मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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रविवार, 1 जनवरी 2012

पहली सालगिरह ...





शुक्रियां !  करम ! मेहरबानी ! 






आज मुझे आप लोगों से मिले पूरा एक वर्ष यानी ३६५ दिन हो चुके हैं ! 
आज मेरे ब्लॉग 'मेरे अरमान मेरे सपने'की वर्षगाँठ हैं :--  

आप लोगो का प्यार और सत्कार मेरे जीवन की अमूल्य निधि हैं !


 " अपनों  की  इनायत  कभी  खत्म  नहीं  होती 
रिश्तो की महक दूरियों से कम नहीं होती 
जीवन में साथ हो अगर सच्ची दोस्ती का 
       तो जिन्दगी जन्नत से कभी कम नहीं होती ....!"


आभासी दुनियां का सफ़र बड़ा निराला और जादुईभरा हैं--एक बटन दबाते ही हम इस लोक से  उस लोक में पहुँच जाते हैं ..जहाँ सपने बिखरे पड़े हैं ..अरमानो की डोलीयां     सजी हैं ..जहाँ हर तरफ प्यार हैं ..आदर हैं ..सम्मान हैं ! जहाँ एक दुसरे से अनजान होते हुए भी परिचित हैं ..सबका  दुःख एक हैं सबका सुख एक हैं ..एक ही जगह बैठकर हम सबके साथ होते हैं ...

मुझे यह फेटेंसी दुनियां  बहुत पसंद आई ..कुछ अपवाद छोड़ दे तो मुझे यहाँ सभी अच्छे  लोग मिले ..जिन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया ..मुझे आदर दिया ..सम्मान दिया ..मेरी क़ाबलियत को उभरने का मौका दिया ..मेरी गलतियों को प्यार से समझाया और मुझे  आगे बढकर गले लगाया ....
 अपने सभी मित्रो का तहेदिल से धन्यवाद करती हूँ ...वो इसी तरह मेरा होंसला बढाए और यु ही मुझ पर प्यार लुटाए .....  धन्यवाद ! 

मेरे मित्रगण और ब्लॉग के जाने- माने दोस्त :-

ललित शर्मा ,हरी शर्मा ,मुकेश सिन्हा , अरुण शर्मा ,डॉ. रूपचंद शास्त्रीजी ,रशिम प्रभाजी ,हरकीरत हीर ,इन्दुपुरी ,आरती शर्मा ,संदीप जाट,संजय भास्कर, केवलराम.,वंदना गुप्ता ,संगीता स्वरुपदी,संगीता पूरी जी , राजीव कुलश्रेष्ठ ,विनोद्शर्मा, डॉ.दराल जी,नीरज जाट ,मदन शर्मा जी ,राकेशकुमार जी , सुनील कुमार, डॉ. दिव्या, ,डॉ. मोनिका शर्मा ,समीरलाल जी ,राज भाटिया जी,राजिव तनेजा जी, अजय झा जी,अल्बेलाजी, अतुल,सुनील खत्री,विशाल ,पाबला पाजी,कुश्वंश जी, संध्याशर्मा जी, सत्यमशिवम् , नीरज गोस्वामीजी, सुरेंदर पा जी, कुंवरकुश्मेश जी,महेंदर श्रीवास्तव जी, रेखा जी,सदा जी, कैलाश शर्माजी,सुशिल बाकलीवालजी,  रोशीजी , महेश्वरी कनेरी जी, अंजू चोधरी जी, अजित गुप्ताजी,निर्मला कपिला जी,शलभ गुप्ता, अनुपमाजी ,जेनी शबनम जी, डंडा लखनवी जी,अरविन्द भट्ट जी,कमलेश भट्ट,संतोष,राजेंदर स्वर्णकार,महेंदर वर्माजी,काजलजी,सतीश जी, आकाश सिंह (जो मुझे माँ कहते हैं ) और मेरे ब्लॉग पर आने वाले समस्त दोस्तों का हार्दिक अभिनन्दन करती हूँ ...............(जिन्हें भूल गई हूँ वो माफ़ करे ..प्लीज़ ........)


मेरा पहला प्रोफाईल फोटू 






मेरी पहली पब्लिश पोस्ट 


अरमान आसमान पर छाए हुए बादलों की तरह होते हैं .... जो सिवाए कुदरत के हुकुम के कभी नहीं बरसते ...
जब तक कुदरत को मंज़ूर न हो.. कोई भी अरमान पूरा नहीं हो सकता |

" तू इस तराहं से मेरी ज़िन्दगी में शामिल हैं 
 जहां  भी जाऊ यह लगता है तेरी महफ़िल है | "




मेरा पहला कमेन्ट 




संजय भास्कर said...
समर्पण के साथ लिखी सुन्दर गजल के लिए बधाई!
नये साल की मुबारकवाद कुबूल करें!




मेरे  लिए  लिखी विशाल...दिल की कलम से  ने पहली कविता   


आदरणीय  दर्शन कौर धनोए जी के नाम..


(वैसे तो दर्शन जी कहती हैं कि अध्यात्मिक चिंतन उनके एक किलोमीटर ऊपर से गुजर जाता है. लेकिन लगता है रब उनके आस पास ही है.उनके सरल हृदय को सलाम......)


जग चलता उलटा उलटा जी ,
हम चलते सीधा सीधा जी,
हमें सीधे  चलते रब मिलता 
जग कहता सीधा सीधा जी.

जग रहता ऊंचा ऊंचा जी,
हम रहते नीचा नीचा जी,
हमें नीचे रहते रब मिलता 
जग कहता नीचा नीचा जी.

जग ऊंचा ऊंचा बोले जी,
हम अपना मूंह न खोलें जी ,
हमें चुप रहने में रब मिलता 
जग गूंगा बहरा बोले जी,

हम बोले सच्चा सच्चा जी,
जग बोले झूठा झूठा जी,
हमें सच कहने में रब मिलता,
जग रहता हम से रूठा जी.

जग आगे आगे दौड़े जी,
हम पीछे को मूंह मोडें जी,
हमें पीछे रहते रब मिलता,
जग चाहे पीछे छोड़े जी.

हम ले लो ले लो कहते जी ,
जग दे दो दे दो कहता जी,
हमें देने में भी रब मिलता ,
जग पाकर खाली रहता जी.

जग बेचे मोल मुहब्बत को,
हम प्रेम खरीदें बढ़ बढ़ जी,
हमें लुट जाने में रब मिलता ,
जग पावे कंकर पत्थर जी.

                       जग कहता  तुझमें ख़म है जी                                    
हर वक्त क्यों हम हम है जी,
हमें हम कहने में रब मिलता,
क्यों हम में भी हमदम है जी.
       
" विशाल जो धर्मशाला रहते  हैं और आदर से मुझे बड़ी बहन कहते हैं...
  "
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मेरी पहली कविता परिकल्पना  पर छापी
 रश्मि प्रभा जी ने इस कविता को 'वटवृक्ष ' में भी स्थान दिया 


रशिम प्रभाजी 




इंतज़ार  


अपने घर की –
दहलीज पर बैठी – तेरा इन्तजार कर रही हूँ –
निर्मोही ,अब तो आजा — !

साँझ हो चली हैं, उजियारा सिमट रहा हैं ,
धुंधलका छाने लगा हैं,
रात का डरावना साया मुझ पर आने लगा हैं ,
चाँद निकल चूका हैं –
चांदनी बिखरी पड़ी हैं –
मेरी सारी सखियाँ जा चुकी हैं –
इस अँधेरे कमरे में मैं,
कब तक अकेले बैठू –?
निर्मोही,अब तो आजा — !

रात का सन्नाटा गहरा रहा हैं–
‘जागते रहो’ की मनहूस आवाज आ रही हैं …
अचानक…..!
अचानक ,पलड़े पर होती वो हल्की -सी आह्ट—
मैं चोंक उठती हूँ ” कहीं तू तो नहीं” ?
निशब्द….!
दबे कदमों से —
मैरा दरवाजे तक आना —
वहाँ तुझे न पाना —
दिल पर विराना -सा छा जाना –
फिर, अंखियो से यू सरिता का बहना —
मन डूब -डूब जाना —
निर्मोही, अब तो आजा — !

रात के सन्नाटे में वो झिन्ग्रुओ की आवाज –
कही……धीरे से बजती वो पायल की झंकार –
दूर……कहीं हंसी, यू ठहाके लगाना –
कहीं…..शहनाई के सुर —
मंगल गीतों का बजना–
अजब -सा मंजर —
गजब -सा विरोधाभास –
कहीं ख़ुशी ….कहीं मातम !!!
निर्मोही ,अब तो आजा —-!

तेरे बिन इस सूने जीवन में आस कौन बँधाए–?
दीया कौन जलाए —?
कौन प्यार करे –?
कौन प्यार जताए –?
कौन अपनी बांहों में मुझे सुलाए –?
मेरा दिल धबरा रहा है –
उन्मुन्दी आँखों में तेरे अक्स का आना –
गीली सतह पर तेरी सूरत का तैर जाना –
ख्यालो में धीरे -धीरे थपकियाँ देकर तेरा मुझे सुलाना –
आँखों में निंदियाँ का सरुर आ जाना –
निर्मोही,अब तो आजा —!!!

ये निंदियाँ – रानी मुझे सरपट दौड़ा रही हैं–
लगता है –
आखरी वक्त हैं …..?
आखरी सलाम ……?
निर्मोही, अब तो आजा —!!!


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"साहित्य प्रेमी संध " के काव्य संग्रह में  मेरी ५ कविताए छपी  हैं 


"टूटते सितारों की उड़ान "


संपादक --सत्यम शिवम् का हार्दिक धन्यवाद 



१. प्रेम दीवानी 


२. क्यों होते हैं ये धमाके 


३. गुलदान 


४. दिलकश चाँद 


५. मुझे मेरा प्यार लौटा दो 


मेरे समस्त दोस्तों को एक बार फिर से धन्यवाद देती हूँ 


"हम अपने रिश्तो को यादों से सजाएगे 
दूर रहकर भी आँखों में नज़र आएगे 
हम कोई वक्त नहीं जो बीत जाएगा 
जब भी करोगे याद चले आएगे ...!"



!! नव -वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए !!