तमिलनाडु डायरी ★
वेल्लोर (तिरुमलाईकोड़ी)
20 जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची। हमने श्री रँगनाथ स्वामी,जम्बुकेश्वर मन्दिर ओर 3दिव्यदेशम मन्दिरो के अलावा तन्जोवर के ब्राहतेश्वर मन्दिर के दर्शन कर के कुम्भकोलम के मन्दिरो के दर्शन कर चिदम्बरम घूमे, चिदम्बर से हम कांचीपुरम के मन्दिरो में गए और फिर अरुणाचलन को चल दिये। अरुणाचलेन ओर कांचीपुरम के मन्दिरो के दर्शन कर अब हम वेल्लोर के मन्दिर चल दिये...अब आगे:--
तिरुवलमलाईकोडाई:--
तरुवन्यमलाई से सुबह नाश्ता कर हम कार से विल्लोर को चल दिये। विल्लोर (तिरुवलममलाईकोडाई) शहर से ये मन्दिर 10 km अंदर पहाड़ी के पास स्थित है। विल्लोर बहुत अच्छा और काफी बड़ा शहर है।
सहेली के मिस्टर का बुखार कम नही हुआ था तो वेल्लोर के फेमस हास्पिटल में उनको 1 बोतल चढ़ाई।कुछ विटामिन्स भी दिए डॉ बोला कि थकान से बुखार है । उन्होंने थोड़ा आराम किया तो तबियत ठीक हुई।
तबियत ठीक थी ।पर वो चलने की स्थिति में नही थे तो हमको बोला कि तुम लोग मन्दिर में जाओ मैं टेक्सी में आराम करूंगा।
उनको टेक्सी में आराम करने का बोलकर हम सब वैल्लोर की लक्ष्मी माता मन्दिर में दर्शन करने चल दिये।
ये सारा मन्दिर सोने का बना हुआ है।ये मन्दिर 1500 सौ किलो सोने की शुध्द पतरी से निर्मित है इसको श्रीपुरम गोल्डन टेम्पल भी बोलते है। इसका निर्माण 2007 में कम्प्लीट हुआ है। वैसे तो ये नया बना हुआ मन्दिर है पर इसके ठीक सामने पुराना मन्दिर भी है। वैसे तो ये मेरा ओर मिस्टर का देखा हुआ था।मेरी सहेली का भी देखा हुआ था फिर भी इधर से निकल रहे थे तो सोचा कि दर्शन करते चले।
यहाँ से तिरुपति 120 km दूर है और हमको तिरुपति ही जाना था।
यहाँ हमने 100 -100 रु के sr सिटीजन के टिकट निकाले ।पिछली बार तो हम दोनों फ्री में गए थे।
यहाँ भी मोबाइल तो जमा नही किया पर फोटू खींचना सख्त मना था। तो अंदर का कोई फोटू नही खींचा।
बाहर आकर कुछ फोटू जरूर खिंचे।
वापसी का रास्ता प्रसादम तक आता है तो हम ने यही पर देवी का लंगर खाया।बहुत टेस्टी खाना था।
खाना खाकर हम गाड़ी में आ गए और गाड़ी आगे तिरुपति को चल दी।
क्रमशः.