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बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

शिव के 5 तत्वों के मन्दिर

तमिलनाडु डायरी ★1
त्रिची।
14 जनवरी 2026
मैं आजकल हमेशा सर्दियों में साउथ की यात्रा करना पसंद करती हु।

इस बार कीधर जाऊ यही सोचती रही। आख़िर बहुत सोचने के बाद मैंने त्रिची ओर तन्जोवर की यात्रा का प्लान बनाया।क्योकि अपनी मदुराई ओर रामेश्वरम की यात्रा के दौरान मेरे ये दोनों मन्दिर छूट गये थे। तभी से मैं इन दोनों मंदिरों में जाने को आतुर थी।
तो मैंने अपनी सहेली को इस ट्रिप मे शामिल होने के लिए तैयार किया ।

वो बोली कि मैंने त्रिची का मन्दिर देखा है और सिर्फ 2 मन्दिरो को देखने इतनी दूर जाना पागलपन है कुछ और शामिल करते है।

ओर इस तरह इस यात्रा की रूपरेखा बनने लगी।गूगल बाबा का दरवाजा खटखटाया,कुछ अनुभवी मेम्बरों की जानकारी इक्क्ठा की ओर सबकी मिलीजुली खिचड़ी ने अपुन का काम आसान कर दिया।
किसी ने चिदम्बरम बोला तो किसी ने कुम्भकोलम ओर किसी ने कालहस्ति बोला।मैंने सारी कड़ियां इक्क्ठा की ओर एक आइटनरी बना ली।

अब डेट के हिसाब से रिजर्वेशन करवाना बाकी था।
हमने 12 जनवरी फिक्स की ओर इंतजार करने लगे।

इस बीच दिसम्बर में मैं ओर मिस्टर पूरी की यात्रा पर भी जा रहे थे पर अचानक मुझे ये यात्रा केंसिल करनी पड़ी।अब मेरा फोकस पूरा अपनी त्रिची यात्रा पर था।।
12 जनवरी 2026 को नियत समय पर हमारी ट्रेन त्रिची यानी तिरुचिरापल्ली को चल दी।
गाड़ी बहुत स्लो थी हम 13 तारीख को रात के 3 बजे त्रिची पहुँचे।जबकि इसको रात के 12 बजे पहुँच जाना था।
हम रात को 4 बजे pf न.1 पर गए और लॉज में फ्रेश हुए ।करीब 6 बजे हम ऑटो कर के श्री रँगनाथ स्वामी मन्दिर को चल दिए।
ये मन्दिर भगवान विष्णु को समर्पित है और भगवान विष्णु के 108 दिव्यदेश मन्दिरों में प्रथम स्थान रखता है।

ऑटो वाले ने 400 रु बोला था पर मेरे बर्गनिंग करने के कारण 300 में ले गया। स्टेशन से मन्दिर की दूरी 9-10 km है। हम 20-25 मिनिट में मन्दिर के अन्दर बने होटल तक पहुँच गए ।जिधर मेरी सहेली इंतजार कर रही थी।हमने साथ ही नाश्ता किया और लगेज उसके रूम में रखकर 3 दिन के लिए एक कार हायर की, 3 दिन का 15 हजार किराया नक्की कर हम मन्दिर के अंदर चले गए।
मन्दिर में फोन तो ले जा सकते हो पर मूर्ति का फोटू खींचना पूर्णतः वर्जित है। ये मन्दिर विष्णुजी को समर्पित है।ये विष्णु जी के 108 दिव्यदेशम मंदिरों में प्रथम स्थान पर है। विष्णु जी की लेती हुई प्रतिमा मोहक अंदाज में है।
प्रागण्ड के सारे मन्दिरों के दर्शन कर हम लोग त्रिची के अगले मन्दिर जम्मुकेश्वर जो शिव जी के जल तत्व का प्रतिनिधित्व करते है आगे को चल दिये।
शेष अगली क़िस्त में।


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