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शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

शिव के 5 तत्वों वाले मन्दिर

तमिलनाडु डायरी ★3
तन्जोवर
15 जनवरी 2026



12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची।सुबह हमने श्री रँगनाथ स्वामी के अलावा जम्बुकेश्वर मन्दिर ओर 3दिव्यदेशम मन्दिरो के दर्शन किए अब आगे:---


रात हमने तन्जोवर के एक होम स्टे में गुजारी।जो भगवान शंकर के एक मन्दिर के सामने था।


सुबह नाश्ता कर हम तन्जोवर का फेमस ब्रह्तेश्वर मन्दिर देखने को निकले।


ये मन्दिर यूनोस्को कि धरोहर है।
9वीं शताब्दी के अंत मे बना ये मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर की जटिल नक्काशी और भव्य कलिंग शैली की वास्तुकला अद्भुत है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का अनोखा मिलन है।


इस मन्दिर के शीर्ष पर लगा पत्थर 80टन वजनी है। यही रहस्य है इस मन्दिर का कि 216 फिट की ऊंचाई वाले इस मन्दिर के शीर्ष पर ये 80 टन का पत्थर कैसे रखा होगा।
मन्दिर सचमुच बहुत ही विशाल है।बलुआ पत्थरो से निर्मित ये देखने लायक मन्दिर है।


मन्दिर में भगवान शिव का विशाल लिंग है और सामने एक विशाल नन्दी की प्रतिमा भी है।


2 घण्टे हम इस विशाल मन्दिर की भव्यता परखते रहे और प्रभावित होते रहे।हर पल, हर चीज चौकाने वाली थी।यहाँ काफी अंग्रेज भी घूम रहे थे।
यहाँ से हम 36 km दूर कुम्भकोलम गए ।यहाँ के एक मन्दिर ऐरातेश्वर  भगवान शिव का मन्दिर है  पर 12 बज गए थे तो ये मन्दिर बन्द हो गया था ।हमने मन्दिर के प्रागण्ड में स्थित हाथी,घोड़ो के साथ कुछ फोटू खिंचाए ओर आगे निकल गए ।इस मन्दिर के सामने देवनायिकी अम्मन मन्दिर भी बन्द था तो हम आगे बढ़ गए। आगे हम चक्रपानी मन्दिर , गंगा चौलाई मन्दिर भी गए ये सब 4 बजे के बाद खुलने वाले थे। तो कुछ समय इंतजार भी किया।


इनकी बाद हमने विष्णुजी के 3 दिव्यदेशम मन्दिरो के दर्शन किये। बहुत ही भव्य मन्दिर थे।मन खुश हो गया।


रात को हम  कुम्भकोलम से चिदम्बरम 52km को चल दिये।रात यही एक होम स्टे में बिताई।


शेष अगले भाग में....









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