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शनिवार, 25 मई 2019
मंगलवार, 8 जनवरी 2019
अपने घर के आंगन में चमेली के मंडवे तले सहेलियों के साथ आंख मिचौली खेल रही थी ।
एकटक उस परी की खूबसूरती को घूंट - घूंट पी रहा था।
और जब उसकी मूक आंखों का निमंत्रण उस सुंदरी को मिला ;
तो चोंककर उसने उधर देखा ----
कोई उसे अजीब -सी निग़ाहों से घूर रहा था,
और वो उसके प्रवाह मे बहती जा रही थी,
मानो खुद पर उसका नियंत्रण ही न रहा हो ।
एक दिन बादशाह के कानों तक इनके इश्क़ के चर्चे पहुंच ही गए
और वही हुआ जो अक्सर होता है ।
लेकिन, यहां बात उल्टी थी---
उनके मुकद्दर में मिलना मुमकिन ही नही था ,
तो वो फिर कैसे मिल सकते थे ?
साथ तो थे पर जुदा - जुदा ..
क्या हर कहानी में नायक ओर नायिका का मिलन सम्भव होना जरूरी है ?
शायद "हा" भी शायद "ना" भी ????
और उनकी भी कहानी अधूरी रह गई !!!!!!!!!
सोमवार, 4 जून 2018
*★मैं तुमसे कब मिलूँगी★*
मैं तुमसे फिर कब मिलूंगी???
~~~~~~~~~~~~~~~~
मैं तुमसे फिर कब मिलूंगी ?
कब ???
जब चन्द्रमा अपनी रश्मियाँ बिखेर रहा होगा
या जुगनु टिमटिमा रहे होंगे
जब रात का धुंधलका छाया होगा
या दूर सन्नाटे में किसी के रोने की आवाज़ आ रही होगी ;
या फिर कहीं पास ही घुंघरुओं की झंकार होगी ।
क्या तब मैँ तुमसे मिलूंगी ?
तीसरे पहर की वो अलसाई हुई सुबह
भोर की लालिमा में चमकती ओंस की नन्ही-नन्ही बूंदे
या दूर पनघट से आती कुंवारियों की हल्की सी चुहल
या रात की रानी की बेख़ौफ़ खुशबु
या नींद से बोझिल मेरी पलकें
उस पर सिमटता मेरा आँचल...
क्या तब मैं तुमसे मिलूंगी !
सावन की मस्त फुहारों के साथ
झूले की ऊँची उड़ानों के साथ
पानी से भीगते अरमानों के साथ
या हवा में तैरते कुछ सवालों के साथ।
बोलो!क्या तब मैं तुमसे मिलूँगी ?
थरथराते होठों के साथ
सेज पर बिखरी कलियों के साथ
मिलन के मधुर गीतों के साथ
ठोलक पर थिरकती उँगलियों के साथ
या बजती शहनाई की लहरियों के साथ।
क्या सच में ! मैं तुमसे उस समय मिलुंगी ?
इन्हीं अन-सुलझे कुछ सवालों के साथ
कुछ गुजरी ; कुछ गुजर गई यादों के साथ
कुछ सुलझे हुये जवाबों के साथ
कुछ यू ही अलमस्त ख्यालों के साथ
क्या तब मैं तुमसे मिलूँगी ....?
---दर्शन के दिल से 💓
रविवार, 10 सितंबर 2017
" प्यार के खेल निराले " 💝
अपने घर के आंगन में चमेली के मंडवे तले सहेलियों के साथ आंख मिचौली खेल रही थी ।
एकटक उस परी की खूबसूरती को घूंट - घूंट पी रहा था।
और जब उसकी मूक आंखों का निमंत्रण उस सुंदरी को मिला ;
तो चोंककर उसने उधर देखा ----
कोई उसे अजीब -सी निग़ाहों से घूर रहा था,
और वो उसके प्रवाह मे बहती जा रही थी,
मानो खुद पर उसका नियंत्रण ही न रहा हो ।
एक दिन बादशाह के कानों तक इनके इश्क़ के चर्चे पहुंच ही गए
और वही हुआ जो अक्सर होता है ।
लेकिन, यहां बात उल्टी थी---
उनके मुकद्दर में मिलना मुमकिन ही नही था ,
तो वो फिर कैसे मिल सकते थे ?
साथ तो थे पर जुदा - जुदा ..
क्या हर कहानी में नायक ओर नायिका का मिलन सम्भव होना जरूरी है ?
शायद "हा" भी शायद "ना" भी ????
और उनकी भी कहानी अधूरी रह गई !!!!!!!!!
बुधवार, 23 अगस्त 2017
यात्रा जगन्नाथपुरी ( YATRA JAGANNATHPURI -- 10 )
बीचोबीच ठहरी हुई गंभीर गंगा
फाइव स्टार होटल वालो की नाव
काशी विश्वनाथ मंदिर ( चित्र -गूगल )
गंगा आरती ( चित्र -गूगल )
1. यात्रा जगन्नाथपुरी की -- भाग 1
2. यात्रा जगन्नाथपुरी की -- भाग 2
3. पुरी के अन्य दार्शनिक स्थल-- भाग 3
4. यात्रा जगन्नाथपुरी-- भाग 4 कोणार्क मंदिर -- भाग 1
2. यात्रा जगन्नाथपुरी की -- भाग 2
3. पुरी के अन्य दार्शनिक स्थल-- भाग 3
4. यात्रा जगन्नाथपुरी-- भाग 4 कोणार्क मंदिर -- भाग 1
यात्रा जगन्नाथपुरी ( YATRA JAGANNATHPURI -- 9 )
*यात्रा जगन्नाथपुरी*
वाराणसी पहुंचकर हम कार से इलाहबाद पहुंचे त्रिवेणी में स्नान कर हम किनारे पहुंचे। .. अब आगे -----
गंगा स्नान कर हम कपड़े बदलकर सीतामढ़ी को चल दिए।
इतिहास ;---
सीतामढ़ी ,उत्तरप्रदेश राज्य के भदौही जिले में स्थित है,हाल ही में भदौही जिले का नाम संत रविदास नगर भी रखा गया था ।जिला भदौही कॉरपेट सिटी के नाम से भी विख़्यात है यहाँ के कालीन दुनियां भर में फ़ेमस है। सीतामढ़ी मंदिर इलाहबाद और वाराणसी के मध्य स्थित है और जंगीगंज बाजार से 11 किलोमीटर दूर गंगा किनारे ही स्थित है कहते है यहाँ सीतामाता धरती में समा गई थी। यहाँ हनुमानजी की 110 फीट ऊँची मूर्ति है। यह मूर्ति विश्व में सबसे ऊँची हनुमान जी की मूर्ति के लिए प्रसिध्य है।
सीता समाहित स्थल ;--
1. यात्रा जगन्नाथपुरी की -- भाग 1
2. यात्रा जगन्नाथपुरी की -- भाग 2
3. पुरी के अन्य दार्शनिक स्थल-- भाग 3
4. यात्रा जगन्नाथपुरी-- भाग 4 कोणार्क मंदिर -- भाग 1
2. यात्रा जगन्नाथपुरी की -- भाग 2
3. पुरी के अन्य दार्शनिक स्थल-- भाग 3
4. यात्रा जगन्नाथपुरी-- भाग 4 कोणार्क मंदिर -- भाग 1
मंगलवार, 1 अगस्त 2017
शनिवार, 1 जुलाई 2017
यात्रा जगन्नाथपुरी ( YATRA JAGANNATHPURI -- 7 )
लिंगराज मंदिर ;--
लिंगराज मंदिर भगवान शिव को समर्पित है यह भुवनेशवर का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर को ललातेडुकेशरी ने 617 - 657 ई. में बनवाया था। यह मंदिर विशाल और अपनी मूर्तिकला के लिए प्रसिध्य है इस मंदिर की प्रत्येक मूर्ति कारीगरी और शिल्प में बेजोड़ है। गणेश, कार्तिकेय और गौरी के भी मंदिर बने हुए है। गौरी मंदिर में पार्वती की काले पत्थर की प्रतिमा बनी हुई है। यहाँ बिंदु सागर सरोवर बना हुआ है और शिव के 8 फीट मोटे और एक फिट ऊँचे ग्रेनाइट पत्थर से बने शिवलिंग है।
इस मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजा जजाति केशरी ने 11 वीं शताब्दी में करवाया था इस मंदिर का प्रागंड़ 150 मीटर वर्गाकार और कलस की ऊंचाई 40 मीटर है। अप्रैल के महीने में यहाँ रथ यात्रा निकलती है
हम लिंगराज मंदिर पहुंचे तो हमारा सारा सामान मोबाईल, कैमरा वगैरा सब काउंटर पर जमा करवाना पड़ा इसलिए यहाँ का एक भी फोटू नहीं है।
मंदिर घुमकर अपना सामान ले हम वापस ऑटो में आ गए और अपने होटल की तरफ चल पड़े आज बहुत थक गए थे इसलिए नजदीक ही एक होटल में खाना खाकर ही अपने होटल आये और कुछ देर गप्पशप कर के सब सो गए। ..
कल हमको वाराणसी जाना है। ..
1. यात्रा जगन्नाथपुरी की -- भाग 1
2. यात्रा जगन्नाथपुरी की -- भाग 2
3. पुरी के अन्य दार्शनिक स्थल-- भाग 3
4. यात्रा जगन्नाथपुरी-- भाग 4 कोणार्क मंदिर -- भाग 1
2. यात्रा जगन्नाथपुरी की -- भाग 2
3. पुरी के अन्य दार्शनिक स्थल-- भाग 3
4. यात्रा जगन्नाथपुरी-- भाग 4 कोणार्क मंदिर -- भाग 1











































