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सोमवार, 11 मई 2026
मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा
मेरी जगन्नाथ यात्रा
मेरी जगन्नाथ यात्रा
मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा
भाग★4
7 फरवरी 2026
4 फरवरी की रात 12:15 पर हमारी ट्रेन LTT रेल्वे स्टेशन बॉम्बे से निकली और हम 6 फरवरी सुबह 12 बजे पूरी पहुँच गए । शाम को हमने श्री जगन्नाथ जी के दर्शन किये । आज हम सुबह से निकले है पूरी के अन्य मन्दिर देखने ...
अब आगे.....
हमने अलारनाथ,बेड़ी हनुमान ओर नरेंद्र तालाब मन्दिर के दर्शन किये थे ।
अगला मन्दिर पुरी से 5-6 km दूरी पर था ।जिसका नाम था " गुप्त वृंदावन" कहते है यहाँ वृंदावन की आध्यात्मिक ऊर्जा मौजूद है इसलिए लोग इसको गुप्त वृंदावन बोलते है वैसे इसको "श्री गौर विहार आश्रम या माता मठ के नाम से भी पुकारते है।"
यह मन्दिर चैतन्य महाप्रभु की साधना से भी जुड़ा हुआ है।
इस मन्दिर में काफी सुंदर पौराणिक दृश्यों से चित्रित सजी मूर्तिया बनी हुई थी।जो देखने मे बहुत सुंदर नजर आ रही थी। एक बड़ा चक्र भी था।मैंने यहाँ पर जीभर कर फोटू खिंचे।
यहाँ भगवानशिव,विष्णु,हनुमान,कृष्ण की ओर चैतन्य महाप्रभु की मनमोहक प्रतिमाएं थी।
यहाँ कई जगह सेल्फी पॉइंट भी बने हुए थे जिधर लोग अपनी तस्वीरे उतार रहे थे।बीच मे बड़ा सा तालाब भी था।
इस मंदिर में टिकिट था । परन्तु सफाई नदारत थी इतने अच्छे मन्दिर का मेंटनेंस न के बराबर था।
इस मन्दिर में थोड़ी भीड़ थी।सबसे पहले हमसे बोला गया कि लंगर चालू है अगर किसी को खाना खाना हो तो जा सकते हो।
हमने भी सुबह नाश्ता किया था फिर कुछ खाया नही था तो हमको भी भूख लगने लगी थी तो हम उस तरफ चल दिये जिधर बोला गया था।
आगे जाकर देखा तो ये एक छोटा -सा खुला एरिया था जिधर टेबल कुर्सियों पर लोग खाना खा रहे थे ।वातावरण एकदम देशी था। पंडित जैसी वेशभूषा में लोग खाना परोस रहे थे। यहाँ लंगर फ्री नही था,एक आदमी का 80 रु चार्ज था। खाना अनलिमिटेड था जितना खाना हो खाओ। तो मैंने 160 रु के 2 कूपन कटवाए ओर पत्तल लेकर हमदोनो एक खाली टेबल पर बैठ गए।
यहाँ हमको सब्जी,दाल, चावल दिए गए। रोटी नही थी । सब्जी बहुत टेस्टी थी। लास्ट में दी गई मीठी चटनी तो कमाल की थी। खाना स्वादिष्ट था। वैसे भी लंगर का खाना स्वादिष्ट ही होता है।हम दोनों के पेट फुल हो गये थे। इतना टेस्टी खाना सिर्फ़ 80 रु में काफी सस्ता था पर बाथरूम जाना उतना ही महंगा था😂 हम 10-10 ₹ देकर बाथरूम में फ्रेश हुये।
बाद में हमने सारा मन्दिर देखा जो काफी बड़ा था । हमने काफी इंजॉय किया और ऑटो वाले के बार बार बुलाने पर आखिर मन न होते हुए भी हम मन्दिर से बाहर आ गए।
अब हम आखरी मन्दिर की तरफ चल दिये जो पुरी से 3-4km दूरी पर है। इस मन्दिर को "ओंकारेश्वर" मन्दिर के नाम से जाना जाता है और भगवान शिव को समर्पित है।
यहाँ गेट पर नन्दी की विशाल प्रतिमा थी जो भगवान शिव की तरफ मुंह कर के बैठी थी। यहाँ 108 शिवलिंग भी थे।इस मन्दिर में भी बहुत सी प्रतिमाएं थी और काफी खूबसूरत थी।यहाँ भी एक चक्र था जो काफी बड़ा और काफी भारी था जिसे सब चला रहे थे।मैंने ओर मिस्टर ने भी उस चक्र को घुमाया पर भारी होने से हमसे बरोबर घुमा नही☺️ फिर हम एक हॉल में गए जिधर 108 शिवलिंग बने हुए थे। उनके दर्शन कर भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन कर के हम बाहर आ गए।
3 बजे हम वापस होटल में आ गए ।
कुछ देर आराम कर के हम 5 बजे फिर से बाहर निकले और गोल्डन बीच पर पहुँचे। लेकिन आज हम लेट हो गए बीच पर पहुँचे तो अंधेरा हो गया था।मुझे लगा था कि हम सूर्यास्त तक पहुँच जायेगे पर बीच पर अंधेरा हो गया था। हम ने वहाँ गोलगप्पे खाये पर इतने घटिया गोलगप्पे मैंने जिंदगी में कभी नही खाये थे 😅 पुरी प्लेट खाये बगैर ही हम आगे चल दिये।थोड़ी देर दुकानों पर कुछ देखा पर कुछ खास नही था तो हम कुछ देर अंधेरे में घूमकर वापस होटल को चल दिये।
शेष अगले भाग में
जय जगन्नाथ🙏
सोमवार, 30 मार्च 2026
मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा
शुक्रवार, 20 मार्च 2026
मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा
मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा
भाग★2
6 फरवरी 2026
4 फरवरी की रात 12:15 पर हमारी ट्रेन LTT रेल्वे स्टेशन बॉम्बे से निकली और हम 6 फरवरी सुबह 12 बजे पूरी पहुँच गए अब आगे.....
हम अपने होटल आ गए और स्नान कर फ्रेश हुए फिर कुछ समय बाद हम होटल के नीचे बने रेस्टोरेंट में आलू के पराठे दही के साथ खा रहे थे।
आज जब हम स्टेशन से ऑटो में आये फिर चौकी पर साइकिल रिक्शा पर सवार हुए और हमने अपना होम स्टे का नाम (श्री विष्णु दर्शन हॉलिडे होम) बताया तो रिक्शा वाला हमको "विष्णु दर्शन" नाम की धर्मशाला में ले गया जो मन्दिर के पश्चिमी गेट के सामने बनी थी । पर वो हमारा होम स्टे नही था। हम रिक्शे से उतर गए और अंदर जाकर इन्क्वारी की तो पता चला कि हमारा होटल तो उधर ही था जिधर से हमने रिक्शा लिया था यानी कि मन्दिर के पास में मेन रोड पर ही था।
अब हम वापस वही चल दिये,यहाँ से हमने फिर दूसरा रिक्शा किया और अपने होम स्टे पहुँचे।
हमारा होम स्टे मेन रोड पर ही था जिसका रास्ता अंडर ग्राउंड था। 2 महीने पहले ही मैंने इस होम स्टे को बुक किया था जिसका किराया 1650 रु पर-डे था। होम स्टे एकदम शानदार था। अंदर एक किचन भी था जिसको हमने यूज नही किया।
अब कमरे में आकर हमने पण्डिजी को फोन किया। इन पंडित जी के बारे में मुझे हमारे ग्रुप "भारत दर्शन" के मेम्बर "विनीत गुप्ता जी" ने बताया था।
पंडितजी ने बोला कि–– "आप थोड़ा आराम करो और शाम को 5 बजे मुझे मन्दिर के पश्चिमी गेट पर मिलो।"
पण्डिजी के इतना कहने पर हम निश्चिंत हो गए और Ac की ठंडी लहरों में खो गए।
2 घण्टे बाद Ac की लहरोँ में खोये हुए हम चोंककर उठ बैठे सोचा कि Ac में ही रहना था तो यहाँ क्यो आये? चलो बाहर की रौनक देखी जाय।
ओर हम फटाफट गुलफ़ाम बने रूम से बाहर आ गए।
बाहर बाजार सजा हुआ था और लोग खरीदारी कर रहे थे ।हम भी बाजार की रौनक देखते हुए आगे बढ़े और एक रिक्शा कर के मन्दिर की तरफ चल दिये। पूरे बाज़ार में बहुत रौनक थी काफी भीड़ मन्दिर की तरफ जा रही थी कुछ लोग मन्दिर से लौट रहे थे कुछ खरीदारी कर रहे थे। बड़ा ही शानदार ओर मनमोहक माहौल था।
हम रिक्शे से मन्दिर के पश्चिमी गेट पर उतरकर अंदर चले गए।कुछ फोटू क्लिक की ओर वही पंडितजी का इंतजार करने लगे।
दूर मन्दिर का ध्वज बदला जा रहा था जिसे पब्लिक देख रही थी और वीडियो बना रही थी। मैंने भी बाहर से ही मन्दिर का वीडियो बनाया।
ठीक 6 बजे पंडित जी आये उन्होंने पहले हमारे जूते ओर मोबाइल जमा करवाये।ये काउंटर मन्दिर के वही बना हुआ था ये मन्दिर की तरफ से ही निशुल्क सेवा होती है ।क्योकि मन्दिर में मोबाइल ले जाना मना है तो काउंटर पर ही जमा करना होता है।
मैंने काउंटर पर 2 मोबाइल और हम दोनों के जूते जमा किये। ये एक थैले में रखना होते है और अपना मोबाइल नम्बर बताना होता है जिसे वो लिख लेते है ये प्रक्रिया बहुत सेफ है। वापसी में आप अपना मोबाइल नम्बर उनको बताओगे तभी आपका फोन मिलेगा।
फोन रखकर हम पंडित जी के साथ पश्चिमी गेट से होते हुए मन्दिर के अंदर गए यहाँ काफी भीड़ थी पंडितजी मिस्टर को संभालते हुए,भीड़ से बचाते हुए ठीक जगन्नाथ जी की मूर्ति के समुख ले गए। भगवान का श्रृंगार फूलों से हो रहा था। ये श्रृंगार उनके भाई कर रहे थे ऐसा वो बोले, कल वो खुद प्रभु के श्रृंगार में उपस्थित थे।
मन्दिर के उस भाग में अत्यंत भीड़ थी पर पंडित जी के साथ हमने सेफली दर्शन किये।
पंडित जी हमको सही सलामत उस भीड़ से निकाल लाये ओर एक जगह बैठा दिया।जिधर थोड़ी देर बाद हमारे लिए 2 पत्तल में भगवान का भोग मंगवॉ दिया जिसे हमने बड़ी श्रद्धा से हाथ जोड़कर वही खाया। बहुत ही स्वादिष्ट भोग था।
बाद में हमको समालते हुए पंडित जी मन्दिर के बाहर ले आये।
आज अगर पंडित जी नही होते तो हम दोनों भगवान के दर्शन बिल्कुल नही कर पाते। क्योकि मन्दिर में बहुत भीड़ ओर धक्का-मुक्की हो रही थी।लोगो ने अपने बच्चों को कंधे पर बैठा रखा था जिसके कारण पीछे वालो को दिखाई नही दे रहा था। लोग दर्शन करने के लिए धक्का मार रहे थे।
इससे तो अच्छा होता अगर मन्दिर ट्रस्ट लाईन में एक-एक श्रद्धालु को दर्शन करवाता ताकि सभी आराम से दर्शन करते।परन्तु वहाँ व्यवस्था के नाम पर कोई इंतजाम नही था।इसलिए काफी धक्का मुक्की हो रही थी।
बाहर आकर हमने किसी भी मन्दिर में जाकर दर्शन नही किये क्योकि हर मन्दिर में काफी लंबी लाईने थी।
बाहर निकलकर मैंने कुछ दक्षणा मन्दिर के भंडारे में दान की ओर कुछ दक्षणा पंडित जी को देकर बिदा ली।उन्होंने हमको पूरी का प्ररसादम भी दिया जिसे हम घर लेकर आये ।
बहुत-बहुत धन्यवाद विनीत जी का जिनके द्वारा मुझे पंडित जी मिले और मेरा ये बहु प्रतीक्षित जगन्नाथपुरी का सपना साकार हुआ।
इस तरह आज का दिन व्यतीत हुआ ओर भगवान के दर्शन कर के हमारा जीवन धन्य हुआ।
शेष अगले एपिसोट र्में....
जय जगन्नाथ🙏
शनिवार, 14 मार्च 2026
मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा
मेरी जगन्नाथ पुरी की यात्रा
भाग★1
5 फ़रवरी 2026
भगवान की लीला अपरंपार है। कहते है जब तक उसका बुलावा नही आता आप जरा- सा भी सरक नही सकते।
मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब एक ग्रुप के साथ 2025 के दिसम्बर महीने में क्रिसमस पर पुरी जाने का हमने सोचा, तो क्या पता था कि हमारी यात्रा कैसे होगी ? कब होगी?
तब अक्टूम्बर की सुबह ओपनिंग डेट पर रिजर्वेशन करवाने खिड़की पर पहुँचे तो पता चला कि AC की सीनियर सिटीजन की सारी टिकिटे बुक हो चुकी है । सीनियर सिटीजन की सीट ही हम लेते है क्योकि तभी हमको नीचे की बर्थ मिलती है।
अब, हम बगैर रिज़र्वेशन के घर आ गए और जगन्नाथपुरी का प्रोग्राम केंसिल कर दिया। परन्तु मैं हारने वालों में नही हु इसलिए आखरी सांस तक लगी रहती हूं। मै ऑनलाइन रिजर्वेशन खँगोलने लगी आखिर में मुझे 22 दिसम्बर की ही 3rd Ac की 2 सीट सीनियर सिटीजन की दिख ही गई। मैंने बगैर एक पल गवाये फटाफट दोनों सीट हड़प ली और निश्चिंत हो गई।लगा कोई जंग जीत ली हो।
अब तो मामला फतेह समझो।
अक्टूम्बर में टिकिट करवाकर हम निश्चिंत हो गए। अभी यात्रा को 2 महीने पड़े थे।
परन्तु भगवान का बुलावा आया ही नही था हम कितना भी प्रयास करे पर होता वही है जो ईश्वर की मर्जी।
तो हुआ यू की नवम्बर में अचानक मैंने आँखों की चेकिंग करवाई तो पता चला कि मेरी आँखों मे मोती बिंदु है। ऑपरेशन करवाना पड़ेगा।
अब,जैसे तैसे दिसम्बर आया तो पता चला कि दिसम्बर में नए साल की वजय से पूरी में बहुत भीड़ है जिसके रहते दर्शन काफी मुश्किल से हो रहे है।
अब क्या करे,जाए या न जाये। इस बीच हमने जनवरी में त्रिची जाने का रिजर्वेशन भी करवा रखा था। तो बहुत सोचने के बाद हमने जगन्नाथपुरी का रिजर्वेशन केंसिल करवा लिया और तुरंत 5 फरवरी 2026 का बुकिंग करवा लिया। इस तरह त्रिची की यात्रा के ठीक 10 दिन बाद हम आखिर में जगन्नाथपुरी को चल ही दिये।
4 फरवरी को रात 12:15 की हमारी गाड़ी थी जो कि 5 फरवरी लग गई थी। पूरी 4 की रात 5 का दिन ओर फिर 5 की रात सफर करते हुए हम 6 फरवरी को सुबह 8 बजे पहुचने वाले थे मगर 4 घण्टे ट्रेन लेट हो गई थी तो हम 12 बजे पूरी के रेलवे स्टेशन पर पहुँचे।
2019 को मैं पहली बार अपनी सहेली के साथ पूरी आई थी ।अभी उस बात को 7 साल हो गए थे और 7 साल में दुनिया ही बदल गई थी।पूरी भी मुझे बदला-बदला दिखाई दिया।
स्टेशन से बैटरी कार द्वारा हम प्लेटफार्म से बाहर आये और 200 रु का ऑटो किया। हम समझे थे कि हम होटल तक पहुँच जायेगे पर यहाँ आकर पता चला कि अब ऑटो मन्दिर से 500 मीटर की दूरी तक ही जाते है आगे की यात्रा बैटरी कार से या साइकिल रिक्शा से पूरी करनी पड़ेगी।
इस तरह हम आखिर जगन्नाथपुरी आ गए ।
शेष अगले एपिसोर्ड में....
जय जगन्नाथ🙏
शुक्रवार, 13 मार्च 2026
महिला -दिवस
सोमवार, 9 मार्च 2026
शिव के 5 तत्वों वाले मन्दिर
तमिलनाडु डायरी ★10
अंतिम भाग
रेनिगुंटा ओर श्री कालहस्ती
शिव के वायु तत्व मन्दिर
22 जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची। हमने श्री रँगनाथ स्वामी,जम्बुकेश्वर मन्दिर, तन्जोवर के ब्राहतेश्वर मन्दिर, कुम्भकोलम, चिदम्बर, कांचीपुर, अरुणाचलन ओर वेल्लोर के मन्दिरों के दर्शन कर के कल हमने तिरुपती के दर्शन किये और आज हम श्रीकालहस्ती मन्दिर के दर्शन करेगे अब आगे:--
कल हमारे साथ जो अनहोनी हुई उसके बाद हमारा मन बहुत खराब था। अब किसी मन्दिर में जाने का हमारा मन हो ही नही रहा था।
ये बात जब मैंने अपने ग्रुप यायावरी में बताई तो हमारे एडमिन सर सौजन्य त्रिपाठी जी ने बोला कि--" जो हुआ सो हुआ,बुरा वक्त टल गया अब सिर्फ 1 मन्दिर रह गया है उसको जरूर पूरा करके आओ। ये कम ही भाग्यशाली लोगो को शिव के पांचों तत्वों के मन्दिरों के एकसाथ दर्शन नसीब होते है। जो आपको हुए है। तो श्रीकालहस्ती मन्दिर जरूर जाओ ।शिव भला करेगा।"
मास्टर जी की नेक सलाह से दिल को तसल्ली हुई और मैंने श्रीकालहस्ती मन्दिर जाने का मन बना लिया।
अब,मिस्टर को आटे में लेना था☺️ क्योकि उनका मन भी बहुत खराब था।लेकिन मेरी दिली इच्छा को देखते हुए वो भी तैयार हो गए।
अब हम सुबह फटाफट तैयार हो सबसे पहले धर्मशाला के पीछे बने गोबिंद धाम मन्दिर गए । जिसमे हम पहले दिन तिरुपति आने के बाद शाम को गए थे पर बहुत भीड़ होने के कारण नही जा सके थे।
कहते है तिरुपति जाने से पहले श्री गोबिंदजी से परमिशन जरूर लेनी चाहिए मतलब यहाँ पहले दर्शन करने चाहिए ताकि सब कुछ कुशल मंगल हो पर उस दिन भीड़ की वजय से हम अंदर नही जा सजे थे। इसीलिए हमारे सारे कामो में विध्न आया हो खेर,...
आज मन्दिर में ज्यादा भीड़ नही थी और हमको आराम से दर्शन हो गए फिर वही एक होटल में हम दोनों ने नाश्ता किया और 1ऑटो किया जो हमको रेनिगुंटा छोड़ दे।
तिरुपति से रेनिगुंटा की दूरी 10-12 km है जो 20 मिनिट में तैय हो जाती है और ऑटो का किराया 300 रु होता है।
हमको ऑटो वाला पहले एक होटल में ले गया जहां 1 हजार रु में हमने 1दिन के लिए 1रूम लिया और सारा सामान उसमे रखकर थोड़ा फ्रेश हुए और फिर आगे श्रीकालहस्ती मन्दिर को चल दिए।
श्री कालहस्ती मन्दिर शिव का वायु तत्व मन्दिर है।
रेनिगुंटा से श्रीकालहस्ती मन्दिर की दूरी 30 km है जो आधे घण्टे में पूरी हो जाती है।
इतिहास:--
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुपति के पास स्थित श्री कालहस्ती मन्दिर स्वर्णमुखी नदी के तट पर एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है, जो अपनी 'वायु लिंगम' (पंचभूत स्थल) के लिए जाना जाता है। यह मंदिर 2000 वर्षों से अधिक पुराना है और 'दक्षिण काशी' या 'दक्षिण कैलाश' कहलाता है। यहाँ राहु-केतु पूजा और कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा की जाती है, और यह मंदिर ग्रहण के समय भी खुला रहता है।
मंदिर में कन्नप्पा की कहानी प्रसिद्ध है, जिन्होंने शिव की आँखों की रक्षा के लिए अपनी आँखें अर्पित कर दी थीं, जिसके बाद शिव ने उन्हें मोक्ष दिया था। इस मन्दिर का उल्लेख शिव पुराण और स्कंदपुराण में भी मिलता है।
हम ऑटो से 30 मिनिट में अपने आखरी पंचतत्व मन्दिर में पहुँच गए। श्रीकालहस्ती मन्दिर स्वम्भू है।ऑटो वाला बहुत ही अच्छा आदमी था उसने हमको स्पेशल रास्ते से मन्दिर में प्रवेश दिला दिया।सारे कर्मचारी बहुत ही सहयोग वाले थे सबने हमको आगे से शार्टकट रास्ते से जाने दिया।वैसे भी मन्दिर में भीड़ नही थी पर रास्ता काफी लंबा था ।हम शार्टकट रास्ते से जल्दी ही मन्दिर के करीब पहुँच गए।
मन्दिर के अंदर लगे दीपक से ही रोशनी हो रही थी। उसी के प्रकाश में हमने लिंग के दर्शन किये हालांकि दिखा कुछ नही क्योकि फूलों से महादेव का श्रृंगार हो रहा था। वैसे भी कहते है यहाँ के लिंग को पुजारी भी हाथ नही लगाते है।
अंदर माता का मन्दिर भी था जिसके दर्शन कर के हम बाहर आ गए।
कुछ देर बाद हमारा ऑटो हमको ले रेनिगुटा को चल दिया।
इस तरह मेरी कभी खुशी कभी गम वाली यात्रा की समाप्ति हुई।मुझे खुशी है कि मैंने इस यात्रा में शिव के पांचों तत्वों वाले मन्दिर, श्री हरि के मन्दिर, माँ लक्ष्मी के मन्दिर ओर तिरुपति बालाजी के दर्शनों का लाभ उठाया।
जीवन मे जो कुछ भी घटित होता है सब ईश्वर की मर्जी से ही होता है।
ॐ नमो शिवाय🙏
समाप्त🙏
बुधवार, 4 मार्च 2026
शिव के 5 तत्वों वाले मन्दिर
सोमवार, 23 फ़रवरी 2026
शिव के 5 तत्वों के मन्दिर
तमिलनाडु डायरी ★
वेल्लोर (तिरुमलाईकोड़ी)
20 जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची। हमने श्री रँगनाथ स्वामी,जम्बुकेश्वर मन्दिर ओर 3दिव्यदेशम मन्दिरो के अलावा तन्जोवर के ब्राहतेश्वर मन्दिर के दर्शन कर के कुम्भकोलम के मन्दिरो के दर्शन कर चिदम्बरम घूमे, चिदम्बर से हम कांचीपुरम के मन्दिरो में गए और फिर अरुणाचलन को चल दिये। अरुणाचलेन ओर कांचीपुरम के मन्दिरो के दर्शन कर अब हम वेल्लोर के मन्दिर चल दिये...अब आगे:--
तिरुवलमलाईकोडाई:--
तरुवन्यमलाई से सुबह नाश्ता कर हम कार से विल्लोर को चल दिये। विल्लोर (तिरुवलममलाईकोडाई) शहर से ये मन्दिर 10 km अंदर पहाड़ी के पास स्थित है। विल्लोर बहुत अच्छा और काफी बड़ा शहर है।
सहेली के मिस्टर का बुखार कम नही हुआ था तो वेल्लोर के फेमस हास्पिटल में उनको 1 बोतल चढ़ाई।कुछ विटामिन्स भी दिए डॉ बोला कि थकान से बुखार है । उन्होंने थोड़ा आराम किया तो तबियत ठीक हुई।
तबियत ठीक थी ।पर वो चलने की स्थिति में नही थे तो हमको बोला कि तुम लोग मन्दिर में जाओ मैं टेक्सी में आराम करूंगा।
उनको टेक्सी में आराम करने का बोलकर हम सब वैल्लोर की लक्ष्मी माता मन्दिर में दर्शन करने चल दिये।
ये सारा मन्दिर सोने का बना हुआ है।ये मन्दिर 1500 सौ किलो सोने की शुध्द पतरी से निर्मित है इसको श्रीपुरम गोल्डन टेम्पल भी बोलते है। इसका निर्माण 2007 में कम्प्लीट हुआ है। वैसे तो ये नया बना हुआ मन्दिर है पर इसके ठीक सामने पुराना मन्दिर भी है। वैसे तो ये मेरा ओर मिस्टर का देखा हुआ था।मेरी सहेली का भी देखा हुआ था फिर भी इधर से निकल रहे थे तो सोचा कि दर्शन करते चले।
यहाँ से तिरुपति 120 km दूर है और हमको तिरुपति ही जाना था।
यहाँ हमने 100 -100 रु के sr सिटीजन के टिकट निकाले ।पिछली बार तो हम दोनों फ्री में गए थे।
यहाँ भी मोबाइल तो जमा नही किया पर फोटू खींचना सख्त मना था। तो अंदर का कोई फोटू नही खींचा।
बाहर आकर कुछ फोटू जरूर खिंचे।
वापसी का रास्ता प्रसादम तक आता है तो हम ने यही पर देवी का लंगर खाया।बहुत टेस्टी खाना था।
खाना खाकर हम गाड़ी में आ गए और गाड़ी आगे तिरुपति को चल दी।
क्रमशः.