मेरे अरमान.. मेरे सपने..


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शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2023

तमिलनाडुडायरी#5

#तमिलनाडुडायरी 5
(रामेश्वरम)
15 दिसम्बर 2022

                 रामेश्वरम टेम्पल 

"कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता ,कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता।"

दोस्तों, सोचते क्या है और हो क्या जाता है ।हम सिर्फ कठपुतली हैं और डोर उस ऊपर वाले के हाथ में है।मेरी सहेली को क्या पता था कि वो रास्ते में ही सफर को अधूरा छोड़कर वापस चली जायेगी।
3 महीने पहले सजाया हुआ सपना यू अचानक टूट जाएगा ये किसी ने नही सोचा था।
खेर,रात जैसे तैसे गुजर गई ।रेखा की हालत खराब होती जा रही थी पैर अकड़ गया था उसको फ्रेश करवाने के लिए भी मेरे सहारे की जरूरत रही।सुबह 6 बजे मैं थोड़ा टहलने को निकली क्योंकि कल हमने कुछ नही देखा था और अब दोबारा रामेश्वर वापसी नही होनी थी तो मैंने सोचा कि थोड़ा घूम आऊँ ओर सुबह का नजारा अपने कैमरे में कैद कर आऊ तो मैं अपने मोबाइल को उठा दरवाजा बंद कर बाहर निकल पड़ी।
सुबह -सुबह काफी भीड़ थी।लोग मन्दिर आ जा रहे थे।काफी लोग काले कपड़ों में थे।क्योकि इन्ही दिनों साउथ में सबरीमाला की यात्रा होती है जिसमें लोग काले कपड़े पहने होते हैं वो लोग सारे हिन्दू टेंपल के दर्शन करते हुए सबरीमाला जाते हैं।
मैंने रामेश्वर मन्दिर का मेन गेट देखा उसको बाहर से नमन करते हुए अग्नितीर्थम की तरफ चल दी।बहुत तादाद में यात्री स्नान कर रहे थे।सूरज उदय हो चुका था मैं फटाफट सब देखकर वापस होटल आ गई क्योकि हमारी कार आने वाली थी जिसमे बैठकर हम मदुराई वापस जाने वाले थे।
ठीक 9 बजे
हमारी टैक्सी आ गई।और मैं बुझे मन से चल दी क्योकि मेरा रामेश्वरम देखना अधूरा रह गया था ओर मैं वापस मदुराई जा रही थी।टेक्सी जब पम्बन ब्रिज पहुँची तो नीचे मेरी निगाह यकायक ब्रिज क्रॉस कर रही ट्रेन पर पड़ी ओर कल की स्मृति आंखों में कौंध गई।कल इसी ट्रेन से हम कितने खुशी खुशी रामेश्वरम आ रहे थे।
खेर, दिल के अरमान आंसुओ में बह गए।मजबूरी थी सहेली को भी छोड़ नही सकती थी।
क्रमशः....


  

                      अग्नितीर्थम

                   पम्बन ब्रिज

         सहेली को मदुराई एयरपोर्ट पर छोड़ा
   

तमिलनाडुडायरी#4

#तमिलनाडुडायरी 4
(रामेश्वरम)
14 दिसम्बर 2022

"रधुकुल रीत सदा चली आई 
प्राण जाई पर वचन न जाई!!"

इस दोहै की रीत मैंने आगे चल कर निभाई ।😪

खेर,कल हम ट्रेन के द्वारा मदुराई से रामेश्वर नामक द्विप पर आए।ऑटो वाला हमको महेश्वरी धर्मशाला में छोड़ गया।धर्मशाला बिल्कुल धर्मशाला की तरह ही थी । Ac रूम मैंने 950 रु में 1 महीने पहले बुक किया था।मेरी रिकवेस्ट पर हमको नीचे का रूम नम्बर 108 दिया गया।हमने समान रक्खा तो देखा रूम जरूरत से ज्यादा गंदा था ओर Ac भी नहीं चल रहा था। "ये बात मैंने Gds ग्रुप के एडमिन किशन बाहेती को बताई क्योकि उन्होंने ही ये धर्मशाला सजेस्ट की थी।किशन ने बोला कि उसको रूम बदलने का बोलो ओर साथ ही फोटु खींचकर मुझे भेजो।" मैंने बाहर आकर काउंटर पर शिकायत दर्ज की ओर कमरा बदलने को बोला,पर उनके सर पर जूं तक न रेंगी तो मैने बोला कि मैं ट्रस्ट में शिकायत करुगी, तो उसने थोड़ा नरम होकर रूम बदलकर 110 नम्बर रूम दिया।
खेर, ये रूम थोड़ा उन्नीस था पर टोटल बेकार ही था।1महीना पहले ही 2 दिन का रूम बुक कर के 1900 रु भर दिए थे वरना तुरंत खाली कर देती।पर मरता क्या करता । बाहर से गर्म पानी की बाल्टी लाकर हम फ्रेश हुए।ओर नाश्ता कम लंच के लिए बाहर निकले।
1 बज रहा था।पास ही महेश्वरी धर्मशाला का लंच होम था 100 रु की थाली थी जिसमें दाल-भात रोटी-सब्जी और दही था।अनलिमिटेड खाना था सिर्फ दही 1 बार ही मिलता था बाकी रोटी सब्जी चावल जितने खाना चाहो खा सकते हो।पर हम ठहरे 2 रोटी खाने वाले भला अनलिमिटेड हमारे किस काम का😛😛

खाना खाकर हम दर्शन के लिए निकले तो पता चला कि अभी दर्शन बन्द हैं 3-4 बजे दरवाजे खुलेंगे तब आना तब भीड़ भी कम होगी और दर्शन भी आराम से होंगे तो हम वापस अपने रूम में आ गए ।और थोड़ा आराम करने लगे।
ठीक 3बजे हम मन्दिर जाने को निकले ,अपना पर्स ओर मोबाइल होटल ही छोड़कर हम मन्दिर में जाने से पहले #अग्नितीर्थम की तरफ जा रहे थे धूप बहुत तेज थी कि अचानक साइड से किसी ने एक गाय को जोर से डंडा मारा और वो दौड़ती हुई हमारे नजदीक ही आई , हम तीनों आगे पीछे ही चल रहे थे अचानक हमको लगा की वो हमारी तरफ ही आएगी और हमने आगे को दौड़ लगाई,मैं आगे चली गई पर मेरी सहेली रेखा का पैर अपने ही पजामें में फंस गया और वो चारों खाने चित गिर गई उसकी आँखों के आगे अंधेरा छा गया और वो उठ न सकी।उसको उठाने आसपास से लोग दौड़ पड़े।इस स्थिति में उसको बहुत जोर की लगी चेहरे पर नाक पर कुहनी, पैर के घुटने पर ओर अंगूठे पर जबरजस्त चोट लगी।हम वही रैलिंग पर बैठ गए ,जब उसकी तबियत थोड़ी ठीक हुई तो मन्दिर से बाहर निकलने वाले गोपुरम के सिक्युरिटी वाले ने हमको वही से मन्दिर के अंदर घुसा दिया ।हम फटाफट मन्दिर के लंबे गलियारे से निकलकर मेन मन्दिर के सामने खड़े थे। भगवान की ऐसी मेहरबानी हुई कि हम लंबे रास्ते से ओर भीड़ से बच गए।रेखा का घाव ताजा था इसलिए ज्यादा पता नही चला थोड़ा संभालकर मैंने उसको दर्शन करवाये ।भीड़ भी नही थी इसलिए फटाफट हम दर्शन कर के बाहर निकलने लगे ताकि रेखा को आराम करने रूम तक ले जाया जा सके पर गलती से हम कुंड की तरफ चले गए ओर बाहर निकलने का रास्ता अलग थलक था तो हमने 25₹ की 3 पर्ची बनवाकर फटाफट कुंड स्नान भी कर लिया।
स्नान कर के वापस रूम में आये तो देखा रेखा का घुटना सूज गया था।उसकी हालत खराब हो गई थी बुखार भी था ।
शाम का अंधेरा छाने लगा था। मिस्टर ने पूछकर एक डॉ का पता लगाया और उसको बहुत रिक्वेष्ट की चलने को पर वो नही  आया ,बोलता रहा पेशेंट को यहां लेकर आओ। खेर,मिस्टर उससे दवाई लेकर आ गए।अब उसकी  हालत ओर भी खराब हो गई थी बाथरूम तक चलना भी मुश्किल  हो रहा था।
तब मैंने समझदारी से काम लिया और उसके लाख मना करने पर भी उसके मिस्टर को सारी स्थिति बताई ।मिस्टर ने बोला कि उसको फ्लाइट से जैसे तैसे बॉम्बे भेज दो।अब रामेश्वर में एयरपोर्ट नही है वहां का नजदीक एयरपोर्ट मदुराई ही  हैं इसलिए हमको दोस्ती निभानी पड़ी और वापस मदुराई आना पड़ा। किस्मत से आज हम एक भी फोटु नही खींच सके।
कल क्या हुआ?
क्रमशः..

 
      इसी स्थान पर रेखा का एक्सीडेंट हुआ था।

तमिलनाडुडायरी#3

#तमिलनाडुडायरी 3
(रामेश्वरम)
14 dec 2022

आज हमको रामेश्वरम जाना था और मुझे ट्रेन से ही जाना था क्योंकि मुझे पम्बन ब्रिज देखना था और इतने बड़े और लंबे पुल से कैसे ट्रेन निकलती है वो अनुभव लेना था।और उसके लिए मदुराई से  सिर्फ एक ही ट्रेन चलती थी जो सुबह शाम अपडाउन करती थी तो हमने इसी ट्रेन से जाने की सोची।
कल हमने जब मदुराई के स्थानीय मंदिरों का दौरा किया था तो स्टेशन जाकर ये पता कर लिया था कि ये ट्रेन कब कब जाती है।ये डेली चलती है।
एक ट्रेन 06651सुबह 6:35 को  ओर दूसरी 06655 शाम6:10 को निकलती है इसमें सब डिब्बे जनरल के होते है और रिजर्वेशन वगैरा नही होती सिर्फ चालू टिकिट लो और कहीं भी बैठ जाओ।
मदुराई टेंपल से रेल्वे स्टेशन का रास्ता मुश्किल से 1 km ही होगा पर ऑटो वाले पूरा 100 का पत्ता छीन लेते है।
हम सुबह साढ़े 5 बजे बगैर नहाए धोए निकल पड़े ,चाय भी हमने स्टेशन पर आकर पी थी😀
मदुराई से रामेश्वरम की टिकिट ओनली 70 ₹ थी। यानी कि 210 रु की 3 टिकिट हाथ मे लेकर हम  बड़े आराम से प्लेटफार्म नम्बर 5 पर खड़ी मदुराई-रामेश्वरम स्पेशल ट्रेन में चढ़ गए ।गाड़ी खाली ही थी।पैर फैलाकर सब सीट पर जम गए।
अपने नियत समय पर गाड़ी आराम से चल रही थी  चल क्या रेंग रही थी 172 km ढाई घण्टे में हमको रामेश्वर पहुचा देगी इसका मुझे शक था। रास्ते मे बहुत से स्टेशनों पर गाड़ी रुकती ओर फिर चल देती थी ।स्थानीय लोग चढ़ते ओर उतरते रहे ।सभी लोग जोर जोर से अपनी भाषा मे बातें कर रहे थे ।मेरी हालत काला अक्षर भैंस बराबर जैसी थी😪।कुछ पल्ले नही पढ़ रहा था खेर,जैसे तैसे गाड़ी रामनाथपुरम पहुँची ओर मेरी मन की अभिलाषा पूर्ण हुई।वही से पम्बन ब्रिज की शुरुवात हुई खिड़की से ब्रिज पर चलती ट्रेन को देखना आश्चर्य कर गया ये अनुभूति वही कर सकता है जो ट्रेन में बैठा हो ।चारो ओर ठहाका मारता समुंदर ओर उस पर धीरे धीरे रेंगती ट्रेन सचमुच ये अनुभूति कमाल की थी। नीचे समुद्र में से झांकती लाल लाल चट्टाने,उन पर मचलती लहरें, पानी का शोर ओर चलती ट्रेन की आवाज़!सबकुछ मायावी लग रहा था। ब्रिज है कि खत्म होने का नाम ही नही ले रहा था और हमारा काफिला आगे बढ़ता जा रहा था।
जब ट्रेन ने ब्रिज क्रॉस कर लिया तो उस जादुई संसार से तन्द्रा भंग हुई और हम भारत की भूमि छोड़कर रामेश्वर नामक द्वीप पर खड़े थे।जो चारों ओर समुंदर से घिरा हुआ था।
स्टेशन से बाहर आये तो यहां भी ऑटो बनाम लुटेरा खड़ा मिला जो 150₹में हमको 1km तैय कर के हमारी धर्मशाला महेश्वरी धर्मशाला छोड़ गया।
दोपहर में एक एक्सीडेंट के कारण मुझे फिर से मदुराई आना पड़ा।शेष अगले अंक में।
क्रमशः

तमिलनाडुडायरी#2

तमिलनाडुडायरी-2
(मदुराई)
13 dec 2022


कल मीनाक्षी मन्दिर में घूमकर आये थे अब आगे:--
कल पैरों की जो बैंड बजी की सुबह हाथ पैरों ने हड़ताल कर दी।उठने को कोई तैयार ही नहीं था जैसे तैसे चाय काफी की रिश्वत दी तब कहीं जाकर थोड़े हिलेडुले🥰
हम भी गोपाल भजते-भजते उठ खड़े हुए आखिर इतनी दूर सोने तो आये नही थे।
खेर,फटाफट गुलफ़ाम बन होटल की टेरेंस पर चढ़ गए और धड़ाधड़ फोटु उतारने लगे।आना सफल हुआ ।जब गर्मी ने नाक में दम किया तब होश आया और हम अपने Ac रूम की ओर लपके।
थोड़े होश काबू में आये तो होटल मैनेजर ने 300 ₹ सवारी की जो कार बुक की थी वो आ गई ओर हम मदुराई के दार्शनिक स्थल देखने निकल पड़े।
सबसे पहले हम Thirumalai Naikker Mahal देखने गए।ये महल या पैलेस बहुत बढ़िया था ।यहां एक बड़ा हाल था जिसमें एक कुर्सी रखी थी जिधर सब फोटु खिंचवा रहे थे। ज्यादा कुछ नही था पर कुछ मूर्तिया देखने लॉयक थी।
आगे हम भगवान  शंकर  का  काफी प्राचीन मंदिर देखने गए जिसका नाम था Thirupanakundram
सामने ही खूबसूरत तालाब था जिसमे महल जैसा कुछ बना था नाम था-- Theppakulam Lake   यहां बोट से जाया जाता है पर उस दिन बन्द था।थोड़ी देर नजारे  देख फोटु खींच हम आगे चल दिये।इसके सामने ही एक ओर मन्दिर था वो भी अम्माँ के नाम पर था ।यहां एक अजीब चीज देखी इद्दर झूले जैसी किसी चीज में अम्माँ की मूर्ति डालकर चढ़ा देते है।ये कोई मान्यता जैसी थी।
एक ओर अजीब बात देखी ,यहां मंदिरों में प्रसाद की जगह राख या धूनी दी जाती है और प्रसाद पैसों से मिलता है।जैसे मीनाक्षी मन्दिर में 1लड्डू 10₹का मिलता है लेकिन अत्यंत स्वादिष्ठ।मैंने 50₹ के 5 ले लिए😜
इसके बाद हम चाय पीकर एक ओर मन्दिर देखने निकल पड़े।
ये मन्दिर  सेंट्रल से 26 km दूर पहाड़ी पर स्थित था।इसका नाम था "Alagercoli"
ये नीचे भी था और ऊपर पहाड़ी पर भी था।स्थान और मन्दिर देखने लॉयक था यहां सुंदर सुंदर प्रतिमाएं बनी हुई थी।
यहां से हम .Kudalalagar temple देखने गए ये भगवान शिव का था और बहुत लंबी लाइन थी ।इसलिए When से ही हाथ जोड़कर हम होटल को निकल गए।रात को होटल पर एक पंजाबी ढाब्बे से खाना मंगवाया ।मन के साथ तन भी तृप्त हुआ।
क्रमशः

तमिलनाडुडायरी#1

#तमिलनाडुडायरी 1
(मदुराई)
10 दिसम्बर 2022

आज रात 8 बजे की ट्रेन नागरकोल एक्सप्रेस से मैं,मेरी सहेली रेखा ओर मिस्टर के साथ हम दक्षिण की यात्रा को निकले।
12 दिसम्बर को सुबह 5 बजे हमारी गाड़ी मदुराई पहुँची।
6बजे हम मन्दिर के करीब " होटल टेंपल व्हीऊ " के अंदर थे।
कुछ देर आराम कर हम गुलफ़ाम बने होटल के बाहर निकल रहे थे।नजदीक ही एक मद्रासी रेस्त्रां में इडली का नाश्ता किया जो स्वाद में बकवास था। फिर हमने मन्दिर के पूर्वी द्वार से मीनाक्षी मन्दिर में प्रवेश किया।
मन्दिर में जैसा कि होता है फोन ले जाना अलाउ नहीं है पर यहां तो फोन,पर्स,पानी की बॉटल ,घड़ी वगैरा कुछ भी ले जाना अलाउ नही था।अगर था तो सिर्फ मनी!😜😜 
"हमें तो लूट लिया मिलकर ....
 खेर, हम अंदर गए ,लंबे गलियारों को पार करते करते पैर दुखने लगे ,देखा तो दर्शन की काफी लंबी लाइन थी देखकर ही चक्कर आ गया,मैं सोच रही थी कि कैसे इतना चलूँगी🤔
फिर किसी ने बताया कि आप जो लाईन देख रही हो वो 100₹ के टिकिट की लाईन है असली फ्री वाली लाईन तो आपने देखी ही नहीं है, वो तो मन्दिर के बाहर से शुरू हुई है🙉 नहीईई
अब मरता क्या करता हमने भी 2 टिकिट 100₹ वाली ले ली। रेखा ने तो पहले ही हथियार डाल दिये थे।हम दोनों लाईन में लग गए।
लाईन चींटी की चाल से चल रही थी वही खड़े खड़े हम 4 बार घूम लिए पर लाईन आगे नही बढ़ी।पैरों का बुरा हाल था😪
खेर, धीरे धीरे हम मन्दिर के नजदीक पहुँचे तो वहां 500 रु की लाइन वाले खड़े थे। हम उनको धकेलकर आगे बढ़ गए इतने में किसी ने 500₹ वालो का भी गेट खोल दिया उनको डायरेक्ट दर्शन थे मेरे नजदीक से वो निकल रहे थे अचानक मैं भी उनके साथ आगे बढ़ गई😜और लंबी कतार से छुटकारा मिनटों में मिल गया ।
जय अम्माँ की🙏
और फिर मैं अम्माँ के सम्मुख खड़ी थी।🙏अचानक अम्माँ ऐसे मेहरबान होगी ये सोचा ही नही था। मेरे सामने अम्माँ मीनाक्षी थी और आंखों में मेरे दर्शन की प्यास थी।कई सालों से देखा सपना आज पूरा हो रहा था और मैं दीपक की रोशनी में माँ अम्माँ को निहार रही थी।
जय माता की🙏
12 दिसम्बर 2022     

गुरुवार, 29 सितंबर 2022

जिंदगी का सफर



जिंदगी का सफर
---~~~~💝--~~~
कैसे कटा 21 से 60
तक का यह सफ़र,
पता ही नहीं चला ।

क्या पाया, क्या खोया,
क्यों खोया,
पता ही नहीं चला !

बीता बचपन, 
गई जवानी
कब आया बुढ़ापा,
पता ही नहीं चला ।

कल तक बेटी थी,
कब सास बन गई,
पता ही नहीं चला !

कब मम्मी से
नानी-दादी बन गई
पता ही नहीं चला ।

कोई कहता सठिया गई,
कोई कहता छा गई
क्या सच है?
पता ही नहीं चला !

पहले माँ बाप की चली,
फिर पति की चली,
फिर चली बच्चों की,
अपनी कब चली,?
पता ही नहीं चला !
        
दिल कहता जवान हूँ मैं,
उम्र कहती है नादान हूँ मैं,
इस चक्कर में कब
घुटनें घिस गये?
पता ही नहीं चला !

झड़ गये बाल, 
लटक गये गाल,
लग गया चश्मा,
कब बदली यह सूरत?
पता ही नहीं चला !

समय बदला,
मैं बदली
बदल गई मित्र-
मंडली भी
कितने छूट गये,
कितने रह गये मित्र,
पता ही नही चला।

कल तक अठखेलियाँ
करती थी मित्रों के साथ, 
कब सीनियर सिटिज़न
की लाइन में आ गई
पता ही नहीं चला !

बहु, जमाईं, नाते, पोते,
खुशियाँ आई,
कब मुस्कुराई उदास
ज़िन्दगी,
पता ही नहीं चला ।

जी भर के जी लो प्यारो
फिर न कहना कि ..

मुझे पता ही नहीं चला।
🥰🥰😂😂😂🥰
---दर्शन के दिल से

     

गुरुवार, 15 सितंबर 2022

Gds के साथ वैष्णोदेवी की यात्रा

मेरी वैष्णोदेवी की यात्रा
15 -18अगस्त 2021
लॉक डाउन के चलते घर में घुसे घुसे एक अरसा बीत गया था...तन के  साथ- साथ मन भी पगलोट हो गया था... पागलपन अपनी चरम सीमा लांघने ही वाला था कि अचानक चारु के फोन ने रिमझिम फुहार बिखेर दी..."ग्रुप का प्रोग्राम बन रहा हैं बुआ वैष्णोदेवी चलोगी" ? पूछ रही थी। 

अंधा क्या मांगे 2 आंखें 😜😜😜 मैंने बगैर घर में पूछे "हा" में अपनी मोटी गर्दन हिला दी।
टिकिट बुक हो गए तब ध्यान आया कि वैष्णोदेवी की कठिन चढ़ाई अब मेरे बूते के बाहर हो गई हैं.. ? तुरंत अचंभे की स्थिति में खुद को घिरा हुआ पाया।क्या करूँ!क्या न करूं!!!

आखिर बहुत सोचने के बाद मैंने बुझे मन से टिकिट कैंसिल करवा दी।
लेकिन माता का बुलावा था तो जाना तो तैय था ही फिर फटाफट 2 दिन में मिस्टर ने आने-जाने की टिकिट करवा दी।टिकिट कंफर्म भी मिली और जाना भी पक्का हो गया।😀

"चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया हैं... जय माता दी😂"

आखिर जीत माता की हुई और मैं ओर चारु नियत समय 15 अगस्त को घर वालों को टा-टा बॉय-बॉय बोलकर निकल पड़े।

11बजे जब बॉन्द्ररा स्टेशन से हमारी ट्रेन निकली तो खुशी के बादल  हंसकर हमारा फूलों से स्वागत कर रहे थे।😂 यानी कि बारिश जोरों पर थी।
धुंआधार बारिश ने मौसम को बेईमान बना दिया था और मैं खिड़की से अपना चेहरा बाहर निकालकर गिरती हुई बूंदों का अभिवादन स्वीकार कर रही थी।
रास्ते में जमकर मस्ती की।हमारे साथ-साथ डिब्बे में भी हंसी के गोले फूट रहे थे।😀
रात 11 बजे कोटा स्टेशन आया और हम 2 सदस्यों में एक ओर सदस्य जुड़ गया, वो थी सरोज...
सरोज से कुछ देर गपशप करने के बाद सब अपनी -अपनी बर्थ पर सोने चले गए।
इधर बारिश का नामोनिशान नही था..इसलिए गर्मी बहुत थी लेकिन रात को ठंडक हो गई थी... सुबह 5 बजे दिल्ली से नन्दिनी ओर 7बजे  पानीपत से सचिन का आवगमन हुआ। अब हमारी पंचौडी(5 सदस्य) ट्रेन में धमाचौकड़ी मचा रही थी।
अम्बाला में हमारे ग्रुप का एक सदस्य विमल मिलने आया और ढेर सारे खाने के पैकेट थमा गया।

सरोज,सचिन ओर नन्दिनी के लाये पकवानों पर हाथ साफ करते -करते कब कटरा स्टेशन आ गया पता ही नही चला...
 शाम को जब सब कटरा स्टेशन उतरे तो घड़ी में 6 बज रहे थे।
स्टेशन पर करोना नाम के भूत की तफ्तीश चल रही थी ..करीब 1 घण्टे बाद सब भूतों को पछाड़कर हम स्टेशन से बाहर निकले।

यहां ग्रुप के 2 ओर सदस्य नितिन ओर रोमेशजी जुड़ गए...सबका काफिला एक होटल में रूका, फ्रेश होकर हमारा काफिला दो भागों में बट गया 1 जो घोड़े से जा रहे थे और दूसरे जो पैदल जा रहे थे।

काफिला नम्बर एक:--
मैं ओर सचिन।
हम दोनों घोड़े से जा रहे थे।
हमने दर्शन ड्योढ़ी पर यात्रा पर्ची की चेकिंग करवाई ओर 1100 ₹ में दो घोड़े अर्ध्यकुवारी तक किये और माता रानी का जयकारा करते- करते रात 10 बजे अर्ध्यकुवारी फतेह कर ली।

अर्ध्यकुवारी पहुँचकर हमने राजमा चावल का भक्षण किया ओर  रूम में आकर लंबी तान लगाकर सो गए। उधर...
काफिला नम्बर 2:--
का 5 सदस्यों वाला ग्रुप रात 8 बजे कटरा से पैदल चलते हुए सुबह 4 बजे भवन के नजदीक पहुँच भी गया। जबकी हम स्वप्नलोक में विचरण कर रहे थे😀 

अचानक सचिन का फोन खड़खडाया..उधर से नितिन ने बोला कि हम भवन पहुंचने वाले हैं तो हमारी नींद रफ़ूचक्कर हो गई ओर हम फटाफट  नहाधोकर बाबूजी बन के बैटरी कार को ढूंढने निकल पड़े। सारा रास्ता सुनसान पड़ा था.. यदाकदा एक आध बन्दर उन्ध रहा था, करीब 1 किलोमीटर चलने के बाद हमको एक इंसान नजर आया जिससे बैट्री गाड़ी का पता पूछा तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खसक गई क्योंकि इतनी मशक्कत के बाद जो मैं 1km चली थी वो बेकार हो गई,मैंने घूरकर सचिन को देखा तो वो हड़बड़ाकर मेरा हाथ पकड़े रिटर्न मुद्रा में चल दिया😀😀

 अब हम वापस उसी रास्ते पर चल रहे थे जिधर से अभी -अभी आये थे। करीब 1km से भी ज्यादा चलने के बाद हम नियत स्थान पर पहुँचे तो पता चला कि बैट्री कार तो 8 बजे चलने वाली है  और अभी 6 बज रहे थे...तो हम बैटरी कार को जय रामजी की बोलकर  दोबारा आधा किलोमीटर ऊपर को चले और घोडों पर सवार हो गए ...लेकिन इन फालतू चीजों में हमारा 2 घण्टा खराब हो गया जिसकी बदौलत हम काफ़िला नम्बर 2 से 2घण्टा पीछे हो गए। इस बार घोड़े पर हमारा 1200 ₹ खर्च हुआ। अब हमारा घोड़ा डगबग-डगबग करते करते भवन की ओर चल दिया।

सुबह 8 बजे जब हम भवन पर पहुँचे तो काफिला नम्बर 2 माता जी के दर्शन कर के हमारा इंतजार 
 कर रहा था। थोड़ी बहस के बाद उनको भेरोबाब के रास्ते में छोड़कर हम माताजी के दर्शन करने लाईन में लग गए।

करीब साढ़े नो बजे हम मातारानी के दर्शनों का लाभ उठाकर बाहर निकले। मन एकदम शांत था अब मेरा यहां आना सार्थक लग रहा था क्योकि मातारानी के  इतने अच्छे दर्शन हुए थे कि मन प्रसन्न था। 
अब पेट में चूहे दौड़ने की बारी आई तो सोचा कुछ खा लिया जाए। वही पास के एक रेस्तरां में बैठकर मैंने फिर से थोड़े राजमा चावल खाये। क्योंकि वहां मिलने वाले छोले भटूरे या तेल में भीगी पूरियो से चावल खाना मुझे ज्यादा अच्छा लगा।
नाश्ता कर के हम क्लार्क रूम की ओर चल दिये.. वहां से समान निकालकर हम वही बैठकर आराम करने लगें कि  काफिला नम्बर 2 का फोन आया कि "हमने भैरोनाथ के दर्शन कर लिए है और अब नीचे उतर रहे हैं।"
अब हमारे सामने ये विकट समस्या उत्पन्न हो गई कि हम भैरो के दर्शन करें या नीचे उतर जाए?
अचानक मेरी नजर हेलिकॉप्टर के बैनर पर गई, नजदीक जाकर पूछा तो टिकिट मिल रही थी। लेकिन तुरंत 1घण्टे के अंदर उड़ान भरनी थी।
अब ,क्या करे, क्या न करे? बड़ी परेशानी थी,क्योकि मैं घोड़े से वापस जाना नहीं चाहती थी 😀 मेरा पूरा शरीर दुख रहा था...घोड़े की लगाम थामे दोनों हथेलीयां दर्द कर रही थी ...सारे रास्ते बूत की तरह बैठी  माता रानी का जाप करती हुई आई थी ...यादगार के लिए एक भी फोटु उतारी नही थी...अब मैं रिस्क नही लेना चाहती थी। तुरंत हम दोनों ने डिसाईट किया कि अब हम सीधे हेलिकॉप्टर से ही वापस जायेगे और तुरंत हमने भैरोनाथ की यात्रा स्थगित कर के 3600 ₹ के 2 टिकिट खरीद लिए। जय माता दी🙏

अब भवन से साँझी छत तक वापस घोड़े पर जाना था, क्योकि पैदल में जा नही सकती थी,तो मरते मरते दिल को तसल्ली दी कि कोई ना, अब तो नीचे ही उतरना हैं।
भवन से हमने वापस सांझीछत तक घोड़े किये यहां भी 800 ₹ में 2 घोड़े हुए।
हेलिकॉप्टर पर चढ़ने से पहले मेरा आधारकार्ड चेक़ हुआ कहीं कोई आतंकी न चढ़ जाए😀😀 और सबसे खतरनाक काम हुआ मेरा मोबाइल छीन लिया दुष्टों ने ☹️😠
मेरे ओर सचिन के मोबाइल उन लोगो ने एक पर्स में रख दिये ओर बोला कि सिक्यूरिटी पर्पज से ऐसा किया जा रहा है। सत्यानाश हो इनका🤦

हम फटाफट हेलिकॉप्टर में सवार हो गए और मिनटों में नीचे आ गए।😍
 बेहद सुखद यात्रा थी हेलिकॉप्टर की,जपनाम!!!
 मैंने कभी सोचा भी नही था कि हेलीकॉप्टर की इतनी मजेदार यात्रा होगी।😂😂
11 बजे हम कटरा में अपने रूम पर आराम कर रहे थे।🤗

दोपहर को काफिला नम्बर 2 आहिस्ता-आहिस्ता एक एक करके आने लगे...सभी थकान से चूर थे और हमारी थकान उतर चुकी थी।
शाम को हमने कटरा बाजार में शॉपिंग की ओर रात को आराम से Ac रूम में सो गए सुबह गाड़ी जो पकड़नी थी😀
इस तरह एक मजेदार धार्मिक यात्रा सबके सहयोग से हंसते खेलते थोड़ा लड़ते -झगड़ते पूरी हुई।
जय माता की🙏



जय माता रानी की 🙏

मंगलवार, 2 अगस्त 2022

सपनों के रंग

सपनों का रंग
~~~~~~~~~★

मैंने सपनों को चुराकर
तकिये के नीचे छुपा रखे है।
तुम अपनी आंखों को मूंदकर
मेरी अँखियों  में समा जाओ,
मैं तुम्हें सपनों की बस्ती में ले चलूंगी 

पूरे चांद के उजाले में,
अपनी बाहों के झूले में
लोरिया गाकर –
तुम्हें झूला झुलाऊंगी।

तब,
तकिये के नीचे रखे अपने सपनों को 
हकीकत का जामा पहनाऊँगी।।

तुम मेरे आग़ोश में अपना सर रख देना,
मैं अपनी उंगलियों से तुम्हारा ललाट सहलाऊंगी
फिर कोमल लबों से उन्हें चूमकर 
अपने प्यार की मोहर लगाउंगी ।

तब तुम मदहोश हो मुझसे लिपट जाना,
और मैं अपनी समस्त लज्जा खोकर 
अमर बेल बन तुममें सिमट जाऊंगी।।

तब तकिये के नीचे रखे अपने सारे सपनों को आजाद कर दूँगी 👻
ओर खुशी के रंग बिखेर तुम्हारी जोगन बन चिल्लाऊंगी___
"मुझे तुमसे मोहब्बत है!
मोहब्बत है !!
मोहब्बत है!!!"

____दर्शन के दिल से💝