मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

अयोध्या

"अयोध्या"
13 मई 2024




जब से भगवान राम का मन्दिर बनना शुरू हुआ तभी से मन मे एक आस का बीज पनपने लगा कि हो न हो एक दिन मैं जरूर अपने लल्ला के दर्शन करुँगी।
धीरे-धीरे ये आस का बीच मन मे अंकुरित होने लगा और फ़टाफ़ट तीव्रगति से फैलने लगा।
मुझे कल की वो बातें याद आने लगी जब मैं छोटी थी और घर मे #धर्ययुग आता था जिसके फ्रंट पेज पर  एक × बना होता था ओर उस पर एक बड़ा ताला लटका होता था । नीचे एक स्लोगन लिखा होता था कि--- " राम मंदिर में फिर से ताला" । बाल बुद्धि थी इसका मतलब समझ नही आता था की क्यो इस मंदिर में ताला लगता हैं?
बात बचपन की थी जो बड़े होने पर समझ आने लगी।फिर वो दिन आया जब यहाँ खून की नदी बही थी और लाशों से गलियां अटी पड़ी थी तब भयभीत हो वो कैसेट देखा था। जिसकी भयावह तस्वीर आज भी दिल मे ताजा हैं।
लेकिन दिन बदले ओर  लल्ला का वनवास खत्म हुआ । भगवान के आशीर्वाद से इस सदी का महानतम दिन आया जब इस मंदिर का उदधाटन हुआ और श्रीराम  लल्ला के रूप में इस नगरी मे अवतरित हुए।
मेरे जीवन के सफलतम दिनों में एक अध्याय ओर जुड़ गया 13 मई 2024 का वो पावन दिन था जब मैंने मेरे प्रभु राम के दर्शन किये। स्थापना के ठीक 111 दिन बाद।
ओर इस दर्शन के बिचौलीये रहे अयोध्या निवासी #श्रीसूरजमिश्राजी जो हमारे Gds सदस्य भी हैं।जिनकी वजय से मैंने आराम से  लल्ला के दर्शन किये फोटू खिंचवाए और अपनी बरसों की प्यासी आत्मा को तृप्त किया। जय श्रीराम🙏











शुक्रवार, 4 जुलाई 2025

केरल की यात्रा भाग 1

*।।केरला-डायरी।।*
भाग--1


27 दिसम्बर 2024
जैसे ही हमारी ट्रेन कोच्चीवेळी पहुँची हम सब अलग अलग कोच के मुसाफिर स्टेशन पर उतरकर बाहर की ओर निकल पड़े... सभी 18 मेम्बर (कुछ को छोड़कर)एकदूसरे से अनजान...?

वैसे कहने को हमसब 4 महीने से व्हाट्सएप की आभासी दुनियां के जरिये एक दूसरे को जान चुके थे या कोशिश की थी।पर असली धरातल पर मिलन आज हो रहा था।
कुछ संकोच!कुछ अनजानापन! शर्म ओर सत्कार की मिलींजुली भावनाओ से  ओतपोत हमारी सवारी यानी कि बस चल पड़ी अपने आगे के सफर पर...

ओर फिर बीच मे आया एक झरना ! सब छलांग मार कर झपट पड़े। जैसे वो कोई रसगुल्ला हो जिसे हर कोई गटकना चाहता हो। वो अलग बात है कि वहाँ रसगुल्ला तो मिला नही पर सबने पाइनएप्पल को ही रसगुल्ला समझ झपट्टा मार दिया।अब हर आदमी के हाथ मे पाइनएप्पल की एक2 पुड़िया थी और सब उसको चूस चूस कर ऐसे खा रहे थे जैसे ये अनोखी चीज इन्होंने जिंदगी में पहली बार खाई हो😂😂🤣

 विशेषकर सोनाली की तो पो- बारह थी। उसको तो ये फल किसी दूसरी दुनियां का लग रहा था जो यहाँ से जाते ही गुमनामी के दलदल में गुम होने वाला था ,तभी तो मैंने पूरे 8 दिन बेचारे सन्दीप जी को उसकी हजूरी में एक एक्स्ट्रा पैकेट हाथ मे लिए एक पैर पर खड़े देखा था।बेचारे मेरे पप्पूकुट्टी☺️
हम सब यानी कि मैं 1दिन ओर बाकी सब 2 दिन के सफर से बिल्कुल बेहाल नही थे बल्कि पूरी तरह फ्रेश बगैर नहाए धोए एकदम शाहरुख की तरह बाहें फैलाये दूर से वाटरफॉल के पोज ले रहे थे जैसे कि अभी अभी फॉल का ठंडा पानी हमारे ऊपर आने वाला हो और हम उसी के सहारे फ्रेश होकर अपनी आगे की यात्रा शुरू करेंगे। परन्तु इन ख्याली पुलावों में कोई टेस्ट नही था और हम उसी तरह  बासी कपड़े ओर बिना लिपिस्टिक के लौटकर आ गए अपनी-अपनी सीट पर  आगे के सफर के लिए।
अब हम सब बस में नींद के झोको के साथ चुपचाप आगे बढ़ रहे थे बगैर कोई हंगामा किये हुए क्योकि अभी तक हम सब एकदूसरे से अनजान थे  सब जानते हैं वेल एजुकेटेड लोग हंगामा नही करते😂🤣😂🤣😂
अचानक एक जगह हमको एक बड़ी सी भेसवा दिखी साथ ही एक चूहा भी ओर फिर सभी वेल एजुकेटेड लोग चिल्ला उठे–– "रुको"
अचानक नींद की खुमारी से जागे हमारे एडमिन ने बस रुकवा दी और हैरत से सबको देखने लगे।सबने भेसवा के साथ फोटू खिंचवाने की सिफारिश कर डाली। अब भला,भेसवा के साथ भी कोई फोटू खिंचवाता हैं ?😷🤦वैसे मैंने भी खिंचवाई थी पर आजतक मिली नही🙆
खेर, दिल पर पत्थर रख के हम आगे स्पाइसी गार्डन को चले ....एक काला सा मजबूत मद्रासी हमको वही चीजो के पेड़ बता रहा था जो उसके पास बेचने को रखी  थी ।मैं समझ गई ये अपना उल्लू सीधा कर रहा है वैसे मेरे साथ के सभी लोग समझ गए थे ये बात मुझे बाद में पता चली जब कोई भी उसके झांसे में नही आया और सबने किनारा कर के बढ़िया मसालेदार चाय पीकर उस मसाले वाले को अलविदा कहा।बेचारा सोच रहा होगा कि आज किस का मुंह देखकर उठा था जो एक भी ग्राहक नही फंसा😂🤣😂😂

रात हो चली थी हम सब पंछी अपने डेरे में लौट रहे थे उबड़ खाबड़ रास्तों से गुजरते आखिर हमारी आज की मंजिल आ चुकी थी । एक छोटे से होटल के आंगन में हमारी बस रुकी ओर हम सब अपने अपने बड़े -बड़े कमरों में घुस गए ।
कल के अगले सफर के लिए ।
क्रमशः🙋
बाकी अगले एपिसोड में हम लोग।




क्रेंद्र शासित राज्य दमन

ये बात अभी 22 जनवरी 2025 की हैं ।


 मैं ओर मेरे मिस्टर दमन घूमने गए थे ।शाम के 7 बजे की बात है हम नानी बीच ( गुजराती में नानी का मतलब छोटा होता हैं) पर टहल रहे थे सूरज अस्त हो गया था ठंड बड़ गई थी और काफी ठंडी हवा चल रही थी। हमारे पास स्वेटर भी नही थे।


कुछ देर बाद हमने होटल लौटने का सोचा पर आसपास कोई आटो दिखाई नही दिया।करीब आधा घण्टा हो गया हमको 1 भी आटो दिखाई नही दिया अब मुझे थोड़ी धबराहट होने लगी क्योकि हमारा होटल 10 km दूर था।अब क्या करे।


वैसे भी रात को अनजान जगह मुझे थोडी घबराहट होती हैं।


जब बहुत देर हो गई और कोई आटो नजर नही आया तो तुरंत एक तरकीब मेरे दिमाग मे याद आई मैं फूटपाथ से उतरकर सड़क पर आ गई।मेरी अगल बगल से कारे गुजर रही थी पर कोई रुक नही रही थी। इतने में मैंने अपने हाथ से कुछ स्कूटरों को रुकने का संकेत किया ।कुछ निकल गए कुछ देखते हुए  आगे बढ़ गए, अचानक एक स्कूटर थोड़ा आगे जाकर रुक गया उस पर एक लड़का एक औरत ओर 2 बच्चे बैठे थे वो उतरकर पीछे आये और मुझसे बात करने लगे। तब मैंने उनको अपनी परेशानी बताई लड़के ने तुरंत बोला कि आप एक एक करके मेरे स्कूटर पर बैठ जाये मैं आपको होटल छोड़ देता हूँ पर मुझे ये अच्छा नही लगा कि वो बेचारा हमारे लिए 40 km up down करे।
मेंने उससे रिक्वेस्ट की कि आप कोई आटो इधर भिजवा दे बस।


फिर उसने अपने एक जानने वाले को फोन कर के बुलाया और जब तक वो आ नही गया दोनों पति पत्नी हमारे पास ही खड़े रहे।


एक अनजान व्यक्ति का अनजान शहर में इतना बड़ा सहयोग देखकर मेरा दिल भर आया। आंखों में पानी तैरने लगा और दिल से हजारों दुआएं निकलने लगी।मेरे मन ने यही कहा की–-"अभी भी मानवता जीवित हैं।"















गुरुवार, 21 मार्च 2024

कसौली यात्रा भाग #2

कसौली Meet पार्ट -2
 
12 जनवरी 2024
~~~~~~~💝~~~~

4 बजे जैसे तैसे सोकर सुबह 6 बजे उठना, वो भी इस ठंडी में, ऐसा ही हैं जैसे मौत के कुएं में छलांग लगाना। 😃 जी हां, अभी -अभी तो आंख लगी थी और चारु ने चिल्लाकर उठा दिया। पर क्या करें ,सुबह 8 बजे सब आजाएंगे ओर हम यही वाले तैयार नही हुए तो धिक्कार हैं हमारा एक दिन पहले आना।
सारे लोग अपने अपने शहर से रात को निकलकर  आज सुबह चंडीगढ़ पहुँच रहे थे और अब हमको चढ़िगढ़ से इक्कठा होकर कसौली पहुँचना था जिधर के लिए हम निकले थे।ओर जहां मीटिंग होनी थी।
तो सुबह फटाफट गरम पानी से कव्वा स्नान करके मैं भी तैयार हो गई। चाय और ब्रेड खाकर बाहर निकल गई। मैं ओर अपर्णा की मम्मी राजस्थान से आये राजेश जी और मदनजी के साथ उनकी कार से कसौली के लिए रवाना हुई । रास्ते मे हमको राजेश जी ने बढ़िया नाश्ता करवाया।

नाश्ता करके हम आगे को निकल गए।मैदानी एरिये को लांधकर अब हमारी कार पहाडो को नापने लगी थी ।जिधर सूरज की तेज किरणें अपना मायाजाल फैला रही थी। फिजा में गर्माहट होने लगी और हमने अपने अपने मौटे -मोटे जैकेट उतारकर हल्के स्वेटर पहन लिए थे। मैदानी एरिये में जहां अभी भी कोहरा छाया हुआ था वही पहाड़ों पर सूरज महाराज ने अपना साम्राज्य फैला रखा था। दूर तक घाटियां कोहरे से ढंकी थी पर चोटियां सूरज की रोशनी से जगमगा रही थी। और मैं इस आलौकिक सौंदर्य का रसपान अपने कैमरे से कर रही थी।
महज 60 km की दूरी 2 घण्टे में समेटकर हमारी कार The Hotal Chabal के लाउंज में खड़ी हुई , तो भव्य नजारा था.. टेरेस हमारे सामने था और  उस पर छोटा सा बगीचा सुंदरता में चार चांद लगा रहा था। वही कुछ कुर्सियां बिछाई जा रही थी...शायद शाम का जलसा होने की तैयारी चल रही थी।एक कोने में स्टेज बना था और वही दीवार पर घुमक्कड़ी दिल से का बड़ा-सा पोस्टर लगा हुआ था ।पर मेरी नजर उस खूबसूरत झूले पर थी जो दूसरी तरफ मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहा था।मुझे ऐसे झूले में झूलना बहुत पसंद हैं।🥰

तभी हमारा वैलकम करने Gds के सदस्य और इस शानदार होटल के मालिक कंवर कुलदीपजी  खड़े थे। हैंडसम, लंबे -चौड़े, पहाड़ी फिल्मों के नायक की तरह दिखने वाले  कुलदीप जी कही से भी मालिक नही दिख रहे थे। हंसकर बुआ का सम्बोधन जब उन्होंने बोला तो मैं भी पहली बार इस शख्सियत से रूबरू हुईं। ओर बहुत प्रभावित हुई। कुंवर इस छोटे से गांव "चॉबल" के राजा थे और इस सारी जमीन के मालिक थे। सभी उनको नाम से पहचानते थे। भला ,राजा को कौन नही पहचानेगा😄😄

कंवर कुलदीप ने हमसे हमारा आई कार्ड लिया और हमको कमरे की चाबी दी । चाबी लेकर मैं ओर अपर्णा की मम्मी रूम नम्बर 117 में दाखिल हुए। अब मेरा,अर्पणा का ओर उसकी मम्मी का 2 दिन के लिए यही रेनबसेरा था।

मैंने अक्सर देखा हैं पहाड़ो पर घर हो या होटल पहले टेरेस दिखती हैं फिर नीचे कमरे होते है।यानी की ऊपर से नीचे की तरफ जाते है ।यहाँ भी होटल चॉबल में ऊपर टेरेस थी और हम सीढियो से नीचे उतरकर अपने आलीशान कमरे में दाखिल हुए।अंदर कमरे वाकई में सुसज्जित ओर भव्य थे। बालकनी से घाटी का सुंदर दृश्य दिखता था। 

हमने सामान रखा और फ्रेश होकर ऊपर डायनिंग एरिये में आ गए।जिधर सारा Gds बैठा नाश्ता कर रहा था। हम तो नाश्ता कर आये थे इसलिए कुछ नही खा सके। इतने में कुलदीप जी मेरे लिए चाय ले आये और हम बातें करने लगे, तभी मेरे हाथों में पकड़े मोबाइल ने हरकत शुरू कर दी और कैमरे ने  धड़ाधड़ कुछ फोटू खींच डाले। कुलदीपजी के साथ उनकी जीवनसँगनी मधु भी उनके कंधे से कंधा मिलाकर सबकी खातिरदारी में व्यस्त थी।खूबसूरत पहाड़ी ड्रेस में मधु  मंदाकिनी से कम नजर नही आ रही थी मैंने उसके साथ भी  कुछ फोटू खींचे ओर उनकी पिछली टेरेस पर चली गई जहाँ से घाटी का अमेजिंन ब्यूह  दिखाई दे रहा था। 

मैं अन्य लोगो से मिलने आगे बढ़ गई। सभी परिचित थे चारों ओर से बुआ-भतीजों का सलाम आदान-प्रदान होता रहा। वही सोनाली सबके लिए Gds नाम के बड़े सुंदर बेच बनवाकर लाई थी उसका श्रीगणेश उसने एडमिन को लगाकर किया। फिर सभी के कॉलर पर Gds बेच चमकने लगे। लगे हाथों मेरा भी कैमरा सबके मुस्कुराते चेहरे कैद करता रहा। ओर मेरी गैलरी फुल होती रही।🥰

खाना खाकर हम सबने सामने वाली पहाड़ी पर स्थित भगवान शिव के एक मन्दिर में जाने का प्रोग्राम बनाया। छोटा सा ट्रेक था ।पहले मुझे थोड़ा डर लगा पर चढ़ने के टाइम नितिन का सहारा लेकर ऊपर चढ़ गई और उतरने के टाइम मिसेस सन्दीप साहनी के सहारे नीचे उतर गई सबके प्यार भरे आग्रह ओर सहारे के मैंने ये किला फतेह किया।😃

शाम की छटा निराली थी । टी-टाइम के समय सामने की पहाड़ी सिंदूरी आभा लिए चमक रही थी। थोड़े बादल होने से सूर्यास्त नही दिख रहा था । लेकिन जो दिख रहा था वो गजब का था।जिसके लिए मेरे पास कोई शब्द नही हैं। सिर्फ ये कहूंगी ----"प्रकृति तेरे रूप हजार!!!

रात को सबका परिचय सम्मेलन हुआ।कार्यक्रम की शुरुवात हमने दिए जलाकर की ओर फिर वही कुलदीपजी के परिवार की लड़कियों ने नृत्य कर के सबका दिल जीत लिया।उसी में हमारे Gds के मेम्बर भी थिरक लिए।
यहाँ पहली बार Gds मीट में जो मेम्बर आये उनमें भिलाई के दो युवा जोड़े ने सबका ध्यान आकर्षित किया और वो थे सोनाली ओर सन्दीप। नटखट सोनाली ओर धीर गम्भीर सन्दीप सबके मन को भाये।
नए लोगों में Mp के उज्जैन के नो रत्नों ने भी अपनी आभा बिखेरी। जिसे सोनाली ने शिव के नो गणों की उपाधि दे डाली।🤣🤣🤣

इनके अलावा Gds मीट में आने वाले ओर भी नए मेम्बर थे जो पहली बार आये थे उनमें जयपुर वाले सन्दीप साहनी खुद ओर उनकी लम्बी चौड़ी फॅमिली थी जो हमसब के साथ लोहड़ी का ये पर्व मनाने कसौली आई थी। इनके साथ जयपुर से राजेश शर्मा जी और मदन शर्मा जी भी जयपुर से अपना वाहन लेकर आये थे।जिसमें चढ़िगढ़ से बैठकर मैं भी कसौली आई थी।
पहली बार रेणु चौधरी भी श्रीकृष्ण की नगरी नाथद्वारा राजस्थान से आई थी।
इसके अलावा हरिद्वार के हमारे एडमिन पंकज भी अपनी श्रीमतीजी को पहली बार Gds मीट में लाये थे।

इसके साथ हमारी मोनालिसा भी अपने श्रीमानजी ओर बिटिया के साथ पहली बार Gds मीट में आई थी।
पिछली पन्ना-मीटिंग में अपर्णा आई थी और इस बार वो अपनी मम्मी को लेकर आई । जिनके राम भजन सुनकर हमने तो उसी दिन प्रभु राम की मूर्ति प्रतिष्ठित कर दी,....ख्यालो में🤩
इसी कड़ी में  पिछली पन्ना-मीट में आया आगरा का नितिन भी जिसे हम कुँवारा समझते थे वो छुपारुस्तम भी अपनी श्रीमतीजी ओर एक प्यारी गुड़िया के साथ आया ।
तो ये था इस मीटिंग में  कुछ नए आये मेम्बरों का छोटा सा परिचय।जो मुझे याद हैं।अगर कोई छूट गया हो तो माफी🙏😃

बाकी हम पुराने मेम्बरों में एडमिन संजय कौशिक, अमनदादा, रितेश &रश्मि, पंकज, बबेले सर जी, अल्पा,चारु, मैं, सुनील, श्वेता,
सरोज, वृषभ, पूनम ओर माथुर साहब, डॉ अजय ओर नीलम ओर शरद शर्मा,जी शामिल हुए।
"रात का शमा झूमे चन्द्रमा.....मन मोरा नाचे रे जैसे बिजुरिया..."
उस रात सचमुच चन्द्रमा झूम रहा था और साथ ही Gds का हर शख्श झूम रहा था।कुछ तन से झूम रहे थे तो कुछ मन ही मन झूम रहे थे मेरी तरह😂🤣😂 पर उज्जैन से आये गोपाल जो खुद को गोबिंदा बोलते है । उन्होंने तो महफ़िल ही लूट ली🤗 अगर गोबिंदा उनका डांस देख लेता तो मारे जलन के ख़ाक हो जाता,उसको अपना सिंहासन डोलता नजर आता😂😂😂
बढ़िया प्रोग्राम चल रहा था पर ओपन में जब प्रोग्राम अपने पूरे शबाब पर था उसको बीच मे ही रोककर खत्म करना पड़ा क्योंकि ठंडी बहुत बढ़ गई थी ।मेरे तो हाथ-पैर दोनों सुन्न से हो गए थे😃 बार-बार सोच रही थी कि रूम में जाकर कम्बल ही उठा लाऊँ😜😜😜

फिर सब खाना खाने लपक पड़े ....
खाना खाकर कुछ देर बतियाकर सब अपने अपने कमरों में सोने चले गए। इस बार पहली बार ऐसा हुआ कि म्यूज़िकल चेयर प्रोग्राम न हो सका ।खेर,अभी कल का भी दिन हैं तो मिलते हैं कल
क्रमशः....






बुधवार, 20 मार्च 2024

यात्रा कसौली की #भाग 1


कसौली Meet पार्ट – 1



10 जनवरी 2024
~~~💝~~~~~


"मेरी आवाज ही पहचान हैं"
ये वाक्य हैं हमारे मेजबान @कंवर कुलदीप जी के जो बड़े ही फ़क्र से कहते है कि– " मेरा नाम ही  मेरा लेडमार्क हैं "☺️ ओर ये सही भी हैं।


तारीख 10 जनवरी को जब मैं बॉम्बे से पश्चिम एक्सप्रेस से चंडीगढ़ को निकली थी तो मन मे ठंडी को लेकर अनेक चिंताये थी...हालांकि मैंने पहनने के कपड़े कम और गरम कपड़े ज्यादा रखे थे ।फिर भी शक था कि इतनी ठंडी को मैं बर्दास्त कर पाऊंगी की नही? कहीं मुझे ठंडी से पैरालिसिस अटैक तो नही पड़ जायेगा? कहीं मैं दुसरो के लिए मुसीबत तो नही बन जाऊंगी ? ऐसा न हो मैं चार कंधों का सहारा लेकर घर पहुँचूँ 🤔
वगैरा!वगैरा !!वगैरा!!!


ऐसे हजारों सवाल पिछले कई दिनों से मेरे ऊपर मक्खियों की तरह मंडरा रहे थे ।जिनका मेरे पास कोई जवाब नही था।


उस पर सन्नी ओर मिस्टर की बार बार काली जबान की–" मत जा! परेशानी होगी, टीवी में देख शीत लहर चल रही है और तू शिमला जा रही हैं। पागल हो गई हैं क्या???☺️


ओर मैं सारी बातें इस कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल रही थी। कई बार सोचती थी की जब सन्दीप को जनवरी के लिए हाँ की थी तब क्यो नहीं ध्यान दिया था,तुरन्त मना कर देना था की इतनी ठंडी में आना मेरे बस की बात नही हैं।शीला जी ने भी तो केंसिल कर दिया हैं। फिर मैं क्यो पहलवान बनू 😢
पर फिर सोचा कि–  "छड्डो यार!जो होगा देखा जाएगा।"😃😃


जब सुबह 9 बजे घर से निकली तो सन्नी ने फिर टोका की मम्मी केंसल करो।पर एक विजय मुस्कान छोड़ते हुए मैं टैक्सी में बैठ गई। अगर Gds मीट न होती तो यकीनन मैं  उसकी बात मान लेती, मगर जब बात Gds की होती हैं तो कोई समझौता हो ही नही सकता। बस चक्क दे फट्टे!😄😄😄


ट्रेन के कम्पार्टमेंट में इस बार बहुत अच्छे साथी मिले, कब टाइम निकल गया पता ही नही चला।फिर चारु तो थी ही साथ ।हमने खूब इंजॉय किया। मथुरा में धने कोहरे के बीच अनु के लाये लजीज बेड़मी,जलेबी ओर कचोरी के मजे लिए पर  चारु पर गुस्सा भी किया कि बेचारे अनु को इतनी सुबह परेशान किया।☺️
11 तारीख को शाम 5 बजे हमारी रेंगती हुई 2 घण्टे लेट लतीफ गाड़ी ने चंडीगढ़ स्टेशन को छुआ तो उमंग से सारे शरीर मे तरंगे फूटने लगी क्योकि हम उस स्थान पर आ गए थे जहां से स्वर्गरोहणी की सीढ़ियां स्पष्ट नजर आ रही थी। मैंने सुना था कि कसौली स्वर्ग से भी सुंदर हैं। और कल हम कसौली की उसी पावन धरा पर पैर रखने वाले थे।


ओर जैसे ही हमने सबको Ta-ta, by-bay बोला और चंडीगढ़ के प्लेटफार्म नम्बर 1 पर अपना पैर रखा की तेज झटका लगा।😳
जी हां😢 आंखों में आंसू आ गए क्योकि अब तक हम जिस गरमा -गरम कूपे में बैठे बतिया रहे थे  उससे उतरते ही ठंड के मायाजाल में ऐसे फंसे की दांत किटकिटाने लगे।


"उई मां! यहाँ तो बहुत ठंडी है 🙉मेरे मुंह से निकला!ओर हम जैसे तैसे लुढ़कते हुए स्टेशन के बाहर टैक्सी तक पहुँचे ।हमारे लिए टैक्सी की व्यवस्था पहले से ही हमारे Gds के एक वीर बालक ने कर रखीं थी और वो वीर बालक अपने हाथों में गर्मागर्म पिज़ा लिए हमारा इंतजार कर रहा था।


हमने आव देखा न ताव ओर फटाफट टैक्सी में घुस गए। अंदर पहुँचकर एक लंबी सांस ली क्योकि अब हम हवा के थपेड़ों से सुरक्षित थे। हालांकि किटकिट की ध्वनि मुंह से लगातार निकल रही थी।


धुन्ध में लिपटा हुआ चंडीगढ़ साढ़े 5 बजे ही मुझे रात 11 बजे का अहसास करवा रहा था और मैं मुम्बई की पौरि ये हजम नही कर पा रही थी कि भला साढ़े 5 बजे शाम को ही रात कैसे हो सकती हैं। क्योकि हमारे यहाँ तो अभी तक सूरज चमक रहा होगा। बाजार जगमगा रहे होंगे, खाली लोकल दूर से मुसाफिरों को टोह कर ला रही होगी। फिर,दिल को तसल्ली दी ये बॉम्बे नही है मेरी जान🥰😄
अब हमारी टैक्सी तेजी से धुंध को काटती हुई आगे सरक रही थी।


नियत स्थान पर टैक्सी रुकी ओर मैंने पर्स में हाथ डाला ही था कि बाहर से एक आवाज़ आई---" नही बुआ,पैसे मैं दूँगा!"
मैंने चौककर बाहर देखा-- "अरे ये वीर बालक तो अपना विमल हैं" जो पिज़ा के 3 पैकेट हाथ मे लिए मंद-मंद मुस्कुरा रहा था।
चढ़िगढ़ में हमारे रहने की सारी जुम्मेदारी प्यारे विमल ने अपने भारी भरकम कंधों पर ले रख्खी थी।वो एक अबोध बालक की तरह सबकुछ करने को आतुर था। हर काम को ऐसा कर रहा था जैसे एक बाप अपनी लाडली बेटी की शादी में लड़के वालों पर निछावर हो जाता हैं।


ये बात इसलिए लिख रही हूं कि उसकी स्फूर्ति देखने लायक थी जब वो मेरी भारीभरकम अटैची को पहले माले तक लाया । कैसे लाया होगा ? आज मैं ये सोच रही हूं🤔


अब हम दोनों टैक्सी से उतरकर उसके घर की तरफ जा रहे थे।हालांकि कंपकपी थी पर सबसे मिलने का उत्साह उस कंपकंपी के ऊपर ज्यादा भारी था।चारों ओर सन्नाटा पसरा पड़ा था।
थोड़ी देर बाद ही हम विमल के गर्म कमरे में हीटर के पास हाथ सकते हुए चाय की चुस्कियों के साथ गर्म -गर्म पिज़ा खा रहे थे।
Gds मीट की यही खासियत हैं कि यहाँ सब मिलकर आनंद के सागर में डुबकियां लगाते हैं और परम आनंद की प्राप्ति करते हैं।✋आज का ज्ञान खत्म☺️


रात को चारु  ने खिचड़ी ओर कढ़ी बनाई और हम सबने मिलकर खाई।इतने मैं भिलाई के 1 मतवाले कपल सोनाली ओर सन्दीप भी आ गए  उनसे प्रथम मिलन था पर प्रथम जैसा कुछ था ही नही सब ऐसी बातें  कर रहे थे जैसे काफी पुराने परिचित हो।😄


गोल मटोल ,हिरनी की तरह चंचल आंखों वाली सोनाली ओर उनके मस्तमौला पति सन्दीप जी दोनों ऐसे घुलमिल गए जैसे बरसो से याराना हो🥰 हम सब छोटे से कमरे में रजाइयों में घुसे हुए आपस मे बतिया रहे थे कि अचानक दादा ने कमरे में प्रवेश किया।दादा यानी कि बोकारो से पधारे हमारे भकिल अमन दादा जिनसे मैं 2017 के  रांशी मीट के बाद अब मिल रही थी।
दादा ने सबसे पहले झुककर मेरा अभिवादन किया तो दिल गदगद हो गया।☺️


रात ढाई बजे तक ये सिलसिला जारी रहा। बातें खत्म होने का नाम ही नही ले रही थी और फिर रात 3 बजे के बाद हमारी आबकारी मैडम अर्पणा अपनी माताजी के साथ आई तो हम सब कुछ अलसाये हुए मदहोशी के आलम में थके हुए उसका वेलकम कर उसे भी सुलाकर फिर सो गए।☺️


कल एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने के लिए.....
क्रमशः












सोनाली,चारु,अमन दादा ,मैं ओर  विमल