मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

प्यार की विडंबना


उसको प्यार है अपने प्यार से ! 
मुझको प्यार है अपने प्यार से !
न वो भूल सकता है अपने प्यार को! 
न मैँ छोड़ सकती हूँ अपने प्यार को !
अजीब विडम्बना है !

फिर क्या समानता है;
हम दोनों के प्यार में ? 
यही की ___ 
" हम दोनों का प्यार पर विश्वास है" ?
"हम दोनों का प्यार अटूट है "?
या __?
"हम दोनों ने प्यार के नाम पर धोखा खाया है" ?
प्यार! 
धोखा !!
प्यार !!!
धोखा!!!!
दो अलग -अलग नाम! 
पर एक दूसरे के पूरक !

"क्या हम दोनों को अपने -अपने  प्यार को परखना चाहिए "?
या__ 
जलने दे अपने - अपने 'दम्भ' को प्यार की चिता पर....
या__ 
किनारा कर ले और तौलने दे समय को प्यार की कसौटी पर....🙄

आगाज़ यही है; अंजाम खुदा जाने ....😍

---दर्शन के दिल से

शुक्रवार, 22 जनवरी 2021

कर्नाटक डायरी#16


#कर्नाटक-डायरी
#मैसूर -यात्रा
#श्री रंगपट्टनम
#भाग=16
#30 मार्च 2018

3 दिन आराम करके हम शनिवार की सुबह नाश्ता कर के निकल पड़े टीपू सुल्तान की राजधानी---
 "श्री रंगपट्टनम"
मैसूर से महज 22 किलोमीटर दूर है श्री रंगपट्टन । श्रीरंगपटनम पड़ोसी जिले मांड्या में स्थित है । पूरा शहर कावेरी नदी से घिरा हुआ है।

द्वीप शहर श्रीरंगपट्टनम के स्मारकों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया गया है।

श्री रंगपट्टनमस्वामी मन्दिर:--
इस शहर का नाम रंगनाथ स्वामी के नाम  के कारण ही श्री रंगपट्टनम  प्रसिध्द हुआ । वैष्णव सम्प्रदाय का ये मन्दिर श्रीरंगपट्टनम दक्षिण भारत का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल कहलाता हैं। ये मन्दिर भगवान विष्णु को समर्पित हैं।यहां काले पत्थर से निर्मित भगवान विष्णु की लेटी हुई प्रतिमा अपने आपमें बहुत ही खूबसूरत दिखती हैं।

मन्दिर के पीछे कावेरी नदी में गोल टोकरी में नदी का लुत्फ उठाया जा सकता हैं।

आधे घण्टे में हमारी कार मन्दिर के पास आकर रुकी...मन्दिर बाहर से ऊंची दीवार से ढंका हुआ था। देखने पर काफी पुराना लग रहा था लेकिंन वहां सफेदी हो रही थी,। बाहर तुलसी की बड़ी बड़ी ओर मोटी मोटी मालाएं मिल रही थी, भगवान विष्णु के मंदिरों की ये खासियत होती हैं कि यहां तुलसी की बहुत सुंदर मालाएं मिलती हैं।

मैंने बद्रीनाथ मन्दिर में भी ऐसी मोटी मोटी माला देखी थी।

मैंने भी एक सुंदर माला ली और अंदर प्रवेश किया।यहां मोबाइल अलाऊ नही था इसलिए मैंने बड़ी चालाकी से बाहर के कुछ फोटू खिंचे।
अंदर काफी बड़ी लाइन थी ,पूरा मन्दिर पत्थरों से बना हुआ था।अंदर जाकर देखा तो कुछ दिखाई नही दिया फिर पुजारी जी ने एक कोने में जाने का बोला,मैंने कोने से अंदर झांका तो भगवान विष्णु की अध लेटी मुद्रा में जिस प्रतिमा को देखा उसको देखती ही रह गई.. काले चमकीले पत्थर की मूर्ति पर सोने के आभूषण काफी खूबसूरत नजर आ रहे थे ऐसा लगता था मानो भगवान स्वयं अभी करवट बदलकर उठकर बैठ जायेगे....इतनी सजीव मूर्ति मैंने मेरी जिंदगी में आज से पहले कभी  नही देखी थी...
मैंने बगैर पलकें झपकाये एकटक उस मूर्ति के मोहजाल में खुद को समर्पित कर दिया।

कुछ देर बाद जब तंद्रा टूटी तो खुद को मदहोश पाया और ऐसी ही अवस्था में मन्दिर से बाहर आ गई ,मन्दिर से बाहर  तो आ गई लेकिन ऐसा लग रहा था मानो कुछ खो गया हो।
मिस्टर को भी ये मूर्ति कुछ स्वपलीन सी लगी।

 खुद को समर्पित होना किसी के मोहजाल में ओर वो भी भगवान के मोहजाल में किसको बुरा लगेगा लेकिन इस मंदिर की ये खासियत हैं कि ये मन्दिर सबको लुभावना लगेगा।

न चाहते हुए भी हम मन्दिर से निकल पड़े,ओर इसी चक्कर में कावेरी नदी और टोकरी का सफर एकदम भूल गए😀

टोकरी में घूमने का सफर किसी ओर वक्त करने का सोचकर हम चल दिये अपने अगके पड़ाव पर जो था टीपू का समर महल और दरिया-दौलत बाग।
क्रमशः...