तमिलनाडु डायरी ★2
त्रिची।
14 जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची।सुबह हमने श्री रँगनाथ स्वामी के दर्शन किए अब आगे:---
यहाँ ज्यादातर मन्दिर 12 बजे बन्द हो जाते है और शाम 4 बजे खुलते है।तो हम फटाफट जम्बुकेश्वर मन्दिर ( अरुल्मिगु जम्बूकेश्वरर टेंपल, तिरुवनई कोविल) को चल दिये।जो रँगनाथ मन्दिर से 2 ढाई km है। 2 ढाई km है।
अरुल्मिगु जम्बूकेश्वरर टेंपल, तिरुवनई कोविल:--
जम्बुकेश्वर मन्दिर शिव के जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। यह मन्दिर अंदर से बहुत विशाल है 3 गोपरम पार किये हमने कार द्वारा ही मन्दिर के मुख्य गोपरम में प्रवेश किया। मोबाइल से फोटू खींचना लगभग यहाँ भी मना ही था।तो मैंने सिर्फ बाहर के फोटू ही खिंचे।
जब मन्दिर में पहुँचे तो काफी भीड़ थी।इन दिनों "ओणम" का पर्व साउथ में मनाया जा रहा है तो मन्दिरो में काफी भीड़ है, बाजार बंद है और चहल-पहल काफी है।
हम मन्दिर में लाईन में लग गए।इतने में एक कर्मचारी ने मेरे मिस्टर को देखकर sr सिटीजन बोलकर दूसरे दरवाजे से सीधे मन्दिर के सामने की लाईन में लगा दिया। हम आराम से मन्दिर के अंदर पहुँच गए।
अंदर बड़ा सा शिवलिंग था। हमने हाथ लगाकर शिवलिंग के दर्शन किये और बाहर निकल गए।
वहाँ से हम 2 दिव्यदेशम मन्दिर ओर गए और रात को खाना खाकर वही तन्जोवर में एक होम स्टे में ठहर गए।
अगले दिन हम तन्जोवर के बृह्तेश्वर मन्दिर जो यूनेस्को द्वारा सरक्षित है। देखने गए।
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