मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

# डलहोजी से खजियार # ( 3 )



    (होटल के अन्दर से लिया गया चित्र )


 13  जुलाई 2010


  सुबह ७ बजे ही नींद खुल गई --होटल से ही नाश्ता मंगवाया --सब तैयार हो  रहे थे --मैने अपनी कुछ तस्वीरे निकाली--आखिर होटल की भी तो याददास्त होनी चाहिए--मोहन भी  आ गया था हमने चेक-आउट किया और चले अपने सफर पर गुनगुनाते हुए--डलहोजी की सुंदर तस्वीर आँखों में लिए हुए..

( और यह मेरा चित्र ..होटल के अंदर से )

(
(जाते-जाते मालरोड का एक और चित्र ) 


जाते समय एक बार फिर मालरोड आए --सुबह का नजारा देखने पर दिन में खास भीड़ नही थी --बच्चो को कुछ खरीदना भी था--मोहन का धर नजदीक ही था वो हमे अपना धर दिखने ले गया --उसे कुछ कपडे भी लेने थे--उसका   धर देखकर हमारी आँखे खुली रह गई --आप भी देखिए --   


( मोहन का घर साईट में हमारी कार  ) 


    और अब हम जा रहे हे शहीद सरदार  भगतसिंह के चाचा शहीद अजित सिंह की समाधी देखने 'पंचकुला' में --स्वतंत्रता सेनानी शहीद अजीतसिंह को कौन  नही जानता --अपने देश के लिए उन्होंने कई आन्दोलन किए --अपना सारा जीवन आजादी की लड़ाई में वार दिया --उन्ही के नक्शे -कदम पर उनका भतीजा शहीद भगतसिंह चले --अपने जीवन का आखरी वक्त उन्होंने डलहोजी मे ही गुजारा --आजादी के एक दिन पहले उन्होंने आखरी साँस ली थी --जहाँ उनकी  समाधी हैं  वहां  ५  पुल बने हैं ...यहाँ का पानी पिने से कई बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं  --ऐसी  स्थानीय मान्यता हैं  ---    

( शहीद सरदार अजितसिंह का स्मारक ) 



(उनकी  अंतिम- स्थली )




( रास्ते का द्रश्य )

(रास्ते की मन मोहक द्रस्यावली )    

और अब खजियार की और -डलहोजी से मात्र आध एक घंटे का सफर ---


    
 खजियार का रास्ता बेहद रमणीय हे ऊँचे - ऊँचे परवत ,लम्बे देवदार और चीड के पेड़, नीची घाटियाँ और लहरदार घाटियों पे आलू की खेती ! आलू के फूलो से सारी घाटी बहुत सुन्दर दिखाई दे रही थी --इन आलुओ को 'पहाड़ी -आलू 'कहते हे -- सारी घाटी पे बादल ऐसे धूम रहे थे मानो 'घाटी की रक्षा कर रहे हो ---   


                           
(पर्वत पे बादलो का पहरा )


(दूर sss आलुओ की खेती और हम )

( भाई--क्या मंज़र हैं   )




मैं और मेरी फेमिली 



(वापस खजियार की और)    


 पहाड़ी रास्तो से हमारी गाडी दोड़ी जा रही थी -- मोहन नोजवान ड्रायवर हे  ,यहाँ के पब्लिक स्कुल में पढ़ा -लिखा हे --यही का निवासी हे ,उसके पास  ३ कारे हे -जिससे उसकी आजीविका चलती हे -- सिर्फ सीजन में ही कमाई होती हे बाकी टाइम फालतू निकलता हे--सीजन में वो अपना घर भी किराए    से दे देता हे --जिसके वो 12 हजार रोज के वसूल करता हे ---
जारी ---