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बुधवार, 4 मार्च 2026
शिव के 5 तत्वों वाले मन्दिर
सोमवार, 23 फ़रवरी 2026
शिव के 5 तत्वों के मन्दिर
तमिलनाडु डायरी ★
वेल्लोर (तिरुमलाईकोड़ी)
20 जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची। हमने श्री रँगनाथ स्वामी,जम्बुकेश्वर मन्दिर ओर 3दिव्यदेशम मन्दिरो के अलावा तन्जोवर के ब्राहतेश्वर मन्दिर के दर्शन कर के कुम्भकोलम के मन्दिरो के दर्शन कर चिदम्बरम घूमे, चिदम्बर से हम कांचीपुरम के मन्दिरो में गए और फिर अरुणाचलन को चल दिये। अरुणाचलेन ओर कांचीपुरम के मन्दिरो के दर्शन कर अब हम वेल्लोर के मन्दिर चल दिये...अब आगे:--
तिरुवलमलाईकोडाई:--
तरुवन्यमलाई से सुबह नाश्ता कर हम कार से विल्लोर को चल दिये। विल्लोर (तिरुवलममलाईकोडाई) शहर से ये मन्दिर 10 km अंदर पहाड़ी के पास स्थित है। विल्लोर बहुत अच्छा और काफी बड़ा शहर है।
सहेली के मिस्टर का बुखार कम नही हुआ था तो वेल्लोर के फेमस हास्पिटल में उनको 1 बोतल चढ़ाई।कुछ विटामिन्स भी दिए डॉ बोला कि थकान से बुखार है । उन्होंने थोड़ा आराम किया तो तबियत ठीक हुई।
तबियत ठीक थी ।पर वो चलने की स्थिति में नही थे तो हमको बोला कि तुम लोग मन्दिर में जाओ मैं टेक्सी में आराम करूंगा।
उनको टेक्सी में आराम करने का बोलकर हम सब वैल्लोर की लक्ष्मी माता मन्दिर में दर्शन करने चल दिये।
ये सारा मन्दिर सोने का बना हुआ है।ये मन्दिर 1500 सौ किलो सोने की शुध्द पतरी से निर्मित है इसको श्रीपुरम गोल्डन टेम्पल भी बोलते है। इसका निर्माण 2007 में कम्प्लीट हुआ है। वैसे तो ये नया बना हुआ मन्दिर है पर इसके ठीक सामने पुराना मन्दिर भी है। वैसे तो ये मेरा ओर मिस्टर का देखा हुआ था।मेरी सहेली का भी देखा हुआ था फिर भी इधर से निकल रहे थे तो सोचा कि दर्शन करते चले।
यहाँ से तिरुपति 120 km दूर है और हमको तिरुपति ही जाना था।
यहाँ हमने 100 -100 रु के sr सिटीजन के टिकट निकाले ।पिछली बार तो हम दोनों फ्री में गए थे।
यहाँ भी मोबाइल तो जमा नही किया पर फोटू खींचना सख्त मना था। तो अंदर का कोई फोटू नही खींचा।
बाहर आकर कुछ फोटू जरूर खिंचे।
वापसी का रास्ता प्रसादम तक आता है तो हम ने यही पर देवी का लंगर खाया।बहुत टेस्टी खाना था।
खाना खाकर हम गाड़ी में आ गए और गाड़ी आगे तिरुपति को चल दी।
क्रमशः.
शनिवार, 21 फ़रवरी 2026
शिव के 5 तत्वों वाले मन्दिर
तमिलनाडु डायरी ★6
तिरुवलममलाई (अरुणाचलेश्वर)
19 जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची। हमने श्री रँगनाथ स्वामी,जम्बुकेश्वर मन्दिर ओर 3दिव्यदेशम मन्दिरो के अलावा तन्जोवर के ब्राहतेश्वर मन्दिर के दर्शन कर के कुम्भकोलम के मन्दिरो के दर्शन कर चिदम्बरम घूमे, चिदम्बर से हम कांचीपुरम के मन्दिरो में गए और फिर अरुणाचलन को चल दिये,अब आगे:---
कांचीपुरम से हम तिरुवन्नमलाई मन्दिर गए जो कांचीपुराम से 118 km है ओर पहुचने का समय ढाई घण्टे का है। ये मन्दिर शिव के चौथा तत्व "अग्नि तत्व" को प्रजेंट करता है।
हम तिरुवन्नमलाई यानी कि अरुणाचलेश्वर मन्दिर पहुँचे तब तक रात हो गई थी।हम मन्दिर के पास पहुँचे हम फटाफट दर्शन कर के वेलूर जाना चाहते थे और आज की रात वही रुकना चाहते थे।पर मन्दिर में बहुत भीड़ थी।मन्दिर के अंदर केबिन बने हुए थे,जिसमे काफी श्रद्धालु दिखाई दे रहे थे। जिनको देखकर ये लगा कि जल्दी नम्बर आने वाला नही है तो हम लौट गए। यहाँ रुकमा मेरी सहेली के मिस्टर की भी तबियत ठीक नही लग रही थी तो सोचा रात यही रुक जाते है और सुबह जल्दी दर्शन करेगे।
यहाँ हमको मन्दिर के पिछली ओर एक होम स्टे मिल गया।इधर भी हमको 2 बड़े बेड का एक रूम मिला । ये भी 1800 so मांग रहा था पर मोलभाव कर के 1500 so में बात बन गई। रूम काफी लंबा था ।घर के स्वामी भी पीछे वाले पोर्शन में रहते थे। सहेली के मिस्टर के लिए दूध हमको वो ही गर्म कर के दे गए।
यहाँ शाम को मिस्टर ओर मैं थोड़ा बाजार भी घूमे ओर वही खाना खाया। रात को हम चारो गप्प सप्प करते हुए सो गए।
सुबह 4 बजे उठकर हम दोनों मन्दिर की तरफ चल दिये।दोनों मर्दों ने हाथ ऊंचे कर दिए क्योकि इतनी भीड़ में उनको जाने का मन नही था। वैसे भी सहेली के मिस्टर को हल्का बुखार था तो मेरे मिस्टर भी नही गए।
अब हम दोनों सुबह2 सुनसान सड़क पर गाना गाते हुये मन्दिर के पास जा रहे थे ––– "दो बेचारे बिना सहारे...😄
मन्दिर के नजदीक पहुँचकर देखा की मन्दिर के केबिन अभी भी भरे हुए थे अब क्या करे ये सोच ही रहे थे कि एक बाईक हमारे पास आकर रुकी, उसपर बैठा एक लड़का हमको स्पेशल दर्शन करवाने को बोल रहा था। हम दोनों ने तुरंत उसका प्रपोजल मान लिया और उसकी बाईक पर बैठ गए वो हमको मन्दिर के पिछले पश्चिमी गेट पर ले गया जिस पर pay -Gopuram लिखा हुआ था। हम समझ गए कि ये पेमेंट लेकर दर्शन करवाते है। वहां कुछ लोग ओर भी खड़े हुए थे हम भी पास ही खड़े हो गए।
ठीक 6 बजे मन्दिर का बड़ा गेट खुला,काफी लोग अपने पटाये लोगो को अंदर भेज रहे थे हमारा वाला लड़का भी 6-7 ओर लोगो के साथ हमको भी अंदर ले गया। कुछ अंदुरिनि रास्तों से गुजारता हुआ वो हमको मूर्ति के सामने लाईन में लगा गया ..15 मिनिट में हम दोनों ने अच्छे से नजदीक जाकर भगवान शिव के दर्शन किये।
दर्शन कर के उसने हमको पद्मावती मन्दिर के दर्शनों की लाइन में लगवा दिया। यहाँ उसने हम दोनों के 500-500रु लिए जो जायज भी थे। वरना इतनी भीड़ के रहते आज दोपहर तक भी दर्शन होना मुश्किल था।
दर्शन कर हम बाहर आये पर पश्चिम गेट पर ताला लगा था ओर सब लोग साउथ गेट की ओर बढ़ रहे थे तो हम भी साउथ गेट की तरफ चल दिये। साउथ गेट काफी दूर था हमको वहाँ से निकलकर वापस पश्चिम गेट पर आना था क्योकि वहाँ हमारी चप्पलें पड़ी थी और पश्चिम गेट भी बहुत दूर था। साउथ गेट से बाहर आये तो ऑटोवाले खड़े थे,दिल को तसल्ली हुई कि अब ऑटो से होटल पहुच जायेगे। परन्तु ऑटो वाले जरा सी दूर का 200 रु ले रहे थे ।हम तो तैयार थे पर हमको हमारे होटल का नाम याद नही था तो ऑटो वाले लेकर नही गए। वहाँ से पैदल ही चलते हुए हम पश्चिम गेट तक आये और चप्पल पहनी।
साउथ के मन्दिर बड़े बेकार है एक तो बड़े बड़े होते है ऊपर से इनके प्रांगण भी लंबे-चौड़े होते है बाहर ही चप्पल उतरवा लेते है अब नंगे पैर चलते रहो।
नंगे पैर चलना मुझे सबसे कठिन काम लगता है।बड़ी मुश्किल से चलते चलते मैं पश्चिमी गेट तक आई और अपनी चप्पल पहनी।
पश्चिम गेट के पास ही हमारा होम स्टे दिख गया ।चलो भगवान भला करे हम बहुत थक गए थे।
कमरे पर आए तो दोनों लंबी तान मार कर सो रहे थे। उनको उठाया और थोड़ा आराम मैने भी किया।
सब तैयार हो गए तो पेकिंग कर के हमने रूम छोड़ दिया। आगे रास्ते मे नाश्ता कर के हम वेलूर को चल दिये।
शेष अगले एपिसोट में...
शिव के 5 तत्वों वाले मन्दिर
तमिलनाडु डायरी ★5
कांचीपुराम
18जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची। हमने श्री रँगनाथ स्वामी,जम्बुकेश्वर मन्दिर ओर 3दिव्यदेशम मन्दिरो के अलावा तन्जोवर के ब्राहतेश्वर मन्दिर के दर्शनकर के कुम्भकोलम के मन्दिरो के दर्शन कर चिदम्बरम घूमे,अब आगे:---
हम चिदम्बरम के मन्दिर घूम के आज कांचीपुराम जाने वाले है क्योकि 3 दिन कार वाले के पूरे हो गए थे।हमने ये 3 दिन की यात्रा 15 हजार में बुक की थी तन्जोवर से कांची तक।
रात हमने चिदम्बरम मन्दिर के ठीक सामने एक होम स्टे में गुजारी थी हम शाम को जल्दी आ गए थे तो एक ऑटो करके हम बाजार चले गए थे जिधर मेरी सहेली ने 15 हजार की साड़ियां खरीदी थी। रात को हम मन्दिर के अन्दर गए पर भीड़ अधिक देखकर वापस रूम में आ गए।यहाँ हमको 1 ही रूम 1800 so रुपये में मिला जिसमे 2 बड़े बड़े बेड थे ।रात को थोड़ी गप्पे मारी ओर सौ गए।
सुबह जल्दी उठकर मन्दिर पहुँचे।भीड़ कम थी । ये शिवजी का 2 रा तत्व था और मन्दिर का नाम था:-
नटराज मन्दिर।
यहाँ से हम डायरेक्ट कांचीपुरम पहुँचे।चिदम्बरम से कांची की दूरी 190 km है जो हमने 4 घण्टे में पूरी की।
हम 11बजे कांचीपुरम के मन्दिर में प्रवेश कर रहे थे।
ये मन्दिर शिवजी का 3 रे तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।ये "पृथ्वी तत्व" को दर्शाता है।
यहाँ काफी भीड़ थी तो हमने 100 रु की पर्ची कटाई ओर लाईन में लग गए।
100 की लाइन भी अच्छी खासी थी।मेरा इस मन्दिर में दूसरी बार आना हुआ है ।पहले मैं कांचीपुरम आ चुकी हूं खेर, हमने दर्शन किये आराम से ओर बाहर आकर अगले मन्दिर कांची कामाख्या मन्दिर को चले।ये मन्दिर माता कांची यानी पार्वती को समर्पित है।थोड़ी भीड़ यहाँ भी थी।इसके बाद हम वरदराजन मन्दिर गए जो विष्णुजी को समर्पित था परंतु बहुत भीड़ होने से हमने ये मन्दिर स्किप किया वैसे भी मेरे पिछली बार दर्शन हो चुके थे।
अब हम इसी मन्दिर में विष्णु जी के दूसरे दिव्यदेशम मन्दिर में गए जिधर जरा भी भीड़ नही थी ।दर्शन कर के हम शंकर जी के एक बहुत पुराने मन्दिर "कैलाशनॉयर " मन्दिर गए ये मन्दिर बहुत प्राचीन है 8वीं शताब्दी में बना ये मन्दिर पल्लव वंश के राजा नरसिंहवर्मन द्वतीय ने बनाया था। ये मन्दिर बलुवा पत्थरो से बना था इसकी पत्थरो पर अंकित नक्कासी बेजोड़ थी।अलग अलग वास्तुकला का शानदार मेल था।बाहर आकर हमने ढेर सारी फोटू क्लिक की।
इस मन्दिर तक हमने रात वाले ऑटो वाले को ही बुलाया था।बड़ा प्यारा लड़का था।
12 बज गए थे अब सारे मन्दिर बन्द मिलेंगे तो हम खाना खाने चले गए।
खाना खाकर हमने थोड़ी शॉपिंग की।यहाँ हमने फिर 12,000 रुपये में एक टैक्सी की जो हमको ऑटो वाले ने ही बताई थी 15 हजार बोल रहा था बड़ी मुश्किल से 12 हजार पर आया।पर ये टेक्सी वाला पिछले ड्राइवर से थोड़ा बेहतर था।ये हमको अरुणाचलेश्वर, वेलूर दिखाता हुआ तिरुपति छोड़ेगा।
अब हम खाना खाकर आगे अरुणाचलेश्वर मन्दिर को चले जो 118 km था।यहाँ पहुँचने में रात होने की संभावना थी।
शेष आगे...
शिव के 5 तत्वों वाले मन्दिर
तमिलनाडु डायरी ★4
चिदम्बरम
16जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची। हमने श्री रँगनाथ स्वामी,जम्बुकेश्वर मन्दिर ओर 3दिव्यदेशम मन्दिरो के अलावा तन्जोवर के ब्राहतेश्वर मन्दिर के दर्शन कर के कुम्भकोलम के मन्दिरो के दर्शन भी किये अब आगे:---
कुम्भकोलम से चिदम्बरम की दूरी 52 km है जो हमने 1 घण्टे ओर कुछ मिनिट में पूरी की।
तिलाई नटराज मन्दिर :-- इस मन्दिर में भगवान शिव के अलावा विष्णु को भी पूजते है।ये आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करता है
यह मन्दिर शिव के आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।
ये मन्दिर 40 एकड़ में फैला हुआ विशाल मन्दिर है।
यहाँ के गोपरम में नृत्य करती मूर्तिया बहुत ही सुंदर है।
मन्दिर के अंदर फोटू खींचना सख्त मना है इसलिए कोई फोटू नही खींच सके।फिर भी मण्डपम के ओर गोपरम के ही फोटू खींच सके है।
आगे हम पैलेस देखने गए पर वो भी आज बन्द था तो हम आगे को निकल गए।
अब हम चिदम्बरम से तिरुमलाई मन्दिर को चले जो 250 km था और ढाई घण्टे से ज्यादा का टाइम लगना था। हम इस मन्दिर में 3 बजे पहुच गए पर मन्दिर अंदर से बन्द था ।
इसके बडे बडे द्वार बंद थे ।हम बाहर ही गाड़ी में इंतजार करने लगे ।और भी गाड़ियां बाहर खड़ी थी।मन्दिर के पास ही एक रथ खड़ा था और पास ही बाजार था परन्तु ओणम के कारण सारा बाजार बंद था।
ठीक 4 बजे दरवाजा खुला ओर हम सबने अंदर जाकर दर्शन किये।मन्दिर काफी बड़ा था।अंदर गरुड़ जी की काफी बडी और लगभग सोने से जड़ित मूर्ति थी।
यहाँ दर्शनार्थियों की काफी भीड़ थी।
हमने दूर से गरुड़ जी के दर्शन किये और विष्णुजी के दर्शनों को आगे बढ़ गए।दर्शन कर हमने माता पद्मावती के दर्शन भी किये ।
यहाँ भी 3-4विष्णुजी के दिव्यदेशम मन्दिरों के दर्शन किये।और आगे को चल दिये ।
शाम हो रही थी और हमारी गाड़ी फ़र्राटे भरती हुई अपनी अगली यात्रा को तैय कर रही थी।
अब हम शिव के अगले तत्व की ओर बढ़ रहे थे।
क्रमश:.....
शिव के 5 तत्वों वाले मन्दिर
तमिलनाडु डायरी ★3
तन्जोवर
15 जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची।सुबह हमने श्री रँगनाथ स्वामी के अलावा जम्बुकेश्वर मन्दिर ओर 3दिव्यदेशम मन्दिरो के दर्शन किए अब आगे:---
रात हमने तन्जोवर के एक होम स्टे में गुजारी।जो भगवान शंकर के एक मन्दिर के सामने था।
सुबह नाश्ता कर हम तन्जोवर का फेमस ब्रह्तेश्वर मन्दिर देखने को निकले।
ये मन्दिर यूनोस्को कि धरोहर है।
9वीं शताब्दी के अंत मे बना ये मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर की जटिल नक्काशी और भव्य कलिंग शैली की वास्तुकला अद्भुत है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का अनोखा मिलन है।
इस मन्दिर के शीर्ष पर लगा पत्थर 80टन वजनी है। यही रहस्य है इस मन्दिर का कि 216 फिट की ऊंचाई वाले इस मन्दिर के शीर्ष पर ये 80 टन का पत्थर कैसे रखा होगा।
मन्दिर सचमुच बहुत ही विशाल है।बलुआ पत्थरो से निर्मित ये देखने लायक मन्दिर है।
मन्दिर में भगवान शिव का विशाल लिंग है और सामने एक विशाल नन्दी की प्रतिमा भी है।
2 घण्टे हम इस विशाल मन्दिर की भव्यता परखते रहे और प्रभावित होते रहे।हर पल, हर चीज चौकाने वाली थी।यहाँ काफी अंग्रेज भी घूम रहे थे।
यहाँ से हम 36 km दूर कुम्भकोलम गए ।यहाँ के एक मन्दिर ऐरावतेश्वर भगवान शिव का मन्दिर है पर 12 बज गए थे तो ये मन्दिर बन्द हो गया था ।हमने मन्दिर के प्रागण्ड में स्थित हाथी,घोड़ो के साथ कुछ फोटू खिंचाए ओर आगे निकल गए ।इस मन्दिर के सामने देवनायिकी अम्मन मन्दिर भी बन्द था तो हम आगे बढ़ गए। आगे हम चक्रपानी मन्दिर , गंगा चौलाई मन्दिर भी गए ये सब 4 बजे के बाद खुलने वाले थे। तो कुछ समय इंतजार भी किया।
इनकी बाद हमने विष्णुजी के 3 दिव्यदेशम मन्दिरो के दर्शन किये। बहुत ही भव्य मन्दिर थे।मन खुश हो गया।
रात को हम कुम्भकोलम से चिदम्बरम 52km को चल दिये।रात यही एक होम स्टे में बिताई।
शेष अगले भाग में....
बुधवार, 4 फ़रवरी 2026
शिव के 5 तत्व वाले मन्दिर
तमिलनाडु डायरी ★2
त्रिची।
14 जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची।सुबह हमने श्री रँगनाथ स्वामी के दर्शन किए अब आगे:---
यहाँ ज्यादातर मन्दिर 12 बजे बन्द हो जाते है और शाम 4 बजे खुलते है।तो हम फटाफट जम्बुकेश्वर मन्दिर ( अरुल्मिगु जम्बूकेश्वरर टेंपल, तिरुवनई कोविल) को चल दिये।जो रँगनाथ मन्दिर से 2 ढाई km है। 2 ढाई km है।
अरुल्मिगु जम्बूकेश्वरर टेंपल, तिरुवनई कोविल:--
जम्बुकेश्वर मन्दिर शिव के जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। यह मन्दिर अंदर से बहुत विशाल है 3 गोपरम पार किये हमने कार द्वारा ही मन्दिर के मुख्य गोपरम में प्रवेश किया। मोबाइल से फोटू खींचना लगभग यहाँ भी मना ही था।तो मैंने सिर्फ बाहर के फोटू ही खिंचे।
जब मन्दिर में पहुँचे तो काफी भीड़ थी।इन दिनों "ओणम" का पर्व साउथ में मनाया जा रहा है तो मन्दिरो में काफी भीड़ है, बाजार बंद है और चहल-पहल काफी है।
हम मन्दिर में लाईन में लग गए।इतने में एक कर्मचारी ने मेरे मिस्टर को देखकर sr सिटीजन बोलकर दूसरे दरवाजे से सीधे मन्दिर के सामने की लाईन में लगा दिया। हम आराम से मन्दिर के अंदर पहुँच गए।
अंदर बड़ा सा शिवलिंग था। हमने हाथ लगाकर शिवलिंग के दर्शन किये और बाहर निकल गए।
वहाँ से हम 2 दिव्यदेशम मन्दिर ओर गए और रात को खाना खाकर वही तन्जोवर में एक होम स्टे में ठहर गए।
अगले दिन हम तन्जोवर के बृह्तेश्वर मन्दिर जो यूनेस्को द्वारा सरक्षित है। देखने गए।