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मंगलवार, 19 मार्च 2024

कश्मीर फाईल #भाग 10

कश्मीर फाईल्स # भाग 10


लोकल श्रीनगर # 2
7 सेप्टेंबर 2023
आज हम लोकल श्रीनगर घूमने निकले हैं। पहले गुरु शंकराचार्य मन्दिर गए फिर मुगल गार्डन ओर फिर निशान्त बाग़ । ड्रायवर हमको परी महल और चश्मे शाही गार्डन भी ले जा रहा था पर हम काफी थक गए थे दूसरा हमने अभी तक शिकारा राईड्स नही की थी ।तो हम सब छोड़कर सीधे हाऊसबोट को निकल गए।हमारे ड्रायवर  ने हमको एक शिकारे में बैठा दिया जो हमको लेकर एक खटारे से हाऊसबोट में ले आया।मुझे ये हाऊसबोट बेहद गन्दा लगा पर शायद ऐसे ही होते होंगे हाऊसबोट! ये सोचकर गम पी लिया ओर फ्रेश होकर चाय पी ओर शिकारा राईट्स के लिए निकल गए। थोड़ी धूप फैली थी तो काफी अच्छा लग रहा था। 
कश्मीर का सबसे आकर्षण बस ये शिकारा में घूमना ही हैं।सचमुच बहुत ही बढ़िया एक्सपीरियनस रहा। हालांकि डल एरिया पिछले भाग में बहुत गन्दा था, काई भी जमा थी और थोड़ी थोड़ी बदबू भी आ रही थी फिर भी घूमने में मजा आ रहा था। 

जैसे जैसे दिन छुप रहा था और रात हो रही थी वैसे-वैसे हाउसबोटों की लाईट्स जगमगा रही थी और वो  सब एक स्वपन सा लग रहा था। मुझे ये ज्यादा आकर्षण का केंद्र लगा।और अब पछतावा हो रहा हैं कि मैंने पहले ही दिन शिकारा राईट्स क्यो नही की।

1 घण्टे की शिकारा राईट्स पलक झपकाते ही खत्म हो गई और शिकारे ने हमको हमारे सड़े से हाऊसबोट पर उतार दिया।पर ये क्या!!हमारा हाऊसबोट भी दुल्हन की तरह सजा हुआ था ।और बहुत प्यारा लग रहा था।मैंने हाऊसबोट पर बहुत सी तस्वीरे खिंचवाई ओर कपड़े चेज कर के हम हाल में आ गए जिधर डायनिग टेबल पर हमारा खाना लगा था। पूरे  हाऊसबोट पर 4 कमरे थे विथ बाथरूम के ओर चारो भरे हुए थे।यहाँ ये बढ़िया बात थी कि फोन आ रहे थे और नेट व वाय फ़ाय भी चल रहा था।

हमने मटर पनीर की सब्जी ,रोटी ,दाल और चावल खाये।खाना बहुत टेस्टी था। यहाँ हमने पानी की एक बॉटल खरीदी जो 70 रु की आई। बाकी तो सबकुछ फ्री था।अगर आप ठहरने हाऊसबोट में जाये तो पहले से पानी की बोतल खरीद ले वरना 20 रु कि बॉटल आपको 70 रु में मिलेगी।

खाना खाकर हम अपने पलँग पर सोने चले गए।यहाँ काफी ठंड़क थी। हाऊसबोट काफी पुराना था नीचे कालीन बिछे थे वो भी पुराने थे ।मैंने टूर वाले को कम्पलेण्ड की पर मुझे पता है कुछ नही होगा।

रात को ठंडी बढ़ गई तो हमने मजबूरी में गन्दे कम्बल ओढ़ लिए ओर गहरी नींद में सो गए।कल हमको पहलगाम जाना है।

दूसरे दिन उठे तो बहुत फ्रेश थे ।नहाने का मन ही नही हो रहा था पर क्या करे नहाना भी मजबूरी था तो जैसे तैसे गर्म पानी से ड्राईक्लीन करके हम डायनिंगरूम में आ गए।फटाफट पोहे ओर ब्रेड का नाश्ता किया और सामान लेकर फटाफट रफूचक्कर हुए।वापस शिकारा में बैठकर किनारे पर आए जिधर हमारा ड्रायवर खड़ा था। हाऊसबोट को अलविदा कर हम अपनी गाड़ी में बैठकर  हजरतबल मस्जिद की ओर चल पड़े।

मस्जिद के पास बहुत सी नॉनवेज दुकानों पर कुछ पक रहा था जिससे माहौल में अजीब सी बदबू फैली थी। हम मस्जिद के सामने उतर गए मिस्टर का मन बिल्कुल नही था पर मेरे कारण वो भी उतर गए और हम अंदर गए। अंदर नमाज़ वाले एरिये में हमको जाने से रोक दिया और  नजदीक के दूसरे रास्ते पर जाने को बोला जिधर बड़ा सा गार्डन था।मैं उधर चल दी।मिस्टर भी बड़बड़ाते हुए मेरे पीछे चल दिये मानो वहाँ खड़े रहे तो कोई उनको गोली मार देगा😃😃

आम सा गार्डन था हम देखकर वापस अपनी कार तक आ गए और आगे का सफर हमारा शुरू हो गया।

मिलते हैं पहलगाम में...

 



कश्मीर फाईल#भाग 9

कश्मीर फाईल्स#9

                 
लोकल श्रीनगर #1
7 सेप्टेंबर 2023

आज हमको कश्मीर आये 5 दिन हो गए है।आज इस होटल से हमारा चेक आउट है।4 दिन का टोटल 14 हजार 500 रु देकर हमने इस होटल से बिदा ली।बिदा से पहले मस्त नाश्ता किया और सारा सामान गाड़ी में रखवाकर हम सबसे पहले लाल चौक गए। यहाँ हमारे देश का गौरव हमारा तिरंगा लहरा रहा था । इसका मतलब यह था कि अब हमारा कश्मीर आतंकियों से मुक्त हो गया हैं। अपने तिरंगे को सेल्यूट कर कुछ फोटू खिंचवाकर हम लोग गुरु शंकराचार्य मन्दिर की तरफ चल दिये ।ये मन्दिर एक पहाड़ी पर स्थित हैं।कार से हम थोड़ी दूर उतर गए और आगे पैदल चल पड़े।आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हैं तो भंडारा चल रहा था।साबूदाने की खीर ,आलू के लच्छे तल रहे थे और आने वाले भक्तजन हाथ साफ कर रहे थे।हमने भी लौटने के टाइम भंडारा चखने का फैसला किया और आगे बढ़ गए।

गुरु शंकराचार्य मन्दिर:-- कश्मीर के श्रीनगर में गोपदरी पर्वत पर स्थित एक  शिव मन्दिर हैं। करीब 8वी शताब्दी में जबसे गुरु शंकराचार्य जी इस मंदिर में आये तब से इनके नाम पर यह मंदिर प्रसिध्द हो गया।यह मंदिर समुद्रतल से 300 मीटर की ऊँचाई पर हैं जो करीब 1हजार फीट हैं।।ये केवल पत्थरो से निर्मित है।
करीब 244 सीढ़ियां चढ़कर जब हम मंदिर के सामने पहुंचते हैं तो इतनी ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से इस मंदिर से श्रीनगर शहर और पूरे डल झील का भव्य नजारा दिखाई देता है। मंदिर का गर्भगृह गोलाकार है। मुख्य द्वार से आगे की ओर  सामने बाग स्थित हैं ।आगे गर्भगृह तक पहुँचने के लिए ओर 30 सीढियां चढ़नी पड़ती हैं।

इससे थोड़ी दूर ही एक कुंड है, जिसे गौरी कुंड के नाम से जाना जाता है। हालांकि अब यह कुंड सुख चुका है। मंदिर की सीढ़ियों पर फारसी भाषा में लिखे दो अभिलेख हैं, जिनके अनुसार इस मंदिर की स्थापना 1659 ईसवी में की गयी थी। दूसरे अभिलेख के अनुसार 1644 ईसवी में शाहजहां ने मंदिर की छत और स्तंभ बनवाया था।

खेर जो भी हो ,हम आराम से सीढियां चढ़ते हुए टॉप पर आ गए।सीढियां काले पत्थर की बनी हैं और साईड में इतनी जगह हैं कि आराम से बैठ सकते है इसलिए आराम-आराम से हमने चढाई पूरी की ।प्रवेश द्वार से अंदर आये तो डल लेक का नजारा अद्भुत था।करीने से सजी छोटी-छोटी खूबसूरत नावे नजर आ रही थी।अगर शाम को आते तो हमको जो दृश्य दिखता उसका कोई मुकाबला नही होता । अभी तो अच्छी खासी धूप थी और धूप के कारण फोटू अच्छे नही आ रहे थे।

हम साईड के छोटे से पार्क को देखते हुए आगे बढ़ गए ।आगे बैठने की अच्छी व्यवस्था थी ।थोड़ा आराम कर के हमको ओर 30 सीढियां चढ़नी थी।

मन्दिर के गर्भगृह में बड़ा -सा शंकर जी का पिंड मौजूद था सभी जल चढ़ा रहे थे।हमने भी पूजा अर्चना कर के नीचे के नजारे अपने मोबाइल में कैद किये और वापसी की राह पकड़ी।
चढ़ने से ज्यादा उतरना खतरनाक हैं☺️ जैसे तैसे उतरकर हम भंडारे के नजदीक आये।अभी भी फिजाओ में खाने की खुशबू फैली हुई थी। अभी तक भंडारा चल रहा था।आलू की सूखी सब्जी,खीर ओर आलू के चिप्स लेकर हम सामने के पंडाल में बैठ गए। मिस्टर तो 2 बार खीर ले आये😊 खाना खाकर हम अपनी गाड़ी में बैठकर मुगल गार्डन की तरफ जा रहे थे जो डल झील के सामने  ही था पर मन्दिर के अपोजिट साईड में डल झील का विस्तार काफी लंबा हैं।

25 रु का टिकिट कटवाकर हम बागीचे के अंदर आ गए। बाहर से काफी खूबसूरत मुगल गार्डन अंदर से काफी टूटा फूटा था मरम्मत चल रही थी । मैंने ये गार्डन सन 70 की फिल्मों में बहुत देखा हैं तब इसकी आन ओर बान देखते ही बनती थी। पर अब फूलों के अलावा कुछ खास नजर नही आया।

यहाँ से आगे हम एक ओर गार्डन "निशान्त बाग़" में गए ।इसकी हालत पहले से बहुत ही अच्छी थी।यहाँ कुछ देर बैठे पर इन गार्डन में बैठने की कोई व्यवस्था नही हैं। कश्मीर सरकार को अब डेवलेपमेंट की तरफ भी ध्यान देना जरूरी हैं।यहाँ भी टिकिट वही 25 रु का था। अब तक हम काफी थक गए थे तो आगे के ओर गार्डन न देखकर डायरेक्ट डल झील चल पड़े क्योकि आज का सटे हमारा हाऊसबोट का था।

हाऊसबोट के बारे में आगे पढ़िए । क्योकि बहुत लम्बी पोस्ट हो गई हैं.... तो मिलते हैं हाऊसबोट में:--
क्रमशः...

                 हमारा होटल


 



शनिवार, 16 मार्च 2024

कश्मीर फाइल्# भाग 8

कश्मीर फाईल #भाग 7


#सोनमर्ग (श्रीनगर)
6 सेप्टेंबर 2023

कल हम गुलमर्ग घूमकर आये ।रात हमने आराम से निकाली अब सुबह हम सोनमर्ग जायेगे।सुबह नाश्ता कर हम सोनमर्ग को निकल गए।
सोनमर्ग, गुलमर्ग से भी बहुत खूबसूरत हैं। ऐसा अजित बोल रहा था ।उसकी ये बात मुझको भी सही लगने लगी जब यहाँ बहने वाली नदी हमारे साथ ही इठलाती हुई चल रही थी तो  ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हमसे होड़ कर रही हो कि मैं तुमसे पहले पहुँचूँगी।☺️
पहली बार सड़क के साथ-साथ बहती नदी देखी थी जो तेग वेग के साथ बह रही थी और हम उस नदी के विपरीत दिशा में आगे बढ़ रहे थे।एक जगह  पुलिस ने हमारी कार रोकी तो मैं खुद को न रोक सकी और फ़टाफ़ट नदी की तरफ दौड़ पड़ी यहाँ मैंने ढेर सारे वीडियो बनाये।मौसम बहुत रंगीन था और फिजा में ठंडक थी ।मैंने एक स्वेटर ओर टोपी पहन रखी थी।मन ऐसा हो रहा था कि यहाँ घण्टो बैठा जाय और इस नदी की लहरोँ से वार्तालाप किया जाय।पर अजित बार बार हॉर्न मार रहा था आखिर मन मसोसकर मैं कार में आ गई।
सोनमर्ग पहुँचकर वहाँ अजित ने कार स्टैंड पर लगा दी,अब आगे का सफर हमको घोड़े पर या गाड़ी पर करना होगा।


घोड़े वाले से बात की तो वो 3 हजार में थजी ग्लेशियर ले जा रहा था रास्ते के 1-2 पॉइंट ओर बोल रहा था पर हमने घोड़ो पर जाना बिल्कुल मना कर दिया।


तो एक कार वाला आ गया जो जोजिला पास दिखाने का 10 हजार मांग रहा था।मैंने 3 हजार बोला तो चला गया फिर 8 हजार बोलकर वापस आया ।मगर मैंने 5 हजार लास्ट बोला तो थोड़ा ना-नुकुर करके तैयार हो गया।
अब हम मोहम्मद के साथ एक बढ़िया कार में सवार हो आगे बढ़ गए। मोहम्मद एक बढ़िया आदमी और ड्रायवर था।उसने हमको रास्ते में गाड़ी रोक रोक कर हर जगह दिखाई और उसके बारे में बताया।


अमरनाथ यात्रा किधर से शुरू होती हैं । वो सब जगह दिखाई जिसे बालटाल कहते है। मैंने भी काफी वीडियो बनाये।अमरनाथ यात्रा अब तो कर नही पाऊंगी कम से कम बालटाल देखकर ही दिल खुश कर लूं।


फिर आया जोजिला के काले-काले पहाड़ ओर गहरी खाइयाँ।दूर पहाड़ों पर बर्फ चमक रही थी।सर्दियों में ये रास्ता बंद हो जाता हैं। यही से लद्दाख जाया जाता हैं।


हम जोजिला के रास्ते पर एक जगह रुके जिधर एक बड़ा सी बर्फ की चट्टान पड़ी हुई थी उसमें से पानी बह रहा था।काफी लोग उतरकर यहाँ फोटुग्राफी कर रहे थे।
फिर हम आगे गए वहाँ एक ग्लेशियर था जिस पर कुछ लोग खेल रहे थे।मैं भी उतरकर ग्लेशियर के पास गई पर काफी ठंडी हवाएं चल रही थी। इतने में अचानक धूप गायब हो गई और बारिश की मोटी मोटी बूंदे गिरने लगी।  मैं दौड़कर कार में आ गई वरना भीग जाती।थोड़ी देर में ये गुलजार ग्लेशियर अचानक सन्नाटे में तब्दील हो गया। सब अपनी अपनी कारो में समा गए और आगे बढ़ गए।हम भी बारिश में ही आगे बढ़ गए।


आगे हमको लद्दाख जाने का गेट नजर आया।यही वार मेमोरियल हैं।यहाँ एक छोटा सा रेस्टोरेंट भी था।
अचानक पानी बन्द हो गया और बर्फ गिरने लगी।मैं तो बर्फ देखकर खुशी से झूम उठी ।मैंने कार का दरवाजा खोला और बाहर छलांग लगा दी।बाहर बर्फ गिर रही थी जो मेरे काले स्वेटर पर रुई की तरह चमक रही थी।.मैं झूम-झूम कर नाचने लगी☺️


गीले होने के डर से मिस्टर चिल्लाने लगे और मैं रेस्टोरेंट के अंदर आ गई।इस बारिश से वहाँ का पारा एकदम लुढ़क गया और ठंडी तेज हो गई। मेरा सारा जिस्म ठंडी से कांपने लगा। तब मैंने गर्मागर्म चाय पी ओर एक समोसा खाया। हालत में सुधार आया।
कुछ देर बाद हम लॉट रहे थे।रास्ते पर हल्की हल्की बर्फ गिरी हुई थी ।मौसम में ठंडक थी और धूप वापस निकल आई थी।


आज का सफर पैसे वसूल रहा। रास्ते मे हमने सेव के बागों से सेव् खरीदे 300 रु में 7 किलो।
श्रीनगर पहुँचकर हमको एक गुरद्वारा नजर आया।तो लगे हाथों हम गुरद्वारे में भी चले गए।
शेष अगले भाग में....














शुक्रवार, 15 मार्च 2024

कश्मीर फाइल# भाग6

कश्मीर फाईल#6




गुलमर्ग
भाग#2
5 सेप्टेंबर 2023

आज हम गुलमर्ग की सैर करने निकले है। पिछले भाग में हम नीचे से गंडोले में बैठकर ऊपर आ गए थे। अब आगे का आंखों देखा किस्सा जारी:-----
3 हजार 50 मीटर्स ऊपर पहुँच कर हमने एक खुला मैदान देखा। इसको कोंगडोरी कहते हैं। इधर कुछ सेल्फी पॉइंट बना रखे थे।यहाँ भी पोनी वाले घूम रहे थे आगे के पॉइंट दिखाने के लिए पर हमने मना कर दिया ।हमको यही पर अच्छा लग रहा था। इन खूबसूरत वादियों को निहारना ओर ठंडी फिजाओं को सूंघना ही मेरा मकसद था।यहाँ मैं घण्टों बैठ सकती हूं।यहाँ थोड़ी ठंडी भी थी तो धूप में बैठना अच्छा लग रहा था। हम धूप में फोटू खिंचते हुए इधर-उधर घूम रहे थे ।बड़ा ही प्यारा मौसम था। यहाँ कुछ होटल बने हुए थे।काफी लोग घोड़े पर बैठकर न जाने किधर निकल गए कुछ देर दिखते रहे फिर गुम हो गए। इससे आगे फेज़ 2 का गंडोला हैं जो 14 हजार फीट ऊपर हैं अगर वहाँ जाती तो यकीनन बर्फ मिलती पर वो आजकल बन्द हैं उसका मेंटनेस चल रहा है।
यहाँ बैठकर मुझे फ़िल्म का गाना बार बार याद आ रहा था--" कितनी खूबसूरत ये तस्वीर हैं.. ये कश्मीर हैं ...ये कश्मीर हैं।"
हमने यहां बहुत फोटू खिंचे , चलते हुए गंडोले के नीचे खड़े होकर हमने खूब वीडियो बनाई। आते-जाते गंडोले बहुत अच्छे लग रहे थे। काफी देर बाद जब मन भर गया तो लौटने में ही भलाई समझी । उधर घोड़े वाले का भी बार बार फोन आ रहा था तो हम वापस गंडोले में बैठ गए।
गंडोले से वापसी में मुझे बॉम्बे का एक ग्रुप मिला जिसमें सभी युवा थे।उनमें से एक लड़के ने मुझसे पूछा कि आंटी जी, "गंडोले वाली जगह कितनी दूर है? हम पैदल जा सकते हैं।"
मैंने बोला--"जरा भी दूर नही हैं आराम से जा सकते हो।"
उनके पास खड़ा घोड़े वाला मुझे घूर रहा था । उसके बन्धे बकरे जो मैंने खोल दिये थे ☺️ओर मुझे जोर से हंसी आ गई,मानो मैंने सारे घोड़े वालो से अपना बदला ले लिया हो।😂🤣😂

घोड़े से वापस आ रहे थे तो हमने एक पहाड़ी पर एक सुंदर मन्दिर देखा।तब याद आया कि ये तो वही मन्दिर हैं जिस पर फ़िल्म "आपकी कसम" में राजेश खन्ना और मुमताज पर एक फ़ेमस गीत फिल्माया था।भांग पीकर दोनों मस्त डांस कर रहे थे । ऐसा लगा,मानो कल की ही बात हो---" जय जय शिव शंकर ...कांटा लगे न कंकर... के प्याला तेरे नाम का पिया😂🤣😂
ओर हम भी झूमते हुए घोड़े पर ही मन्दिर की तरफ चल दिये।मन्दिर एक टेकरी पर बना हुआ था ।वहाँ तक जाने के लिए सीढियां बनी हुई थी जिससे हम जैसे लोग आराम से चढ़कर ऊपर जा सकते हैं।
शिव मंदिर:---
यह मंदिर 1915 में महराजा हरी सिंह की पत्नी महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया ने बनवाया था। इस मंदिर की देखरेख एक मुस्लिम परिवार करता है।106 साल पुराने इस शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कश्मीर में तैनात मिलिट्री के जवानों ने किया है।करीब तीन महीनों में सेना ने इस मंदिर की मरम्मत करके इसे फिर से पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए खोल दिया गया था। इस मंदिर में चर्च,गुरद्वारा ओर मस्जिद भी हैं।
सीढ़ियों से ऊपर चढ़कर हमें शानदार सीनरी के दर्शन हुए। नीचे खड़े घोड़े ओर गाड़ियां नन्हे नन्हे खिलोने जैसे प्रतीत हो रहे थे। चारो ओर खूबसूरत मखमली हरियाली बिछी थी मानो किसी ने हरी चादर बिछा दी हो।प्रकृति का ये रूप कितना दिलकश था।
ऊपर शंकर जी का मंदिर था। रंगरोगन नये जैसा ही लग रहा था।कुछ देर बैठकर हम नीचे उतर गए ।वही गाड़ी मंगवा ली और उसमें बैठकर हम श्रीनगर को चल दिये।
कल हम सोनमर्ग चलेगे ।तो मिलते हैं कल...










गुरुवार, 14 मार्च 2024

कश्मीर फ़ाइल भाग#5

कश्मीर फाईल #भाग 5
#गुलमर्ग (श्रीनगर)
भाग#1
#)गंडोले की सेर
5 सेप्टेंबर 2023


कल हमने दुधपत्री देखी।इतना खूबसूरत हरा-भरा मैदान इसके पहले मैंने खजियार मैं देखा था पर वहाँ कलकल करती ऐसी नदी नही थी। जबकि दुधपत्री की पहचान ही ये नदी हैं।
सुबह मैं गुलफ़ाम बनी खुशबू उड़ाते हुऐ जब डायनिंगहॉल में पहुँची तो गुजराती फेमिली नाश्ता कर रही थी।उनको मैं दूधपत्री के किस्से सुनाने लगी, पर उनकी एक बात सुनकर मेरी सारी खुशबू पल भर में उड़न छूं हो गई।
हुआ यूं कि, कल गुजराती फॅमिली सोनमर्ग जा रही थी पर हम दुधपत्री गए तो उन्होंने भी सोनमर्ग केंसल कर के दुधपत्री का ही प्रोग्राम बनाया और हमारे बाद वहां पहुँचे गए उनका ड्रायवर जो कश्मीरी था वो थोड़ा  चालक निकला उसने उनको कार से ही अंदर नदी तक सैर करवा दी वो भी सिर्फ 300 रु में ? ओर आराम से भी ; जबकि हमने 3हजार 200 ₹ खर्च किये और परेशानी से घोड़ो पर सवारी की😥 तब मुझे याद आया कि मैंने उनकी गाड़ी सड़क मार्ग से जाती हुई देखी थी और उन्होंने भी मुझे घोड़े पर देखा था। पर मुझे क्या पता कि वो गाड़ी इन लोगों की ही थी।  ये इसलिए लिख रही हूं कि यदि आप लोग कोई जाओ तो ध्यान रखे।
अब आज......
आज हम गुलमर्ग जायेगे।सुबह नाश्ता कर हम गुलमर्ग को निकले। गुलमर्ग श्रीनगर से 52 km दूर हैं।जो 2 ढाई घण्टे में कार द्वारा पहुँचा जा सकता हैं। गुलमर्ग कश्मीर का एक फेमस हिल स्टेशन हैं। समुद्रतल से इसकी ऊंचाई 8,690फीट हैं।
यहाँ की केबल कार एशिया की सबसे ऊंची केबल कार परियोजना हैं। हमने गंडोला का टिकिट पहले से ही ऑनलाइन खरीद लिया था।  फेज़ 1 का टिकिट 810 रु का ओर फेज़ 2 का  टिकिट 1050 ₹ का था। हमारे टाइम फेज़ 2 का गंडोला  चल नही रहा था।उसकी रिपेरिंग चल रही थी।
खूबसूरत दृश्यों को देखते हुए हमारा कारवां बढ़ता हुआ गुलमर्ग पहुँच गया।हमारी टेक्सी जैसे ही स्टैंड पर पहुँची घोड़े वालो की भीड़ हमारे ऊपर मक्खियों की तरह भिनभिन्नाने लगी।पर आज हम थोड़ा सतर्क थे कोई धोखा खाने को तैयार नही थे।पर हाय री किस्मत🤦धोखा तो मिलना ही था!
हमने सोचा था कि हम लोग बैटरी कार से गंडोले तक चले जायेंगे और पोनी नही करेंगे पर कश्मीरियों की चालाकी देखो, 2 km पहले ही टैक्सी स्टैंड बना डाला,जिधर हमको अपनी टैक्सी खड़ी करनी थी और हमारा ड्रायवर इतना शरीफ बन्दा था कि न अपना दिमाग इस्तेमाल करता था न अपने हाथ पैर 🙆
अब गंडोले तक हम जैसे लोग न पैदल जा सकते थे, न  पोनी पर, ओर अगर पोनी करे तो लुटे।
इधर पोनी वाला हमको गंडोले के पास छोड़ने का 4 हजार मांग रहा था।फिर मोलभाव कर के हमने 2 हजार में पोनी की ओर 'मरता क्या न करता' वाली स्थिति में हम पोनी से चल दिये।चलने के टाइम 2 आदमी  "मदद" करने हमारे आसपास चलने लगे। दोनों ने हम दोनों के घोड़े सम्भाल लिए।
 मैंने पूछा ---"आप लोग कौन?"
वो बोले– " हम मददगार है आपको सही सलामत घुमाकर यही छोड़ेंगे"
मैंने बोला---" हम टूटे फूटे हैं क्या?जब बॉम्बे से कश्मीर आ सकते हैं तो यहाँ अकेले क्यों नही घूम सकते।"  "वैसे आप लोग फोकट में चल रहे हो तो चलो"--मैंने बोला।
वो मुस्कुराये ओर तेजी से बोले--"अरे मेमसाब! जो मर्जी हो दे देना" अब मेरी हंसने की बारी थी😂😂
बड़ी मुश्किल से मैंने उनसे पीछा छुडाया।
आगे हमको फोटू वाले ने पकड़ लिया। "1 फोटू का 30 रु  हैं मेमसाब!" उससे भी बड़ी मुश्किल से पीछा छुडाया। अब हम गंडोले तक पहुँच गए। यहाँ के कर्मचारी बड़े अच्छे निकले ,क्योकि 50-60 लोगो की लाइन लगी थी उन्होंने  हमको शार्टकट रास्ते से अंदर जाने दिया और गंडोले में भी दूसरे लोगों को रोककर हमको पहले बैठाया।यहाँ Sr. सिटीजन होने के कारण थोड़ी Vip फीलिंग आई🤪
कश्मीर में पुलिस और मिलिट्री आपकी बहुत सहायता करते हैं।पर घोड़े के मालिक और टैक्सियों के मालिक खून चूसने वाली जोंक हैं।ये लोग पूरी तरह पर्यटको का खून चूसते हैं। परन्तु कश्मीर का आम आदमी जिससे पैसे का कोई व्यवहार नही हैं वो बहुत हेल्प करता हैं।
गंडोले में बैठकर हम ऊपर जा रहे थे। रास्ते के खूबसूरत दृश्य देखकर शुरू की कड़वाहट काफी कम हो गई थी। खूबसूरत पहाड़, मिट्टी के घर ओर टेढे मेढे रास्ते काफी खूबसूरत दिख रहे थे।
ऊपर पहुँचकर क्या देखा ।ये अगले एपिसोर्ट में।
मिलते हैं शब्बाखेर✋

गंडोले में जाने के लिए

गंडोले की लाइन में

गंडोले के अंदर