मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

केरला ट्रिप भाग -4

*।।केरला-डायरी।।*
भाग--4
30दिसम्बर 2024



मेरी केरला-यात्रा 26 दिसम्बर से पनवेल से शुरू हुई थी जो 27 दिसम्बर को कोच्चीवेळी पहुँची थी। अब हम मुन्नार में हैं  आज हमारा तीसरा दिन हैं, अब आगे:-----

आज हमारा सारा टब्बर मुन्नार से निकल रहा था, 3 दिन यहाँ रहकर इस माहौल से, यहाँ के स्टॉफ से इश्क हो गया था। स्पेशली विष्णु से थोड़ा ज्यादा ही लगाव हो गया था वो भी हमसे घुलमिल गया था थोड़ा भावुक हो वो मेरे पास सेल्फी खिंचवाने आ गया। हम सबने सेल्फी खिंचवाई ओर वहाँ से बिदाई ली।
अब हम एक शानदार टी-गार्डन में पहुँचे जिधर 50 ₹ का टिकिट कटवाकर हम सब चाय के बगानों में ऐसे घुस गए जैसे बेगारी करने जा रहे हो 🤣😂😂
यहाँ सबने अपनी अपनी रील बनाई और दिल की तमन्ना फोटुओं में धो दी। सभी ने अलग-अलग पोज बनाकर बरसों की तमन्ना पूरी की🥰 यहाँ का माहौल भी बहुत रोमांटिक था चारो ओर चाय के बगान...पीछे दूर तक  हरे-हरे पहाड़ ओर उन पर नाचते सफेद बादल.. आश्चर्य की चरम सीमा तक जादुई माहौल था....कभी बादल पहाड़ पर थिरकते नजर आते कभी चाय के बगानों पर ओर कभी हमको ठंडा सा स्पर्श करवा जाते।
सन्दीप साहनी जी हरे बगानों में अपनी लाल रंग की टीशर्ट में  देवानन्द नजर आ रहे थे ओर योगिता के पीछे दौड़ लगा कर गा रहे थे--" माना जनाब ने पुकारा नही,क्या मेरा प्यार भी गवारा नही..." ऐसा लग रहा था मानो किसी तोते ने अपने मुंह मे लाल सुर्ख मिर्च दबा रखी हो ।उस पर मैंने उनका थिरकता हुआ वीडियो भी बना डाला☺️
उधर हमारे नम्बर 2 सन्दीप चटर्जी किसी मलयालम बेग़म के पीछे पड़े हुए थे और वो उनसे अपना पल्लू छुड़ाकर उनको चेता रही थी --- "छोड़ दो आँचल जमाना क्या कहेगा"। ओर हद तो तब हुई जब मैं उनका भी वीडियो बना रही थी।😂😂🤣
इधर हमारे एडमिन तो एक छोटी- सी डूंगर पर ही चढ़ गए और आमिरखान की तरह लहरा-लहरा कर गाना गाने लगे ---"पहला नशा, पहला खुमार... नया प्यार है नया इंतजार..."🥰  मुझे डर लगने लगा, कहीं आमिर खान की तरह शर्ट न उतारकर फेंक दें परन्तु एक नम्बर के कंजूस अपनी Gds की टोपी तक नही फेंक सके😂🤣😂 मैंने इनका भी फोटू उतार लिया।
इस जादुई माहौल में हम सब काफी देर तक उठा-पटक करते रहे। सबने बहुत इंजॉय किया अब हमारी बस बादलों को काटती हुई दौड़ रही थी। सामने की सड़क तक दिखनी बन्द हो गई थी हम खुद भी बादलो के अंदर से निकल रहे थे।ये पल इतना रोमांचक और जादुई था कि लग रहा था मानो हम स्वर्ग में घूम रहे हो👻👻
थेकडी का 3-4 घण्टे का सफर था एक जगह रुककर हमने आज  का लंच भी किया।
केरल में 3-4 घण्टे के सफर में बोरियत बिल्कुल नही होती क्योकि दृश्य इतने खूबसूरत होते हैं कि
आंख बंद करने का मौका ही नही मिलता।घुमावदार रास्ते,हरे भरे चाय के बागान ओर खूबसूरत घर देखते रहने का मन होता हैं।
शाम 4 बजे हम आराम से थेकडी पहुँच गये । थेकडी के इंटर पर ही हमको भगवान गणेश की बड़ी विशाल मूर्ति देखने को मिली। फिर कुछ देर बाद हम एक बढ़िया से होटल के आंगन में उतरे जो मेन बाजार में था आसपास काफी दुकानें थी और सामने एक बड़ा सा चर्च था जिस पर नए साल के उपलक्ष्य में लाइटिंग कर रखी थी।
कुछ देर फ्रेश होकर हम ठीक 6 बजे यहाँ पास ही  कथककली का शो देखने गए 200 रु पर पर्सन  का online टिकिट सन्दीप ने पहले ही करवा लिए था। कथकली नृत्य नाटिका मैंने जीवन मे पहली बार ही देखी थी।  कलाकारों ने लक्ष्मण और शूपर्णखा का कैरेक्टर जबरजस्त प्ले किया था। एकदम मंजा हुआ अभिनय और भाव भागिमा देखते ही बनता था।
उसके बाद हमने केरल की एक ओर प्राचीन कला को देखा जिसे "कलारिपट्टू" कहते हैं। इसमे योद्धा ओर उसकी युध्द कला दिखाई गई थी जो हैरत करने वाली थी।
ये भी 1 घण्टे का प्रोग्राम था। थियेटर से निकलकर हम बाजार में आ गए और सबने अपने मनपसंद गरम मसाले खरीदे।
आज पूरे दिन बहुत कसरत की थी तो नींद भी आंखों में थपेड़े मार रही थी कल फिर सफर करना है तो हम सब गुड बॉय बोलकर अपने अपने रूम में चले गए।
मिलते हैं एक ब्रेक के बाद।











केरला डायरी भाग-3

*।।केरला-डायरी।।*
भाग--3
29दिसम्बर 2024



मेरी केरला-यात्रा 26 दिसम्बर से पनवेल से शुरू हुई थी जो 27 दिसम्बर को कोच्चीवेळी पहुँची थी। अब हम मुन्नार में हैं  आज हमारा दूसरा दिन हैं, अब आगे:-----

कल सुबह मुन्नार में हमारे ग्रुप की गर्ल्स ने चाय के बगानों1 में आग लगा दी 😳🤭 हैरान मत हो, आग लगाने से मेरा तातपर्य यह हैं कि कल उन्होंने सुबह सुबह चाय के बगानों में जाकर जो थईया -थैया किया कि सारे बागानों के तोते उड गए जिन्हें देखकर मेरे हाथों के भी तोते उड़ गए😔 क्योंकि कल मैं बुलाने पर भी नहीं गई थी तो मुझे अफसोस तो होगा ही क्योकि मेरी उनकी साथ खूबसूरत  वीडियो न बन  सकी।  इसका मुझे अफसोस  हैं।😪
पर अब अफसोस करने से क्या फायदा🙆  इसलिए  मैंने भी आज कमर कस ली कि उनसे भी बढ़िया वीडियो बनाकर दिखाउंगी 🙋 वो अलग बात है कि उनके जैसी क्या उनसे आधे के जैसी भी वीडियो नही बन सकी😭😪
खेर, मैं किसी तरह किसी को भी न बताये चुपचाप होटल से बाहर आ गई। अपनी सेल्फी स्टिक को हवा में,,,,   , उछालती हुई। 
बाहर  काफी ठंडक थी। एक ठंडा हवा का फ्रेश झोंका मेरे अधरों को चूमता हुआ खेतों में गुम हो गया और मैं उसी के पीछे मतवाली चाल से अपने बालों को झटकाती हुई खेतो में घुस गई ।कुछ फोटू खिंचे पर अकेले मजा नही आया तो वापस लौट रही थी कि अचानक मैंने वहाँ एक भुतहा घर 💀देखा फिलकुल अंग्रेजी फिल्मों जैसा था तो मैं भाग खड़ी हुई और अपने  दड़बे में आकर ही दम लिया।👻किसी को कानो कान खबर नही हुई।🙃😔वो तो अच्छा हुआ मुझे आते समय हमारे एडमिन संजय कौशिक नही मिले वरना ये बात सारे ग्रुप में जग जाहिर हो जाती😎🤭😳
कुछ देर बाद विजयी चाल चलती हुई मैं डायनिंग एरिये में आ गई  जिधर सब नाश्ते पर टुटे पड़े थे।आज दिन की शुरुआत एक मनहूस खबर से हुई ।हम जवान लोगो के ग्रुप की नन्ही कली हमारी प्यारी नेहाशर्मा को पैर में मोच आ गई थी जिसके कारण उससे चला नही जा रहा था। मिस्टर शर्मा और सरोज परेशान थे अब क्या होगा पर बहादुर नेहा सबको चिल्लल कर के आगे के सफर को तैयार हो निकल पड़ी।
आज हम किसी नेशनल पार्क में जाने वाले थे। वहाँ जाने के लिए 2 से ढाई घण्टे लगना था और इतना टाइम हमने अंताक्षरी खेलकर बिताया समय का पता ही नही चला और हम सब  "एराविकुलम नेशनल पार्क" के गेट के पास खड़े थे।यहाँ काफी भीड़ थी हमारी टोली भी इस भीड़ में शामिल हो गई। यहाँ से बस द्वारा हमको दूर पहाड़ पर जाना था रास्ता दिलकश था चारो ओर दूर तक चाय के बागान अपने हाथ फैलाये खड़े थे आखिर में बस ने हमको एक निश्चित जगह पर उतार दिया यहाँ काफी भीड़ थी। कुछ स्टॉल भी बने थे जिसपर चाय और केक मिल रहे थे । ग्रुप के सदस्यों ने यहां हल्का फुल्का नाश्ता किया और मैंने भी चाय और केक खरीद लिया परन्तु यहाँ बड़ा बेकार सिस्टम था आप कैश पैसों से कुछ नही खरीद सकते थे सब अपने कार्ड से खरीदो।इसलिए लाईन लंबी थी।
खेर, ये पार्क बड़ा ही सुंदर था ।सारे पर्यटक इसको दिखने यहाँ जरूर आते थे इसलिए काफी भीड़ थी।यहाँ वैसे तो कोई जानवर दिखाई नही दिया। हाँ,बकरी जैसे जानवर जरूर घूम रहै थे।जिसके लिए लिखा था कि ये नीलगिरी ताहर लुप्त प्रजाति की पहाड़ी बकरी हैं ।काफी लंबी चौड़ी ये बकरी यहां पर्यटकों से हिलिमिली बेखोफ घूम रही थी सबके साथ मस्त फोटू खिंचवा रही थी।
कुछ देर बाद मैंने देखा कि कुछ लोग ट्रेकिंग करके ऊपर जा रहे है जो आगे जाकर एक छोटी सी पहाड़ी पर समाप्त होती थी। वहां से घाटी का मनोरम दृश्य नजर आता था। यहां से मुन्नार की सबसे ऊंची चोटी "अनामुडी" के भी दर्शन होते हैं जो लगभग 2695 मीटर की ऊँचाई पर थी।
पैदल चलने के अलावा यहां बैटरी कार भी चल रही थी जो 800 रु पर-पर्सन के हिसाब से चार्ज ले रही थी। पैसे बहुत ही ज्यादा थे मेरे ख्याल से इतनी ऊंचाई के लिए 400 रु ठीक थे। मैं आधी दूर जाकर वापस लौट आई क्योकि मेरे लिए ज्यादा चढ़ाई चढ़ना नुकसानदायक था लेकिन ग्रुप के ज्यादातर सदस्य ऊपर जाकर Gds का झंडा फहरा कर ही आये।
यहाँ जाने और आने में काफी समय लगा।थक भी गए थे और कल की तरह आज भी यहाँ कोई लंच करने को तैयार नही था क्योंकि यहाँ सब जगह सिर्फ स्नैक्स की ही दुकानें थी जिन पर सिर्फ आइसक्रीम ओर केक ही बिक रहे थे ।अब कितना केक खाये🤪
थोड़ी देर बाद हमारी बस एक वाटरफॉल की तरफ दौड़ रही थी और मुझे खाली पेट चक्कर आ रहे थे ।इतने में मैंने देखा कि मेरे पीछे कुछ खुसुर-पुसुर हो रही हैं और कुछ देर में ही पिटारा खुल गया ।उधर से ललिता लड्डू ले आई तो सोनाली केक ले आई ,तो सरोज  थेपले ले आई और आखिर में योगिता ने मोटी मोटी गजब की मीठी रोटी खिलाई😀 यानी कि लंच की कमी सबने मिलजुल कर दूर कर दी।यही तो एकता की ताकत हैं।और Gds की एकता की तो मिसालें दी जाती हैं। Gds जिन्दाबाद।
अब हम Lakkom वाटर फॉल जो नेशनल पार्क से ज्यादा दूर नही था हम उधर पहुँचे।यहाँ भी 50 रु की बलि चढ़ाकर हम तेजी से ऊपर की तरफ चल दिये ।ये एक खूबसूरत महाबली वाटरफॉल था जो पूरे वेग से अपने उफान पर था ।ग्रुप के बच्चे राहुल और मनन तो लपककर फॉल के पास पहुँच गए  ।लेकिन मैं , मेरे मिस्टर, सोनाली ओर अनिता मैडम दूर से इसको देखकर ही खुश हो रहे थे जबकि सारे सदस्य पानी के पास पहुँचकर जलक्रीड़ा में मग्न थे।
यहाँ से हमारी सवारी चंदन के पेड़ों वाले जंगल मे जाने वाली थी पर सबने मना कर दिया अब  चन्दन को देखने कौन जाएगा।अगर वीरप्पन जिंदा होता तो कोई बात भी थी ।अब कौन 3 घण्टे का सफर करके चन्दन के पेड़ देखने जाए।अब तो "पुष्पा"का जमाना हैं वही नकली चन्दन देख लेंगे🤣🤣😂🤣
अब हमने बस वाले अन्ना को बोला कि वो हमको मुन्नार के बाजार में छोड़ दे ताकि हम बाजार की रौनक देख सके और कुछ खरीदारी भी कर सके । आखिर अब सोनाली के लिए अन्नानाश भी
तो खरीदना था। आज उस बेचारी को कहीं भी कोई अन्नानाश बेचता अन्ना नही मिला😩
और हम मुन्नार के बाजार में उतर गए।
उसके बाद बड़ा ही रौचक मामला हुआ जो सोनाली ने लिखा है🤪🤪 कृपया जरूर पढ़ें।
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तो मिलते हैं कल अगले एपिसोड में हम लोग।





केरल यात्रा भाग-2

*।।केरला-डायरी।।* भाग 2
28 दिसम्बर 2024


मेरी केरला-यात्रा 26 दिसम्बर से पनवेल से शुरू हुई थी जो 27 दिसम्बर को कोच्चीवेळी पहुँची थी। अब हम मुन्नार में थे आगे:-----
कल रात हम सब जैसे ही अपने शानदार बेड पर पसरे ही थे कि अचानक एक रोबीली आवाज़ याद आ गई जिसने डायनिंग टेबल पर ऐलान किया था कि --- "सब 7 बजे उठकर 8 बजे नाश्ते की टेबल पर आ जाए"।
ये हमारे ग्रुप के सबसे स्मॉर्ट बन्दे शर्मा जी थे। अब उनकी बात कौन टाल सकता था।पहले ही दिन उनकी घुड़की काम कर गई और सबसे पहले टेबल पर आने वाली मैं ही थी ।😂🤣😂
जैसे मुझे डर हो कि कहीं ये मुझे ग्रुप से खदेड़  न दे😂😂🤣
इस होटल में विष्णु नामके वेटर के साथ बड़ा बढ़िया एक्सपीरियेंस रहा। बड़ा प्यारा बच्चा था।हम कुछ भी बोलते वो उसके सर से 1km ऊपर से जाता था और वो अपने काले से मुखमंडल पर फैले धुँधरालु बालो को एक जोरदार झटका देकर सफेद बत्तीसी दिखा देता था।🤪🤪
ओर जब अनिताजी,उसके साथ पंजाबी में गल करती तो उसका मुंह शर्म से लाल हो जाता था।ओर हम सब जोरदार ठहाके लगाते थे😀😀😀
ठीक एक घण्टे बाद,हम सब गुलफाम बने मुन्नार  देखने निकल पड़े। हमारी सजधज ऐसी थी मानो हम सब बेटे के लिए बहु देखने जा रहे हो 😛😛
हमसब  सजेधजे किसी फिल्मी हीरो -हीरोइनें की तरह कातिल अंदाज में अपनी- अपनी सीट पर बिराजमान हो गए। 
आज सबसे पहले हम मुन्नार के खूबसूरत चाय बगानों को देखने गए और एक ब्यूह पॉइंट पर जाकर ढेर सारी फोटू ओर वीडियो बना डाली।
फिर हम कुंडाला डैम (Kundala Dam) देखने निकल पड़े।वहाँ पहुँचकर मैंने देखा कि इस डेम के साथ एक खूबसूरत लेक भी हैं। लेक इतनी खूबसूरत थी कि आंखों में मदहोशी छाने लगी चारो ओर हरियाली छाईं हुई थी और झील ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो प्रकृति ने अपने दोनों हाथों में अथाह जलराशि समेट रखी हो। नीले रंग की झील में रंग बिरंगी नावे ऐसे तैर रही थी जैसे लाल पीली मछलियां तैर रही हो।
मैंने तो आव देखा न ताव सबको पछाड़ती हुई लेक की तरफ दौड़ने लगी और धड़ाधड़ फोटू खींचने लगी । उधर जाते-जाते मैंने कनखियों से देखा की सोनाली तेजी से बस से लुडकती हुई  अन्नानाश वाले ढ़ेले की ओर दौड़े जा रही थी। ओर बेचारे हमारे पप्पुकुट्टी उसका पर्स हाथों मे दबाए  पीछे- पीछे खिंचे जा रहे थे 🙆
लेक के पास ही यूकोप्लीट्स के सुंदर पेडों की कतारें सजी हुई थी।जहाँ मैंने अपने सुस्त हुए पति को मोबाइल थमाया ओर ढेर सारे फोटू खिंचवाने लगी।फिर पास ही कुर्सी पर बैठकर  अपनी अधखुली आँखों से झील को निहारने लगी । कुछ देर बाद मेरी तंद्रा भंग हुई तो मेरा मन बिल्लियों उछलने लगा और तन उस खूबसूरत झील की छाती पर टहलने का करने लगा। तो सोचा क्यो न मैं भी एक नाव में बैठकर फ़िल्म "मैंने प्यार किया" का वो फेमस गीत गाउ....
" दिल दीवाना बिन सजना के माने ना।
ये पगला हैं समझा ने से,समझे ना"
ओर मैं अपने आपको भाग्यश्री समझ ही रही थी की नामुराद काउंटर वाले ने मेरा नम्बर आने पर खिड़की ही बन्द कर दी 😡 बोला टिकिट खत्म हो गई। हैं भगवन ! मेरे सारे मंसूबों पर इस नामुराद ने पानी फेर दिया, अब क्या करूँ😢 मरता क्या न करता, मैंने भी उसको मन ही मन पंजाबी में जमकर गालियां दी– "कलमुंहे तेनु छित्तर पड़े ✊👊
मन शांत हुआ तो पता चला कि ये खूबसूरत झील तो बिल्कुल शूपर्णखा निकली । हमारे प्यारे बच्चे मनन का मोबाइल  ही निगल गई। सबका मन खराब हो गया। मेरा भी दिल उदास हो गया।आज के दौर में भगवान मोबाइल तो दुश्मन का भी न छीने😪।
सब उदास मन से दूसरे डेम को देखने आगे बढ़ गए। जिसका नाम था मत्तूपेटी (Mattu Petty Dam) डेम ।ये भी मुन्नार का एक खूबसूरत डेम था। यहाँ काफी भीड़ थी जाम भी तगड़ा था तो हम कुछ लोग बस से उतर गए और पुल को पार करते हुए लेक की तरफ़ आ गए। यहाँ भी नावे चल रही थी और नव विवाहित जोड़े गले मे बाहें डाले नाव में घूम रहे थे। पर यहाँ लेक में वो बात नही दिखी जो  कुण्डला लेक में थी ।वैसे भी दिल उदास था ।किसी का मन नही हुआ तो हमने सिर्फ चाय पी ओर  आगे बढ़ गए।
आगे हमारी सवारी कारमिलगिरी बोटनिकल गॉर्डन में गई जिधर 50 रु का कर्ज अदा करके हम सब अंदर घुस गए। यहाँ हजारों की तादात में कैक्टस लगे हुए थे।इतनी वेराइटी में कैक्टस देखना मेरे लिए किसी आश्चर्य से कम नही था। इतनी खूबसूरती से कैक्टस ओर फूलों को सजाया गया था कि सबकुछ दिवा स्वप्न सा लग रहा था। यहाँ बहुत से सेल्फी पॉइंट्स भी बनाये गये थे जिधर हम सब महिलाओं ने दिल खोलकर  फ़ोटुग्राफी की ।अंदर कुछ दुकानें भी थी जिधर अनिता जी और मैंने हेट पहनकर विभिन्न मुद्राओं में फोटू खिंचे ।
ओर उधर, सोनाली,योगिता ओर ललिता अपने घरों के लिए स्पाइसी सामान खरीदने में लगी हुई थी। आखिर में,मैं कैसे पीछे रहती मैंने भी आव देखा न ताव ओर देखा देखी में 800 रु का मसाला खरीद लिया ओर एक विजय मुस्कान चेहरे पर लाकर अपने आपको विजेता घोषित कर थैला हाथ मे लिए गार्डन से बाहर आ गई।
दोपहर हो चली थी और पेट मे चूहे दौड़ रहे थे पर खाने की किसी की भी चाहत दिखाई नही दे रही थी ।वैसे भी आसपास कोई अच्छी होटल दिख भी नही रही थी मजबूरी में हमारे बस वाले अन्ना ने हमारी बस रोज गार्डन के पास रोक दी अब सब रोज गार्डन देखने ऐसे निकले जैसे किसी शादी में खाने के पंडाल में जा रहे हो।
मैंने फिर कनखियों से झांका की सोनाली कीधर गई पर इस बार सोनाली को कोई अन्नानाश वाला नही मिला तो वो दोनों एक केक शॉप में घुस गए। शायद वहाँ कोई अन्नानाश फ़्लेवर का केक-शेक मिल जाये।🤭
इधर  मैं भी खाने के जुगाड़ में इधर उधर भटकने लगी ।आखिर में एक टपरी दिखी जिधर हम दोनों भूखे प्यासे प्राणियों ने चाय ,ब्रेड और आमलेट से अपनी भूख मिटाई ।
अब तक बस के अन्य प्राणी गार्डन की कैंटीन में चाय समोसा खाकर खुद को हरा भरा कर रहे थे ।जब मैं वहाँ पहुँची तब तक सबकी तृप्ति हो चुकी थी और सारा गार्डन देखकर सब वापसी की कतार में खड़े थे।
जब मैं रोज गार्डन में पहुँची तो मैंने देखा कि यहाँ भी 50 रु की अर्जी कटवानी पड़ेगी।परन्तु मैं कैसे कटवाती क्योकि मेरे अंदर जाते ही सब बाहर निकल रहे होंगे तो? तो मैंने टिकिट लिया ही नही ओर ऐसे ही अंदर घुस गई।न किसी ने पूछा न मैंने किसी को बताया😛😛
ओर अंदर घुसते ही वही हुआ ,कुछ लोग बाहर निकलते नजर आये तो मैंने उनको अनदेखा कर एक खोपचे में घुसकर बाग के अंदर प्रवेश किया आखिर यहाँ के भी तो फोटू होने चाहिए थे। मैं अकेली ही अपनी शानदार सेल्फ स्टिक से अपने ही फोटू लेने लगी कि अचानक ग्रुप के शर्मा जी और नाहटा जी नजर आए और हम सबने मिलकर कुछ फोटू ओर वीडियो बनाये।
दिनभर घूमता परिंदा रात को अपने घोसले को निकल पड़ा। हम भी थके हारे अपनी मंजिल को आ रहे थे कि हमारी बस एक शानदार राजस्थानी रेस्टोरेंट के सामने रुकी जिसका नाम *पुरोहित* होटल था यहाँ हम भूखे भेड़ियों की तरह खाने पर टूट पड़े क्योंकि दोपहर को लंच किया नही था तो सबने छक कर खाया और थके हुए अपने नीड पर लौट आये ।
आज तो पैरों की वो हालत थी कि कोई गोद मे उठाकर ले जाता तो ईनाम का हकदार होता।
ओर इस तरह हमारा पहला दिन हर्षोल्लास से सम्पन्य हुआ।
शेष अगले एपिसोट में
















अयोध्या

"अयोध्या"
13 मई 2024




जब से भगवान राम का मन्दिर बनना शुरू हुआ तभी से मन मे एक आस का बीज पनपने लगा कि हो न हो एक दिन मैं जरूर अपने लल्ला के दर्शन करुँगी।
धीरे-धीरे ये आस का बीच मन मे अंकुरित होने लगा और फ़टाफ़ट तीव्रगति से फैलने लगा।
मुझे कल की वो बातें याद आने लगी जब मैं छोटी थी और घर मे #धर्ययुग आता था जिसके फ्रंट पेज पर  एक × बना होता था ओर उस पर एक बड़ा ताला लटका होता था । नीचे एक स्लोगन लिखा होता था कि--- " राम मंदिर में फिर से ताला" । बाल बुद्धि थी इसका मतलब समझ नही आता था की क्यो इस मंदिर में ताला लगता हैं?
बात बचपन की थी जो बड़े होने पर समझ आने लगी।फिर वो दिन आया जब यहाँ खून की नदी बही थी और लाशों से गलियां अटी पड़ी थी तब भयभीत हो वो कैसेट देखा था। जिसकी भयावह तस्वीर आज भी दिल मे ताजा हैं।
लेकिन दिन बदले ओर  लल्ला का वनवास खत्म हुआ । भगवान के आशीर्वाद से इस सदी का महानतम दिन आया जब इस मंदिर का उदधाटन हुआ और श्रीराम  लल्ला के रूप में इस नगरी मे अवतरित हुए।
मेरे जीवन के सफलतम दिनों में एक अध्याय ओर जुड़ गया 13 मई 2024 का वो पावन दिन था जब मैंने मेरे प्रभु राम के दर्शन किये। स्थापना के ठीक 111 दिन बाद।
ओर इस दर्शन के बिचौलीये रहे अयोध्या निवासी #श्रीसूरजमिश्राजी जो हमारे Gds सदस्य भी हैं।जिनकी वजय से मैंने आराम से  लल्ला के दर्शन किये फोटू खिंचवाए और अपनी बरसों की प्यासी आत्मा को तृप्त किया। जय श्रीराम🙏











शुक्रवार, 4 जुलाई 2025

केरल की यात्रा भाग 1

*।।केरला-डायरी।।*
भाग--1


27 दिसम्बर 2024
जैसे ही हमारी ट्रेन कोच्चीवेळी पहुँची हम सब अलग अलग कोच के मुसाफिर स्टेशन पर उतरकर बाहर की ओर निकल पड़े... सभी 18 मेम्बर (कुछ को छोड़कर)एकदूसरे से अनजान...?

वैसे कहने को हमसब 4 महीने से व्हाट्सएप की आभासी दुनियां के जरिये एक दूसरे को जान चुके थे या कोशिश की थी।पर असली धरातल पर मिलन आज हो रहा था।
कुछ संकोच!कुछ अनजानापन! शर्म ओर सत्कार की मिलींजुली भावनाओ से  ओतपोत हमारी सवारी यानी कि बस चल पड़ी अपने आगे के सफर पर...

ओर फिर बीच मे आया एक झरना ! सब छलांग मार कर झपट पड़े। जैसे वो कोई रसगुल्ला हो जिसे हर कोई गटकना चाहता हो। वो अलग बात है कि वहाँ रसगुल्ला तो मिला नही पर सबने पाइनएप्पल को ही रसगुल्ला समझ झपट्टा मार दिया।अब हर आदमी के हाथ मे पाइनएप्पल की एक2 पुड़िया थी और सब उसको चूस चूस कर ऐसे खा रहे थे जैसे ये अनोखी चीज इन्होंने जिंदगी में पहली बार खाई हो😂😂🤣

 विशेषकर सोनाली की तो पो- बारह थी। उसको तो ये फल किसी दूसरी दुनियां का लग रहा था जो यहाँ से जाते ही गुमनामी के दलदल में गुम होने वाला था ,तभी तो मैंने पूरे 8 दिन बेचारे सन्दीप जी को उसकी हजूरी में एक एक्स्ट्रा पैकेट हाथ मे लिए एक पैर पर खड़े देखा था।बेचारे मेरे पप्पूकुट्टी☺️
हम सब यानी कि मैं 1दिन ओर बाकी सब 2 दिन के सफर से बिल्कुल बेहाल नही थे बल्कि पूरी तरह फ्रेश बगैर नहाए धोए एकदम शाहरुख की तरह बाहें फैलाये दूर से वाटरफॉल के पोज ले रहे थे जैसे कि अभी अभी फॉल का ठंडा पानी हमारे ऊपर आने वाला हो और हम उसी के सहारे फ्रेश होकर अपनी आगे की यात्रा शुरू करेंगे। परन्तु इन ख्याली पुलावों में कोई टेस्ट नही था और हम उसी तरह  बासी कपड़े ओर बिना लिपिस्टिक के लौटकर आ गए अपनी-अपनी सीट पर  आगे के सफर के लिए।
अब हम सब बस में नींद के झोको के साथ चुपचाप आगे बढ़ रहे थे बगैर कोई हंगामा किये हुए क्योकि अभी तक हम सब एकदूसरे से अनजान थे  सब जानते हैं वेल एजुकेटेड लोग हंगामा नही करते😂🤣😂🤣😂
अचानक एक जगह हमको एक बड़ी सी भेसवा दिखी साथ ही एक चूहा भी ओर फिर सभी वेल एजुकेटेड लोग चिल्ला उठे–– "रुको"
अचानक नींद की खुमारी से जागे हमारे एडमिन ने बस रुकवा दी और हैरत से सबको देखने लगे।सबने भेसवा के साथ फोटू खिंचवाने की सिफारिश कर डाली। अब भला,भेसवा के साथ भी कोई फोटू खिंचवाता हैं ?😷🤦वैसे मैंने भी खिंचवाई थी पर आजतक मिली नही🙆
खेर, दिल पर पत्थर रख के हम आगे स्पाइसी गार्डन को चले ....एक काला सा मजबूत मद्रासी हमको वही चीजो के पेड़ बता रहा था जो उसके पास बेचने को रखी  थी ।मैं समझ गई ये अपना उल्लू सीधा कर रहा है वैसे मेरे साथ के सभी लोग समझ गए थे ये बात मुझे बाद में पता चली जब कोई भी उसके झांसे में नही आया और सबने किनारा कर के बढ़िया मसालेदार चाय पीकर उस मसाले वाले को अलविदा कहा।बेचारा सोच रहा होगा कि आज किस का मुंह देखकर उठा था जो एक भी ग्राहक नही फंसा😂🤣😂😂

रात हो चली थी हम सब पंछी अपने डेरे में लौट रहे थे उबड़ खाबड़ रास्तों से गुजरते आखिर हमारी आज की मंजिल आ चुकी थी । एक छोटे से होटल के आंगन में हमारी बस रुकी ओर हम सब अपने अपने बड़े -बड़े कमरों में घुस गए ।
कल के अगले सफर के लिए ।
क्रमशः🙋
बाकी अगले एपिसोड में हम लोग




क्रेंद्र शासित राज्य दमन

ये बात अभी 22 जनवरी 2025 की हैं ।


 मैं ओर मेरे मिस्टर दमन घूमने गए थे ।शाम के 7 बजे की बात है हम नानी बीच ( गुजराती में नानी का मतलब छोटा होता हैं) पर टहल रहे थे सूरज अस्त हो गया था ठंड बड़ गई थी और काफी ठंडी हवा चल रही थी। हमारे पास स्वेटर भी नही थे।


कुछ देर बाद हमने होटल लौटने का सोचा पर आसपास कोई आटो दिखाई नही दिया।करीब आधा घण्टा हो गया हमको 1 भी आटो दिखाई नही दिया अब मुझे थोड़ी धबराहट होने लगी क्योकि हमारा होटल 10 km दूर था।अब क्या करे।


वैसे भी रात को अनजान जगह मुझे थोडी घबराहट होती हैं।


जब बहुत देर हो गई और कोई आटो नजर नही आया तो तुरंत एक तरकीब मेरे दिमाग मे याद आई मैं फूटपाथ से उतरकर सड़क पर आ गई।मेरी अगल बगल से कारे गुजर रही थी पर कोई रुक नही रही थी। इतने में मैंने अपने हाथ से कुछ स्कूटरों को रुकने का संकेत किया ।कुछ निकल गए कुछ देखते हुए  आगे बढ़ गए, अचानक एक स्कूटर थोड़ा आगे जाकर रुक गया उस पर एक लड़का एक औरत ओर 2 बच्चे बैठे थे वो उतरकर पीछे आये और मुझसे बात करने लगे। तब मैंने उनको अपनी परेशानी बताई लड़के ने तुरंत बोला कि आप एक एक करके मेरे स्कूटर पर बैठ जाये मैं आपको होटल छोड़ देता हूँ पर मुझे ये अच्छा नही लगा कि वो बेचारा हमारे लिए 40 km up down करे।
मेंने उससे रिक्वेस्ट की कि आप कोई आटो इधर भिजवा दे बस।


फिर उसने अपने एक जानने वाले को फोन कर के बुलाया और जब तक वो आ नही गया दोनों पति पत्नी हमारे पास ही खड़े रहे।


एक अनजान व्यक्ति का अनजान शहर में इतना बड़ा सहयोग देखकर मेरा दिल भर आया। आंखों में पानी तैरने लगा और दिल से हजारों दुआएं निकलने लगी।मेरे मन ने यही कहा की–-"अभी भी मानवता जीवित हैं।"