जीत की ऐसी खुमारी छाई
मार्च में फिर से लोटकर दिवाली आई
ऐसी दिवाली आई --
लोग ढोलक ,मज्जी लेकर निकले ,
बरसों बाद भारत में एकता के बादल गरजे
सन ४७ के बाद ऐसे दिन आए ,
हाथो में झंडा ले बाल -गोपाल चिल्लाए !
छोड़ेगे नही आज दुश्मन घर आए ,
पताका अपना फहराना है ,
चाहे मुम्बई चाहे लाहोर तक जाए !
(पापियों का, भगवान् सचिन को दण्डवत प्रणाम )
( माई -बाप ~~बचालो ! )
(चल भाग ~~~)
(आशीर्वाद ले बच्चे --हारने का ? )
(हुड ---दबंग---दबंग --दबंग ---)
(ले जाएगे --ले जाएगे दिल वाले दुल्हनिया --)






