दिलकश चाँद !
" चलो दिलदार चलो
चाँद के पार चलो "
तुम्हारी चमकती आँखों में छांककर पूछती--
और तुम अपनी मदमस्त आँखों को घुमाकर कहते --
" हम हैं तैयार चलो "--
और मैं ख़ुशी के हिंडोले में सवार
दू.....र... आकाश में अपने पंख पसार
बादलो से परे,
चाँद की पथरीली जमीं पर,
उड़ते -उड़ते घायल हो चुकी हूँ ,
अपने लहू -लुहान जिस्म को समेटे ,
कातर निगाहों से तुम्हे धूर रही हूँ ,
और तुम दू....र खड़े मुसकुराते हुए,
मानो,मेरा मजाक उड़ा रहे हो---
" चाँद को छूने वाले ओंधे मुंह जो गिरते है "
मैं सोच रही हूँ की यह चाँद दूर से कितना ,
हसीन !कितना दिलकश था !
क्यों मैने इसके नजदीक जाने का साहस किया !
तुम भी तो ' राज' !
उस चाँद की तरह हो ,
जिसे मैं देख तो सकती हूँ ,
पर छू नही सकती ----?
अपने तन -मन को घायल कर --
आज सवालों के घेरे में खड़ी हूँ --!
दू......र से आवाज आ रही हैं --
" आओ खो जाए सितारों में कहीं
छोड़ दे आज ये दुनिया ये जमीं "
चलो दिलदार चलो
चाँद के पार चलो
हम हैं तैयार चलो ~~~~~~~!



