तमिलनाडु डायरी ★10
अंतिम भाग
रेनिगुंटा ओर श्री कालहस्ती
शिव के वायु तत्व मन्दिर
22 जनवरी 2026
12 जनवरी को बॉम्बे से चलकर मैं 13 की रात 3 बजे त्रिची पहुँची। हमने श्री रँगनाथ स्वामी,जम्बुकेश्वर मन्दिर, तन्जोवर के ब्राहतेश्वर मन्दिर, कुम्भकोलम, चिदम्बर, कांचीपुर, अरुणाचलन ओर वेल्लोर के मन्दिरों के दर्शन कर के कल हमने तिरुपती के दर्शन किये और आज हम श्रीकालहस्ती मन्दिर के दर्शन करेगे अब आगे:--
कल हमारे साथ जो अनहोनी हुई उसके बाद हमारा मन बहुत खराब था। अब किसी मन्दिर में जाने का हमारा मन हो ही नही रहा था।
ये बात जब मैंने अपने ग्रुप यायावरी में बताई तो हमारे एडमिन सर सौजन्य त्रिपाठी जी ने बोला कि--" जो हुआ सो हुआ,बुरा वक्त टल गया अब सिर्फ 1 मन्दिर रह गया है उसको जरूर पूरा करके आओ। ये कम ही भाग्यशाली लोगो को शिव के पांचों तत्वों के मन्दिरों के एकसाथ दर्शन नसीब होते है। जो आपको हुए है। तो श्रीकालहस्ती मन्दिर जरूर जाओ ।शिव भला करेगा।"
मास्टर जी की नेक सलाह से दिल को तसल्ली हुई और मैंने श्रीकालहस्ती मन्दिर जाने का मन बना लिया।
अब,मिस्टर को आटे में लेना था☺️ क्योकि उनका मन भी बहुत खराब था।लेकिन मेरी दिली इच्छा को देखते हुए वो भी तैयार हो गए।
अब हम सुबह फटाफट तैयार हो सबसे पहले धर्मशाला के पीछे बने गोबिंद धाम मन्दिर गए । जिसमे हम पहले दिन तिरुपति आने के बाद शाम को गए थे पर बहुत भीड़ होने के कारण नही जा सके थे।
कहते है तिरुपति जाने से पहले श्री गोबिंदजी से परमिशन जरूर लेनी चाहिए मतलब यहाँ पहले दर्शन करने चाहिए ताकि सब कुछ कुशल मंगल हो पर उस दिन भीड़ की वजय से हम अंदर नही जा सजे थे। इसीलिए हमारे सारे कामो में विध्न आया हो खेर,...
आज मन्दिर में ज्यादा भीड़ नही थी और हमको आराम से दर्शन हो गए फिर वही एक होटल में हम दोनों ने नाश्ता किया और 1ऑटो किया जो हमको रेनिगुंटा छोड़ दे।
तिरुपति से रेनिगुंटा की दूरी 10-12 km है जो 20 मिनिट में तैय हो जाती है और ऑटो का किराया 300 रु होता है।
हमको ऑटो वाला पहले एक होटल में ले गया जहां 1 हजार रु में हमने 1दिन के लिए 1रूम लिया और सारा सामान उसमे रखकर थोड़ा फ्रेश हुए और फिर आगे श्रीकालहस्ती मन्दिर को चल दिए।
श्री कालहस्ती मन्दिर शिव का वायु तत्व मन्दिर है।
रेनिगुंटा से श्रीकालहस्ती मन्दिर की दूरी 30 km है जो आधे घण्टे में पूरी हो जाती है।
इतिहास:--
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुपति के पास स्थित श्री कालहस्ती मन्दिर स्वर्णमुखी नदी के तट पर एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है, जो अपनी 'वायु लिंगम' (पंचभूत स्थल) के लिए जाना जाता है। यह मंदिर 2000 वर्षों से अधिक पुराना है और 'दक्षिण काशी' या 'दक्षिण कैलाश' कहलाता है। यहाँ राहु-केतु पूजा और कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा की जाती है, और यह मंदिर ग्रहण के समय भी खुला रहता है।
मंदिर में कन्नप्पा की कहानी प्रसिद्ध है, जिन्होंने शिव की आँखों की रक्षा के लिए अपनी आँखें अर्पित कर दी थीं, जिसके बाद शिव ने उन्हें मोक्ष दिया था। इस मन्दिर का उल्लेख शिव पुराण और स्कंदपुराण में भी मिलता है।
हम ऑटो से 30 मिनिट में अपने आखरी पंचतत्व मन्दिर में पहुँच गए। श्रीकालहस्ती मन्दिर स्वम्भू है।ऑटो वाला बहुत ही अच्छा आदमी था उसने हमको स्पेशल रास्ते से मन्दिर में प्रवेश दिला दिया।सारे कर्मचारी बहुत ही सहयोग वाले थे सबने हमको आगे से शार्टकट रास्ते से जाने दिया।वैसे भी मन्दिर में भीड़ नही थी पर रास्ता काफी लंबा था ।हम शार्टकट रास्ते से जल्दी ही मन्दिर के करीब पहुँच गए।
मन्दिर के अंदर लगे दीपक से ही रोशनी हो रही थी। उसी के प्रकाश में हमने लिंग के दर्शन किये हालांकि दिखा कुछ नही क्योकि फूलों से महादेव का श्रृंगार हो रहा था। वैसे भी कहते है यहाँ के लिंग को पुजारी भी हाथ नही लगाते है।
अंदर माता का मन्दिर भी था जिसके दर्शन कर के हम बाहर आ गए।
कुछ देर बाद हमारा ऑटो हमको ले रेनिगुटा को चल दिया।
इस तरह मेरी कभी खुशी कभी गम वाली यात्रा की समाप्ति हुई।मुझे खुशी है कि मैंने इस यात्रा में शिव के पांचों तत्वों वाले मन्दिर, श्री हरि के मन्दिर, माँ लक्ष्मी के मन्दिर ओर तिरुपति बालाजी के दर्शनों का लाभ उठाया।
जीवन मे जो कुछ भी घटित होता है सब ईश्वर की मर्जी से ही होता है।
ॐ नमो शिवाय🙏
समाप्त🙏
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