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शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

जीवन डोर तुम्ही संग बाँधी ....


* शादी की सालगिरह *




16   दिसंबर 1979



शुभ विवाह 



आज मेरी शादी की 32वी सालगिरह हैं .......एक खूबसूरत दिन !


 फ़ैरो के समय हमारे यहाँ घुंघट का रिवाज था ..उन दिनों 




आन्नद -कारज का  द्रश्य


छोटा भाई ..फेरे करवाता हुआ 



मेरी सहेली रुकमा, भाई व् कजिन बहन 




शादी के बाद...ज़नवासे में 


इस ज्योति की तरह  हमेशा हमारा जीवन जगमगाता रहे 




" जीवन  डोर तुम्ही संग बाँधी  "


जीवन के अंतिम चरणों तक जो साथ हमारा निभाता हैं--
जीवन -साथी वही कहलाता हैं !
जीवन साथी वही कहलाता हैं !
जीबन की नैया को जो पार लगता हैं --
जीवन साथी वही कहलाता हैं !
जीवन साथी वही कहलाता हैं !
जब -जब मुझ पर दुःख आया तो ,
तुमने मेरा साथ दिया ,
हर मुश्किल आसान कर दी ,
जीवन को गुलज़ार किया ---!

सात जन्मो के इस रिश्ते को ,
साजन तुमने नाम दिया !
मेरी हर अनदेखी गलती को .
प्रीतम तुमने मान दिया ---!

रानी मुझको बनाकर अपनी ,
ममता का सौभाग्य दिया --!
हर पल मेरे तन के सुख पर,
अपना जीवन तार दिया --!

मुझसे शुरू होती हैं उनके जीवन की हर खुशियाँ !
मुझ पर ही ख़त्म होती हैं उनकी इच्छा और रंगीनियाँ !
ऐसे जीवन साथी को रब ने मुझ पर वार दिया --!

दुनियां की हर रस्म निभाकर ,
जब उनसे नाता जोड़ा था ,
क्या पता था जीवन के इस अग्नि -पथ पर  --
संग -संग चलना मुश्किल होगा ,
अंगारों से भरी जमीं होगी ,
और झुलसता आसमान  होगा,
पर, तुम्हारे साथ ने प्रियतम हर मुश्किल को आसान किया --!





अंतिम इच्छा हैं रब से --- 
उनका हरदम साथ मिले ...
हर जन्म में वो ही हो वर मेरे 
ऐसा मुझको वरदान मिले ......!





इस मधुर बेला पर मेरे समस्त दोस्त आमंत्रित हैं ....दर्शन कौर