मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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रविवार, 15 मई 2011

!! इक लम्हे का प्यार !!



!! इक लम्हे का प्यार !!






इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी संवार दी मेरी ?
इक लम्हे में उन्होंने जिन्दगी उजाड़ दी मेरी ?


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कसूर उनका नही मेरा था --
जो उन दो लम्हों को जिन्दगी मान बैठी  
चोट खा बैठी  
क्यों कर उन दो लम्हों में जिन्दगी गुजार दी मैने
प्यार आ जाता है आखो में रोने से पहले 
हर खवाब टूट जाता है सोने से पहले 
इश्क है गुनाह यह तो समझ गए हम 
काश, की कोई रोक लेता यह गुनाह करने से पहले !




       


हम ख़ाक जमी की होकर 
उस चाँद की हसरत कर बैठे 
थी,चीज वो सबसे ऊँची 
जिससे मुहब्बत कर बैठे 
दामन में हम फकीरों के 
कुछ खार इक्कठे कर बैठे 
काश, की कोई रोक लेता दामन भिगोने से पहले !







कितना समझाया इस  नादां दिल को लेकिन --
तेरी चाहत मेरी जिन्दगी की कमजोरी बन गई 
तू हर पल मेरे दिल के बहुत पास रहता है
ये दूरियाँ मेरे प्यार की रुसवाई  बन गई 
तेरे बिन जिन्दगी मुझे खलती है यारब !
अब तो जेसे गुजरी गुजार दी यारब !
अब जीने का कोई सबब  नही रहा  यारब  !  
मोंत खुद हेरान है ,जिन्दगी ठगी -सी लगती है 
काश की कोई रोक लेता तुझ संग दिल लगाने से पहले 
  







इक लम्हा गुजारा था मैने तेरे आगोश में 
हर पल तेरे वजूद को सजोया था अपने दामन मै 
भोर हुई ,कलिया मसल मुंह फेर चल दिए 
सुनी मांग ! सुनी चाहत ! सुनी राहगुजर
हम ठगे से बैठे रहे ,उनके कदमो की चाप सुनते रहे 
दूर होती गई वो आहटे ! वो खुशियाँ ! वो चाहते  
मेरा आंचल सूना ही रह गया उनके जाने से पहले 
काश ,की कोई रोक लेता उनमे समाने से पहले !!!