मुझसे न पूछो कौन हूँ मै ?
मै हर क्षण बदलने वाला व्यक्तित्व हूँ
मेरा रूप हर क्षण बदलता रहता है --
कभी उजला -उजला -सा नाम हूँ तो ,
कभी सहमी हुई ,
डरी हुई, आवाज हूँ --
कभी महत्वहीन हूँ ,
कभी समर्पिता हूँ --
तो,कभी इशारों पर चलने वाली कठपुतली !
मेरे विविध रूप है --
कभी उबली हुई जलधारा हूँ---तो --
कभी ठंडी सहस्त्र धारा--
कभी मन की उथल -पुथल से विचलित हूँ ,तो
कभी भार ढ़ोने वाली काया !
कभी खनकते घुंघरू हूँ तो ,
कभी शांत पड़ी वीणा के तार,
कभी खिलोना हूँ खेलने वाला ,
कभी रुमाल हूँ हाथ पोछने वाला,

