५ जुलाई को बॉम्बे से यात्रा शुरु की थी --आज ११ जुलाई है --सुबह पालम पुर से निकले थे --रास्ते मे चामुंडा -माता का मन्दिर देखते हुए --आगे बड़े -१२बजे तक हम धर्मशाला पहुचे - --
मेक्लोंडगंज में धुसते ही जोरदार बारिश ने हमारा स्वागत किया --फिर पहाड़ी पर 'जाम'लगा हुआ था--- इसलिए थोड़ी परेशानी हुई, पर इस खुबसूरत पहाड़ी शहर ने हम सब का मन मोह लिया--मेरा अंतर्मन तो वेसे ही पहाड़ो को देखकर नाचने लगता हे --लेकिन यह शहर वाकई में खूब सुरत हे-- यदि ऐसा न होता तो तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा यहाँ अपनाआशियाना न बनाते --इसलिऐ बोध्य भिक्षु काफी नजर आ रहे थे ---
बारिश रुक गई थी --और मोसम बहुत ही खुशनुमा हो गया था-भीगा -भीगा समा था --चारो तरफ ठंडी हवा के झोके ,बादलो के झुण्ड,दूरधोलाधार की पहाड़ीयां,मन शायरी करने को मचल रहा था -- कार से उतरकर हम पैदल ही चल पड़े-भागसु नाग मन्दिर देखने --दोनों तरफ पहाड़ी लोगो की दुकाने सजी हुई थी --छोटा -सा बाज़ार हे -- मेरीलडकियों ने कुछ ज्वेलरी खरीदी ---
हम मंदिर में पहुचे यह शिव मंदिर हे काफी पुराना मंदिर हे --सामने ही तालाब में बच्चे -बड़े मस्ती कर रहे थे -कुछ दूर एक झरना हे -यह उसी का पानी हे - -पूछा- तो पता चला की २किलो मीटर हे झरना --देखने की बहुत इच्छा थी -पर नही गए क्योकि रास्ता खराब था--और हम दोनों इतना पैदल चल नही सकते थे --बच्चो को कहा --तुम लोग धूम आओ हम यही पर बैठकर इन्तजार करते हे --पर उन्होंने भी मना कर दिया --भूख जोरो की लग रही थी ,सुबह के आलू के पराठे कब के रफूचक्कर हो चुके थे --एक छोटे से होटल की छत पे खाना खाने पहुचे ---
(खाना आया नही हे --पेट में चूहे कबड्डी कर रहे हे )
खाना खाकर हम चल दिए -दलाई -लामा-टेम्पल देखने --चीन के अत्याचारों से दुखी हो दलाईलामा ने तिब्बत छोड़ मेक्लोंडगंज को अपना धर बनाया -- यह मठ तिब्बती करीगरी का बेजोड़ नमूना हे --यहाँ भगवान बुध्द की मूर्तियों पर सोने की पालिश हुई हे-- यह ३ मंजिला भवन हे निचे की मंजिल पर बहुत से भिक्षु इधर -उधर धूम रहे थे --कुछ अपना काम कर रहे थे --हम भी उनसे इजाजत लेकर ऊपर चढ़ गए --सीढियों पर ही एक बड़ा -सा टोपा बना था--इसे क्या कहते हे पता नही ?- ऊपर सुंदर -सी बड़ी भगवान बुध्द की मूर्ति लगी
(यह शायद घंटा हो सकता हे )
(तिब्बती -मठ के बाहर लगी मूर्ति )
(मठ के अंदर का द्रश्य )
रात को पठान कोट पहुचे --पहले होटल गए --रूम अच्छे थे --यहाँ गर्मी बहुत हे --ऐ.सी. रूम लेना पड़ा -- थक गए --जल्दी सोना पडेगा--सुबह हमको डलहोजी के लिए निकलना हे ---
जारी ---








