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सोमवार, 30 मार्च 2026

मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा

मेरी जगन्नाथपुरी यात्रा
भाग★3
7 फरवरी 2026


4 फरवरी की रात 12:15 पर हमारी ट्रेन LTT रेल्वे स्टेशन बॉम्बे से निकली और हम 6 फरवरी सुबह 12 बजे पूरी पहुँच गए । शाम को हमने श्री जगन्नाथ जी के दर्शन किये । अब आगे.....

आज सुबह उठकर फ्रेश हुए और तैयार होकर हम नीचे रेस्टोरेंट में आ गए।अभी नाश्ता तैयार नही हुआ था ।थोड़ा वेट किया फिर इडली खाकर हम बाहर निकल पड़े।

आज हम लोकल मन्दिरो के दर्शनों को जायेगे जो जरूरी तो नही है फिर भी अगर आपके पास टाइम नही है तो केंसिल कर सकते हो।पर हमको उन स्थानों को भी अपनी यात्रा में शामिल करना चाहिए जब भगवान की  रथयात्रा निकलती है तब वो जिन जिन स्थानों पर जाती है वही स्थान देखने आज हम जा रहे थे।
यहाँ हमने एक ऑटो 1000 रु में किया जो सारे मन्दिर घुमाकर हमको वापस होटल छोड़ेगा।

तो सबसे पहले हम भगवान जगन्नाथजी  के ससुराल वाले मन्दिर में गए जहाँ 10 रु का टिकिट खरीदा। दर्शन कर वापस ऑटो में बैठ गए।
दूसरा मन्दिर "लोकनाथ मन्दिर" है।मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव की स्थापना स्वयं श्री राम ने की थी। यह एक अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण शिव मंदिर है।

तीसरा मन्दिर था "बेड़ी हनुमान"।
 हम जब मन्दिर के अंदर गए  तो देखा की यहाँ हनुमानजी बेड़ियों से जकड़े हुए थे । कहते है भगवान जगन्नाथ ने ही इनको बेड़ियां पहनाई थी।ताकि ये कही भाग न सके और मन्दिर की रक्षा समुद्र देवता से करे। 

इसका इतिहास ऐसा है कि,हर साल समुद्र देवता भगवान के चरण छूने आते थे।जिसके कारण काफी विनाश होता था।लोगों के घर डूब जाते थे और सारा सामान बह जाता था। तो भगवान ने हनुमानजी को आदेश दिया कि आप मन्दिर की रक्षा करे और समुद्र देवता को आगे नही आने दे ।"

 परन्तु हनुमान जी को भी भगवान के दर्शन करने थे तो वो तट को छोड़कर मन्दिर में भगवान के दर्शन करने चले गए ओर पीछे से समुद्र देवता भी मन्दिर में पहुँच गए और सारे मन्दिर में पानी-पानी हो गया तो भगवान को क्रोध आ गया उन्होंने गुस्से में उनको जंजीरों से बांध दिया ताकि वो भविष्य में कही भी नही जा सके, ओर तट की रक्षा करे।

कहते है तभी से हनुमानजी तट की रक्षा करते है और फिर मन्दिर में कभी समुद्र देवता का पानी नही आया ।इसलिए यहाँ का तट भी हमेशा शांत रहता है।

अगला मन्दिर था "गुडिचा मन्दिर"। यानी कि भगवान की मौसी का घर। रथयात्रा के दौरान भगवान कृष्ण ,भाई बलराम ओर बहन सुभद्रा यहाँ आते है और  7 दिन विश्राम करते है।
ये मन्दिर कोविट के टाइम से बन्द है इसे अभी तक खोला नही गया है मैंने पूछा तो सिक्युरिटी ने बताया कि मरम्मत का काम चल रहा है।मतलब भविष्य में ये मन्दिर जल्दी खुल जायेगा। वैसे इससे पहले जब मैं यहाँ आई थी तब मैंने अंदर से ये मन्दिर देखा था।

यहाँ से आगे हम "नरेंद्र तालाब" को गए। यहाँ 10₹ का टिकिट कटवाया ।यहाँ भी भगवान रथयात्रा के दौरान आते है और शाम को उनकी भव्य सवारी नाव में निकलती है। तब देखने वालों की भीड़ लग जाती है। कहते है भगवान 7 दिन आराम कर के स्वास्थ्य लाभ लेकर अपने भक्तों को दर्शन देते है। तब भगवान की सवारी नाव में फूलों से सुसज्जित  होकर यहाँ निकलती है।ओर सभी जनता भगवान के दर्शन करती है। सालों से ये कार्यक्रम नियम पूर्वक हो रहा है। नरेंद्र तालाब बहुत खूबसूरत मन्दिर है इसके चारों ओर फैला तालाब बड़ा आकर्षक है। यहाँ काफी लोग नहा भी रहे थे। हम भी कुछ देर यहाँ पर बैठे और ठंडी हवा का आनंद लिया।यहाँ की भींनी-भींनी खुशबू माहौल को काफी सुहावना बना रही थी।

बाहर निकल कर देखा तो एक आदमी गले की मोतियों की मालाएं बेच रहा था ।मैंने जाकर देखा तो सारी मालाएं खूबसूरत थी और सस्ती भी थी तो मैंने अपने लिए ओर बेटियों के लिए कुछ मालाएं खरीदी ।
पोस्ट लंबी होने से अब हम बिदा लेते है।
शेष यात्रा अगले भाग में...
जय जगन्नाथ🙏
  

नरेंद्र तालाब


गुडिचा मन्दिर

बेड़ी हनुमान मन्दि

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