मेरी जगन्नाथ पुरी की यात्रा
भाग★1
5 फ़रवरी 2026
भगवान की लीला अपरंपार है। कहते है जब तक उसका बुलावा नही आता आप जरा- सा भी सरक नही सकते।
मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब एक ग्रुप के साथ 2025 के दिसम्बर महीने में क्रिसमस पर पुरी जाने का हमने सोचा, तो क्या पता था कि हमारी यात्रा कैसे होगी ? कब होगी?
तब अक्टूम्बर की सुबह ओपनिंग डेट पर रिजर्वेशन करवाने खिड़की पर पहुँचे तो पता चला कि AC की सीनियर सिटीजन की सारी टिकिटे बुक हो चुकी है । सीनियर सिटीजन की सीट ही हम लेते है क्योकि तभी हमको नीचे की बर्थ मिलती है।
अब, हम बगैर रिज़र्वेशन के घर आ गए और जगन्नाथपुरी का प्रोग्राम केंसिल कर दिया। परन्तु मैं हारने वालों में नही हु इसलिए आखरी सांस तक लगी रहती हूं। मै ऑनलाइन रिजर्वेशन खँगोलने लगी आखिर में मुझे 22 दिसम्बर की ही 3rd Ac की 2 सीट सीनियर सिटीजन की दिख ही गई। मैंने बगैर एक पल गवाये फटाफट दोनों सीट हड़प ली और निश्चिंत हो गई।लगा कोई जंग जीत ली हो।
अब तो मामला फतेह समझो।
अक्टूम्बर में टिकिट करवाकर हम निश्चिंत हो गए। अभी यात्रा को 2 महीने पड़े थे।
परन्तु भगवान का बुलावा आया ही नही था हम कितना भी प्रयास करे पर होता वही है जो ईश्वर की मर्जी।
तो हुआ यू की नवम्बर में अचानक मैंने आँखों की चेकिंग करवाई तो पता चला कि मेरी आँखों मे मोती बिंदु है। ऑपरेशन करवाना पड़ेगा।
अब,जैसे तैसे दिसम्बर आया तो पता चला कि दिसम्बर में नए साल की वजय से पूरी में बहुत भीड़ है जिसके रहते दर्शन काफी मुश्किल से हो रहे है।
अब क्या करे,जाए या न जाये। इस बीच हमने जनवरी में त्रिची जाने का रिजर्वेशन भी करवा रखा था। तो बहुत सोचने के बाद हमने जगन्नाथपुरी का रिजर्वेशन केंसिल करवा लिया और तुरंत 5 फरवरी 2026 का बुकिंग करवा लिया। इस तरह त्रिची की यात्रा के ठीक 10 दिन बाद हम आखिर में जगन्नाथपुरी को चल ही दिये।
4 फरवरी को रात 12:15 की हमारी गाड़ी थी जो कि 5 फरवरी लग गई थी। पूरी 4 की रात 5 का दिन ओर फिर 5 की रात सफर करते हुए हम 6 फरवरी को सुबह 8 बजे पहुचने वाले थे मगर 4 घण्टे ट्रेन लेट हो गई थी तो हम 12 बजे पूरी के रेलवे स्टेशन पर पहुँचे।
2019 को मैं पहली बार अपनी सहेली के साथ पूरी आई थी ।अभी उस बात को 7 साल हो गए थे और 7 साल में दुनिया ही बदल गई थी।पूरी भी मुझे बदला-बदला दिखाई दिया।
स्टेशन से बैटरी कार द्वारा हम प्लेटफार्म से बाहर आये और 200 रु का ऑटो किया। हम समझे थे कि हम होटल तक पहुँच जायेगे पर यहाँ आकर पता चला कि अब ऑटो मन्दिर से 500 मीटर की दूरी तक ही जाते है आगे की यात्रा बैटरी कार से या साइकिल रिक्शा से पूरी करनी पड़ेगी।
इस तरह हम आखिर जगन्नाथपुरी आ गए ।
शेष अगले एपिसोर्ड में....
जय जगन्नाथ🙏
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