मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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गुरुवार, 18 जून 2020

मेरी मुरुदेश्वर यात्रा

               मेरी मुरुदेश्वर यात्रा

मुरुदेश्वर यात्रा
(उडुपी-यात्रा =2)
#भोले_बाबा_के_संग
#मेरा_ड्रीम_डेस्टिनेशन।
#श्री_मेरूदेश्वर_कर्नाटक)
#भाग =9
1 /11/19

आज ही सुबह हम उडुपि पहुँचे हैं बस-स्टैंड से ऑटो कर हम सीधे कृष्णामठ पहुँचे वहां एक कमरा नान Ac, 450 रु में लिया..ओर हम कृष्णमठ मन्दिर में दर्शन करने गए प्रसाद ग्रहण करने के बाद हम अपने रूम में आराम करने आ गए ।अब आगे...

रूम में थोड़ा आराम करके हम 4 बजे मालपा बीच घूमने निकले, मन्दिर के पास ही ऑटो स्टैंड हैं, वहां 150₹ में एक ऑटो कर हम मालपा बीच पहुंच गए...

बीच वैसा ही था जैसा आमतौर पर बोम्बे में होते है इसलिए मुझे बीच  ज्यादा पसन्द नही हैं, लेकिन हमारे पास  टाइम बहुत था और उसको कैसे भी पास तो करना था तो हम आराम से बीच पर घूमने लगे वैसे  इस बीच के बारे में काफी सुना था इसलिए यहां चले आये...

मुझे यहां का समुद्र बॉम्बे के समुद्र से थोड़ा अलग नजर आया, यहां पास ही बहुत सारी नावे खड़ी थी और उनपर कुछ लोग बैठे हुए गप्पे मार रहे थे मैंने पास जाकर मेरी आइलैंड जाने का पूछा तो मालूम पड़ा कि आजकल मेरी आइलैंड जाना मना  है क्योंकि समुन्द्र में तूफान आने की चेतावनी दी हुई हैं इसलिए बोट समुद्र में उतार नही सकते।

मेरा, मेरी आइलैंड जाने का बहुत मन था वहां की अजीबो गरीब चट्टानें देखने का मन था खेर, अब हम समुद्र की लहरों से खेलने लगे थोड़ी देर बाद मैंने बीच का जायजा लिया सबलोग उछलकूद कर रहे थे,सागर की शांत लहरें किनारों पर आ आआकर लौट रही थी.. सामने ही गाँधीजी का स्टैच्यू बना हुआ था,लेकिन धूप अधिक थी तो शाम का इंतजार करने के लिए हम एक बेंच पर बैठ गए ...

सुबह मन्दिर के प्रसाद में चावल सांभर खाया था तो भूख भी लग आई थी इसलिए नजदीक के स्टालों पर निगाह दौड़ाई तो चारों ओर फिश फ्राई के पोस्टर ही दिखे,लेकिन फिलहाल फिश खाने का बिल्कुल मुड़ नही था इसलिए एक स्टाल पर भीड़ देख मैंने एक प्लेट सेवपुरी की बनवाई ओर नजदीक ही बेंच पर बैठ गए ... यहां से सागर का अद्भुत दृश्य दिख रहा थ....लाल सूरज अपनी छटा पानी में बिखेर रहा था ओर उस छटा से एक बादल का टुकड़ा खेल रहा था... ये दृश्य जानलेवा था😀

शाम होते ही हम गाँधीजी के स्टैच्यू के पास जाकर फोटू खींचने लगे तब तक थोड़ा अंधेरा भी होने लगा था अब मुझे बीच से आकाश गहरा नीला दिखाई दे रहा था और सागर का पानी काला दिखाई दे रहा था प्रकृति का ये मनोहर रूप मन को भावविभोर कर गया तब सागर के किनारे कई फोटू खिंचे ओर एक ऑटो कर वापस कृष्णमठ लौट आये..

रात को मन्दिर की छटा निराली थी चारों ओर लाईटिंग लगी थी छोटे छोटे बल्बों से मन्दिर सजा हुआ था...

सामने स्टेज पर कुछ लेडिस कन्नड़ भाषा में भजन गा रही थी ,ये मैं सुबह से देख रही हूं लेडीज़ ग्रुप पीली साड़ी ओर लाल ब्लाउज पहने निरन्तर भजन गा रही थी ... ये ग्रुप चेंज भी हो रहे थे लेकिन कपड़े सबने वही पहने थे...वही पास में एक पोस्टर देखा जिसमें लिखा था कि ये संगीत कब शुरू हुआ और कब तक चलेगा...रात-दिन चलने वाली ये भजन मंडली किधर से आती होगी यही सोचते हुए हम भी वही एक  कुर्सी पर बैठ गए और कुछ देर भजन का आनंद लिया फिर मन्दिर का एक चक्कर लगाकर वापस सड़क पर आ गए और एक रेस्ट्रॉन्ट में खाना खाया वही पूछने पर हमको रूम का भी पता चला जाकर रूम देखा तो सुबह वाले से ये रूम ज्यादा अच्छा लगा ..सुबह वाला रूम मिस्टर को बिल्कुल भी पसन्द नहीं आ रहा था सुबह हमने 450 में रूम लिया था और ये रूम 650 का था खेर, रात 9 बजे हमने कृष्णामठ का रूम खाली किया और समान ले नए रूम में आ गए।

मुझे यहाँ रूम का हिसाब बढिया लगा यहां रूम आपको 24 घण्टे के हिसाब से मिलता हैं आप जब भी आओ उसीके हिसाब से 24 घण्टे रह सकते हो, दूसरी सिटी की तरह यहां 12 बजे का चेकआउट या चैकइन नही होता जिस भी टाइम आप आओगे,दूसरे दिन उसी टाईम आपको खाली करना पड़ेगा या दूसरे दिन का भाड़ा लागू होगा।

हमको कल 9 बजे रात को ही चेकआउट करना था इसलिए हमने ये रूम लिया।

खेर, इस रूम में आकर मुझे भी अच्छा लगा ...देर रात तक कल का प्रोग्राम बनाती हुई कब नींद लग गई पता ही नही चला...

क्रमसः---









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