मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

मेरी वन्डरफुल यात्रा भाग=4


मेरी वंडरफुल यात्रा
भाग= 4 
(राजस्थान डायरी)
(अंतिम)

1 अक्टूम्बर 2019

29 सितम्बर को बॉम्बे से इंदौर उज्जैन होते हुए  माता बगुलामुखी के दर्शन करके रात मंदसौर में गुजारकर हम सुबह चारभुजा जी और कांकरोली जी के दर्शन करते हुए आज श्रीनाथजी पहुंच गए ,सुबह श्रीनाथजी के दर्शनों का लाभ उठाकर हम एकलिंग जी पहुंचे ...
अब आगे चित्तौड़गढ़ की तरफ रुखसत हुए....

एकलिंग जी के दर्शन कर के हम चित्तौड़गढ़ चल दिये
करीब 1बजे हम चित्तौड़ के किले में प्रवेश कर रहे थे...चित्तौड़ का किला एक पहाड़ी पर स्थित हैं और अंदर अभी भी लोग रहते है काफी मजबूत दिखाई दे रहा था हम विजयस्तम्भ पर उतर गए यही रानी पद्मावती ने अपनी दासियों के साथ सामूहिक जोहर किया और ख़िलजी के आगे घुटने नही टेके थे , यही कृष्ण भक्त मीराबाई का भी मन्दिर हैं ...
चित्तौड़ का किला अंदर से नही देख सकी उसको फिर कभी देखूंगी।

चित्तौड़ के किले से उतरकर हम बाजार में  कल्पना रेस्टोरेंट में गए क्योंकि भूख लग रही थी और दाल बाटी चूरमा खाने को पेट मचल रहा था और जीभ पानी पानी हुई जा रही थी... 99 रु. में अनलिमिटेड दाल बाटी सब्जी और चटनी थी ,चूरमा अलग से लेना था आधी कटोरी देशी घी से भरी थी और हम सभी टूट पड़े थे ...बहुत ही टेस्टी खाना था मैंने 2 बाफले खाये थे उससे ज्यादा खाने का मन था लेकिन दूसरा पेट कहा से लाऊँ 😢 पेट का सवाल था जी😜😜😜

अब पेटपूजा करके हमने दूजा काम किया रुक्मा की बेटी का ससुराल यही है उनसे मिलना भी जरूरी था तो वही बाजार में उनके घर पर दस्तक दी और थोड़ी देर आराम कर चाय पीकर हम निकल गए अपने अगले ओर आख़री डेस्टिनेशन पर...

सांवरिया जी
करीब 5 बजे हम सांवरिया सेठ मन्दिर में प्रवेश कर रहे थे ... मन्दिर नया बना है और मन्दिर की बनावट बेजोड़ हैं ये काफी बड़े प्रागंण में बना हैं
ये मन्दिर भी कृष्ण को समर्पित हैं ...इस बार किशन कन्हिया के दर्शन बहुत हुए।
मन्दिर के बाहर ही काफी दुकानें बनी हैं जिधर भांति भांति की वस्तुएं मिलती हैं ,हम काफी देर इन दुकानों की चीजों को देखते रहे और कुछ खरीदारी भी करते रहे।

1घण्टा इधर गुजारकर हम सीधे चल दिये मंदसौर की ओर, यहां मुझे अपनी बिछड़ी सहेली से मिलना था करीब 44 साल बाद मैं अपनी सहेली से मिल रही थी...

मेरे ज़ेहन में अभी तक उसकी सलोनी तस्वीर ही तैर रही थी...लेकींन समय ने उस सलोनी सूरत को झुर्रियों से सजा दिया था.. पर मन उसका आज भी मेरे लिए प्यार से लबरेज़ था... भगवान की लीला अपरम्पार हैं उमर का तकाजा किसी को कम तो किसी को ज्यादा होता हैं और यहां तो थोड़ा ज्यादा ही था 😢 चंद पंक्तियां जसबीर के लिए:--

"दोस्ती अब पुरानी हो गई हैं----
हैं वही सखी,
पर अब ओर भी प्यारी हो गई हैं---
समय ने दी हैं अनगिनत सोगातें --
चेहरा तो वही है ,
पर लकीरें उसको बहुत सारी  हो गई हैं ---।"😢

फिर भी उसके साथ गुजारे बहुत सारे पल याद करके उससे गले मिल मैंने इंदौर की ओर प्रस्थान किया ..दिल बहुत उदास था कुछ भी समझ नहीं  आ रहा था...रह- रहकर गुजरा जमाना याद आ रहा था आंखों से आँसुओं की धारा बह रही थी और दिमाग सुन्न था .. 
ओर इसी चक्कर में मैं अपने दूसरे fb दोस्त सुनील से मिल नहीं सकी इसका मुझे बहुत अफसोस हुआ...
कार में सन्नाटा फैला हुआ था सब सो रहे थे और मेरा दिमाग सायकिल पर सवार जसबीर ओर मेरे आसपास दौड़ रहा था...
"कॉलेज के दिन याद आ रहे थे कैसे गले मे बांहे डाले हम सायकिल पर सवार गाने गाते हुए कॉलेज में जाते थे ... लड़के रिमार्क कसते थे ,लेकिन हमको कोई फर्क नही पड़ता था.. लोग हमारी दोस्ती की मिसाल देते थे ? 
वो भी क्या दिन थे...दिन - दुनिया से बेख़बर हमारी दोस्ती की जड़े बहुत मजबूत थी लेकिन उसको समय ने तोडा जब मैं इंदौर आ गई और  फिर उससे कभी मिल नही सकी .. ।
वो तो भला हो मेरे fb दोस्त सुनील का जिसने गुम हुई जसबीर को फिर से जिंदा कर दिया और उसका पता ढिकाना ढूंढकर मुझे खबर किया...  आज सुनील के कारण मैंने दोबारा जसबीर से मुलाकात की लेकिन, मैं उस भले इंसान से नही मिल सकी जिसने मेरी सखी को ढूंढा था... क्योंकि मेरे साथियों को उसी दिन इंदौर पहुंचना था और मंदसौर में ही रात के 9 बज रहे थे जबकि इंदौर का सफर अभी भी 3 घण्टे का ओर था ..
खेर, अगली बार मैं फिर से मंदसौर जाउंगी ओर सबसे मिलूँगी।ये मेरा वादा हैं👍
 वीर बालक मद्धम आवाज़ में अपने पसंदीदा गाने गुनगुना रहा था ओर सभी थके हुए लोग गहरी नींद में सो रहे थे लेकिन मेरी आँखों में नींद का कोसों दूर तक पता नही था मैं अपने गुजरे जमाने मे अभी तक विचरण कर रही थी... फिर रात के 2 बजे इंदौर आ गया और मुझे पता ही नही चला...हम सब अपने ठिकाने पहुंच गए थे लेकिन मेरा दिल अभी भी उदास था😢
इसतरह ये 3 दिन का सफर समाप्त हुआ👏

  
               दाल बााटी चूरमा




           
     यहां रानी पदमावति ने जोहर  किया  था          

                    सांवरिया जी

                     सांवरिया जी

                    सांवरिया जी
               दूसरे दिन मेरीी वापसी

बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

मेरी वंडरफुल यात्रा भाग =3


मेरी वंडरफुल यात्रा
भाग= 3
(राजस्थान डायरी)
1 अक्टूम्बर 2019

बॉम्बे से इंदौर उज्जैन होते हुए  माता बगुलामुखी के दर्शन करके रात मंदसौर में गुजारकर हम सुबह चारभुजा जी और कांकरोली जी के दर्शन करते हुए आज श्रीनाथजी पहुंच गए ।अब आगे...

हमको श्रीनाथजी में रूम बढिया मिले ,सुबह मैं तो आराम से उठी जबकि सब लोग सुबह 6 बजे श्रीनाथजी के दर्शन कर आये जिसे मंगला -आरती बोलते है।

लेकिन मैं फ्रेश होकर साढ़े सात बजे के दर्शन को निकली...मुझे भी भव्य दर्शन हुए .. ऐसा लगा मानो खुद मुरलीमनोहर मुझे निहार रहे है... साक्षात प्रभु से साक्षात्कार हो रहा था और अनायास मेरी पलकें गीली हो गई 😢मुझे ऐसे अनुभव बहुत ही कम होते हैं क्योंकि मैं ज्यादा भक्ति में लीन होने वालों में से नही हूँ।☺️

श्रीनाथजी के दर्शन कर हम वही बाजार में कुछ खरीदारी करने लगे,न चाहते हुए भी मैंने एक छोटी सी मूर्ति श्रीनाथजी की खरीद ही ली ।

"श्रीनाथजी"
ये मन्दिर उदयपुर से 48 km दूर है
 पुष्टिमार्गीय वैष्‍णव सम्प्रदाय की ये प्रमुख पीठ हैं यहां सैकड़ो वैष्णवी श्रध्यालू रोज दर्शन करने आते हैं ये मन्दिर 337 साल पुराना हैं।
दर्शन के बाद हमने वही बैठकर एक होटल में सुबह का नाश्ता किया वही इंदौरी पोहे ओर अहमदाबादी फाफड़े ओर मीठी कड़ी.. भूख बहुत लग रही थी इसलिए फोटू नही ले सकी।
श्रीनाथजी की यात्रा समाप्त होते ही हम चल दिये गोवर्धन परिक्रमा करने ...पूरा गोवर्धन पर्वत का चक्कर लगाकर हम एक ऐसी जगह आये जहां पर विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा के दर्शन हुए ये प्रतिमा भोलेनाथ की थी 351 फिट ऊंची लार्ड शिवा की ये मूर्ति विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा  हैं..तपस्या में लीन शिव शम्भू की ये प्रतिमा देखने लायक थी। ये हमको हाइवे से ही नजर आ रही थी।

"एकलिंगजी महादेव"
यहां से निकलकर हम चल दिये एकलिंगजी के भव्य मंदिर में जो भगवान शिव को ही समर्पित हैं.. यह मंदिर उदयपुर से 18 km उत्तर में बसा हैं ये खूबसूरत मन्दिर 2पहाड़ियों के बीच स्थित हैं ।
मेवाड़ के राजाओं के शिव आराध्य देवता थे ओर वो अपने हर युध्य में जाने से पहले इस मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते थे।
जब हम यहां पहुंचे तो सुबह के 10 बज रहे थे और मन्दिर खुलने का टाईम साढ़े 10 था जो हमको यहां का एक बोर्ड बता रहा था..यहां सारा सामान हमको एक लॉकर में जमा करना पड़ा क्योंकि अंदर कुछ भी ले जाना मना था, पता नही इन मंदिरों में मोबाइल ले जाना और फोटू खींचना क्यो मना होता हैं।😢

अंदर मन्दिर बहुत ही खूबसूरत बना हुआ था उसकी नक्कासीदार डिजाइन मन को मोह गई ...अंदर कई छोटे छोटे मन्दिर थे ओर सभी एक से बढ़कर एक👍
एकलिंग जी के मंदिर की भव्यता देखकर फोटू न उतारने का अफसोस जरूर हुआ लेकिन इतने खूबसूरत मन्दिर देखने का जो सौभाग्य मिला उसने अफसोस के सारे रंज धो दिए।
ओर यहां के बाद हम चल दिये चित्तौड़गढ़....
शेष आगे----

                     दामोदर धाम
 

                    एकलिंगजी

शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

मेरी वंडरफुल यात्रा = भाग2

मेरी वंडरफुल यात्रा
भाग=2
(राजस्थान डायरी)
30 सितम्बर 2019

बॉम्बे से इंदौर उज्जैन होते हुए  कल हमने नलखेड़ा में माता बगुलामुखी के दर्शन किये और रात को मंदसौर में आराम किया अब आगे...

रात मेरी तो मजेदार गुजरी...सुबह सबसे देर से उठने वालों में मैं ही थी😜
सुबह हम सब राजा बाबू बनकर 8 बजे भीलवाड़ा के लिए निकल पड़े...
यहां आपको बता दूं कि मंदसौर शहर मेरे लिए नया नही है ये Mp का जिला हैं..यहां भगवान शिव की पशुपतिनाथ की मूर्ति नेपाल के बाद दूसरे नम्बर पर आती हैं और इसे #काला_सोना यानी अफीम की खेती के लिए भी जाना जाता हैं... 

मैंने यहां स्कूली शिक्षा 9th से कालेज की शिक्षा BA सेकण्डियर तक कि पढ़ाई की है.. मेरे पापा यहां पुलिस डिपार्टमेंट में काम करते थे.. सन 1976 में  उनके रिटायमेंट के बाद  मैंने मंदसौर शहर छोड़ दिया था ओर अपने पैतृक घर इंदौर चली आई थी ... तब से मैंने इस शहर में आज अपना कदम रखा हैं😀 

मेरी जिंदगी में इस शहर की कुछ  अच्छी यादें शामिल है, जो बरबस याद आ गई..चलते चलते नई आबादी का पुलिस स्टेशन देखा जहां मैंने कई साल गुजारे थे..आज वो पुलिस हेडक्वार्टर बन चुका है... फिर अपना स्कूल और कॉलेज भी देखा काफी कुछ बदल गया था लेकिन फिर भी वो मेरा शहर था जहां मेरी किशोरावस्था गुजरी थी ...आंखों में नीर उतर आया और मैंने सजल आंखों से, आंखों ही आंखों में उन गुजरे पलों को नमन किया और आगे बढ़ गई..😢

ओर अब हम भीलवाड़ा की तरफ तेजी से जा रहे थे...रास्ते में एक जगह रुककर हमने पोहे का नाश्ता किया और करीब 12 बजे भीलवाड़ा पहुंच गए ।
भीलवाड़ा से हम दोपहर का खाना खाकर करीब  3 बजे श्रीचारभुजा जी के मन्दिर की तरफ चल पड़े...

चारभुजाजी
 एक ऐतिहासिक एवं प्राचीन हिन्दू मन्दिर है... जो राजस्थान के राजसमंद जिले के कुम्भलगढ़ तहसील के गढ़बोर गाँव मे स्थित हैं.. कुम्भलगढ़ का किला भी काफी फ़ेमस हैं लेकिन वो फिर कभी देखेंगे।
चारभुजा जी उदयपुर से 112 km ओर कुम्भलगढ़ से 32 km की दूरी पर हैं... यह मेवाड़ का प्रसिध्द  तीर्थ स्थल हैं...यहाँ की मूर्ति अनेक चमत्कारों से भरी पड़ी हैं इस मूर्ति को बद्री नारायण के नाम से भी जाना जाता हैं।
चारभुजा जी के दर्शन करने के बाद हम भगवान कृष्ण के मंदिर #कांकरोली की तरफ चल दिये...

कांकरोली
उदयपुर से मात्र 62 km स्थित यह मंदिर राजसमन्द शहर में है इसको द्वारकाधीश मन्दिर भी कहते है यह मंदिर 1676 ईस्वी में राजा राजसिंह ने बनवाया था यह मन्दिर वैष्णव वल्लभाचार्य सम्प्रदायजी के अंर्तगत आता हैं ...मन्दिंर के नजदीक ही  राजसमन्द झील उपस्थित है।
 ओर यहां पर प्रसिद्व जे.के.टायर फेक्ट्री भी हैं ।
कांकरोली में भगवान कृष्ण अपने बाल रूप में मौजूद है।
कहते है 2015 में मन्दिर के गर्भगृह में भयंकर आग लगी थी जिससे मन्दिर के गर्भगृह में काफी नुकसान हुआ था ।
हम जब मन्दिर में पहुंचे तो बारिश ने माहौल खराब कर रखा था शाम के साढ़े 6 बज रहे थे और मन्दिर के पट सवा सात बजे खुलने थे ,तब तक हमने मन्दिर के पिछवाड़े स्थित झील का मुआवना किया...काफी बड़ी झील थी लेकिन बारिस के रहते हमने दूर से ही झील का आनंद लिया और मछलियों को आटे की गोलियां खिलाई...करीब 7:15 पर मन्दिर के पट खुले ओर हमने मन्दिर के अंदर जाकर भगवान कृष्ण की मूर्ति के दर्शन किये .. यहां भगवान कृष्ण को पान के बीडे का भोग लगाया जाता हैं जो बाद में पैसों के द्वारा खरीदा जाता हैं ... रुक्मा कहीं घुस कर वो पान के बीडे हमारे लिए ले आई जिन्हें हमने चाय पीने के बाद खाया..
करीब 8 बजे तक हम मन्दिर में थे फिर नाथेद्वारा की तरफ चल दिये।

यहां आकर हमने मन्दिर के पास ही दामोदर गेस्ट हाऊस में  सीयूट लिए जहां 3 कमरे थे और किराया नाममात्र का यानी सिर्फ 1हजार रु.था ... रूम में समान रखकर हम बाज़ार में निकल पड़े पहले खाना खाया फिर गरमा गरम दूध का सेवन किया...बारिश अब कम हो गई थी।

दिनभर की थकान आंखों में उतर आई थी और हम सब लोग निद्रादेवी के आगोश में समाते  चले गए..
शेष कल...


 

 




              कांकरोली मन्दिर



बुधवार, 7 अक्टूबर 2020

मेरी वंडरफुल यात्रा =भाग 1


★मेरी वन्डरफुल यात्रा★
      भाग=1
(राजस्थान डायरी)
28 सितम्बर से 2 अक्टूम्बर तक।

29 सितम्बर 2019
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25 सितम्बर को अचानक मेरी बचपन की सखी रुक्मा का फोन आया..."चल, श्रीनाथजी के दर्शन करते हैं।"
"कब"?
"28 को निकल रहे हैं हम 6 लोग हैं तुझे मिलाकर 7 हो जायेगे,टवेरा गाड़ी की है जो खर्चा होगा आपस में मिल बाट लेंगे"
स्किम पसन्द आई लेकिन सिर्फ 2 दिन में कैसे निकलू सोचने की बात थी फिर अपना जुगाड़ू दिमाग लगाया और सबसे पहले बहु से पूछा उसने ग्रीन सिंग्लन दिया तो समझो किला फतेह हुआ...अब मिस्टर को पटाना था...थोड़ी चूं-चाँ के बाद परमिशन मिल गई अब बेटे को टिकिट करवाने का बोला तो 3और 2 Ac फूल थे सिर्फ सिलिपर में Rac था तो मैंने श्रीनाथजी का नाम लेकर टिकिट निकलवाने का बोल दिया ..घूमने के लिए तो मैं नीचे फ़र्श पर भी बैठने को तैयार हूं ☺️ 

अब तक सबकुछ ठीक चल रहा था फिर तैयारी करने में जुट गई और 28 की रात को अपने नियत समय पर बॉम्बे सेंट्रल से इंदौर की #अवंतिका एक्सप्रेस" पकड़ ली...

29 की सुबह इंदौर में आँखें खुली 10 बजे स्टेशन से ऑटो पकड़कर सीधे अपनी सहेली रुकमा के घर पहुंची... पहुंचकर फटाफट राजाबाबू बनकर तैयार हो चल दिये एक बड़ी गाड़ी में सवार हम 6 लोग, 1सवार हमको उज्जैन में मिलना था तो हम उड़ चले इंदौर से उज्जैन की ओर.. 

सुबह का सुहाना सफर ओर बारिश के बाद जंगल का हराभरा माहौल...दिल को अजीब-सा सुकून दे रहा था.. इस बार बारिश ने Mp में अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे तो चारों ओर भयंकर पानी भरा हुआ था ,खेतों ने ओर पानी पीने से साफ इंकार कर दिया था लिहाजा पानी खेतों में ऐसा भरा हुआ था कि किसी ने अभी -अभी गिलास से पानी डाला हो; फिर भी फ़िजा में एक अजीब सी खुशबू तैर रही थी ..मन प्रसन्न हो अंगड़ाई ले रहा था ...उस पर 4 औरतों की कचर -पचर ओर तेज गीतों की स्वरलहरी फ़िजा में रंगीनियां बिखेर रही थी...
उज्जैन पहुंचकर 1 मेम्बर को साथ लिया और उनके घर पर गरमागरम चाय पीकर हम उज्जैन शहर को अलविदा बोल आगे बढ़ गए।

रास्ते में इंदौरी #पोहे ओर #कचौरी का गरमा गरम नाश्ता किया और जा पहुंचे नलखेड़ा जिला आगर एम. पी. में स्थित माँ बगलामुखी सिध्दपीठ के मंदिर में...

आज नवरात्री का पहला दिन था ओर हम बगलामुखी माता जो तंत्र - मंत्र की सिद्ध माता है उसके दर्शनों से  निहाल हो गए ... 
जय माता की👏

मन्दिर में ज्यादा भीड़ नही थी..बहुत आराम से दर्शन किये ढ़ेर सारे फोटू क्लिक किये और माता के भण्डारे पर भी हाथ साफ किया.. टेस्टी साबूदाने की खीर ओर साबूदाना फरहाली खाकर बाहर निकले ही थे कि Tv रिपोर्टरों ने घेर लिया एकदम Vip जैसी फिलिंग आ रही थी...हम भी खुद को Vip समझकर इंटरव्यू देने लगे..आखिर एन. डी. टीवी का इंटरव्यू था,साथ ही लोकल एम. पी. ओर राजस्थान के टीवी चैनल्स भी थे...! फिर क्या था, हमारा धुंआधार इन्टरव्यू शुरू हुआ...
--- - --- -- @#!😂

अब हमारा अगला डेस्टिनेशन था राजस्थान में भीलवाड़ा..!
यहां हमारा निजी काम था सो जाना जरूरी था .. लेकिन एम. पी. ओर राजस्थान में इस साल अत्यधिक बारिश होने के कारण सड़कें लापता थी,चारों ओर कीचड़ ओर गढ्डों का साम्राज्य फैला हुआ था और हमारी डोंगी डगमग डगमग होये जा रही थी...दचकों से पिछवाड़ा सुन्न हो गया था जो पीछे बैठे थे उनका तो खुदा गवाह था 😢
फिर भी हमारा वीर बालक गाड़ी को खें कर आराम से गानों का लुत्फ़ उठाते हुए बड़ी सफाई से गाड़ी को गढ्डों से बचाता हुआ निकाल रहा था।
खेर, इन खूबसूरत बलखाती सड़कों की नदारती के रहते हम भीलवाड़ा न जा सके..सुबह तो सब डींगें हांक रहे थे कि आज हम भीलवाड़ा होकर रात को श्रीनाथजी में आराम करेंगे और इधर हम अभी तक एम. पी.में ही टहल रहे थे...
" एम पी गजब हैं"😂😂😂

बार बार यही गाना दिमाग में बज रहा था..
"कांग्रेस सरकार की जय👏

रात के करीब 8 बज रहे थे और जो सफर दिन में सुहाना था अब भयानक हो गया था .. फिजायें सब चारा खाने निकल गई थी और झिंगरु अपनी टोली लिए आ चुके थे... चारों ओर झींगुरुओ की भयंकर आवाज़ गूंज रही थी...कई जगह तो मेढ़क बाबा भी उनके साथ अपनी आवाज़ मिला रहे थे...और हम सब ऐसे चुप बैठे थे मानो हमने कोई भूत देख लिया हो?

 हम अभी तक मंदसौर (Mp) भी नहीं पहुंचे थे .. जबकि आज हमको राजस्थान पहुँच जाना था ।अचानक सबने मंदसौर ही रुकने का प्लान बनाया क्योंकि रात के अंधेरे में बारिश के मौसम में बाहर गाड़ी में सेफ नहीं था.. सड़कें टूटी थी..पुल बह गए थे.. इसलिए सह सहमति से आगे न बढ़कर हमने मंदसौर ही ठहरने का फैसला किया... 
"भैय्या जी की जय!"
क्योकि हमारे साथ जो भैयाजी चल रहे थे उनके भाई का घर यही था... रुकमा के पड़ोसी भाई साहब ने आननफानन में सारा बंदोबस्त फोन पर ही कर लिया और हम रात 11 बजे काफी मशक्कत के बाद खाना खाकर सोने की तैयारी में लग गए ... 
"वो कैसे?"
तो हुआ यू की..  किस्मत से भईया जी के छोटे भाई मंदसौर में ही रहते हैं लेकिन अभी अमेरिका अपने बेटे के पास गए हुए हैं ओर उनके घर की चाबी पड़ोसी के पास थी सो हमने पड़ोसी से चाबी ली ओर होटल से पैक करवाया हुआ खाना खाया और हमारा आज का ठिकाना मंदसौर में पक्का हुआ। 
इस तरह हींग लगी न फिटकरी ओर रंग भी आया चोखा!!
बाकी कल सुबह उठकर , आज बहुत थक गई हूँ...😃
गुडवाली नाईट👍

  





 


                    हमारी बुजुुर्ग मंडली😊


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