मेरे अरमान.. मेरे सपने..


Click here for Myspace Layouts

शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

जयपुर की सैर == भाग 6 ( Jipur ki sair = bhag 6 )


जयपुर की सैर  == भाग 6









तारीख 13 को  हम बॉम्बे से 3 सहेलियां निकली थी जयपुर जाने को  'सम्पर्क क्रांति ट्रेन ' से और वो  रात कयामत की रात थी। ... 

अब आगे ----


18 अप्रैल 2016

आज सुबह देर तक सोते रहे क्योकि कल बहुत थक गए थे 9 बजे सब उठ गए आज मैंने सबको इंदौर के फेमस पोहे बनाकर खिलाये । सबको बहुत अच्छे लगे फिर हम मार्किट जाने को तैयार होने लगे  आज हम मार्किट जा रहे थे कुछ शॉपिंग करने..

आज सुबह हमारे एक और मित्र 'अरविंद भट्ट' जी हमसे मिलने आ गए, उन्होंने गुलाब के फूलों से और चॉकलेट से हमारा जोरद्वार स्वागत किया । फिर हम उनकी गाड़ी से बापू मार्केट तक आये ,आज उनको भी काम था इसलिए उनकी दावत कल के लिए स्थगित कर दी । कल मिलने का बोलकर वो चले गए पर शाम को हमको  घर छोड़ने का वादा किया अब हम दिनभर शॉपिंग करेगे।

हम बापू मार्किट में आये यहाँ पर  राजस्थानी साजो समान भरा पड़ा है जिसको देखना ही बहुत अच्छा लगता है ।पर भाव- ताव बहुत होता है टूरिज्म प्लेस होने के कारण पहले भाव ज्यादा बोलते है फिर धीरे धीरे कम करते है । गर्मी बहुत थी और हम गर्मी से बेहाल हो रहे थे फिर भी हमने यहाँ से राजस्थानी लहँगा, बैग, चूड़ियाँ,  चप्पल, चादरें, पेंटिंग वगैरा खरीदी और सबने यहाँ के मशहूर घाघरे खरीदे ।यहाँ की मशहूर चाट खाई। दिन भर हम नीबू पानी और जूस पीते रहे ताकि पानी की कमी न हो । वैसे हम घर पर से भी ठंडा ग्लूकोश का पानी बनाकर लाये थे।

पूरा दिन शॉपिंग करते रहे और शाम को अरविंद जी आ गये ,गर्मी अपनी चरम सीमा पर थी । मार्किट में गर्मी से झुलसते हुए जब कार के AC की ठंडी हवा आई तो मुझे तो नींद के झोंके आने लगे।
राजाजी बाग पहुंचकर अरविंद ने एक - एक लस्सी पिलाई और हम अपने घर पहुँच गए ।आज बहुत थक गए थे मुझसे तो उठा ही नहीं जा रहा था, अल्ज़िरा ने ही पुलाव बनाये और सबने खाये और जो सोये की पूछो मत

19 अप्रैल2016
सुबह 5 बजे मीना अक्सर उठ जाती है आज उसी ने सबके लिए नाश्ता बनाया अंडे और ब्रेड .. पहले वो  बाजार से अंडे और ब्रेड लाई फिर सबको उठाया, हम सब फ्रेश होकर अरविंद का इंतजार करने लगे देखते है आज अरविंद ने कहाँ ले जाना है ।
ठीक टाईम पर अरविंद के साथ हम सब मैँ, अल्ज़िरा, नीना और मीना निकल पड़े। 

आज हम सबने कल का खरीदा हुआ घाघरा और चप्पल पहना था। पहले अरविंद अपने IT कॉलेज लेकर आये जहाँ वो प्रोफ़ेसर है उनके कॉलेज के शानदार बगीचे में हमने कुछ फोटू खिंचे फिर हमारी कार जयपुर की व्यस्त सड़कों से गुजरती हुई जयपुर के बड़े मॉल वर्ल्ड ट्रेड पार्क  में आई , बहुत विशाल और भव्य मॉल था। आज हमारा लन्च यही था। आज का दिन हमने इसी मॉल में बिताया। और यह एक यादगार दिन साबित हुआ।






 लक्ष्मी मिष्ठान भंडार के टेस्टी  दही भल्ले और टिकिया 






LMB  



 कॉलेज के कम्पाउंड में -- मैँ  नीना और मीना  


वर्ल्ड ट्रेड पार्क बाहर का दृश्य 



























इस तरह आज का दिन मजेदार रहा


बुधवार, 6 जुलाई 2016

जयपुर की सैर == भाग 5 ( jaipur ki sair = bhag 5)

जयपुर की सैर == भाग 5
``````````````````````````

तारीख 13 को  हम बॉम्बे से 3 सहेलियां निकली थी जयपुर जाने को  'सम्पर्क क्रांति ट्रेन ' से और वो  रात कयामत की रात थी। ... 

अब आगे -----


17 अप्रैल 2016 


आज सुबह हम हरी शर्मा जी की बेटी की शादी में शरीक होने जा रहे थे पर अचानक गिरिराज जी शर्मा (जिनके साथ हम सब जाने वाले थे ) जी के रिश्ते में किसी की मौत हो गई और हमारा प्रोग्राम केंसिल हो गया क्योकि यहाँ से भीलवाड़ा 200 km है और एकदम से बन्दोबस्त करना थोडा मुश्किल है फिर भी कोशिश की पर सफलता नहीं मिली।
मन बहुत उदास है । हरी जी ने कहा टैक्सी कर के आ जाओ मैँ यहाँ पेंमेंट कर दूँगा पर हमारी इच्छा नहीं हुई ।जिस शादी में शरीक होने आये थे वहां न जाना हुआ इसलिए सबका मूड ऑफ़ था।

दिन भर हम मुंह लटका कर रहे अचानक हमारे एक दोस्त राजीव अवस्थी का फोन आया की 6 बजे तक तैयार रहिये मैँ आपको आमेर के किले पर होने वाला लाइट ऐंड साउंड शो दिखाने ले चलता हूँ फिर हम देशी होटल में डिनर करेगे ...

वाह !!! सब को जैसे पंख लग गए , हम हवा से बाते करने लगे ,फटाफट सब कपड़े वगैरा निकालने और सजने - सवांरने लगे ,थोड़ी देर पहले फैली ख़ामोशी टूट गई ।
ठीक 6 बजे राजीव अपनी गाडी के साथ प्रकट हुए और हम सब चल दिए खेड़ापती  बालाजी के मंदिर को देखने ...यह जयपुर शहर से 51 km दूर है 
जयपुर के शानदार दरवाजो से गुजरती हुई हमारी कार जा रही थी रास्ते में बिड़ला मन्दिर , सिटी पैलेस ,हवामहल और जलमहल को पार् करते हुए हम पहुँच गए खड़े गणपति।।।

काफी दूर हमको रोक दिया गया और हम पैदल ही मन्दिर की और बढ़ चले ,ये मन्दिर काफी विशाल है इसकी पहली मंजिल पर मन्दिर है बहुत भीड़ थी हम दर्शन कर के वापस लोट आये ,अब हमारा अगला पड़ाव था आमेर का किला।

जयगढ़ का किला पार् करके हमारी गाड़ी तेजी से जयपुर के बाहर निकल रही थी और Iहम किले में न जाकर किले के पिछवाड़े चल दीये जहाँ ये शो होता है ।  हमको कार से किले के बाहर छोड़कर राजीव वापस 1 किलो मीटर पीछे चले गए गाड़ी पार्क करने , अजीब बात है इतनी दूर पार्किंग बनाने का क्या तुक है खेर, हम वही फोटू खीचने लगे और राजीव के आते ही हम किले में चल दिए जहाँ 200 रु पर व्यक्ति टिकिट थी ;विदेशियों को यही टिकिट 500 में मिल रही थी ।हमारे काफी ना करने के बावजूद भी टिकिट राजीव ने खरीदी और हम किले के ऊपर चढ़ने लगे । काफी लोग बैठे थे और सामने चल रहा था अद्भुत इतिहास लाईट के माध्यम से अमिताभ और गुलज़ार की रौबीली आवाज़ में जयपुर का शानदार इतिहास ,घोड़ो की टापो से गूंजती स्वर लहरी हमको पौराणिक जयपुर की सैर करती रही और हम मन्त्रमुक्त हो उस काल में विचरण करते रहे।

बस एक बात खटकी की फोटू लेने पर पाबन्दी थी पर हम भी कम नहीं थे  चुपचाप कुछ तस्वीरें ले ही ली ; पर मज़ा नहीं आया खैर ,कमेंट्री भी अंग्रेजी में थी हिंदी में कमेंट्री होती तो और भी ज्यादा आनंद आता लेकिन ये बात हमको पता चली जब हम 1घण्टे का शो देखकर रिटर्न हुए तो पता चला की अगला प्रोग्राम हिंदी का ही है और इसका टिकिट भी 100 रु था ओ तेरी की !!!! हम तो नए थे पर शायद राजीव को भी यह बात पता नहीं होगी वरना हम यह शो देखते।

अब हम चल दिए डिनर करने हमारी कार जयपुर की नई बनी टनल को पार करती हुई दौड़े जा रही थी यहाँ एक ढ़ाबा  गणेश पवित्र भोजनालय के सामने  राजीव ने कार रोकी बहुत ही सिम्पल और सड़क के किनारे पर स्थित यह ढ़ाबा था कुछ कुर्सियां और मेजें रखी हुई थी ; अजीब तो लगा पर बहुत इन्जॉय किया कड़ी और सेव की भाजी के क्या कहने बहुत टेस्टी थे ।सड़क के किनारों के ढाबे में खाना खाने का एक अलग ही आनन्द महसूस हुआ।

रात को हमको राजीव हमारे घर तक छोड़कर गए....
थैंक्स राजीव सबकी तरफ से ..


खेड़ापती बालाजी 


मंदिर पहली मंजिल पर 




 मंदिर का प्रवेश द्वार 



 रास्ता 




 हमको अपनी गाडी से यहाँ उतरना  पड़ा 












आमेर के किले का  पिछवाड़ा ; यही से हम प्रोग्राम देखने गए थे 


 लाईव शो 




























सोमवार, 20 जून 2016

जयपुर की सैर == भाग 4 (Jaipur ki sair --bhag 4)

जयपुर की सैर == भाग 4  






तारीख 13 को  हम बॉम्बे से 3 सहेलियां निकली थी जयपुर जाने को  'सम्पर्क क्रांति ट्रेन ' से और वो  रात कयामत की थी। ... 

अब आगे -----



15 अप्रैल 2016


सुबह 4:30 को जब जयपुर स्टेशन के बाहर निकले तो ऑटो की कतारें लगी हुई थी और सबने एक साथ झुण्ड में हल्ला बोल दिया अब ये डिपार्टमेंट अल्ज़िरा को सोप में आराम से जयपुर स्टेशन का मुआयना करने लगी , स्टेशन अच्छा था इतनी सुबह भी गर्दी थी इतने में अलजीरा ने एक ऑटो वाले को 150₹  में जाने को तैयार कर लिया । हम अपना सामान ले चल दिए ... राजाबाग़  की और ...

नीना का मकान भी तीसरे माले पर था और हम सामान लेकर जो ऊपर चढ़े तो , कुछ मत पूछो हमारा हाल ...उफ़ !!!!हम और ऊपर चौथा माला देखने चढ़ गए गोल सीढ़ियों पर ऊपर चढ़ना अपने आप में काफी रोमांचक था ! ऊपर चौथे माले कीबालकनी से  आधा जयपुर दिख रहा था सामने ही रमण्डा होटल और पास ही गुरुद्वारे की गुंमद भी दिख रही थी जहाँ हमने पहले अपना शीश झुकाया। ..... 

दिनभर आराम किया बहुत थक गए थे और रात को चांडाल चौकड़ी की महफ़िल जम गई गाने ,कव्वालियां,अंताक्षरी का दौर चला साथ ही कुछ खाना पीना भी ..न न न न दारू नहीं भाई कोक और वेज खाना क्योकि माताजी के दिन चल रहे है और आज तो नवमी भी थी 2  फ्रेंड जयपुर के मिलने आये हुए थे ...देर रात तक महफ़िल जमी रही फिर हम सो गए ..... 

16 अप्रैल 2016

सुबह देर तक बेफिक्री वाली नींद सोते रहे , आज का दिन फ्री था सो, इतने दिन तक फूल पत्ती खाने से पेट का हाजमा खराब हो गया था तो सबसे पहली शुरुआत अंडो से की 2 -2 मस्त आमलेट पर हाथ साफ़ किये तीसरे की भी इच्छा थी पर उसे कल पर छोड़कर हम चाय पर आ गए और चाय की चुस्कियों के साथ जयपुर टूरिज्म पर ध्यान लगाया ।गूगल खोलकर देखा तो एक बढ़िया प्लान नजर आया जो दोपहर को फ़लाना जगह से लेकर हमको 2 किले जयगढ़ और आमेर का किला दिखाकर रात को डिनर और साथ ही राजस्थानी नृत्य भी , मात्र 450 ₹  में मज़ा आ गया जय हो जयपुर की ...

हमको लगा जयपुर तो बड़ा सस्ता है । हम जाने के लिए रेड्डी होने लगे ।

ठीक टाईम पर हम बताई जगह पर पहुँचे पर यह क्या ! अब, उनका टाईम टेबल चेंज हो गया था । वो विज्ञापन पुराना था ऐसा उन्होंने कहा , नए विज्ञापन के अनुसार अब किले दूर से दिखाते है और रात को डिनर के साथ डांस नहीं होता और पैसे भी 750 ₹ एक मेंबर के ...

हम लोगो 
को बहुत गुस्सा आया ।मैंने 2 -4 सिम्पल गलियां दी और वापस आ गए ,पहले ही दिन मुड़ खराब हो गया था ।जयपुर के नाम से गुस्सा आ रहा था।सबका मूड ऑफ़ हो गया..
इतने में अनिल जो नीना और अब हमारे फ्रेंड थे ,और जिनकी कार में हम यहाँ तक आये थे उनको हमारा खराब मूड अच्छा नहीं लगा वो बोले नो टेंसन  मैँ ले चलता हूँ जयगढ़ बाकी कल देखेगे । वो जयगढ़ का किला दिखाने को तैयार हो गए और हम सब जयगढ़ का किला देखने निकल पड़े।फिर पुराने माहौल ने अपनी जगह बना ली और हम गाने गाते हुए आगे निकल पड़े।

अब हमारे गाईड भी वही थे रास्ते के बाजार, मेन गेट, और जलमहल दिखाते हुए आगे बढ़ते रहे ।
जलमहल में रुकने का बोला तो अनिल बोले आते वक्त रुकेंगे पहले जयगढ़ ...

पर हाय री किस्मत !!! पहाड़ पर गाडी खड़ी हो गई पता चला की इंजन में पानी नहीं है और पानी हमारे पास भी नही था सो, किसी दूसरी गाड़ी से पानी लिया और हम सबने जंगल में मंगल मनाया कुछ फोटू खिंचे यहाँ एक गजब वाकिया हुआ मैँ मोर (पिकॉक के फोटो उतारने थोड़ा जंगल के किनारे गई इतने मेंएक कार वाला चिल्लाने लगा -- '' मैडम ऐसे मत घूमिये यहाँ पेंथर है फौरन कार में ही रहिये और फटाफट ऊपर या निचे उतर जाइये यहाँ रहना खतरे से ख़ाली  नहीं "    शाम का धुंधलका हो गया था और हम सब थोड़ा डर भी गए थे रात होने वाली थी उपर जाने से कोई फायदा नहीं था हम लोग वापस लौट चले। मूड ख़राब हो गया था , वापसी में जलमहल का नजारा देखा पर रात होने के कारण कुछ खास  अच्छा नहीं लगा फिर भी कुछ देर घूमकर कुछ फोटू खीचकर कुछ शॉपिंग कर,पापड़ खाकर दिल को तसल्ली देते हुए अपने घर को वापस चल दिए , भूख लगने लगी थी इसलिए रास्ते के एक चाईनीज रेस्त्रां से वेज ममोज् लिए काफी सस्ते थे सिर्फ 40 ₹ के 12 ममोज् ! हमने 24 ममोज् पैक करवाये और आराम से घर आकर मस्त AC में बैठकर खाये .... 
इस तरह आज घुलामिला दिन रहा।

शेष अगले अंक में ----



गुरद्वारे में नमन 



गोल सीढ़ियाँ 













4  दीवाने जंगल में 

 सुनसान सड़क और मैँ 




जंगल में मंगल 


 गाड़ी ख़राब हो गई 





 जलमहल 



 पापड़ वाली  --- पापड़ खिला 


पीछे जलमहल है .. पर अँधेरा है  



चलिए राम राम सा 









बुधवार, 1 जून 2016

जयपुर की सैर == भाग 3 (Jaipur ki sair --bhag 3)



जयपुर की सैर == भाग 3 



15 अप्रैल 2016 


तारीख 13 को  हम बॉम्बे से 3 सहेलियां निकली थी जयपुर जाने को  'सम्पर्क क्रांति ट्रेन ' से और वो  रात कयामत की थी। ... 

अब आगे -----



चाय ....चाय...चा... य...
गरमा - गरम चाय ....
मसालेदार चाय..
अभी नही तो कभी नहीं ...
चाय..गर्म गर्म चाय ...

इस मीठी आवाज से नींद खुली ,देखा तो हमारी गाडी जयपुर स्टेशन पर खड़ी है....
बाप रे !!!!
हम सब जयपुर पहुँच गए और हमको खबर भी नहीं उफ्फ्फ्फ्फ़....
सब घोड़े बेचकर सो रहे थे और पूरा कूपा खाली था...
ख़ाली तो कोटा से ही था सिर्फ हम ही तीनों दिख रहे थे ।कहाँ परसों नर मुंडो का समुन्दर और कहाँ आज खाली रेगिस्थान ...

कल रात को जब टी टी टिकिट चेक कर के चला गया था गाड़ी चलने को थी की अचानक जोर से कुछ गिरने की आवाज़ आई ,हमारी सीट गेट के पास ही थी मैंने जाकर देखा तो 3 छोटे - छोटे बेग किसी ने बाहर से फेंके थे  गाड़ी धीमी गति से चल दी थी  और अभी प्लेटफार्म पर ही थी .. मैंने देखा, कोई दिखा नहीं अचानक चलती गाड़ी में 2 लड़के और एक लड़की चढ़े , लड़की के मुंह से उफ़ निकला और लड़के अपना सामान उठाने लगे उनमें से एक बोला --" देखा, मैंने बोला था ना गाड़ी मिल जायेगी अपना तो लक ही जोरदार है कभी मेरी गाड़ी छुटी नहीं --" और वो गे गे कर के हँसने लगा....  लड़की बड़बड़ा रही थी ...मुझे लगा अभी थप्पड़ मार देगी लेकिन वो सिर्फ बुरा - सा मुंह बनाकर उसको गालियां देती हुई  अन्दर आ गई.... 

वो तीनों हमारे ही कूपे में आये और हमसे ऊपर वाली सीट पर चढ़ गए ...वो लोग कही एग्जाम देने जा रहे थे ।
फिर उनकी  बातें चटर- पटर होती रही और धीरे धीरे मेरी आँखों में नींद खटर् - खटर्  होने लगी 
...
सुबह उठी तो देखा  वो लोग भी दिखाई नहीं दे रहे थे ,शायद रास्ते  में कही उतर गए थे, अपना सामान देखा तो वो ज्यो का त्यों पडा हुआ था।

मैंने इन दोनों को झिझोड़कर उठाया ,दोनों बेफिक्र सो रही थी  दोनों हड़बड़ा कर उठी और हम तीनो फटाफट नो जयपुर स्टेशन पर उतर गए , जयपुर हमारी सोच से भी ज्यादा ठंडा निकला वैसे इस टाईम सुबह के 4.30 बजे थे और जनरली ये टाईम हर शहर ठंडा ही होता है।

खेर, हम अपना माल मत्था उठाकर सीढ़ियों की तरफ चल दिए ।
पर ये क्या ? 
यहाँ भी इलेक्ट्रॉनिक ऐलिविटर उफ़ !!! अब मैँ क्या करूँ ...

मुझे बहुत चक्कर आते है इन सीढ़ियों में, मैंने आसपास देखा कही और कोई साधारण सीढियाँ नहीं थी अब क्या करुँ ?
अल्ज़िरा और मीना मेरा भी सामान लेकर ऊपर चली गई थी और मैं बेवकूफ की तरह सीढिया देखे जा रही थी लोग आ रहे थे और फटाफट जा रहे थे, कुछ जयपुर की मारवारणे सर ढ़के आई और अपना धाधरा संभालकर फटाफट सीढिया चढ़ गई ...  मुझे बहुत गुस्सा आया ..... आखिर मुम्बईकर कैसे पीछे रह सकता है .... जोश आ गया चक्कर वक्कर भूल सीढियाँ चढ़ने ही वाली थी की उधर से मीना वापस आती हुई दिखी अब तो इज्जत की बात हो गई थी लेकिन उसने कुछ सुना नहीं और  मेरा हाथ पकड़कर धकेलते हुए सीढियाँ चढ़ गई ... लो जी मैँ तो अरामनाल चंगी तरह से सीढियाँ चढ़ गई ...

आगे जाकर क्या देखते है की  राईट साईड पर एक लिफ्ट भी लगी हुई है जो आराम से ऊपर से निचे और निचे से ऊपर आ रही थी और मैँ बेवकूफों की तरह से सबका मुंह देख रही थी फिर हम तीनो जो ठहाका मारकर हंसे की आसपास के लोग देखने लगे ।
इस तरह हमारा जयपुर का शुभारम्भ हुआ ....

 शेष अगले अंक में