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बुधवार, 14 सितंबर 2011

गोल्डन टेम्पल अमृतसर भाग 4



गोल्डन टेम्पल भाग 4


(नीव का पहला पत्थर रखवाते हुए  --बाबा  बुढ़ासिंह ) 


अमृतसर के गोल्डन टेम्पल की नीव बाबा  बुढ़ा सिंह  ने एक मुसलमान मुरीद से रखवाई थी .. गोल्डन टेम्पल को 'हरमंदिर साहेब' भी कहते हैं ---इस मंदिर का निर्माण गुरु रामदास जी ने खुद करवाया था  और पहला 'प्रकाश' भी उन्होंने खुद किया था ..



( बाबा  बुढ़ाजी ग्रन्थ साहेब की पहली बिड हरमिन्दर साहेब में ले जाते हुए ) 
"पीछे गुरु रामदास जी चवर डुलाते हुए चल रहे हैं "    







(बारिश में भीगा --गोल्डन टेम्पल यानी हरमिंदर साहेब  )

हम ता. 5 अगस्त को मुम्बई से चल कर  7 अगस्त को गोल्डन टेम्पल यानी अमृतसर पहुंचे  .....





आज रात से ही  बहुत बारिश हो रही थी --सुबह जब आँख खुली तो चारो और पानी ही पानी हो रहा था --बहुत अफ़सोस हुआ --क्योकि मुझे यहाँ से पहनने के सुट खरीदने थे और कुछ सामन भी चाहिए था --पर इतनी मुसळधार बारिश के रहते कही  घूमना भी ठीक नहीं था --पर अति उत्साहित अतुल महाराज कहा मानने वालो में से थे --आखिर हम तैयार हो माता लालदेवी के मंदिर जाने को निकल ही पड़े ...



(गुरूद्वारे के रूम में बैठे हुए अतुल महाराज का इन्तजार कर रही हूँ   )





(सन्नी कैसे पीछे रहता--?    आखिर  बेटा किस का हैं )   


(सीढियों से नीचे उतरते हुए ---बाहर बारिश हैं )


(बारिश में नहाया हुआ ---- जल मग्न --गोल्डन टेम्पल ) 
"शमा हैं सुहाना -सुहाना ---नशे में जहाँ हैं "  


(आज बिलकुल भीड़ नहीं हैं ---रास्ता कितना खाली  हैं) 


सुबह गुरूद्वारे में माथा टेक कर हमने चाय नाश्ता किया --अब हम लाल माता के यहाँ जाने को तैयार थे --पर ऑटो जा ही नहीं रहे थे --सड़क पर घुटनों तक पानी भरा हुआ था --पुलिस साइरन बजा रही थी और सबसे इल्तजा कर रही थी की कोई भी अपने धरो से बाहर न निकले --काफी कारे  पानी में फंसी हुई थी --आखिर में एक ऑटो वाला 200 रु. में ले जाने के लिए  तैयार हो गया --चोगुना किराया देकर आखिर हम लाल माता के दर्शन करने निकल पड़े --एक मन था की वापस चला जाए कौन खतरा मोल ले ,  पर अतुल और सन्नी की वजय से मुझे भी जाना पड़ा --वैसे  मैने तो देख रखा था पिछली बार जब आई थी तो  ! खेर, --पर ऑटो भी ज्यादा दूर नहीं जा सका उस के साइलेंसर में पानी भर गया  --मज़बूरी वश हमें साईकिल रिक्शा में जाना पड़ा -- मुझे साईकिल -रिक्शा में जाना पसंद नहीं हैं --एक आदमी पर बोझा ढ़ोना  मुझे मंजूर नहीं हैं --पर क्या करे ???




( अमृतसर में बाढ़ ----पानी ही पानी )


(एक ही रिक्शे में-- अतुल को ऐसे  बैठना पड़ा...हा हा हा हा )
वैसे मैने उससे वादा क्या था --यह फोटू नहीं लगाउंगी --सारी र्रर्र अतुल ..)

लेकिन तस्वीर इतनी सुंदर हैं की दिल मचल गया 



(लाल माता का गेट---अतुल और  मैं )



(यह हैं लाला माता देवी का मंदिर --इसे वैष्णव देवी मंदिर भी कहते हैं )  



( वैष्णवी माता की गुफा में धुसते हुए ---सन्नी और अतुल )



( पीछे माता की पिंडी ) 


(जगत गुरु शंकराचार्य  के समक्ष प्रणाम की मुद्रा में सन्नी )




(पूरा मंदिर कांच का बना हैं )



इस माता की बड़ी सी मूर्ति की जुबान को जब अतुल ने पकड़ा तो एक पुजारी बहुत चिल्लाया  --अतुल ने तब तो छोड़ दिया पर फोटू खीचने के टाइम फिर से पकड ली ----शैतान  ! फोटू खीचने की मनाई नहीं हैं यहाँ ? 



(यह गोतम बुध्द की बहुत बड़ी प्रतिमा हैं --अभी काम चल रहा हैं ) 


यहाँ लोग  अपनी शादी की मन्नत मांगते हैं और चुन्नी व्  शादी का चुडा चडाते हैं --मैने भी लगे हाथो यहाँ सन्नी की शादी की मन्नत मांग ही ली ...   

(सन्नी के पीछे शिवजी की बहुत बड़ी  प्रतिमा )


(यह हें भोला भंडारी तपस्या में लींन ) 




(श्री हरी की आराम मुद्रा )
सबकी नींद लूटकर खुद आराम की बंसी बजा रहे हैं 


(गुफा से बाहर निकलते हुए---बन्दर की तरह --सन्नी और अतुल )





(पिछले साल भी मैं  गई थी लाल मंदिर )


(वापसी में पानी  कुछ कम हुआ )

हम वापसी कर रहे थे तो बारिश की भयानकता कम हुई--सडको से पानी उतर रहा था --हमने चैन की सांस ली --पर धीरे -धीरे बारिश का कहर जारी था --

हम चले ऐसी ही बारिश में जलियांवाला बांग देखने   ....


अगली किस्त जलियांवाला बांग ........



मंगलवार, 6 सितंबर 2011

गोल्डन टेम्पल अमृतसर भाग 3


गोल्डन टेम्पल भाग 3


( रात का सुहाना मंजर )




( गुरु रामदास जी--चोथे गुरु )





गुरु रामदास जी सिक्ख -धर्म के चोथे गुरु थे --उन्होंने ही अमृतसर शहर को बसाया था और इस पवित्र सरोवर का निर्माण कराया  था-----

हम 5 अगस्त 2011 को  गोल्डन टेम्पल के लिए रवाना हुए थे:---







अतुल का फोन आया तो नींद खुली शाम हो गई थी ...अब बाधा वार्डर नहीं जा सकते थे ... उसे मना किया --वैसे कई बार देख चुकी थी इसलिए मन भी नहीं था -- मैने सन्नी को उठाया ---हम तैयार होकर नीचे चल दिए --पहले जाकर सौप वाली चाय पी,फिर पास ही 'बाबा अटल भाई जी वाले गुरूद्वारे को देखने गए ...यह एक गोल गुरुद्वारा हैं --सात मंजिला ! इसमें  काम चल रहा हैं  ...रिपेय्रिग का --पास ही बहुत बड़ा तलाब भी हैं ---


      
(बाबा अटल भाई साहेब जी का गुरुद्वारा )



सबसे ऊपर वाली गुम्मद में गुरु हरकिशन जी का चित्र लगा  हैं--और एक अखंड -जोत जल रही हैं .. 

(गुरु हरकिशनजी --- सिक्ख धर्म  के आठवे गुरु हैं )



( सातवे माले से गुरुद्वारे से दिखाई देता एक विहंगम द्रश्य ---दूर गोल्डन टेम्पल दिखाई दे रहा हैं )


(गुरुद्वारे के अंदर के भित्ति-चित्र )



(गुरुद्वारे के अंदर के भित्ति-चित्र )
( मुग़ल शासन के समय के )


( कबूतरों से मेल -मिलाप हो जाए  ) 





(यह हैं बेरी का झाड ---यहाँ  गुरुनानक देव जी स्वयम साधना करते थे )



( रात का नजारा ---सोने- सा चमक रहा तेरा दरबार  दाता  )



(सन्नी का गुरु प्रेम )




(रात को अतुल भी आ गया --हमने  इक्कठे गुरु साहेब का सुखासन किया )



( जगमगाहट  सोने की ---इसलिए तो इसे गोल्डन -टेम्पल कहते हैं  )






(सन्नी , मैं और अतुल )  




(दरबार साहेब में पालकी सज़ रही हैं )




(  गाजे-बाजे से सवारी को ले जाते हुए  )






( रात ११बजे --पालकी साहब से महाराज की  सवारी अकाल तख्त में विश्राम को जाते हुए )

(अंदर --महाराज  की  सवारी ---आराम करते हुए )




(धन्य -धन्य गुरु राम दास जी )





 -: कुछ पुरानी यादे :-




( 1992 में जब मैं पहली बार गोल्डन टेम्पल गई थी ) 
अंजुल,  सन्नी, जेस, ऋषि, निक्की और रवि --मेरे और मेरे देवर के बच्चे .....






( 2002 में जब मैं दूसरी बार गोल्डन टेम्पल गई  )
सन्नी ,मैं,जेस और निक्की 






( 2010 में जब मैं तीसरी बार गोल्डन टेम्पल गई  )
*** साथ में निक्की ***


( और आज 2011 में मेरा चोथा चक्कर हैं  ---गोल्डन टेम्पल का  )



रात १२ बजे हम सोने चले गए---अतुल अपने होटल में गया ... 


कल हम घुमने जाएगे --लाला माता और  जन्लियावालाबाग़  ---