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शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

केरला ट्रिप भाग-7

*।।केरला-डायरी।।*
भाग--7
2 जनवरी 2025



मेरी केरला-यात्रा 26 दिसम्बर से पनवेल से शुरू हुई थी जो 27 दिसम्बर को कोच्चीवेळी पहुँची थी। मुन्नार में 3 दिन गुजार कर हम थेकडी पहुँचे  फिर अलेपि।ओर आज हम कोवलम पहुँच गए। आखरी क़िस्त।अब आगे:-----


कोवलम यानी कि ये हमारा केरला ट्रिप का आखरी डेस्टिनेशन था अब बिदाई की घड़ी नजदीक आ रही थी। 6 दिन पहले मिले अनजान लोग अब दिल के बहुत करीब आ चुके थे। सुबह 6 बजे उठना,8 बजे नाश्ता करना और 9 बजे निकल पड़ना अब एक यादगार पल बनने जा रहा था।


कल रात को हम कोवलम बीच पर बने रीसोर्ट में आ गए थे जिसका नाम था "पप्पूकुट्टी" ।पहली बार केरला के किसी होटल का नाम जुबान पर आया था😂🤣😂 वरना नाम याद रखना तो दूर की बात है बोला भी नही जाता था।


खेर, कोवलम का रिसोर्ट बहुत बढ़िया था।होटल के सामने ही विशाल समुद्र  अपनी बांहे फैलाये हमारे स्वागत में खड़ा था।  किनारों पर शांत लहरे आ जा रही थी ओर लोग उन मचलती लहरों के संग  अटखेलियां कर रहे थे।


आगे, हम सब कोवलम के सजे धजे बाजार से गुजरते हुए अपने होटल की ओर बढ़ रहे थे ।अपने रूम में सामान रख हम सब खाना खाने अपनी अपनी पसन्द के होटलों में चले गए। मैं ओर अनिता मैडम अतिथि होटल की पहली मंजिल पर बैठे थे आज कुछ हटकर नानवेज खाने का मन हो रहा था। सामने हीँ समुंदर  दिखाई दे रहा था। जिस पर कितने ही जोड़े  चहल कदमी कर रहे थे। और हम भी ठंडी हवा के झोको से झूम रहे थे। सामने की टेबल पर बैठा एक अंग्रेज जोड़ा हाथ मे बियर का गिलास पकड़े अपनी ही मस्ती में चूर था। और हम सब इन नजारों का लुत्फ लेते हुए अपना डिनर खत्म कर रहे थे। फिर समुंदर के किनारे चलते हुए अपने कमरे में आ गए। अब बस आज का आखरी दिन बचा था साथ  मौज मस्ती के लिए क्योकि कल सब लौट जायेंगे अपनी अपनी जिंदगियों में।😔


कोई नी बादशाहों! अभी तो दिन शुरू हुआ है😂🤣😂
अब, हम सब रोज की तरह गुलफ़ाम बने अपनी उड़न तश्तरी में सवार हो तेजी से त्रिवेंद्रम की ओर बढ़ रहे थे " स्वामी पद्मनाशन मन्दिर की ओर।ये लखपति मन्दिर मेरे कुछ सालों पहले से ही दिमाग मे आया था जब इसके अंदर से खजाना  निकला था हालांकि 2021 में  मैं अपनी रामेश्वरम-कन्याकुमारी यात्रा के दौरान इस मन्दिर के दर्शन कर चुकी थी पर आज फिर ईश्वर ने इस मंदिर में आने का मौका दिया था तो क्या हर्ज था😄


अब  हम सब अपनी लूँगीयां टाइट कर मन्दिर के विशाल प्रागण्ड में लाईन में लगे हुये थे। भीड़ काफी थी  पिछली बार मुझे आराम से दर्शन हुए थे। पर मूर्ति दिखाई नही दी थी।शायद इस बार हो जाये।


अचानक, हमारे ग्रुप के वीर जवान कहीं से जुगाड़ कर के Vip टिकिट्स ले आये और हमको कुछ राहत मिली ।अब हम दूसरी Vip लाईन में खड़े थे जो काफी नजदीक थी।


गर्भ गृह में दीपक की रोशनी में मुझे पिछली बार की तरह मूर्ति के दर्शन इस बार भी नही हुए।😪 मेरे लिए ये अफसोस कि बात है कि मुझे दीपक की  लो में मूर्ति के दर्शन नही हुए।


साउथ में सभी बड़े छोटे मंदिरों में दीपक जलते हैं और उनकी मध्यम रोशनी में सबकुछ धुंधला नजर आता हैं खेर, उस स्थान पर पहुँचना ही बहुत बड़ी उपलब्धि हैं। यही सोचकर दिल को तसल्ली दी।
अब हम एक बार फिर से कोवलम बीच के पास बने लाईट हाउस में पहुँच गए पर यहाँ कहते है लिफ्ट हैं तो हम सब पहली मंजिल पर चढ़कर लिफ्ट के जरिये 6 माले तक आराम से पहुँच गए पर आखरी मंजिल फिर से सीधी सपाट थी आगे सीढ़िया थी।अब 'मरता क्या न करता' जैसे तैसे हम लोग सीढ़ियों के जरिये ऊपर आ गए☺️ ऊपर आकर दिल खुश हो गया।हमारे सामने विशाल समुंदर दूर तक नजर आ रहा था और कोवलम बीच का शानदार नजारा दिखाई दे रहा था। सबने खूब फोटू खिंचवाए ओर आराम से नीचे आ गए।
अब हम नजदीक ही भगवान शिव के मन्दिर पर पहुँच गए।यहाँ भगवान शंकर की एक विशाल प्रतिमा बनी थी जिसका जिक्र मेंने कई वीडियो में देखा था।ये मूर्ति मैंने पिछली यात्रा में नही देखी थी। पास ही मन्दिर भी था।


अब ,हम सब अपने रात्रि निवास पर लौट आये।आज एक नाटिका भी खेली गई जिसका नाम था सोनू की शादी।


ओर सोनू की शादी जिसका डायरेक्शन , लेखन, पटकथा ,संवाद,अभिनय सभी हमारे ग्रुप के युवा डायरेक्टर p n शर्मा जी ने किया था।ओर सोनू यानी कि हमारी सोनाली चक्रवती ओर मिस्टर सन्दीप चक्रवती ने दुल्हा-दुल्हन बनकर इस प्ले में चार चांद लगा दिए। नाटक की प्रस्तुति इतनी अच्छी थी कि हमारा हंस हँस के बुरा हाल हो गया।


रात गुजरती रही और हमारा कोवलम स्पेशल प्ले शो अपनी गरिमा बनाते हुए आगे बढ़ता रहा। इतना आनंद मैंने आज से पहले किसी मीटिंग में नही लिया था।


ये आखरी रात हमारे पूरे केरला टूर पर भारी थी।














ओर

ओर इस तरह हमारी केरल यात्रा खत्म हुई।

केरला ट्रिप भाग -6

*।।केरला-डायरी।।*
भाग--6
1जनवरी 2025


मेरी केरला-यात्रा 26 दिसम्बर से पनवेल से शुरू हुई थी जो 27 दिसम्बर को कोच्चीवेळी पहुँची थी। मुन्नार में 3 दिन गुजार कर कल हम थेकडी पहुँच गए थे ।आज हमारा पांचवा दिन हैं ओर साल का पहला दिन हैं। अब आगे:-----


आज साल का पहला दिन हैं और ये शुरू हुआ ठीक रात के 12 बजे केक कटिंग के साथ💐🎂
तो हुआ यू की कल रात 31दिसम्बर का जश्न हम अलेपि के बीच पर मनाने वाले थे। रात को सब गुलफ़ाम बने पार्टी के इंतजार में 9 बजे सजधज कर कमरे से बाहर निकले तो पता चला कि यहाँ का बीच 2-3 km दूर है और हमारा बस वाला नोटांक मार कर आराम से सो रहा हैं उसने स्पष्ट बोल दिया कि 9 बजे के बाद गुडनाईट, मतलब गुडनाईट।

 
अब उसके फैसले से उसको एस्ट्रा पैसा भी नही हिला सका तो बेचारे हमारे ग्रुप के 'बॉयज' दौड़ लगाकर ऑटो वालो को ढूंढने निकल पड़े पर लगता था सारे आटो वाले नए साल का जश्न दारू पीकर मनाने वाले थे तो कोई आने को तैयार नही था।और अगर 1 आध मिल भी गया तो 18 लोग छत पर चढ़कर या एक दूसरे की गोद मे बैठकर भी नही पहुँच सकते थे।  बड़े मायूस हो हमने बीच पर जाना केंसिल किया और अपुन की मंडली वही जमा ली।मूढ़ तो खराब हो चुका था पर थोड़ी देर में सब नार्मल हो गया।


फिर क्या था Gds की महफ़िल जब जम जाती हैं तो खत्म होने का नाम ही नही लेती😂😂 सब अपने अपने धांसू किस्से सुनाने लगे और ठीक 12 बजे जब अचानक पटाखे चलने लगे तो होश आया कि नया साल तो गया😀 सब बाहर की ओर लपके ओर लगे नाचने । बाहर अंधेरा था तो अंधेरे को दूर किया मोबाइल की टार्च ने।जब सब थक कर अंदर आये तो एक हेवी केक हमारा इंतजार कर रहा था। ये बड़ा सरप्राईज था।जी हां, लेकिन ये नए साल का केक नही था बल्कि हमारे ग्रुप की मेम्बर ललिता नाहटा का जन्मदिन केक था जिसे उनके प्यारे बेटे मनन ओर राहुल सजा रहे थे। यानी कि नए साल के जश्न में जन्मदिन का जोश भी शामिल हो गया।इस दुगनी खुशी के बीच उन्होंने केक काटा ओर हम सबने जीभर कर खाया और इस तरह हमारे पिछले साल की बिदाई ओर नए साल के आगमन की खुशियां मनाई गई जो हमारे मानस पटल पर हमेशा अंकित रहेगी।🥰
रात 1 बजे के बाद सोए ओर ठीक 8 बजे नाश्ता खाने भी आ गए क्योकि आज फिर हमको इस होटल से अपना बोरिया बिस्तर लपेटकर आगे कोवलम जाना था जहाँ 2 दिन रुकना था।
खेर, हम सबने सुबह नाश्ता किया। आज का नाश्ता  कल से भी बढ़िया था ।तो सबने एक साथ अपना नाश्ता खत्म किया और हम सब  बस में सवार हो गए।


आज सुबह-सुबह हम अलेपि की फेमस राइड यानी कि चलते फिरते घरों में घूमने निकल पड़े।
अलेपि के चलते-फिरते घर यानी कि हाउसबोट में हमने डेरा जमा लिया और लगे कव्वाली करने।क्या हुड़दंग मचाई की कह नही सकती।
कहीं फोटू खींचने की होड़ लगी थी तो कहीं कव्वाली गाई जा रही थी तो कहीं डांस हो रहे थे  ओर तो ओर हमारे शास्त्री जी ने तो "हनुमान चालीसा" ही शुरू कर दिया जिसमें स्वर से स्वर मिलाया हमारे ग्रुप के ' बॉयज' ने तो माहौल एकदम भक्ति पूर्ण हो गया। फिर क्या था थोड़ी देर में हम सब हनुमान चालीसा गा रहे थे। हालांकि मुझे पूरा नही आता पर स्वर मैंने भी मिला ही दिया।☺️


उसके बाद रही सही कसर हमारी अनिता मैडम ने एक पहाड़ी गीत गाकर पूरी कर दी।नए साल का ये रंगारंग प्रोग्राम ऐसा लग रहा था मानो हमारे केरला ट्रिप का यही पैसा वसूल आईटम हो।😛
2 घण्टे की ये पानी पर तैरती सैर मुझे जिंदगी भर याद रहेगी।🥰🥰


अब हम सब अपनी दूसरी डेस्टिनेशन पर चल दिये जिसका नाम था --"जटायु अर्थ सेंटर"।
यहाँ आने की मेरी दिली ख्वाहिश थी ।मैं काफी दिनों से ये जगह आना चाहती थी पर आना नही हो पा रहा था। 2021 में अपनी रामेश्वरम -त्रिवेंद्रम यात्रा में मैं इस जगह से अनजान थी वरना तभी आ जाती।


खेर,लेकिन कई बार सबकुछ ठीक होने पर भी बहुत कुछ नही होता।इंसान के हाथ मे कुछ भी नही हैं वो उस ऊपर बैठी अदृश्य शक्ति के हाथ का खिलोना मात्रा हैं।उसके इशारे के आगे हम इंसान कितने मजबूर है।


यहाँ आकर पता चला कि आज रोप वे बन्द हैं और 900 सीढ़ियों से ही सब लोग ऊपर  आ-जा रहे हैं। खड़ी चढाई चढ़ना मेरे लिए बहुत मुश्किल था 😪इसलिए हमारे ग्रुप के जवान मेम्बर सीढ़ियों से चढ़ गए और हम नीचे बैठे उनका इंतजार करते रहे । ओर ये सोचकर खुश हुए की यहाँ तक आना ही हमारे लिए सौभाग्य की बात है। ये सोचकर दिल को तसल्ली दी कि इसमे भी उस वाहेगुरु की कोई रजा होगी। हम नीचे 2 घण्टे तक सबका इंतजार करते रहे और उनकी आंखों के जरिये ही उस पवित्र स्थल का अवलोकन करते  रहे जहाँ भगवान राम के चरण पड़े थे।


सबके आने के बाद हमारी सवारी आगे कोवलम बीच पर चल दी। लेकिन बीच मे एक वेज रेस्टोरेंट में सबने छक्क कर खाना खाया।
पोस्ट लंबी हो गई हैं तो आगे की यात्रा अगले एपिसोड में देखिए आपके अपने केरला डायरी में
क्रमशः***



















केरला भाग-5

*।।केरला-डायरी।।*
भाग--5
31दिसम्बर 2024



मेरी केरला-यात्रा 26 दिसम्बर से पनवेल से शुरू हुई थी जो 27 दिसम्बर को कोच्चीवेळी पहुँची थी। मुन्नार में 3 दिन गुजार कर आज हम थेकडी पहुँच गए हैं ।आज हमारा चौथा दिन हैं, अब आगे:-----
कल शाम को हम थेकडी पहुँचे थे । मुख्य बाजार में स्थित हमारा होटल बहुत ही बढ़िया था सामने ही बड़ा सा चर्च था और उसी के कोने में माँ मरियम की विशाल सफेद प्रतिमा थी जिस पर रात को रंग बिरंगी लाईट के फोकस से प्रतिमा बेहद खूबसूरत लग रही थी।हल्की -हल्की ठंड में हम बाजार में घूम रहे थे बहुत ही प्यारा मौसम था इस समय। फिर खाना खाकर हम आकर होटल में सो गए।


आज सुबह भी होटल में नाश्ता करने वाली मैं पहली ही मेम्बर थी🤪 आज हमारा नाश्ता 3 दिन की अपेक्षा ज्यादा ही शानदार था। कंठ तक ठूंस कर मैंने नाश्ते से इतिश्री की।😋😋


मैंने देखा धीरे धीरे ग्रुप के सभी मेम्बर नाश्ता कर चुके तो हम सब आज जंगल मे मंगल मनाने निकल पड़े।हमारे साथ सोनाली,नेहा,अनिता मेम ओर चक्रवती सर नही गए बाकी सब 4-5 के ग्रुप में 3 जीप में सवार हो निकल पड़े।


आगे जाकर बन्द जीपों के कवर को खोल दिया गया जैसे कोई लड़की अपनी बंधी हुई जुल्फों को खोल देती हैं ठीक वैसे ही  हमारी जीप और उसमें बैठे हम लोग मदमस्त होकर उड़े जा रहे थे।अब ठंडी ठंडी हवा हमारे चेहरो से टकरा रही थी ओर हमारे बाल हवा में लहरा रहे थे। हिचखोले खाती हमारी जीप टेढेमेढे खूबसूरत रास्तों से गुजर रही थी कि अचानक सारी जीपें एक जगह रुक गई ।
मैंने भी उतरकर जायका लिया तो पता चला कि नीचे एक नदी बह रही हैं वो एक खूबसूरत पॉइंट था।सब वो ही देखने नीचे उतर चुके थे  । पर नीचे उतरना मुझे थोड़ा टेडी खीर लग रहा था पर मेरा मन इस खीर को खाने को ललचा रहा था क्योकि मुझे आभास हो गया था कि ये खीर नमकीन नही अपितु बहुत मीठी होगी😍 और हुआ भी वही, खीर मीठी ही नही बल्कि मेवा डली थी। तो अपने राम कूद पड़े इसे फ़तेह करने और इसमे साथ दिया हमारे ग्रुप के  जैन साहब ओर सूद साहब ने जिनका सहारा लेकर आखिर ये गर्मागर्म खीर मैंने खा ही ली😀😀

 
नदी बहुत ही खूबसूरत थी पहाड़ी नदी कल-कल बहता पानी उफ्फ्फ..गजब!! तभी मुझे फ़िल्म मधुमती की नदी याद आ गई जिधर वैजयंतीमाला ने गीत गाया था:--
"मैं तो कब से खड़ी इस पार... ये अंखिया थक गई पथ निहार...आ ...जा..रे परदेशी.."
परदेशी तो कोई आया नही पर हमारे ग्रुप के सारे हैंडसम मर्द अपनी बुआ के फोटू खींचने जरूर आ गए ओर फिर फोटुओं का जो दौर चला तो रुकने का नाम ही नही ले रहा था । उधर हमारे एडमिन अलग मुझसे होड़ लगा रहे थे नायाब फोटू खिंचवाने में,पर मुझे पता था मुझसे बाजी नही जीत सकते😄 😀😀


नीचे उतरना जितना टेडी खीर था ऊपर आना  उससे भी ज्यादा कठिन था परंतु Gds हो जिधर पंगा नही लेने का उधर 🙆 मैं कब ऊपर आ गई मुझे पता ही नही चला 🤣😂🤣


तो जनाब सभी के प्रयासों से मैं ऊपर आ गई और हमारी जीप फिर एक बार चल पड़ी।
काश! यहाँ सोनाली होती तो हजारों की तुलना में फोटू खिंचवाती ओर हमारे पप्पूकुट्टी बेचारे अभी तक नदी की लहरों में फंसी सोनाली मैडम की तस्वीरें खिंचते रहते। 🥰


अब हमारी जीप उछलती कूदती सरपट दौड़ रही थी आगे बहुत की खराब रास्ता आने वाला था जिसने मेरी हड्डी पसली एक कर दी।😔


जिसके कारण मुझे रात को आयोडेक्स ढूंढना पड़ा परन्तु वो कमबख्त पता नही कीधर कम्बल ओढ़कर सोया हुआ था कि मिला ही नही😪😪
हड्डियां तुड़वा कर हम जंगल मे मंगल मनाते रहे मनाते रहे जब भी जीप किसी खूबसूरत स्पॉट पर रुकती हम ता-थैया -ता-थैया करते और फिर जीप में बैठ जाते अपनी कमरिया तुड़वाने😪

 
और आखिर में हमारा कलमुँही जीप से पीछा छूटा ओर हम सब हमारी प्यारी बस में सवार हो गए ।यहाँ सोनाली,नेहा ओर अनिता मैडम फिर से मिल गए और हमारी सवारी आगे अलेपि की ओर भागने लगी।रास्ते मे एक जगह लंच किया।हालांकि आज भूख उतनी नही थी क्योकि सुबह अनलिमिटेड नाश्ता जो ठूस लिया था।


शाम के 4 बजे हम अलेपि पहुँच गए और सबसे पहले लाईट हाउस देखने पहुँचे। सात मंजिला लाईट हाउस की गोल सीढ़िया देखकर पहले तो मुझे चक्कर आ गये फिर एकदम नही बोलकर  मैंने दिल को तसल्ली दी कि मैं ऊपर नही जा सकती पर सोनाली को ऊपर जाता देखकर मेरा डरपोक मन थोड़ा साहस दिखा गया  और डरते डरते श्री राम का नाम लेकर आखिर ऊपर चढ़ ही गई। पर दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था बार बार यही बोल रहा था कि ––" बेटा ऊपर चढ़ तो गई हैं पर अब उतरेगी कैसे😭😭😭


सच मानो,किस टाइम मेरे दिमाग मे ये सनक सवार हुई थी कि मैं ऊपर चढूगी? कान पकड़े बाबा! आज के बाद ऐसी पागलपंथी फिर कभी नही करुँगी। सच्ची! मैंने दिल को तसल्ली दी।
हालांकि 2 दिन बाद फिर वही फितूर सवार हुआ था 😔😔😔


लाईट हाउस देखकर हम अलेपि के बीच पर आ गए जिधर सनसेट का विहंगम दृश्य दिखने वाला था।सबने बीच पर खूब हुडदंग मचाई। आज 31 की रात थी और हम सब यहाँ पार्टी करने वाले थे। वो अगले एपिसोर्ट में
क्योकि,अभी पिक्चर बाकी हैं मेरे दोस्त!!!
क्रमशः*****













केरला ट्रिप भाग -4

*।।केरला-डायरी।।*
भाग--4
30दिसम्बर 2024



मेरी केरला-यात्रा 26 दिसम्बर से पनवेल से शुरू हुई थी जो 27 दिसम्बर को कोच्चीवेळी पहुँची थी। अब हम मुन्नार में हैं  आज हमारा तीसरा दिन हैं, अब आगे:-----

आज हमारा सारा टब्बर मुन्नार से निकल रहा था, 3 दिन यहाँ रहकर इस माहौल से, यहाँ के स्टॉफ से इश्क हो गया था। स्पेशली विष्णु से थोड़ा ज्यादा ही लगाव हो गया था वो भी हमसे घुलमिल गया था थोड़ा भावुक हो वो मेरे पास सेल्फी खिंचवाने आ गया। हम सबने सेल्फी खिंचवाई ओर वहाँ से बिदाई ली।
अब हम एक शानदार टी-गार्डन में पहुँचे जिधर 50 ₹ का टिकिट कटवाकर हम सब चाय के बगानों में ऐसे घुस गए जैसे बेगारी करने जा रहे हो 🤣😂😂
यहाँ सबने अपनी अपनी रील बनाई और दिल की तमन्ना फोटुओं में धो दी। सभी ने अलग-अलग पोज बनाकर बरसों की तमन्ना पूरी की🥰 यहाँ का माहौल भी बहुत रोमांटिक था चारो ओर चाय के बगान...पीछे दूर तक  हरे-हरे पहाड़ ओर उन पर नाचते सफेद बादल.. आश्चर्य की चरम सीमा तक जादुई माहौल था....कभी बादल पहाड़ पर थिरकते नजर आते कभी चाय के बगानों पर ओर कभी हमको ठंडा सा स्पर्श करवा जाते।
सन्दीप साहनी जी हरे बगानों में अपनी लाल रंग की टीशर्ट में  देवानन्द नजर आ रहे थे ओर योगिता के पीछे दौड़ लगा कर गा रहे थे--" माना जनाब ने पुकारा नही,क्या मेरा प्यार भी गवारा नही..." ऐसा लग रहा था मानो किसी तोते ने अपने मुंह मे लाल सुर्ख मिर्च दबा रखी हो ।उस पर मैंने उनका थिरकता हुआ वीडियो भी बना डाला☺️
उधर हमारे नम्बर 2 सन्दीप चटर्जी किसी मलयालम बेग़म के पीछे पड़े हुए थे और वो उनसे अपना पल्लू छुड़ाकर उनको चेता रही थी --- "छोड़ दो आँचल जमाना क्या कहेगा"। ओर हद तो तब हुई जब मैं उनका भी वीडियो बना रही थी।😂😂🤣
इधर हमारे एडमिन तो एक छोटी- सी डूंगर पर ही चढ़ गए और आमिरखान की तरह लहरा-लहरा कर गाना गाने लगे ---"पहला नशा, पहला खुमार... नया प्यार है नया इंतजार..."🥰  मुझे डर लगने लगा, कहीं आमिर खान की तरह शर्ट न उतारकर फेंक दें परन्तु एक नम्बर के कंजूस अपनी Gds की टोपी तक नही फेंक सके😂🤣😂 मैंने इनका भी फोटू उतार लिया।
इस जादुई माहौल में हम सब काफी देर तक उठा-पटक करते रहे। सबने बहुत इंजॉय किया अब हमारी बस बादलों को काटती हुई दौड़ रही थी। सामने की सड़क तक दिखनी बन्द हो गई थी हम खुद भी बादलो के अंदर से निकल रहे थे।ये पल इतना रोमांचक और जादुई था कि लग रहा था मानो हम स्वर्ग में घूम रहे हो👻👻
थेकडी का 3-4 घण्टे का सफर था एक जगह रुककर हमने आज  का लंच भी किया।
केरल में 3-4 घण्टे के सफर में बोरियत बिल्कुल नही होती क्योकि दृश्य इतने खूबसूरत होते हैं कि
आंख बंद करने का मौका ही नही मिलता।घुमावदार रास्ते,हरे भरे चाय के बागान ओर खूबसूरत घर देखते रहने का मन होता हैं।
शाम 4 बजे हम आराम से थेकडी पहुँच गये । थेकडी के इंटर पर ही हमको भगवान गणेश की बड़ी विशाल मूर्ति देखने को मिली। फिर कुछ देर बाद हम एक बढ़िया से होटल के आंगन में उतरे जो मेन बाजार में था आसपास काफी दुकानें थी और सामने एक बड़ा सा चर्च था जिस पर नए साल के उपलक्ष्य में लाइटिंग कर रखी थी।
कुछ देर फ्रेश होकर हम ठीक 6 बजे यहाँ पास ही  कथककली का शो देखने गए 200 रु पर पर्सन  का online टिकिट सन्दीप ने पहले ही करवा लिए था। कथकली नृत्य नाटिका मैंने जीवन मे पहली बार ही देखी थी।  कलाकारों ने लक्ष्मण और शूपर्णखा का कैरेक्टर जबरजस्त प्ले किया था। एकदम मंजा हुआ अभिनय और भाव भागिमा देखते ही बनता था।
उसके बाद हमने केरल की एक ओर प्राचीन कला को देखा जिसे "कलारिपट्टू" कहते हैं। इसमे योद्धा ओर उसकी युध्द कला दिखाई गई थी जो हैरत करने वाली थी।
ये भी 1 घण्टे का प्रोग्राम था। थियेटर से निकलकर हम बाजार में आ गए और सबने अपने मनपसंद गरम मसाले खरीदे।
आज पूरे दिन बहुत कसरत की थी तो नींद भी आंखों में थपेड़े मार रही थी कल फिर सफर करना है तो हम सब गुड बॉय बोलकर अपने अपने रूम में चले गए।
मिलते हैं एक ब्रेक के बाद।











केरला डायरी भाग-3

*।।केरला-डायरी।।*
भाग--3
29दिसम्बर 2024



मेरी केरला-यात्रा 26 दिसम्बर से पनवेल से शुरू हुई थी जो 27 दिसम्बर को कोच्चीवेळी पहुँची थी। अब हम मुन्नार में हैं  आज हमारा दूसरा दिन हैं, अब आगे:-----

कल सुबह मुन्नार में हमारे ग्रुप की गर्ल्स ने चाय के बगानों1 में आग लगा दी 😳🤭 हैरान मत हो, आग लगाने से मेरा तातपर्य यह हैं कि कल उन्होंने सुबह सुबह चाय के बगानों में जाकर जो थईया -थैया किया कि सारे बागानों के तोते उड गए जिन्हें देखकर मेरे हाथों के भी तोते उड़ गए😔 क्योंकि कल मैं बुलाने पर भी नहीं गई थी तो मुझे अफसोस तो होगा ही क्योकि मेरी उनकी साथ खूबसूरत  वीडियो न बन  सकी।  इसका मुझे अफसोस  हैं।😪
पर अब अफसोस करने से क्या फायदा🙆  इसलिए  मैंने भी आज कमर कस ली कि उनसे भी बढ़िया वीडियो बनाकर दिखाउंगी 🙋 वो अलग बात है कि उनके जैसी क्या उनसे आधे के जैसी भी वीडियो नही बन सकी😭😪
खेर, मैं किसी तरह किसी को भी न बताये चुपचाप होटल से बाहर आ गई। अपनी सेल्फी स्टिक को हवा में,,,,   , उछालती हुई। 
बाहर  काफी ठंडक थी। एक ठंडा हवा का फ्रेश झोंका मेरे अधरों को चूमता हुआ खेतों में गुम हो गया और मैं उसी के पीछे मतवाली चाल से अपने बालों को झटकाती हुई खेतो में घुस गई ।कुछ फोटू खिंचे पर अकेले मजा नही आया तो वापस लौट रही थी कि अचानक मैंने वहाँ एक भुतहा घर 💀देखा फिलकुल अंग्रेजी फिल्मों जैसा था तो मैं भाग खड़ी हुई और अपने  दड़बे में आकर ही दम लिया।👻किसी को कानो कान खबर नही हुई।🙃😔वो तो अच्छा हुआ मुझे आते समय हमारे एडमिन संजय कौशिक नही मिले वरना ये बात सारे ग्रुप में जग जाहिर हो जाती😎🤭😳
कुछ देर बाद विजयी चाल चलती हुई मैं डायनिंग एरिये में आ गई  जिधर सब नाश्ते पर टुटे पड़े थे।आज दिन की शुरुआत एक मनहूस खबर से हुई ।हम जवान लोगो के ग्रुप की नन्ही कली हमारी प्यारी नेहाशर्मा को पैर में मोच आ गई थी जिसके कारण उससे चला नही जा रहा था। मिस्टर शर्मा और सरोज परेशान थे अब क्या होगा पर बहादुर नेहा सबको चिल्लल कर के आगे के सफर को तैयार हो निकल पड़ी।
आज हम किसी नेशनल पार्क में जाने वाले थे। वहाँ जाने के लिए 2 से ढाई घण्टे लगना था और इतना टाइम हमने अंताक्षरी खेलकर बिताया समय का पता ही नही चला और हम सब  "एराविकुलम नेशनल पार्क" के गेट के पास खड़े थे।यहाँ काफी भीड़ थी हमारी टोली भी इस भीड़ में शामिल हो गई। यहाँ से बस द्वारा हमको दूर पहाड़ पर जाना था रास्ता दिलकश था चारो ओर दूर तक चाय के बागान अपने हाथ फैलाये खड़े थे आखिर में बस ने हमको एक निश्चित जगह पर उतार दिया यहाँ काफी भीड़ थी। कुछ स्टॉल भी बने थे जिसपर चाय और केक मिल रहे थे । ग्रुप के सदस्यों ने यहां हल्का फुल्का नाश्ता किया और मैंने भी चाय और केक खरीद लिया परन्तु यहाँ बड़ा बेकार सिस्टम था आप कैश पैसों से कुछ नही खरीद सकते थे सब अपने कार्ड से खरीदो।इसलिए लाईन लंबी थी।
खेर, ये पार्क बड़ा ही सुंदर था ।सारे पर्यटक इसको दिखने यहाँ जरूर आते थे इसलिए काफी भीड़ थी।यहाँ वैसे तो कोई जानवर दिखाई नही दिया। हाँ,बकरी जैसे जानवर जरूर घूम रहै थे।जिसके लिए लिखा था कि ये नीलगिरी ताहर लुप्त प्रजाति की पहाड़ी बकरी हैं ।काफी लंबी चौड़ी ये बकरी यहां पर्यटकों से हिलिमिली बेखोफ घूम रही थी सबके साथ मस्त फोटू खिंचवा रही थी।
कुछ देर बाद मैंने देखा कि कुछ लोग ट्रेकिंग करके ऊपर जा रहे है जो आगे जाकर एक छोटी सी पहाड़ी पर समाप्त होती थी। वहां से घाटी का मनोरम दृश्य नजर आता था। यहां से मुन्नार की सबसे ऊंची चोटी "अनामुडी" के भी दर्शन होते हैं जो लगभग 2695 मीटर की ऊँचाई पर थी।
पैदल चलने के अलावा यहां बैटरी कार भी चल रही थी जो 800 रु पर-पर्सन के हिसाब से चार्ज ले रही थी। पैसे बहुत ही ज्यादा थे मेरे ख्याल से इतनी ऊंचाई के लिए 400 रु ठीक थे। मैं आधी दूर जाकर वापस लौट आई क्योकि मेरे लिए ज्यादा चढ़ाई चढ़ना नुकसानदायक था लेकिन ग्रुप के ज्यादातर सदस्य ऊपर जाकर Gds का झंडा फहरा कर ही आये।
यहाँ जाने और आने में काफी समय लगा।थक भी गए थे और कल की तरह आज भी यहाँ कोई लंच करने को तैयार नही था क्योंकि यहाँ सब जगह सिर्फ स्नैक्स की ही दुकानें थी जिन पर सिर्फ आइसक्रीम ओर केक ही बिक रहे थे ।अब कितना केक खाये🤪
थोड़ी देर बाद हमारी बस एक वाटरफॉल की तरफ दौड़ रही थी और मुझे खाली पेट चक्कर आ रहे थे ।इतने में मैंने देखा कि मेरे पीछे कुछ खुसुर-पुसुर हो रही हैं और कुछ देर में ही पिटारा खुल गया ।उधर से ललिता लड्डू ले आई तो सोनाली केक ले आई ,तो सरोज  थेपले ले आई और आखिर में योगिता ने मोटी मोटी गजब की मीठी रोटी खिलाई😀 यानी कि लंच की कमी सबने मिलजुल कर दूर कर दी।यही तो एकता की ताकत हैं।और Gds की एकता की तो मिसालें दी जाती हैं। Gds जिन्दाबाद।
अब हम Lakkom वाटर फॉल जो नेशनल पार्क से ज्यादा दूर नही था हम उधर पहुँचे।यहाँ भी 50 रु की बलि चढ़ाकर हम तेजी से ऊपर की तरफ चल दिये ।ये एक खूबसूरत महाबली वाटरफॉल था जो पूरे वेग से अपने उफान पर था ।ग्रुप के बच्चे राहुल और मनन तो लपककर फॉल के पास पहुँच गए  ।लेकिन मैं , मेरे मिस्टर, सोनाली ओर अनिता मैडम दूर से इसको देखकर ही खुश हो रहे थे जबकि सारे सदस्य पानी के पास पहुँचकर जलक्रीड़ा में मग्न थे।
यहाँ से हमारी सवारी चंदन के पेड़ों वाले जंगल मे जाने वाली थी पर सबने मना कर दिया अब  चन्दन को देखने कौन जाएगा।अगर वीरप्पन जिंदा होता तो कोई बात भी थी ।अब कौन 3 घण्टे का सफर करके चन्दन के पेड़ देखने जाए।अब तो "पुष्पा"का जमाना हैं वही नकली चन्दन देख लेंगे🤣🤣😂🤣
अब हमने बस वाले अन्ना को बोला कि वो हमको मुन्नार के बाजार में छोड़ दे ताकि हम बाजार की रौनक देख सके और कुछ खरीदारी भी कर सके । आखिर अब सोनाली के लिए अन्नानाश भी
तो खरीदना था। आज उस बेचारी को कहीं भी कोई अन्नानाश बेचता अन्ना नही मिला😩
और हम मुन्नार के बाजार में उतर गए।
उसके बाद बड़ा ही रौचक मामला हुआ जो सोनाली ने लिखा है🤪🤪 कृपया जरूर पढ़ें।
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तो मिलते हैं कल अगले एपिसोड में हम लोग।





केरल यात्रा भाग-2

*।।केरला-डायरी।।* भाग 2
28 दिसम्बर 2024


मेरी केरला-यात्रा 26 दिसम्बर से पनवेल से शुरू हुई थी जो 27 दिसम्बर को कोच्चीवेळी पहुँची थी। अब हम मुन्नार में थे आगे:-----
कल रात हम सब जैसे ही अपने शानदार बेड पर पसरे ही थे कि अचानक एक रोबीली आवाज़ याद आ गई जिसने डायनिंग टेबल पर ऐलान किया था कि --- "सब 7 बजे उठकर 8 बजे नाश्ते की टेबल पर आ जाए"।
ये हमारे ग्रुप के सबसे स्मॉर्ट बन्दे शर्मा जी थे। अब उनकी बात कौन टाल सकता था।पहले ही दिन उनकी घुड़की काम कर गई और सबसे पहले टेबल पर आने वाली मैं ही थी ।😂🤣😂
जैसे मुझे डर हो कि कहीं ये मुझे ग्रुप से खदेड़  न दे😂😂🤣
इस होटल में विष्णु नामके वेटर के साथ बड़ा बढ़िया एक्सपीरियेंस रहा। बड़ा प्यारा बच्चा था।हम कुछ भी बोलते वो उसके सर से 1km ऊपर से जाता था और वो अपने काले से मुखमंडल पर फैले धुँधरालु बालो को एक जोरदार झटका देकर सफेद बत्तीसी दिखा देता था।🤪🤪
ओर जब अनिताजी,उसके साथ पंजाबी में गल करती तो उसका मुंह शर्म से लाल हो जाता था।ओर हम सब जोरदार ठहाके लगाते थे😀😀😀
ठीक एक घण्टे बाद,हम सब गुलफाम बने मुन्नार  देखने निकल पड़े। हमारी सजधज ऐसी थी मानो हम सब बेटे के लिए बहु देखने जा रहे हो 😛😛
हमसब  सजेधजे किसी फिल्मी हीरो -हीरोइनें की तरह कातिल अंदाज में अपनी- अपनी सीट पर बिराजमान हो गए। 
आज सबसे पहले हम मुन्नार के खूबसूरत चाय बगानों को देखने गए और एक ब्यूह पॉइंट पर जाकर ढेर सारी फोटू ओर वीडियो बना डाली।
फिर हम कुंडाला डैम (Kundala Dam) देखने निकल पड़े।वहाँ पहुँचकर मैंने देखा कि इस डेम के साथ एक खूबसूरत लेक भी हैं। लेक इतनी खूबसूरत थी कि आंखों में मदहोशी छाने लगी चारो ओर हरियाली छाईं हुई थी और झील ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो प्रकृति ने अपने दोनों हाथों में अथाह जलराशि समेट रखी हो। नीले रंग की झील में रंग बिरंगी नावे ऐसे तैर रही थी जैसे लाल पीली मछलियां तैर रही हो।
मैंने तो आव देखा न ताव सबको पछाड़ती हुई लेक की तरफ दौड़ने लगी और धड़ाधड़ फोटू खींचने लगी । उधर जाते-जाते मैंने कनखियों से देखा की सोनाली तेजी से बस से लुडकती हुई  अन्नानाश वाले ढ़ेले की ओर दौड़े जा रही थी। ओर बेचारे हमारे पप्पुकुट्टी उसका पर्स हाथों मे दबाए  पीछे- पीछे खिंचे जा रहे थे 🙆
लेक के पास ही यूकोप्लीट्स के सुंदर पेडों की कतारें सजी हुई थी।जहाँ मैंने अपने सुस्त हुए पति को मोबाइल थमाया ओर ढेर सारे फोटू खिंचवाने लगी।फिर पास ही कुर्सी पर बैठकर  अपनी अधखुली आँखों से झील को निहारने लगी । कुछ देर बाद मेरी तंद्रा भंग हुई तो मेरा मन बिल्लियों उछलने लगा और तन उस खूबसूरत झील की छाती पर टहलने का करने लगा। तो सोचा क्यो न मैं भी एक नाव में बैठकर फ़िल्म "मैंने प्यार किया" का वो फेमस गीत गाउ....
" दिल दीवाना बिन सजना के माने ना।
ये पगला हैं समझा ने से,समझे ना"
ओर मैं अपने आपको भाग्यश्री समझ ही रही थी की नामुराद काउंटर वाले ने मेरा नम्बर आने पर खिड़की ही बन्द कर दी 😡 बोला टिकिट खत्म हो गई। हैं भगवन ! मेरे सारे मंसूबों पर इस नामुराद ने पानी फेर दिया, अब क्या करूँ😢 मरता क्या न करता, मैंने भी उसको मन ही मन पंजाबी में जमकर गालियां दी– "कलमुंहे तेनु छित्तर पड़े ✊👊
मन शांत हुआ तो पता चला कि ये खूबसूरत झील तो बिल्कुल शूपर्णखा निकली । हमारे प्यारे बच्चे मनन का मोबाइल  ही निगल गई। सबका मन खराब हो गया। मेरा भी दिल उदास हो गया।आज के दौर में भगवान मोबाइल तो दुश्मन का भी न छीने😪।
सब उदास मन से दूसरे डेम को देखने आगे बढ़ गए। जिसका नाम था मत्तूपेटी (Mattu Petty Dam) डेम ।ये भी मुन्नार का एक खूबसूरत डेम था। यहाँ काफी भीड़ थी जाम भी तगड़ा था तो हम कुछ लोग बस से उतर गए और पुल को पार करते हुए लेक की तरफ़ आ गए। यहाँ भी नावे चल रही थी और नव विवाहित जोड़े गले मे बाहें डाले नाव में घूम रहे थे। पर यहाँ लेक में वो बात नही दिखी जो  कुण्डला लेक में थी ।वैसे भी दिल उदास था ।किसी का मन नही हुआ तो हमने सिर्फ चाय पी ओर  आगे बढ़ गए।
आगे हमारी सवारी कारमिलगिरी बोटनिकल गॉर्डन में गई जिधर 50 रु का कर्ज अदा करके हम सब अंदर घुस गए। यहाँ हजारों की तादात में कैक्टस लगे हुए थे।इतनी वेराइटी में कैक्टस देखना मेरे लिए किसी आश्चर्य से कम नही था। इतनी खूबसूरती से कैक्टस ओर फूलों को सजाया गया था कि सबकुछ दिवा स्वप्न सा लग रहा था। यहाँ बहुत से सेल्फी पॉइंट्स भी बनाये गये थे जिधर हम सब महिलाओं ने दिल खोलकर  फ़ोटुग्राफी की ।अंदर कुछ दुकानें भी थी जिधर अनिता जी और मैंने हेट पहनकर विभिन्न मुद्राओं में फोटू खिंचे ।
ओर उधर, सोनाली,योगिता ओर ललिता अपने घरों के लिए स्पाइसी सामान खरीदने में लगी हुई थी। आखिर में,मैं कैसे पीछे रहती मैंने भी आव देखा न ताव ओर देखा देखी में 800 रु का मसाला खरीद लिया ओर एक विजय मुस्कान चेहरे पर लाकर अपने आपको विजेता घोषित कर थैला हाथ मे लिए गार्डन से बाहर आ गई।
दोपहर हो चली थी और पेट मे चूहे दौड़ रहे थे पर खाने की किसी की भी चाहत दिखाई नही दे रही थी ।वैसे भी आसपास कोई अच्छी होटल दिख भी नही रही थी मजबूरी में हमारे बस वाले अन्ना ने हमारी बस रोज गार्डन के पास रोक दी अब सब रोज गार्डन देखने ऐसे निकले जैसे किसी शादी में खाने के पंडाल में जा रहे हो।
मैंने फिर कनखियों से झांका की सोनाली कीधर गई पर इस बार सोनाली को कोई अन्नानाश वाला नही मिला तो वो दोनों एक केक शॉप में घुस गए। शायद वहाँ कोई अन्नानाश फ़्लेवर का केक-शेक मिल जाये।🤭
इधर  मैं भी खाने के जुगाड़ में इधर उधर भटकने लगी ।आखिर में एक टपरी दिखी जिधर हम दोनों भूखे प्यासे प्राणियों ने चाय ,ब्रेड और आमलेट से अपनी भूख मिटाई ।
अब तक बस के अन्य प्राणी गार्डन की कैंटीन में चाय समोसा खाकर खुद को हरा भरा कर रहे थे ।जब मैं वहाँ पहुँची तब तक सबकी तृप्ति हो चुकी थी और सारा गार्डन देखकर सब वापसी की कतार में खड़े थे।
जब मैं रोज गार्डन में पहुँची तो मैंने देखा कि यहाँ भी 50 रु की अर्जी कटवानी पड़ेगी।परन्तु मैं कैसे कटवाती क्योकि मेरे अंदर जाते ही सब बाहर निकल रहे होंगे तो? तो मैंने टिकिट लिया ही नही ओर ऐसे ही अंदर घुस गई।न किसी ने पूछा न मैंने किसी को बताया😛😛
ओर अंदर घुसते ही वही हुआ ,कुछ लोग बाहर निकलते नजर आये तो मैंने उनको अनदेखा कर एक खोपचे में घुसकर बाग के अंदर प्रवेश किया आखिर यहाँ के भी तो फोटू होने चाहिए थे। मैं अकेली ही अपनी शानदार सेल्फ स्टिक से अपने ही फोटू लेने लगी कि अचानक ग्रुप के शर्मा जी और नाहटा जी नजर आए और हम सबने मिलकर कुछ फोटू ओर वीडियो बनाये।
दिनभर घूमता परिंदा रात को अपने घोसले को निकल पड़ा। हम भी थके हारे अपनी मंजिल को आ रहे थे कि हमारी बस एक शानदार राजस्थानी रेस्टोरेंट के सामने रुकी जिसका नाम *पुरोहित* होटल था यहाँ हम भूखे भेड़ियों की तरह खाने पर टूट पड़े क्योंकि दोपहर को लंच किया नही था तो सबने छक कर खाया और थके हुए अपने नीड पर लौट आये ।
आज तो पैरों की वो हालत थी कि कोई गोद मे उठाकर ले जाता तो ईनाम का हकदार होता।
ओर इस तरह हमारा पहला दिन हर्षोल्लास से सम्पन्य हुआ।
शेष अगले एपिसोट में
















अयोध्या

"अयोध्या"
13 मई 2024




जब से भगवान राम का मन्दिर बनना शुरू हुआ तभी से मन मे एक आस का बीज पनपने लगा कि हो न हो एक दिन मैं जरूर अपने लल्ला के दर्शन करुँगी।
धीरे-धीरे ये आस का बीच मन मे अंकुरित होने लगा और फ़टाफ़ट तीव्रगति से फैलने लगा।
मुझे कल की वो बातें याद आने लगी जब मैं छोटी थी और घर मे #धर्ययुग आता था जिसके फ्रंट पेज पर  एक × बना होता था ओर उस पर एक बड़ा ताला लटका होता था । नीचे एक स्लोगन लिखा होता था कि--- " राम मंदिर में फिर से ताला" । बाल बुद्धि थी इसका मतलब समझ नही आता था की क्यो इस मंदिर में ताला लगता हैं?
बात बचपन की थी जो बड़े होने पर समझ आने लगी।फिर वो दिन आया जब यहाँ खून की नदी बही थी और लाशों से गलियां अटी पड़ी थी तब भयभीत हो वो कैसेट देखा था। जिसकी भयावह तस्वीर आज भी दिल मे ताजा हैं।
लेकिन दिन बदले ओर  लल्ला का वनवास खत्म हुआ । भगवान के आशीर्वाद से इस सदी का महानतम दिन आया जब इस मंदिर का उदधाटन हुआ और श्रीराम  लल्ला के रूप में इस नगरी मे अवतरित हुए।
मेरे जीवन के सफलतम दिनों में एक अध्याय ओर जुड़ गया 13 मई 2024 का वो पावन दिन था जब मैंने मेरे प्रभु राम के दर्शन किये। स्थापना के ठीक 111 दिन बाद।
ओर इस दर्शन के बिचौलीये रहे अयोध्या निवासी #श्रीसूरजमिश्राजी जो हमारे Gds सदस्य भी हैं।जिनकी वजय से मैंने आराम से  लल्ला के दर्शन किये फोटू खिंचवाए और अपनी बरसों की प्यासी आत्मा को तृप्त किया। जय श्रीराम🙏