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मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

मेरा जनम -दिवस ......आभार ..





मेरा जनम -दिवस 
२८ march




मेरे जन्म दिन पर आप सभी दोस्तों का मैं आभार प्रकट करती हूँ ----इस दिवस को आप सबने अपने प्यार से यादगार बना दिया ..आपके स - स्नेह का तहे दिल से शुक्रियां अदा करती हूँ  --यह प्यार हमेशा बनाए रखना यही इल्तजा करती हूँ :-----








मेरे सभी मित्र जन ने अपने -अपने अंदाज में मुझे तौहफे प्रदान किए  ..जो मेरे लिए बेहद मूल्यवान हैं सबसे पहले मेरे परम  मित्र ललित शर्मा की एक सुंदर रचना के साथ शुरुवात करती हूँ :--







ललित शर्मा 


दर्शनजी ,तुहानू जनम दिन की लख -लख वधाईया  होवे 


तुम्हें खुशियाँ मिले अपार 
दुआओं का कोष रहे अपार 
जीवन में कभी दुःख न हो 
हर्ष -उल्हास मिले विशेष ---!


जनम -दिन पर तुम्हारे मैं 
करता हूँ मैं रब्ब  से अरदास 
आनन्द से भरा जीवन हो 
धन -धान्य  रहे नित पास ---!


खिलंदड - बालपन तुम्हारा 
मुझको बहुत भाता हैं 
यु लगता हैं जैसे कोई 
पिछले जनम का नाता हैं ---!


विपुल स्नेह तुम्हारा मित्र 
बरसता रहता हैं निस-दिन
यु ही चलता रहे जीवन 
कष्ट न आए पल- छीन --!


जनम -दिवस स्वीकार  करो  
यह अक्षर -बंधन का उपहार 
शब्द -शब्द से स्वीकार करो 
मेरी शुभकामनाए अपार ......
...............ललित शर्मा ! 


  
    


ललितजी  का प्यार व् आदर पा निहाल हो गई मैं ..आभार  !   


**************



हरी शर्मा 

बाँध दू चाँद .....
आँचल के इक छोर में ...
मांग भर दूँ तुम्हारी सितारों से मैं ...
क्या समर्पित करू जनम दिन पर तुम्हें ...
पूछता फिर रहा हूँ बहारो से मैं ...


गूँथ दू वेणी में पुष्प मधुमास के ..
और उनको ह्दय की अमर गंध दूँ ..
स्याह भादों भरी ,रात जैसी सजल ,
आँख को मैं अमावस  का अनुबंध दूँ ..
पतली भू -रेखा की फिर करूँ अर्चना ..
प्रीती  के मद भरे कुछ इशारों से मैं ..
बाँध दूँ चाँद, आँचल के इक छोर में ...
मांग भर दूँ तुम्हारी सितारों से मैं ......!


पंखुड़ी से अधर द्वय तनिक चूमकर ..
रंग दूँ उन्हें सांध्य आकाश का ..
फिर सजा दूँ अधर के निकट एक तिल ..
माह ज्यों वर्ष के  माश्या मधुमास का ..
चुम्बनों की प्रवाहित करूँ फिर नदी ..
करके विद्रोह मन के किनारों से मैं ..
बाँध दूँ चाँद, आँचल के इक छोर मैं ...
मांग भर दूँ तुम्हारी सितारों से मैं .....!!!
..................(डॉ. कुमार विश्वास)  








आभार हरीजी  आपके स -स्नेह का दोस्त ..


************



अल्ज़िरा लोबो

जनम दिन की अनेको शुभकामनाए

"दिए जलाए प्यार के चलो इसी ख़ुशी में ..
बरस बिता के आई हैं ये शाम जिन्दगी में .."



थंक्स जानी 

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गिरिराज किशोर शर्मा 

प्रिय मित्र दर्शन कौर जी ,,,जनम दिन की आपको बधाई :)

"तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हें तोहफे  मैं क्या भेजू ,
सोना भेजू ,चांदी भेजू ,या फिर प्यार स्नेह भेजू ,


कोई बहुत कीमती वस्तु तोहफे के लिए तो बताना ,
जो खुद कोहनूर का हिरा हो उसे क्या हिरा भेजू ...!"


आभार गिरिराजजी 




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विनोद शर्मा 


हर लम्हां आपके होठों पर मुस्कान रहे ..
हर गम से आप अनजान रहे ...
जिसके साथ महक उठे आपकी जिन्दगी ...
हमेशा आपके पास वो इंसान रहे ..





आभार दोस्त विनोद 

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संजय विजावत  
जनम-दिन का केक  
********आपके लिए !


आभर संजय 

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राज भाटिया जी  

दर्शंकौर जी जन्मदिन की बधाई हो आपको 





सा-स्नेह आभार राजजी 

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पुष्प सिंधल  
जन्मदिन की बहुत -बहुत बधाई हो दीदी 







आभार पुष्प ...स्नेह बनाए रखना 

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थंक्स वाजिदा बच्चे ..माय परी 
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इसके साथ उन सभी दोस्तों का तहे दिल से धन्यवाद करती  हूँ ..जिन्होंने इस दिन को खास बनाया 







अरुण शर्मा मेरे मित्र

जिन्होंने सबसे पहले ठीक १२ बजे मुझे मुबारक बात फोन द्वारा दी ...आभार दोस्त !

ऋषि धनोय , तजेंदर सिंह लाम्बा,रशिम प्रभा,मुज्जफर अली.मुकेश कुमार सिन्हा,आशुतोष वर्मा, 'आशु' चंदर भूषण मिश्रा 'गाफिल' ,तरनप्रीतसिंहं,किरण गुलाठी,संजय गर्ग ,पारसनाथ उपाध्याय,रंजीतसिंह शेखो,संजय कुमार खेर, सुनीता शर्मा, अतुल गर्ग, गिरीश पंकज, हरदीपसिंह, विवेककुमार तिवारी, प्रीती,कैलाश शर्मा, मनीष कुमार, रिया अग्रवाल, शिखा वैसाने,अनिल मेथा,नीरज तनेजा, सीता आर्या, शाहनवाज़,सत्यम शिवम्,रमेश शर्मा, रोहितकुमार मीत,राजीव कुमार, रोशी अग्रवाल, उषा राठोर, समीर लाल, निधि शाह, सिम्पी,बंसी चोहान, अनीता कपूर, कविता विकाश,पियूष यश्वान्तानी,आशा पांडे ओझा, आरती शर्मा, कुमार कुश्मेश, काजल कुमार, संजीव तिवारी, हरनीत, आस्था, नेहा शाह,रामान्जय शर्मा,उमा शर्मा,सुनील खत्री, अनीता सिंह, नीलकमल वैष्णव 'अनिश' प्रभा जोशी, स्वैसिंह सवाई सिंह राजपूत, अशोक अरोरा, अंजू चोधरी,  पाबला साहेब, डॉ. रूपचंदशास्त्रीजी,और राजीव तनेजा.... 
(अ गर कोई छुट गया हो तो माफ़ी चाहती हूँ )    
                  

आखिर मैं सबकी प्यारी दादी गुड्डो 






* दादी का आशीर्वाद *


शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

जन्मदिन......



 मेरी छोटी बेटी निक्की का जन्मदिन 


 अपने पापा की गोद में निक्की 




(पहला जन्म दिन निक्की का )
( 4 अगस्त 1990 )

पंजाबी में निक्की का मतलब होता हें--'छोटा '--हर पंजाबी घरो में एक निककी  या एक निक्कू मिल जाएँगे--
निक्की का 21 वा  जनम दिन हैं ---हमारे पुरे खानदान में वो बहुत लाडली हैं ..पर मुझे याद आ रहा हैं वो दिन जब निक्की इस धरा पर जन्मी भी नही थी ....???

मैं तीसरे बच्चे के एकदम खिलाफ थी --मेरा पूरा परिवार बन चूका था --इसे मैं किसी भी हालत  में नहीं चाहती थी   ..मैने बहुत कोशिश की पर सफल नही हुई --वो कहते है न --'जाको राखे साईयाँ ,मार सके न कोई '--ठीक यही  हाल निक्की के साथ भी हुआ ---???

उसके जनम की मुझे कोई ख़ुशी नहीं हुई --यहाँ तक की मैने उसकी शक्ल भी नही देखी !अपना मुंह फेर लिया .. डॉ ने बहुत  कहाँ की आप एक नन्ही बेटी की माँ बनी हैं ...पर मुझे अच्छा ही नही लग रहा था ...     
लेकिन ,२दिन बाद एक अजब वाकिया हुआ ..जिसने मेरा मन ही बदल दिया ----   

२दिन बाद ----मैं निक्की को लेकर घर आ गई --दिल में कोई ख़ुशी नही थी --मन थोडा उदास था --पर पतिदेव बहुत खुश थे--उनको वैसे भी लडकियों से जरा ज्यादा ही लगाव हैं ..... 

रात को करीब १० बजे निक्की की साँसे उखड़ने लगी --नब्ज बहुत स्लो चल रही थी--हम घबरा गए --तुरंत उसे नर्सिग होम  डॉ के पास लेकर गए --डॉ ने चेक किया और कहा --'आपने इसे कुछ खिला दिया हैं --आप इसे नही चाहती थी न ' ??? मैं  हैरान रह गई --बात तो ठीक थी पर, मैने उसे कुछ नही खिलाया था सिर्फ शहद चटाया था ?मैने उससे  कहा --पर वो मानने  वाली नही थी --  बोली -- 'पुलिस कम्प्लेंट  तो करवानी पड़ेगी हम कुछ नही कर सकते ...'  


 मैने बहुत कहा-पहचान वाली डॉ थी, थोडा पसीजी ! बोली-- 'आप इसे बाम्बे ले जाए बच्चो के सरकारी  हास्पिटल  में ,यहाँ हम कुछ नही कर सकते--मैं चिठ्ठी लिख देती हूँ  ...!' हालाकि मैं  बहुत डर गई थी  और इसी कारण मैने उसे यह नहीं बताया की मैने उसे थोड़ी सी अफीम भी चटाई हैं --हमारे यहाँ रिवाज है की बच्चे को थोड़ी सी अफीम भी चटाते हैं ताकि वो आराम से सो सके और पेट की गंदगी भी निकल सके ...शायद मैने नासमझी में थोडा -सा डोज ज्यादा दे दिया होगा ....

खेर, रात ३ बजे हम वसई से टेक्सी कर ग्रांड रोड स्थित वाडिया हास्पिटल चल पड़े --हमे २ घंटे लग जाना था ....रास्ते भर  उस नन्ही सी जान पर बहुत तरस आता रहा..मेरा हाथ उसकी नब्ज पर ही था और मैं अपने आप को कोस  रही थी की मेरी वजय से इस नन्ही -सी जान पर यह कयामत टूटी हैं ..मैं मन ही मन   भगवान् से अपने किए की माफ़ी मांग रही थी ..मेरी मनहूस इच्छा ये मासूम बच्चा भुगत रहा था --डॉ को तो समझ आ गया था की कुछ खिलाया जरुर हैं ? पर मैं उसे बतला नही सकती थी..? मैं खुद डर गई थी ..उपर से २दिन की जच्चा !  बहुत कमजोरी महसूस कर रही थी ..लेंकिन अपनी कमजोरी को नजरंदाज कर मैं निक्की के प्राणों की भीख मांग रही थी ...माँ की ममता की आखिर जीत हुई .....


हम वाडिया हास्पिटल पहुंचे तब तक सुबह हो चुकी थी ..वो काली अमावस्या की रात बीत चुकी थी ---निक्की भी अब नार्मल साँसे ले रही थी ---शायद अफीम का असर खत्म हो चूका था --हमने OPD में दिखाया तो डॉ बोला यह नार्मल हैं --?आप घर जा सकते हैं ...

 मेरा ख़ुशी का ठिकाना नहीं था ..आँखों में ख़ुशी के आंसू थे --हम वापस घर चल पड़े ...
भगवान् ने मुझे एक करार झटका दिया था ?

मेरी  उसी बेटी का आज जनम दिन हैं ...निक्की बहुत समझदार और हुशियार लडकी हैं ...हमारे घर की रौनक और सबकी चाहती हैं  ...
   
"आज उसको एक कविता रूपी भेट देना चाहती हूँ "









" एक अजन्मी बेटी की इल्तजा "

ओ माँ मेरी !मुझे कोख मैं न मार 
मुझे देखने दे यह प्यारा संसार 
तेरी गोद में मुझ को रहने दे 
कुछ पल मुझे और जीने दे 
ओ माँ मेरी ..
मुझे तुझ से कुछ और नही लेना हैं 
बेटी होने का अधिकार मुझको देना हैं 
क्यों तू मेरा गला घोट रही हैं
ओ माँ मेरी . ..
तू भी तो एक माँ की जननी हैं 
देखने यह संसार आई हैं 
फिर क्यों मेरा वजूद मिटाने चली है
ओ माँ मेरी ...
मुझे मारकर तुझे क्या मिलेगा !
बेटियां तो होती हैं घर का गहना ! 
 ओ माँ मेरी ...
मारकर मुझ को तू क्या करेगी 
यह दंड तू सारे जनम भरेगी 
इस निठुर समाज के लिए 
तू मुझे यू न उजाड़ 
ओ माँ मेरी ...
अपनी कोख को तू कब्रस्तान न बना 
मुझे इस कब्र में जिन्दा न दफना 
सुन ले मेरी चीख -पुकार 
ओ माँ मेरी ...
यह कैसा समाज है माँ !
यह कैसा रिवाज है माँ !
पुत्र जन्मे तो चाँद चढ़ जाए 
पुत्री जन्मे तो अधियारा घिर आए 
यह कैसा इन्साफ हैं माँ ?
यह कैसा समाज है माँ ?
तू इन कसाइयो में क्यों मिल गई 
ओ माँ मेरी ..
कर ले मेरी मौत से तोबा !
मैरी जिंदगी से गर्व तुझे होगा !!
ओ माँ मेरी ...




पुत्रियों को न मारो करो इस बात से तोबा !
क्योकि यह होती हैं हमारे घर की शोभा !!
   


रविवार, 10 अप्रैल 2011

जन्म-दिन मुबारक हो !

* * * अतुल  * * *





                                     
आज अतुल का जन्म -दिन है --अतुल वही है जो 'नीरजजाट ' के साथ  'अल्मोड़ा ' गया था ! जिसे वो प्यार से 'खाग्गड़ ' या  ' धेले का इंसान नही कहता है '--मै उससे नही मिली हूँ --पर वह हमेशा मुझे फोन करता है आपनी यात्रा के अनुभव सुनाता है -- अतुल बड़ा प्यारा बच्चा है --बहुत होनहार है-- बडो की इज्जत करना जानता है --पढाई के साथ -साथ नोकरी भी करता है --सोनीपत्  में अकेला रहता है -खाना  भी खुद ही बनाता हे --मेरी तरह उसे भी पहाडो पर घुमना अच्छा लगता है --वो गंगोत्री अकेला ही घूमकर आया है --अब ,उसे हेमकुंड साहेब और अमरनाथ जाना है --साथी तलाश कर रहा है ---उसे काला रंग बहुत पसंद है --पर उसका दिल एकदम सफेद है --ऐश उसकी पसन्द की हिरोइन है --उसकी हार्दिक इच्छा थी की मै उसको जन्म -दिन (10 अप्रेल ) का कोई नायब तोहफा दू  --अब एक लिखने वाला और क्या दे सकता है --मेरी दुआऐ और तोहफा इस प्रकार है :--





                             अतुल आपको ढेरो शुभकामनाए ईश्वर आपकी सभी मनोकामनाए पूरी करे  :--



जनम दिवस् पर तुम्हारे हमेशा बहार रहे !
    खुशियों से तुम्हारा घर -आँगन महकता रहे !
तुम यू ही हँसते -रहो मुस्कुराते रहो !
 उन्नति की सीढियां लगातार चड़ते रहो !
सफलता तुम्हारे पग चूमे ,
जिन्दगी की अनेक ने'मते तुम्हे मिले  !
कोई गम तुम्हारे पास न आए ,
खुशिया तुम्हारा घर ढूंढे ,
सूरज की किरणों से सोना बरसे,
चाँद की चांदनी तुम्हारा अंगना महकाए ! 
तुम्हारा दिल हमेशा प्यार से लबरेज रहे !  
यह दिन तुम्हारे जीवन में बार -बार आए !
मेरी शुभ कामना हमेशा हमारा साथ रहे !    


या sssssमी  


(अतुल यह तुम्हारे लिए )


( और यह भी ~~मुंह  में पानी आ रहां है न ? )


(और ये सबके लिऐ )



(नमकीन भी हाजिर है ~~~~)


आप सब अतुल के जन्म -दिन पर आमंत्रित है --सेवा का मोका दे--दर्शन!