उम्र का बदलाव तो दस्तूर -ऐ -जहाँ हैं !
अगर महसूस न करो तो, बुढ़ापा कहाँ हैं !!
(*सदा प्रफुल्लित मैं और पतिदेव*)
**जेष्ठ --नागरिकों के साथ एक दिन---पिकनिक **
ज्येष्ठ --नागरिक कल्याणकारी -संध ..वसई
(गणमान्य लोग --बस में सवार )
आज मुझे 'जेष्ठ -नागरिकों के साथ एक पिकनिक में जाने का सु-अवसर प्राप्त हुआ --पतिदेव उस समिति के गणमान्य सदस्य हें --पिछले साल की पिकनिक मुझसे 'मिस' हो गई थी ,पर इस बार-- 'मैं जरुर जाउंगी' ऐसा फरमान मैने जारी कर दिया ---अब बेचारे पतिदेव की कहा बिसात जो टाल दे --थोड़ी ना -नुकुर के बाद आखिर 'यस ' हो ही गया ---
सुबह सात बजे निकला बसों से हमारा काफिला --सब में काफी जोश भरा हुआ था --कुछ तो ८५ के भी थे --लगता ही नहीं था की बुजुर्ग हैं --सब टिप -टाप! कुछ अकेले थे --कुछ पत्नियों के साथ थे !
पहले गणेश वंदना की गई --फिर किसी ने भजन गाया ---तब तक बिस्कुट का वितरण शुरू हो गया --एक जनाब ने गीत शुरू किया --" माना जनाब ने पुकारा नहीं --क्या मेरा प्यार भी गवारा नहीं ,मुफ्त में बन के चल दिए तन के वल्लाह जबाब तुम्हारा नहीं "वाह !वाह !! का शोर शुरू हो गया --वैसे वो खुद भी देव साहेब के जरा ज्यादा ही प्रशंसक थे--क्योकि उनके कपडे ,केप और गले का मफलर यही कहानी कह रहा था --"ख़्वाब हो तुम या कोई हकीकत कौन हो तुम बतलाओ ...." सब मस्ती में ताली बजने लगे --"दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना ,जहाँ नहीं चैना ....?????" इतना गाते ही सब चिल्लाने लगे दर्दीले गीत नहीं --ख़ुशी भरे गीत गाओ ---" मैं हूँ झूम --झूम --झूम --झूम झुमरू फक्कड बन के घुमु ......"
(खुशगवार मौसम ---अभी सूरज की लालिमा फैल रही हें )
( वो देखो ....भास्कर का उदय हो रहा हें )
(देवसाहेब की अदा )
(मंदिर के बाहर धुप सेकते विशिष्ठ जन )
( मंदिर के बाहर स्वागत करती कठपुतली )
( गणेशजी की प्रतिमा )
( मंदिर में जगन्नाथ ,सुभद्रा ,बलराम की मूर्तियां )
(मंदिर में बुजुर्गो की प्रतिमाए )
(दिलकश सुबह का मंज़र )
(नाश्ता -हाल )
(मिस्टर एक दोस्त के साथ )
(रिसोर्ट का रास्ता )
(मिस्टर अपने दोस्तों के साथ )
(हम भी चले --ऊपर की तरफ .. जहां पानी के बड़े -बड़े स्लाइड लगे हैं )
(यह खुबसुरत काटेज हैं ..जो किराए से मिलती हैं )
(और यह मैं हूँ )
( ठंडे पानी से चींख निकल गई )
(रेन -डांस का मजा ही कुछ और हैं )
(मजा ही मजा )
(चलिए ,बहुत रैन -डांस हुआ ...थोडा धुप सेक ले ... बड़ी ठंडी हैं ..)
(नहाकर खाने का इन्तजार )
(खाने के बाद ....मनोरंजन के कुछ पल ..)
( कविता कहते हुए पाटिल साहेब --संचालक )
रास्ते में एक मंदिर विश्वकर्मा आया सब उतर गए दर्शन करने चल दिए -----
(मंदिर के बाहर धुप सेकते विशिष्ठ जन )
( मंदिर के बाहर स्वागत करती कठपुतली )
( गणेशजी की प्रतिमा )
( मंदिर में जगन्नाथ ,सुभद्रा ,बलराम की मूर्तियां )
(मंदिर में बुजुर्गो की प्रतिमाए )
(दिलकश सुबह का मंज़र )
(जंगल में मंगल )
खुबसुरत रास्तो से गुजरते हुए आखिर हम रिसोर्ट पहुँच ही गए --बहुत अच्छा समां था--चारो और ठंडी -ठंडी पुरवैया बह रही थी --दिल मगन हो रहा था ---हमारा स्वागत किया इस मेंडक जी ने ....
(देखिए हमें देख कितना खुश हो रहे हैं ---मिस्टर मेंडक जी --फुले नहीं समां रहे हैं ---)
सबसे पहले रिसोर्ट पहुँच कर हमको नाश्ता दिया गया --गरमा -गरमा पोहें ,उपमा और वडे ..छककर नाश्ता किया फिर गर्म चाय पीकर चल पड़े ऊपर की तरफ जहां पानी की बड़ी -बड़ी स्लाइड लगी थी -पर शायद हममे से कोई वहां जाने का साहस नहीं कर पाएगा --हाँ , रेन डांस और स्विंगपूल का सबने मज़ा लिया ----चलिए चलते हैं ---
(नाश्ता -हाल )
(मिस्टर एक दोस्त के साथ )
(रिसोर्ट का रास्ता )
(मिस्टर अपने दोस्तों के साथ )
(हम भी चले --ऊपर की तरफ .. जहां पानी के बड़े -बड़े स्लाइड लगे हैं )
(यह खुबसुरत काटेज हैं ..जो किराए से मिलती हैं )
(और यह मैं हूँ )
( ठंडे पानी से चींख निकल गई )
(रेन -डांस का मजा ही कुछ और हैं )
(मजा ही मजा )
( "ओ--ओ -- सजना ..बरखा बहार आई ---रस की फुहार लाई --अखियों में प्यार लाई ---ओ ओ ओ सजना" )
(चलिए ,बहुत रैन -डांस हुआ ...थोडा धुप सेक ले ... बड़ी ठंडी हैं ..)
(नहाकर खाने का इन्तजार )
खाना बहुत टेस्टी था ---छोले,पूरी आलू और मटर पनीर साथ में दाल- चावल और श्रीखंड ---वाह ! लंच के बाद कुछ बुजुर्ग लोग आराम करने लगे ..वही बिछी हुई खटियो पर --कुछ गुट बना कर बतियाने लगे --और मै जमकर झुला झूलने लगी --
( झुला झूलते हुए --सुहाने मौसम का मज़ा )
(खाने के बाद ....मनोरंजन के कुछ पल ..)
( कविता कहते हुए पाटिल साहेब --संचालक )
लंच के बाद रंजना जी ने गीत गया ----
"हें ,नीले गगन के तले --धरती का प्यार पले --
ऐसे ही जग में आती हैं सुबह ही ऐसे ही शाम ढले .."
गीत के बोल ऐसे थे --सच में हम नीले गगन के तले बैठे हुए थे --बहुत अच्छा लगा ...कई लोगो ने कविता -पाठ किया ---फिर सबने गरबा भी खेला --चुटकुलों का दौर भी चला --हंस -हंस कर पेट दुखने लगा ..
५ बजे चाय आ गई ..और हम चल पड़े वापस --एक अनमोल यादगार के साथ अपने -अपने घर ........जयहिंद !





















































