मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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गुरुवार, 24 मई 2012

नैनीताल ..भाग 2




नैनीताल की नैनी झील 





रात को 11बजे के बाद  अजमेर -रानीखेत गाडी प्लेटफार्म पर आई ...पूरी तरह खचाखच भरी थी ,यहाँ हमें कूपा नसीब नहीं हुआ ...3 महीने पहले कराई रिजर्वेशन पर पानी फिर गया और हम अपने C T I  पतिदेव को शक की नजरो से देखने लगे...कोई एडजस्ट भी करने वाला नहीं था ,,भला कोई हमारे लिए क्यों कूपा खाली करता ..कोई हम रेल्वे मिनिस्टर के रिश्तेदार तो थे नहीं ? खेर ,रात का सफ़र हैं और सोना ही तो हैं यह सोचकर दिल को पतिदेव ने तसल्ली दी और अपनी साइड की अपर और लोअर सीट से ही काम चला लिया ..अब हरदीप के खाने की याद आई जो बड़ी -सी टोकरी में कुछ दे गया था ....चारो अलग -अलग सीट  थी फिर भी दो पर हम और दो पर जेस और निक्की बैठ गए ..खाना बहुत बढ़िया था और बहुत ज्यादा था ,कम से -कम दो आदमी और खा सकते थे ..साथ में आम भी थे पर उन्हें खाने का टाईम नहीं था, सो रख लिए बाद में खाएगे  ....रात को बेटे (सन्नी ) से बात की  वो हमारे साथ नहीं आया था आखिर एक बन्दा घर की रखवाली के  लिए भी तो होना चाहिए ....चोरो का क्या भरोसा इधर हम घुमने जाए उधर वो माल पर हाथ घुमा दे ..हा हा हा हा फिर हमारा  डागी शेडो भी हैं ...उसका ख्याल रखना हमारा परम कर्तब्य हें ....


रात आराम से गुजर गई ..सुबह अचानक जहाँ गाडी खड़ी थी  वो था हल्दानी स्टेशन ! काफी लोग उतर गए थे ..एक वेटर से पूछा की हम भी यही उतर जाए तो वो बोला की आपको नैनीताल जाना हैं तो काठगोदाम  में ही उतरना ...10 मिनट बाद ही काठ गोदाम स्टेशन आ गया ..





सुबह काठगोदाम स्टेशन आते ही मधुमक्खी की तरह टेक्सी वाले चिपक गए .'नैनीताल का कितना लोगे ' मैनें एक से पूछा ! 650 रु, जवाब था पर मैं भी  पक्की बम्बईया थी बगैर मोल -भाव के कोई काम नहीं करती हूँ ..तुरंत कमलेश ने जो नंबर दिया था अपने दोस्त 'शेलेंद्र' का उससे बात की उसने कहा की 400 रु. में  ले जाएगा मैंनें टैक्सी वाले को 400 रु कहा .. थोड़ी न -नुकर के बाद वो तैयार हो गया -- नाम विक्की था .. चाप्टर  लग रहा था ..सीधा तो वो बिलकुल भी नहीं था .. आजकल पहाड़ पर वो शांत और शर्माने वाले पहाड़ी कहाँ रह गए हैं ..वो भोली मुस्कान वो भोलापन अब यहाँ देखने को नहीं मिलता ? चारों और लूट -ख्सोट यहाँ भी अपने पैर जमा चुकी हैं .. बाद में उसने बताया की क्या करे मेडम, बस यही सीजन में ही हमारी कमाई होती हैं बाकी  महीने  तो हमें बैठकर ही खाना होता हैं  ..मुझे भी लगा की बंदा सच कह रहा हैं .. हम शहर के लोग तो बारह महीने काम करते हैं ..खेर......

 हम चल पड़े उसकी इंडिका कार में आरामदायिक सफ़र पर ...रास्ते की द्रस्यावाली  मन मोह रही थी ..ठंडी -ठंडी  हवाए दिल चुरा रही थी ...गुलाब के ढेरों पोधें चटक लाल रंग के बड़े -बड़े खिले हुए गुलाबों से भरे पड़े थे  .कुछ बड़े पेड़ भी बेंगानी रंग के और आरेंज कलर के इस सुन्दरता में चार चाँद लगा रहे थे ....किस जात के थे पता नहीं ,पर लग बहुत सुंदर रहे थे .. कहीं -कहीं ऊँची -ऊँची पहाड़ियाँ थी तो कहीं गहरी खाइयाँ थी ...मन मयूर -सा नाच रहा था ...और दिल गाना गाने को बैचेन था ....

ये हंसी वादियाँ ये खुला आसमा ..
आ गए हम कहाँ ऐ मेरे साजना .. 

खुबसूरत  बेंगनी फूलों  का पेड 

यह बर्फ नहीं हैं ..सफेद पहाड़ हैं 


खुबसूरत आरेंज कलर के पेड़ 



खुबसूरत पुल ..दो पहाड़ियों को जोड़ता हुआ ..कितना दिलकश नजारा हैं 


हमारा कारवां बढता रहा 


रास्ते में रूककर हमने चाय पी ..15 रु की ऐक चाय ...बड़ी महगी हैं   

रास्ते में रुककर हमने चाय पी ...सुबह का माहौल खुशगवार था --एक चेरी वाला चेरी बेच रहा था 20 रु में एक दौना ..बच्चो ने भी ले लिया --पर यह क्या ? शुरू होते ही ख्त्म यानी हमें ही बेवकूफ बना दिया ..उपर से दौना  भरा हुआ लग रहा था ,हम बहुत खुश हुए ,पर जब हाथ में  गिनकर 6 चेरी भी नहीं आई तो हमारा बुरा हाल था  यह तो मुम्बई से भी महंगी निकली ... हम तो ठग गए भाई हा हा हा हा हा.....



चाय ख़तम करके हम चल दिए अपने नियत स्थान पर ..अभी नैनीताल दूर था .. रास्ते में विक्की ने बताया की कल यहाँ एक बस खाई में गिर गई थी ...ड्राइवर मर गया पर सवारी नहीं थी ..इसलिए ज्यादा नुक्सान नहीं हुआ ..सुनकर रोंगटे खड़े हो गए ..यह पहाड़ दिखने में जितने सुंदर हैं उतने ही भयानक भी ..


खाई में गिरी हुई बस


इस खोफनाक  मंजर के बाद ,सबकी बोलती बंद थी ,,सब चुपचाप चले जा रहे थे ..  गुनगुनाना बंद हो गया था ..जब भी कोई मोड़ आता मेरी  चींख निकल जाती ,मैं विक्की को आराम से चलने का बोल रही थी ,अभी सुबह का  टाईम था रास्ते के एक बोर्ड पर उसका ध्यान दिलाया जिसपर लिखा था ----

सावधानी हटी,,,,,दुर्धटना घटी 


रास्ते -भर विक्की अपनी लव -स्टोरी सुनाता रहा ..उसने लव -मेरिज की थी . ..लड़की भी नैनीताल की ही थी ..माँ  तैयार नहीं थी तो  दोनों भाग गए  और कुछ समय दिल्ली में गुजारे ..कहने लगा बड़े बुरे दिन थे ..पर अब माँ -बाप मान गए हैं मेरी बीवी को सबने स्वीकार कर लिय हैं वो एक स्कूल में टीचर हैं ...विक्की की लव -स्टोरी -सुनते सुनते कब  नैनीताल आ गया पता ही नहीं चला ..... 

हम आराम से नैनीताल पंहुच  गए ...कमलेश भट्ट ने जो होटल बुक किया  था होटल  जगती ! उसके रूम बहुत ही अच्छे  थे ..दो रूम  चार बेड और किराया सिर्फ 1500 रु....सामने ही नैनीझील इठलाती हुई हमें देख रही थी ..सिंपल होटल था वैसे 2000 भाड़ा था  पर हमें कंसेसन मिल गया था वैसे भी अभी यहाँ सीजन चालू नहीं हुआ था ..दिल्ली में छुटियाँ चालू नहीं हुई थी सो, अभी यहाँ सबकुछ सस्ता हैं ऐसा हमें उस होटल के मालिक ने कहा..कुछ भी हो जगह शानदार थी  दिल - बाग़ -बाग़ हो गया था ..काफी देर तक मैं उस झील को देखती रही ...कितनी सुन्दरता प्रकृति ने यहाँ रचा रखी हैं ..ऐसा लगता हैं मानो स्वप्नलोक मैं आ गए हो ....आप भी देखें ...क्या शमा हैं ----पर हम कितना प्रकृति को कैद कर पाएगे ????


 नैनीझील  


 नैनीझील  
  




 नैनीझील  


नैनीझील  


नैनीझील की सुन्दरता में मन खो -सा गया ....कमरे में आकर हम सब तैयार होने लगे ..10 बजे विक्की को नैनीताल की साईट दिखने को कहा था ..आने के टाईम विक्की ने साईट -सीन देखाने का प्रस्ताव रखा जिसे हमने मान लिया .. पहले तो वो 1300रु. मांग रहा था पर बाद  में 800 रु. में तैयार हो गया ..टोटल 9 पाइंट दिखाने की बात हुई ...बाद में पता चला की असल में 800 रु. ही होते हैं साईट सीन के ..खेर, और हम चल दिए नैनीताल व्यूह देखने .....आपको भी दिखाएगे पर अगले एपिसोड में ..तब तक के लिए अलविदा .....

9 व्यू पाइंट ऑफ़ नैनीताल :----

1. जल प्रपात !
2.खुरपा ताल !
3.लवर्स -पाइंट !
4.सुखा ताल !
5.हनुमानगढ़ी टेम्पल !
6.हिमालय दर्शन !
7.नैनीताल व्यू पाइंट !
8.केव गार्डन !
9. गवर्नर हाउस !

शेष जारी ----

बुधवार, 31 अगस्त 2011

गोल्डन टेम्पल अमृतसर भाग 2


गोल्डन टेम्पल भाग २


अमृतसर  





रात ९.३० बजे हमने (बेटा सन्नी और मैं ) बोरीवली से 'गोल्डन टेम्पल अमृतसर ' गाड़ी पकड़ी--! ता.7 को हम अमृतसर पहुंचे --रूम लिया और अब हम गुरूद्वारे में जाने को निकल पड़े ...   

गोल्डन टेम्पल अमृतसर  भाग १ पढने के लिए यहाँ क्लीक करे ..


आज सुबह जब हम अमृतसर पहुंचे नहीं थे ..तब अतुल का फोन आया ..वो अमृतसर पहुँच गया था ? अतुल वही है जो अल्मोड़ा 'नीरज जाट के साथ गया था...और जिसके 'जन्मदिन' पर मैने   एक कविता भी लिखी थी .....वो कल तक तो चम्बा में था ..आज अमृतसर  भी पहुँच गया ---मुझसे मिलने को ..? बहुत प्यारा बच्चा हैं ..हमेशा अकेला ही घूमता रहता हैं--और वहाँ की सारी जानकारी फोन पर देता रहता हैं....


(नीरज जाट और अतुल )


खेर,जब हम गुरुद्वारे पहुंचे तो  अतुल वही खड़ा मिला ..मुझे देखते ही पहचान गया--तुरंत मेरे पैरो पर झुक गया..बहुत ही अच्छा लड़का लगा ..सन्नी थोडा  अपसेट था ? पर अतुल के व्यवहार से कब दोनों दोस्त बन गए पता ही नहीं चला ... अतुल कुछ काम से चला गया --उसने दरबारसाहेब  में सुबह हाजिरी दे दी थी--शाम को बाधा -वार्डर लेंगे --हमने वादा किया  -

फिर  हम  गुरूद्वारे की और चल पड़े ...आज सन्डे होने के कारण बहुत भीड़ थी .. सबसे पहले सरोवर में सन्नी ने स्नान किया ...मैं कल करुँगी ...



(सरोवर में स्नान करते हुए सन्नी )

(जंजीर से पकड़कर स्नान...?  कही डूब न जाउ ? सन्नी को यही शंका सता रही हैं )




यह हैं "बेरी का पेड़ "वाली जगह --कहते हैं-- 'यहाँ जो भी स्नान करता हैं उसका चरम रोग ठीक हो जाता हैं ' इस स्थान की बहुत महत्ता हैं--यहाँ गुरुनानकदेवजी ने भी साधना की थी...






( यहाँ  हैं बाबा दीप सिंह जी का गुरुद्वारा ) 



यहाँ  हैं बाबा दीप सिंह जी के गुरुद्वारे के पास उनकी पट्टिका --" कहते हैं --जब आर्मी गोल्डन टेम्पल में धुसी थी.. तब यहाँ आकर टेंक फंस गए थे ...आगे बढ़ ही नहीं रहे थे---तब  यहाँ पर 'अरदास' की गई ..तब कही जाकर मिलिट्री आगे बढ़ सकी ----आपरेशन --ब्लू स्टार  !"पर आंतकवादियों को खदेड़ने के लिए ....



( गुरुद्वारे के चारो कोनो में पानी पीने की व्यवस्था हैं --कभी -कभी यहाँ मीठी लस्सी भी मिलती हैं )


  ( प्रसाद की लाइन ...यहाँ आप ११ रु. का प्रसाद लो या १०१ का सबको बराबर मिलता हैं )


( लाइन में खड़े हुए---आज बहुत गर्दी (भीड़ )...हैं )


( आज गुरूद्वारे में बहुत भीड़ हैं )


(सोने का केंडिल ...पहले यहाँ दीपक जलाता था )




(किसी ने प्रसाद का दोना  फेंक दिया ..ऐसी पवित्र जगह पर  हमें ध्यान देना चाहिए की गंदगी न करे )





(  यह गुरुद्वारे के ऊपर का फोटू हैं.....चुपचाप  लिया हुआ ? )



(गुरूद्वारे के अंदर का द्रश्य ---चुपचाप लिया हुआ)


(३ घंटे में ...बड़ी मशक्कत के बाद बाबा के दर्शन हुए...)
दर्शन के बाद प्रसन्न मुद्रा में दर्शन  

(सन्नी क्यों पीछे रहता ..?  उसका भी एक शानदार फोटू )


(तालाब  में तैरती हुई गोल्डन-फिश )





(आखरी मोड़ पर गुरूद्वारे से निकलकर गुरु का प्रसाद ...लेती संगत )




यह हैं अकाल तख्त ---सिख धर्म के सारे हुक्म यही से निकलते हैं--जिन्हें सबको मानना पड़ता हैं !



अकाल तख्त--सिखधर्म के सारे फरमान यही से जारी होते हैं-- जिन्हें सारे देश की  गुरुद्वारा-प्रबन्धक कमेटी को मानना होता हें --'आपरेशन -ब्लूस्टार' के समय इसे मिलिट्री ने तोपों से उड़ा दिया था --और जनरेलसिंह भिंडरावाला को अपने साथियो के साथ यहि से गिरफ्तार किया था--उसके बाद अकालतख्त की दौबारा कार- सेवा की गई..आज का अकालतख्त नया बना हैं--रात को 'महाराज की सवारी' यही आती हैं--और गुरुग्रन्थ साहेब का सुकासन यही होता हैं !


दोपहर के ३ बज रहे थे और हमें भूख सता रही थी ..सुबह स्टेशन पर एक चाय पी थी--तब से भूखे थे--थोडा सा प्रसाद ही खाया था -- सो अब चूहों की कबड्डी चालू हो गई थी--अब, हम चलते हैं 'लंगर- हाल ' की तरफ --यहाँ हर टाइम गुरु का लंगर चलता रहता हैं --यह दो मंजिला लंगर हाल हैं --निचे फुल हो जाने के बाद उपर संगत चल देती हैं--नीचे चाय की भी 'सेवा होती रहती हैं --बढ़िया सोंफ की बनी चाय---




(यह हैं  'लंगर-हाल  -- यहाँ मोटर गाडी द्वारा सफाई होती हैं )


(ऊपर लंगर को जाती संगत ) 



( गुरु का लंगर करती संगत )



( गुरु का प्रसाद यानी खाना ----अभी खीर और सब्जी नहीं आई हैं.. पर मुझे बहुत भूख लग रही..)


लंगर -हाल 

खाने का सिस्टम यहाँ बहुत अच्छा हैं ..इतनी संगत के होते हुए भी न गंदगी! न खाने की कंमी !कैसे मैनेज करते है ?आश्चर्य हैं  .....



यह हैं बर्तन साफ़ करने की जगह....आप आराम से सेवा कर सकते हो ? यहाँ सेवा करने के लिए लाइन लगती हैं ..सिख -धर्म में सेवा का बहुत महत्व हैं ?




खाना खाकर हम चल दिए अपने कमरे में --बहुत थक गए थे  --थोडा आराम करेंगे ...वैसे यहाँ गर्मी भी बहुत हें --शाम को बाधा वार्डर भी जाना हैं .....अतुल इन्तजार कर रहा होगा ...शेष अगली बार ;;;;;


जारी -------


रविवार, 23 जनवरी 2011

# * पालमपुर की यात्रा ( 2) * #


११ जुलाई 2010 
   रात को बहुत अच्छी नींद आई --सुबह आँखें खुली तो कमरा एकदम ऐ.सी.की तरह ठंडा हो चूका था --रात को एक्स्ट्रा रजाईयां  ली थी फिर भी ठण्ड लग रही थी-पर धुप निकल चुकी थी --पर्दे हटाए तो  चीख निकलते -निकलते रह गई --इतना सुंदर द्रश्य --देखते ही रह गई 
   
(सुबह का   मन- मोहक  द्रश्य ) 


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(पालमपुर का चोराहा )            
(और यहाँ  मे )
नहा -धोकर तैयार होकर हम ने नाश्ता किया --पहाड़ो पर आलू के परांठे बहुत मिलते हे -नाश्ता करके हम धुमने चल दीऐ  'न्युग्ल केफे '--यहाँ बहुत सुन्दर पार्क बना हे बिच मे एक झोपड़ी नुमा काटेज बना हे-- बड़ा अच्छा मोसम था--अमृतसर की गर्मी हम भूल चुके थे ----    
(न्युगल केफे ) 

(न्युगल केफे के पार्क में )

(न्युगल केफे के पार्क में मिस्टर सिह ) 
सामने जो झोपडी दिखाई दे रही हे वो कचरा -धर हे --उसमे एक चरसी बैठा चरस के कश खीच रहा था --मेरी लडकियाँ डर गई --हम तुरंत वहां से चल दीऐ ---वेसे भी हमे नेशनल पार्क जाना था --पर सब ने मना कर दिया --सो,हम पालमपुर से  धर्मशाला को चल दिए ---                          
पालमपुर से धर्मशाला की यात्रा बहुत अच्छी रही रस्ते भर पालमपुर के चाय के खेत दीखते रहे --रात की बारिश ने शमां खुशनुमा बना दिया था --आम के पेंड़ो से आम गिरकर सड़क पर पड़े थे --बच्चो ने २-३ किलो आम इक्कठा कर  लिए -- यहाँ के आम छोटे -छोटे होते हे बिलकुल जामुन के बराबर --पर मीठे बहुत थे 
   
(चाय के फेमस खेत )
और अब हम पहुच गए धर्मशाला में --वहां रुके नही सीधे ऊपर गए वहां भी 
हमारा स्वागत किया बारिस ने --मेक्लोडगंज  ऊपर के हिस्से को कहते हे
जारी ----