आज ----
फिर वही सवाल उठा ----
क्या राहत मिलेगी मुझे ----
इन बंद फिजाओ में ----?
खेर, अँधेरे  भी  भले -जीने के लिए ----
गैर, हो जाते हैं  सभी चेहरे उजालो में----
मुस्कुराओ तो भी अच्छा हैं  ----
बेरुखी भी भली तुम्हारी ----
बेअसर हैं  सभी बाते यहाँ मलालो में ----
याद आते हो तो एहसास -ऐ -ख़ुशी मिलती हैं  ----
यूँ तसल्ली भी गिरफ्तार हैं ---
सौ (१००) तालो में----???????   










16 टिप्‍पणियां:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

भैयादूज पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

संजय भास्कर ने कहा…

....सुन्दर प्रस्तुति....भाईदूज की शुभकामनाएं.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सुन्दर रचना!
भइयादूज की शुभकामनाएँ!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरत रचना ..

G.N.SHAW ने कहा…

मर्म और प्यार भरी कविता बधाई
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर!
--
कल के चर्चा मंच पर, लिंको की है धूम।
अपने चिट्ठे के लिए, उपवन में लो घूम।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

रचना बहुत सुन्दर है ।

संगीता पुरी ने कहा…

अच्‍छी रचना ..

आशा ने कहा…

सुन्दर भाव लिए कविता |
दूज पर शुभ कामनाएं |
आशा

Maheshwari kaneri ने कहा…

खूबसूरत रचना ..

मदन शर्मा ने कहा…

आदरणीय दर्शन कौर जी नमस्ते !
याद आते हो तो कितने ----
अपने -से लगते हो तुम ----
वर्ना, हर लम्हां गुजरता हैं ----
तुम्हारे ख्यालो में --
मुस्कुराओ तो भी अच्छा हैं ----
बेरुखी भी भली तुम्हारी ----
याद आते हो तो एहसास -ऐ -ख़ुशी मिलती हैं ---
वाह ! क्या कहने माशा अल्लाह !!
बहुत ही खूबसूरती से आपने ह्रदय के भावों को व्यक्त किया है ! धन्यवाद !
मेरी तरफ से आपको भैयादूज पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!!!

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

याद आते हो तो कितने ----
अपने -से लगते हो तुम ----
वर्ना, हर लम्हां गुजरता हैं ----
तुम्हारे ख्यालो में ----

ओये होए .....!!!!!
बधाइयाँ जी बधाइयाँ .....
बस ताले मत खोलें .....:))

संध्या शर्मा ने कहा…

सुन्दर, प्यार भरी रचना...

mahendra verma ने कहा…

अपने ही तो याद आते हैं।

बहुत अच्छी कविता।
श्वेत-श्याम चित्र बहुत कलात्मक लग रहा है।

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

वाह, बहुत सुंदर

Rakesh Kumar ने कहा…

यूँ तसल्ली भी गिरफ्तार हैं ---
सौ (१००) तालो में----???????

कौन से वाले ताले हैं ये,दर्शी जी.
आप भी क्या कविता लिखतीं हैं.
निराले अंदाज के लिए बधाई