लागी छूटे न
लागी छूटे न अब तो सनम !
चाहे जाए जिया ,तेरी कसम !!
पर मै जानती हूँ तेरे दिल में मै नही हूँ ?
मेरा प्यार , मेरा अहसास !सब खोखला है
तू मुझसे प्यार नही करता ?
मैं तेरी आरजू इन आँखों में लिए भटकती रहूंगी
तुझ से मिलने को अब मैं तरसती रहूंगी
वो खुशनुमा दिन !
वो खुशनुमा राते !
जब हम मिलकर प्यार किया करते थे
वो कदम के पेड़ की छाया....
वो रजनीगन्धा के फुल....
जूही की मदमस्त खुशबु से सराबोर
वह तेरे दिल का आँगन ........
जहां तेरी मुस्कुराती तस्वीर मेरे मन को हर्षाती थी !
जहां कभी मैं निशब्द चली आती थी ,
तेरे दिल के दरवाजो को झंकृत कर के
न शोर !
न कोई कोलाहल !
खामोशी से लरजते वो तेरे अशआर
मुझे अंदर तक रोंद गए है....
अब वो बात कहाँ .....
तेरी विरह अग्नि में मै, जल रही हूँ ज़ालिम !
बूंद -बूंद पिघल रही हूँ ज़ालिम !
इस तपिश से मुझे बचा ले ज़ालिम !
कैसे तुझे चाहू !
कैसे तुझे पाऊ !
कैसे तुझे देखू !
इस दिल की लगी से मुझे बचा ले यारा !
इस पीड़ा से मुक्ति दिला दे यारा !!
" दूर है फिर भी दिल के करीब निशाना है तेरा "
