मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

विवाह !




विवाह से पूर्व ---
मैने एक सपनों का ,
शाल बुना था ---
जिसमे मेरी भावनाएं ---
मेरी तमन्नाएं ---
गुंथी हुई थी ---
लेकिन ---जल्दी में ,
मैने उस शाल का ,
अंतिम छोर ----
एक ' गलत ' हाथो में थमा दिया ---|
जिसके नासमझ  हाथो ने ,
उस अंतिम छोर को ,
उधेड़ कर ,सम्पूर्ण शाल को ,
उलछे हुए धागों में ,
तबदील कर दिया ---
शाल से मिलने वाला गर्म ताप ,
मुझे कताई न मिलता ---
पर उसे अस्वीकार कर ,
उधेडा तो नही गया होता ---?